एयर इंडिया के 2 और पायलट प्रारंभिक ड्रग टेस्ट में नॉन-नेगेटिव
एयर इंडिया में 2 और पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटाया गया
पायलट ड्रग स्क्रीनिंग में 2 नए मामले, कन्फर्मेटरी टेस्ट बाकी
एयर इंडिया के दो और पायलट प्रारंभिक ड्रग स्क्रीनिंग में नॉन-नेगेटिव पाए गए हैं। दोनों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया और उनके सैंपल कन्फर्मेटरी टेस्ट के लिए भेजे गए हैं। यह कार्रवाई एयर इंडिया की सभी पायलटों की व्यापक स्क्रीनिंग के बीच हुई है। अंतिम टेस्ट के बिना इसे पॉजिटिव परिणाम कहना उचित नहीं होगा।
एयर इंडिया ने प्रारंभिक ड्रग टेस्ट में नॉन-नेगेटिव नतीजे आने के बाद दो और पायलटों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया है। दोनों पायलटों के सैंपल अब कन्फर्मेटरी टेस्ट के लिए भेजे गए हैं। इसका मतलब यह है कि फिलहाल उनके खिलाफ अंतिम पॉजिटिव ड्रग टेस्ट का निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। यह घटनाक्रम एयर इंडिया ग्रुप की व्यापक पायलट ड्रग स्क्रीनिंग के बीच सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया ने 13 अगस्त से अपने सभी पायलटों की साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्टिंग शुरू की थी। यह कदम फुकेत-दिल्ली फ्लाइट से जुड़े गंभीर एविएशन इंसिडेंट के बाद उठाया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक अब तक करीब 300 से 400 कॉकपिट क्रू सदस्यों की स्क्रीनिंग हो चुकी थी, जिनमें इन दो पायलटों के सैंपल नॉन-नेगेटिव आए। दोनों को उड़ान से अलग कर दिया गया है और अंतिम जांच के लिए सैंपल भेजे गए हैं। यहां “नॉन-नेगेटिव” शब्द महत्वपूर्ण है। प्रारंभिक स्क्रीनिंग किसी पदार्थ की संभावित मौजूदगी का संकेत दे सकती है, लेकिन अंतिम पॉजिटिव निष्कर्ष के लिए कन्फर्मेटरी लैब टेस्ट जरूरी है। इसलिए इन दोनों पायलटों को “ड्रग पॉजिटिव” कहना अभी तथ्यात्मक रूप से जल्दबाजी होगी।
एयर इंडिया का व्यापक ड्रग टेस्टिंग अभियान 4 अगस्त 2026 को फुकेत से दिल्ली जा रही फ्लाइट AI2379 में हुई गंभीर घटना के बाद शुरू हुआ। इस एयरबस A320neo ने उड़ान के दौरान अचानक लगभग 300 फीट की ऊंचाई खो दी थी। घटना के बाद पायलटों की साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग कराई गई। फ्लाइट के कैप्टन की प्रारंभिक स्क्रीनिंग के बाद कन्फर्मेटरी टेस्ट कराया गया, जिसमें मारिजुआना के लिए पॉजिटिव परिणाम आने की रिपोर्ट हुई। इसके बाद एयर इंडिया ने अपनी टेस्टिंग व्यवस्था को पूरे पायलट ग्रुप तक विस्तारित करने का फैसला किया।
नहीं। यहां एक महत्वपूर्ण एडिटोरियल फर्क रखना जरूरी है। फुकेत-दिल्ली फ्लाइट की घटना और कैप्टन के कन्फर्मेटरी ड्रग टेस्ट को एक ही कारण मानना अभी सही नहीं होगा। एयरबस के प्रारंभिक विश्लेषण में विमान के तीनों हाइड्रॉलिक सिस्टम में अस्थायी दबाव की समस्या और कुछ सेकंड के लिए प्रमुख फ्लाइट कंट्रोल के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई थी। इस घटना की विस्तृत जांच अभी जारी है। इसलिए ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव नतीजा आने को विमान के ऊंचाई खोने का स्थापित कारण बताना उचित नहीं है। यही वजह है कि इस खबर में पायलट टेस्टिंग और फ्लाइट इंसिडेंट को अलग-अलग तथ्यों के तौर पर पेश करना जरूरी है।
फुकेत-दिल्ली फ्लाइट के कैप्टन की प्रारंभिक स्क्रीनिंग में ऐसा नतीजा आया था जिसके बाद आगे की जांच की जरूरत पड़ी। कन्फर्मेटरी लैब टेस्ट में उनके सैंपल में मारिजुआना की पुष्टि होने की रिपोर्ट सामने आई। इस मामले के बाद एयर इंडिया ने अपनी टेस्टिंग व्यवस्था को व्यापक बनाने का फैसला किया। अब सभी एयर इंडिया पायलटों के लिए साइकोएक्टिव सब्सटेंस स्क्रीनिंग की जा रही है। एयर इंडिया एक्सप्रेस के पायलट भी इस स्क्रीनिंग के दायरे में हैं।
मौजूदा दो मामलों में प्रारंभिक नतीजे नॉन-नेगेटिव हैं। दोनों को उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है। अब कन्फर्मेटरी टेस्ट यह तय करेगा कि प्रारंभिक स्क्रीनिंग में मिले संकेत की अंतिम पुष्टि होती है या नहीं। इसलिए इन दोनों पायलटों की पेशेवर स्थिति पर अंतिम निष्कर्ष अभी निकालना उचित नहीं होगा।
