भाजपा-सपा को अपनों से ज्यादा पैराशूट प्रत्याशियों पर भरोसा

पैराशूट प्रत्याशी आने से मेरठ की जनता मायूस,बीजेपी के दिग्गज नेता भी दिखे नाराज़,सपा में भी जारी है घमासान

Meerut/शाहवेज़ खान (Shah Times)। मौजूदा वक्त में भाजपा का मजबूत गढ़ मेरठ लोकसभा सीट पर तीन बार से विजय प्राप्त करने वाले राजेंद्र अग्रवाल को इस बार भाजपा ने रिजेक्ट कर दिया है उनके स्थान पर मेरठ के ही कई बड़े दिग्गज नेता अपनी किस्मत आजमा रहे थे लेकिन भाजपा ने किसी को भी लोकसभा चुनाव के लायक नहीं समझा और पैराशूट प्रत्याशी के रूप में टीवी के राम अरुण गोविल को मेरठ से मैदान में उतार दिया और इस तरह भाजपा भी समाजवादी पार्टी की राह पर चलती हुई दिखाई दी।

 समाजवादी पार्टी ने भी कुछ दिनों पूर्व मेरठ के नेताओं को दरकिनार करते हुए पैराशूट प्रत्याशी के रूप में अधिवक्ता भानु प्रताप को मैदान में उतारा जिसके बाद समाजवादी पार्टी में भी भूचाल आ गया है और पार्टी हाईकमान के निर्देश से नाराज होकर पार्टी कार्यकर्ता पार्टी छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं अब देखना है कि जिस तरह का साहस समाजवादी पार्टी के नेताओं ने दिखाया इस तरह का साहस क्या भाजपा नेता दिखा पाते हैं या फिर वह अपनी मेहनत का फल किसी और को खाते हुए सिर्फ देखते ही रहेंगे ।

 फिलहाल मेरठ के अंदर दोनों पार्टियों ने पैराशूट प्रत्याशी उतार दिए हैं जिससे सपा और भाजपा दोनों ही पार्टी के कार्यकर्ता हैरान है और  पार्टी के इस निर्णय से नाराज दिखाई दे रहे हैं, और मेरठ की जनता की जबान पर अब एक ही सवाल नजर आ रहा है कि आखिर भाजपा और सपा ने अपने भरोसेमंद कार्यकर्ताओं और नेताओं को दरकिनार कर आखिर पैराशूट प्रत्याशियों पर भरोसा क्यों जताया है, क्या यह मेरठ की जनता के साथ धोखा नही,क्या बीजेपी अब अपनी ताकत के सामने किसी का कोई वजूद नही मानती, मेरठ की जनता लगातार यही सवाल  कर रही है कि आखिर बाहर के प्रत्याशियों पर भरौसा जता पार्टियां क्या संदेश दे रही है, क्या यह निर्णय इस और इशारा नही करता  कि जनता का काम सिर्फ वोट देना है पार्टियों के काम और उनके निर्णय में दखल अंदाज़ी करना नही, और अगर ऐसा है तो यकीनन मेरठ की जनता आने वाले समय में यहां की तरक्की के रास्ते मे खुद रुकावट साबित होंगी।

क्या लोकसभा चुनाव लड़ने के काबिल नही  भाजपा नेता !

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मेरठ के अंदर पैराशूट प्रत्याशी उतारा है उसके पीछे समाजवादी पार्टी के नेताओं की आपसी कलह  है और टिकट वितरण में लगातार यहां के  नेता अपनी दावेदारी कर रहे हैं जिसको देखते हुए अखिलेश यादव ने शायद यह फैसला लिया होगा । लेकिन भाजपा ने जिस तरीके से अरुण गोविल को मेरठ से प्रत्याशी बनाया है उसके बाद मेरठ की सियासत हिचकोले ले रही है लोगों की जबान पर एक ही सवाल आ रहा है कि अखिलेश तो किसी मजबूरी के तहत ऐसा कर गए हैं लेकिन भाजपा के सामने आखिर ऐसी क्या मजबूरी आ गई जो उन्होंने तीन बार से सांसद और मेरठ को भाजपा का गढ़ बनाने वाले राजेंद्र अग्रवाल का ही टिकट काट दिया ।राजेंद्र अग्रवाल हमेशा से बेदाग छपी वाले नेता रहे हैं ऐसा कोई भी विवाद उनके साथ नहीं जुड़ा है जो पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सके। 

उसके बावजूद भाजपा ने राजेंद्र अग्रवाल का टिकट काटकर मेरठ की सियासत में उथल-पुथल मचा दी है खुद भाजपा नेताओं का कहना है कि पार्टी हाई कमान का यह निर्णय चौंकाने वाला है मेरठ के अंदर भाजपा हाई कमान को एक भी ऐसा नेता मौजूद नजर नहीं आया जो लोकसभा चुनाव लड़ सके मेरठ की बात करें तो यहां पर भाजपा नेताओं की फौज है जो भाजपा को हमेशा से जीत दिलाने के लिए मैदान में डटे रहते हैं। जिन्होंने पूरी जिंदगी भाजपा को मुख्य धारा और भाजपा को सत्ता में लाने के लिए गुजार दी लेकिन जब भाजपा सत्ता में आई तो उन्हीं नेताओं की मेहनत को दरकिनार करते हुए मेरठ में ऐसे व्यक्ति को टिकट क्यों दिया गया जो जीत के बाद भी यहां नहीं रहेगा। 

अक्सर बाहरी लोग चुनाव जीत लेते है और चले जाते हैं अगर कोई परेशान होता है तो वह क्षेत्र की जनता होती है ऐसे में भाजपा नेता भी लगातार प्रयास कर रहे हैं कि भाजपा की पार्टी अरुण गोविल का टिकट को काटकर यहां से किसी स्थानीय व्यक्ति को ही मैदान में उतारे और इस बात को भी जनता के दिलों से निकले कि भाजपा को मेरठ में एक भी काबिल नेता दिखाई नहीं दिया जो लोकसभा चुनाव लड़ सके, पार्टी द्वारा बाहरी नेता को टिकट देना स्थानीय नेताओं का अपमान है।

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