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बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच SIP का दम, ₹2 लाख करोड़ पहुंचा नेट निवेश

Apurva Choudhary 2026-09-10 21:17:40
बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच SIP का दम, ₹2 लाख करोड़ पहुंचा नेट निवेश
भारतीय निवेशकों ने बाजार की उठापटक के बावजूद SIP में भरोसा बनाए रखा। वित्त वर्ष 2025-26 में नेट SIP निवेश रिकॉर्ड ₹2 लाख करोड़ पहुंचा। अगस्त 2026 में मासिक SIP contribution ₹32,297 करोड़ के नए रिकॉर्ड पर रहा। इक्विटी म्यूचुअल फंड में भी करीब ₹29,329 करोड़ का मजबूत निवेश आया।

LOCATION | DATE | BYLINE
📍 New Delhi | 📰 10 September 2026 | ✍️ Apurva Choudhary 

बाजार में उतार-चढ़ाव, लेकिन SIP पर भरोसा कायम
भारतीय शेयर बाजार में बीते दौर में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन छोटे और खुदरा निवेशकों के बीच Systematic Investment Plan यानी SIP की लोकप्रियता कमजोर नहीं हुई। वित्त वर्ष 2025-26 में नेट SIP निवेश रिकॉर्ड ₹2 लाख करोड़ तक पहुंच गया।
SEBI के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक यह रकम FY26 में हुए करीब ₹3.5 लाख करोड़ के ग्रॉस SIP निवेश का 56 प्रतिशत रही। यह अनुपात कम-से-कम पिछले तीन वर्षों में सबसे ऊंचा है। FY25 में नेट SIP निवेश का ग्रॉस निवेश में हिस्सा करीब 54 प्रतिशत था।

नेट और ग्रॉस SIP में क्या फर्क?
SIP से जुड़े आंकड़ों को समझते समय ग्रॉस और नेट निवेश के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। AMFI की मासिक रिपोर्टिंग में सामान्य तौर पर SIP contribution यानी ग्रॉस निवेश दिखाया जाता है। इसके विपरीत नेट SIP निवेश में उस रकम से संबंधित निकासी या रिडेम्पशन को घटाने के बाद बची राशि देखी जाती है।
FY26 में करीब ₹3.5 लाख करोड़ का ग्रॉस SIP निवेश हुआ, जबकि नेट आंकड़ा लगभग ₹2 लाख करोड़ रहा। यानी निवेशकों ने SIP के जरिये बड़ी रकम लगाई, लेकिन कुछ राशि योजनाओं से बाहर भी निकाली गई। रिपोर्ट के अनुसार FY26 में SIP से संबंधित निकासी लगभग ₹1.5 लाख करोड़ रही।
यही वजह है कि केवल SIP accounts की संख्या देखने के बजाय नेट flow को भी निवेशकों के व्यवहार का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

अगस्त में SIP contribution का नया रिकॉर्ड
ताजा AMFI आंकड़े बताते हैं कि अगस्त 2026 में SIP contribution बढ़कर ₹32,297 करोड़ हो गया। जुलाई में यह ₹31,961 करोड़ था। यानी एक महीने में करीब 1.05 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और मासिक SIP contribution ने नया रिकॉर्ड बनाया।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अगस्त में शेयर बाजार की चाल पूरी तरह स्थिर नहीं रही। इसके बावजूद निवेशकों ने नियमित निवेश का सिलसिला जारी रखा।
SIP का मूल विचार ही market timing से दूरी बनाकर नियमित अंतराल पर निवेश करना है। इसी वजह से बाजार ऊपर हो या नीचे, निवेशक तय रकम निवेश करते रहते हैं।

इक्विटी फंड में भी मजबूत निवेश
अगस्त में इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में नेट inflow करीब ₹29,329 करोड़ रहा। जुलाई में यह ₹24,697 करोड़ था। यानी महीने-दर-महीने करीब 19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इक्विटी फंड के भीतर Small-cap और Mid-cap योजनाओं में निवेशकों की दिलचस्पी खास तौर पर मजबूत रही। अगस्त में Small-cap funds में करीब ₹7,973 करोड़ और Mid-cap funds में करीब ₹6,989 करोड़ का नेट inflow आया।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि इन श्रेणियों में निवेश हमेशा बेहतर return देगा। Small-cap और Mid-cap schemes में volatility और risk अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है। निवेशकों के लिए asset allocation और risk profile को समझना जरूरी है।