रिपोर्ट के अनुसार एयर इंडिया ने पायलटों के लिए साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्टिंग को व्यापक बनाया है। स्क्रीनिंग ट्रेनिंग सेशन, फ्लाइट के बाद और एयरलाइन के निर्धारित केंद्रों पर की जा रही है। गुरुग्राम स्थित एयरलाइन अकादमी और पायलटों के होम बेस भी टेस्टिंग व्यवस्था में शामिल हैं। यह व्यवस्था मौजूदा रेगुलेटरी रैंडम टेस्टिंग से व्यापक है। रॉयटर्स के अनुसार उस समय लागू नियमों के तहत एयरलाइंस को हर साल कम से कम 10 प्रतिशत फ्लाइट क्रू की रैंडम साइकोएक्टिव सब्सटेंस टेस्टिंग करनी होती थी।
पायलटों की फिटनेस विमानन सुरक्षा का बुनियादी हिस्सा है। साइकोएक्टिव सब्सटेंस से जुड़ी स्क्रीनिंग का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि फ्लाइट क्रू ड्यूटी के दौरान ऐसी स्थिति में न हो जिससे निर्णय लेने की क्षमता या विमान संचालन प्रभावित हो। दिल्ली हाई कोर्ट के एक फैसले में भी भारतीय एविएशन नियमों के संदर्भ में साइकोएक्टिव सब्सटेंस पर रोक और पायलटों की सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों का उल्लेख किया गया है। हालांकि किसी प्रारंभिक स्क्रीनिंग को अंतिम पॉजिटिव परिणाम मानना वैज्ञानिक और एडमिनिस्ट्रेटिव दोनों स्तरों पर उचित नहीं होगा। कन्फर्मेटरी टेस्ट की भूमिका इसी वजह से महत्वपूर्ण है।
जरूरी नहीं।
प्रारंभिक ड्रग स्क्रीनिंग में किसी पदार्थ या उसके मेटाबोलाइट का संकेत मिलना और ड्यूटी के समय व्यक्ति के नशे में होने की पुष्टि, दोनों अलग बातें हैं। फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने ड्रग टेस्टिंग से जुड़े नियामकीय सुझावों पर अपनी टिप्पणियों में भी इस मुद्दे को उठाया था। संगठन ने कहा था कि कुछ टेस्ट किसी पदार्थ के पिछले इस्तेमाल का संकेत दे सकते हैं और इससे यह अपने आप साबित नहीं होता कि व्यक्ति ड्यूटी के समय प्रभावित था। इसीलिए मौजूदा दो मामलों में कन्फर्मेटरी रिपोर्ट का इंतजार महत्वपूर्ण है।
एयर इंडिया पिछले कुछ समय से सुरक्षा और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं को लेकर अतिरिक्त निगरानी में है। अगस्त की फुकेत-दिल्ली घटना को भारतीय विमानन अधिकारियों ने गंभीर घटना के रूप में वर्गीकृत किया है और इसकी जांच एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो कर रहा है। एयरबस और फ्रांस की बीईए भी तकनीकी जांच में सहयोग कर रहे हैं। एयरबस के प्रारंभिक विश्लेषण में हाइड्रॉलिक सिस्टम से जुड़े तकनीकी मुद्दों की जानकारी सामने आई है। इसका मतलब है कि जांच का दायरा केवल पायलटों के ड्रग टेस्ट तक सीमित नहीं है।
व्यापक स्क्रीनिंग का सीधा उद्देश्य फ्लाइट सेफ्टी में भरोसा बनाए रखना है। एयर इंडिया ने सभी पायलटों की टेस्टिंग शुरू करके यह संकेत दिया है कि वह सुरक्षा प्रोटोकॉल को सख्त कर रही है। लेकिन यात्रियों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि दो प्रारंभिक नॉन-नेगेटिव टेस्ट का अर्थ दो पायलटों के ड्रग इस्तेमाल की अंतिम पुष्टि नहीं है।
अंतिम लैब रिपोर्ट और संबंधित रेगुलेटरी प्रक्रिया के बाद ही किसी पायलट के खिलाफ स्थायी कार्रवाई का आधार स्पष्ट होगा।
मौजूदा दो पायलटों के कन्फर्मेटरी टेस्ट के नतीजे सबसे महत्वपूर्ण अगला अपडेट होंगे। अगर अंतिम टेस्ट पॉजिटिव आता है, तो एयरलाइन और नियामक स्तर पर आगे की कार्रवाई का सवाल उठेगा। अगर परिणाम नकारात्मक आता है, तो प्रारंभिक स्क्रीनिंग और अंतिम टेस्ट के बीच अंतर की वजह भी महत्वपूर्ण होगी।
इसके समानांतर फुकेत-दिल्ली फ्लाइट की तकनीकी और ऑपरेशनल जांच भी जारी रहेगी। एयरबस के प्रारंभिक तकनीकी निष्कर्षों के कारण यह जांच केवल पायलट के ड्रग टेस्ट के आधार पर समाप्त नहीं होगी।
एयर इंडिया के दो और पायलट प्रारंभिक ड्रग स्क्रीनिंग में नॉन-नेगेटिव पाए गए हैं और दोनों को फिलहाल उड़ान ड्यूटी से हटा दिया गया है। उनके सैंपल कन्फर्मेटरी टेस्ट के लिए भेजे गए हैं। यह घटनाक्रम एयर इंडिया की व्यापक पायलट स्क्रीनिंग के बीच सामने आया है, जिसे फुकेत-दिल्ली फ्लाइट की 4 अगस्त की गंभीर घटना के बाद शुरू किया गया था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रारंभिक नॉन-नेगेटिव परिणाम को अंतिम पॉजिटिव ड्रग टेस्ट नहीं माना जाना चाहिए। कन्फर्मेटरी टेस्ट के नतीजे आने तक दोनों पायलटों के मामले में यही तथ्यात्मक स्थिति है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।