Uttar Pradesh
अलीगढ़ नगर निगम में 2001 के जन्म प्रमाण पत्र को ऑनलाइन कराने में अड़चन, रिकॉर्ड और दस्तावेज में जन्मतिथि अलग होने का दावा
Wasi Siddiqui
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2026-09-10 11:21:22
अलीगढ़ में 2001 के पुराने जन्म प्रमाण पत्र को ऑनलाइन कराने की प्रक्रिया जन्मतिथि के अंतर के कारण अटकने का मामला सामने आया है। आवेदक ने निगम रिकॉर्ड की जांच की मांग की है।
📍 अलीगढ़, उत्तर प्रदेश
🗓️ 10 सितंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
2001 के जन्म प्रमाण पत्र को ऑनलाइन कराने में अड़चन
अलीगढ़ नगर निगम में पुराने जन्म प्रमाण पत्र को ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज कराने से जुड़ा एक मामला सामने आया है। पत्रकार शारिक खान अपने परिजन के वर्ष 2001 में जारी जन्म प्रमाण पत्र को ऑनलाइन और क्यूआर कोड वाले प्रमाण पत्र के रूप में दर्ज कराने के लिए निगम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
शारिक खान के मुताबिक, उनके पास नगर निगम अलीगढ़ की ओर से वर्ष 2001 में जारी किया गया मूल जन्म प्रमाण पत्र मौजूद है। उनका कहना है कि इसी प्रमाण पत्र के आधार पर बाद में परिवार के अन्य दस्तावेज तैयार हुए, लेकिन अब पुराने प्रमाण पत्र और निगम के मौजूदा रिकॉर्ड में जन्मतिथि को लेकर अंतर बताया जा रहा है।
पुराने प्रमाण पत्र का रिकॉर्ड
आवेदक के अनुसार, उनके पास मौजूद प्रमाण पत्र बुक संख्या 36 और क्रम संख्या 34 में दर्ज है। प्रमाण पत्र से संबंधित रिकॉर्ड 23 जनवरी 2001 से जुड़ा बताया गया है।
शारिक खान का कहना है कि वह इसी पुराने प्रमाण पत्र को मौजूदा ऑनलाइन व्यवस्था में दर्ज कराकर क्यूआर कोड वाला प्रमाण पत्र प्राप्त करना चाहते हैं। इसी प्रक्रिया के दौरान निगम रिकॉर्ड की जांच में जन्मतिथि को लेकर अंतर सामने आने की जानकारी दी गई।
जन्मतिथि में एक अंक के अंतर का दावा
शारिक खान के अनुसार, निगम कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि जन्म से संबंधित रिकॉर्ड रजिस्टर में मौजूद है, लेकिन उसमें दर्ज जन्मतिथि और पुराने प्रमाण पत्र की जन्मतिथि में एक अंक का अंतर है।
इसी अंतर के कारण ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी कराने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि जन्मतिथि में अंतर मूल रिकॉर्ड तैयार होने के समय हुआ या बाद में रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण के दौरान सामने आया।
यही बिंदु इस पूरे मामले की जांच के लिए अहम है।
कई बार निगम कार्यालय जाने का दावा
शारिक खान का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए वह कई बार नगर निगम कार्यालय जा चुके हैं। उनका आरोप है कि उन्हें अभी तक मामले की प्रक्रिया और समाधान को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है।
उनके अनुसार, जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड रूम के प्रभारी मोहन पाठक से भी मामले में जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
यह पक्ष आवेदक के बयान पर आधारित है। संबंधित अधिकारी की ओर से कोई विस्तृत लिखित प्रतिक्रिया उपलब्ध होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
सहायक नगर आयुक्त से भी जवाब मांगने का प्रयास
मामले में जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड से संबंधित अधिकारी सहायक नगर आयुक्त तपस्या यादव से भी पक्ष जानने का प्रयास किए जाने की बात कही गई है।