SIP accounts का बड़ा निवेश आधार
FY26 के दौरान SIP ecosystem में बड़ा विस्तार हुआ। NSE के विश्लेषण के अनुसार मार्च 2026 तक outstanding SIP accounts लगभग 10.5 करोड़ तक पहुंच गए थे, जो FY22 के करीब 5.3 करोड़ के स्तर से लगभग दोगुने हैं।
हालांकि यहां एक जरूरी nuance भी है। SIP accounts की संख्या बढ़ने के साथ नए registrations और discontinuations दोनों बढ़े हैं। FY26 में नए SIP registrations करीब 7.2 करोड़ रहे, जबकि discontinued SIPs करीब 6.8 करोड़ तक पहुंचे।
इसका मतलब यह नहीं कि निवेशकों का भरोसा खत्म हो रहा है। बल्कि यह संकेत देता है कि SIP ecosystem अब बहुत बड़ा हो चुका है और उसमें account churn भी बढ़ रहा है।

छोटे निवेशकों के व्यवहार में बदलाव
SIP की बढ़ती लोकप्रियता भारतीय retail investment culture में बदलाव का संकेत देती है। पहले आम परिवारों की बचत का बड़ा हिस्सा बैंक deposits, सोना या पारंपरिक बचत साधनों में जाता था। अब लंबे समय के wealth creation के लिए mutual funds और SIP भी household financial planning का हिस्सा बन रहे हैं।
FY26 में SIP contribution करीब ₹3.5 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के लगभग ₹2.9 लाख करोड़ से करीब 21 प्रतिशत अधिक था।
यह वृद्धि केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है। डिजिटल onboarding, investment apps और financial awareness ने छोटे शहरों और नए निवेशकों के लिए mutual funds तक पहुंच आसान की है।

बाजार गिरने पर SIP क्यों जारी रहता है?
SIP का सबसे बड़ा behavioural advantage यह है कि इसमें निवेशक को हर महीने बाजार की दिशा का अनुमान लगाने की जरूरत नहीं होती। बाजार नीचे होने पर उसी रकम से ज्यादा units मिल सकती हैं और बाजार ऊपर होने पर कम units खरीदी जाती हैं।
इसी प्रक्रिया को rupee-cost averaging के नजरिये से देखा जाता है। हालांकि यह किसी निश्चित return की गारंटी नहीं देता और market risk हमेशा बना रहता है।
यही कारण है कि SIP को short-term trading के बजाय long-term investment discipline के रूप में देखा जाता है।

Small-cap और Mid-cap की बढ़ती पसंद
अगस्त के आंकड़ों में Small-cap और Mid-cap funds का मजबूत प्रदर्शन retail investors की risk appetite को भी दर्शाता है। लेकिन यहां निवेशकों के लिए सावधानी जरूरी है।
छोटी और मध्यम कंपनियों के शेयरों में price swings बड़े हो सकते हैं। इसलिए केवल पिछले inflow या किसी category की popularity देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं है।
वित्तीय लक्ष्य, investment horizon, income stability और risk tolerance के आधार पर portfolio का संतुलन तय करना अधिक अहम है।

क्या SIP का यह ट्रेंड आगे भी कायम रहेगा?
अगस्त के रिकॉर्ड contribution और FY26 के मजबूत net flow से संकेत मिलता है कि SIP अब भारतीय mutual fund industry का एक महत्वपूर्ण structural pillar बन चुका है। बाजार में temporary volatility आने पर भी बड़ी संख्या में निवेशक अपनी नियमित investment strategy जारी रख रहे हैं।
फिर भी भविष्य के SIP flows बाजार की दिशा, household income, interest rates, employment conditions और investor sentiment जैसे कई factors पर निर्भर करेंगे। इसलिए मौजूदा रिकॉर्ड को भविष्य के returns की गारंटी के रूप में देखना सही नहीं होगा।

भारतीय निवेशकों के लिए बड़ा संकेत
₹2 लाख करोड़ का FY26 net SIP investment केवल एक financial number नहीं है। यह भारतीय households के investment behaviour में हो रहे बदलाव का भी संकेत है।
अगस्त में ₹32,297 करोड़ का monthly contribution और करीब ₹29,329 करोड़ का equity MF inflow यह दिखाता है कि market volatility के बावजूद domestic investors की भागीदारी मजबूत बनी हुई है।
लेकिन SIP में निवेश करते समय भी risk को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। Mutual fund investments market risk के अधीन हैं और किसी भी category का पिछला प्रदर्शन भविष्य के return की गारंटी नहीं होता।
फिलहाल सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारतीय retail investors market timing के बजाय नियमित निवेश और long-term wealth creation की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं। यही बदलाव आने वाले वर्षों में भारत के capital market landscape को और गहरा कर सकता है।
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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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