शारिक खान के अनुसार, उन्हें वहां से भी मामले पर स्पष्ट जवाब नहीं मिला। हालांकि, नगर निगम अधिकारियों की ओर से इस प्रकरण पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान उपलब्ध नहीं है।
ऐसे में जन्मतिथि में अंतर की वास्तविक वजह और रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक स्थिति सामने आना अभी बाकी है।
पुराने दस्तावेज और मौजूदा रिकॉर्ड के बीच अंतर का सवाल
इस मामले में सबसे अहम सवाल पुराने प्रमाण पत्र और सरकारी रिकॉर्ड के बीच कथित अंतर को लेकर है।
यदि वर्ष 2001 में नगर निगम द्वारा प्रमाण पत्र जारी किया गया था और उसी प्रमाण पत्र के आधार पर परिवार के अन्य दस्तावेज तैयार हुए, तो रिकॉर्ड में मौजूद अलग जन्मतिथि का प्रशासनिक आधार क्या है, यह जांच का विषय है।
दूसरा सवाल यह है कि यदि मूल रजिस्टर में रिकॉर्ड मौजूद है, तो पुराने प्रमाण पत्र और रजिस्टर में दर्ज जानकारी का आधिकारिक मिलान किस प्रक्रिया के तहत किया जाएगा।
दस्तावेजी पहचान पर असर की चिंता
जन्म प्रमाण पत्र किसी व्यक्ति की बुनियादी नागरिक पहचान से जुड़े प्रमुख दस्तावेजों में शामिल होता है। जन्मतिथि में अंतर होने पर शिक्षा, पहचान, पासपोर्ट, सरकारी सेवाओं और दूसरे दस्तावेजों में भी सत्यापन संबंधी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं।
शारिक खान का कहना है कि उनके भाई के अन्य मूल दस्तावेज वर्ष 2001 में जारी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर तैयार हुए हैं। ऐसे में यदि निगम रिकॉर्ड में अलग जन्मतिथि दर्ज है, तो आगे दस्तावेजी सत्यापन के दौरान परेशानी सामने आने की आशंका है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इन संभावित प्रशासनिक प्रभावों का वास्तविक असर संबंधित दस्तावेज और प्राधिकरण की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
रिकॉर्ड मिलान की मांग
शारिक खान ने नगर निगम प्रशासन से मांग की है कि वर्ष 2001 के मूल रिकॉर्ड और उस समय जारी किए गए जन्म प्रमाण पत्र का मिलान कराया जाए।
उनकी मांग है कि रिकॉर्ड की जांच के बाद नियमानुसार सही जानकारी को ऑनलाइन जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए और पात्रता के अनुसार क्यूआर कोड वाला जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाए।
मामले में रिकॉर्ड की मूल प्रति, प्रमाण पत्र और मौजूदा डिजिटल प्रविष्टि का तुलनात्मक परीक्षण इस विवाद को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
अब नगर निगम की कार्रवाई पर नजर
फिलहाल मामला आवेदक की शिकायत और उसके पास मौजूद पुराने प्रमाण पत्र में दर्ज जानकारी तक सीमित है। जन्मतिथि में अंतर की वजह और जिम्मेदारी को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले नगर निगम के मूल रजिस्टर तथा डिजिटल रिकॉर्ड की आधिकारिक जांच जरूरी है।
अब नजर नगर निगम प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि पुराने प्रमाण पत्र और मूल रजिस्टर का औपचारिक मिलान कर स्थिति स्पष्ट की जाती है, तो आवेदक को आगे की प्रक्रिया की जानकारी मिल सकेगी और दस्तावेजी विसंगति का समाधान भी संभव होगा।
इस मामले ने पुराने कागजी रिकॉर्ड को डिजिटल व्यवस्था में स्थानांतरित करने के दौरान दस्तावेजी शुद्धता और नागरिकों को स्पष्ट प्रशासनिक जानकारी उपलब्ध कराने से जुड़े सवाल भी सामने रखे हैं।
Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।