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भारत के 59 Power Plants में Coal Stock गंभीर, बिजली मांग से बढ़ा दबाव

Apurva Choudhary 2026-09-11 20:56:09
भारत के 59 Power Plants में Coal Stock गंभीर, बिजली मांग से बढ़ा दबाव
भारत के एक-तिहाई बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। 9 सितंबर तक 59 संयंत्रों में भंडार 25% से कम था। बिजली मांग, गर्म मौसम, कमजोर हाइड्रो उत्पादन और मानसूनी बाधाओं ने दबाव बढ़ाया है। सरकार ने रेल और सड़क से आपूर्ति तेज की है।

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📍 New Delhi | 📰 11 September 2026 | ✍️ Apurva Choudhary 

59 बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक गंभीर
भारत के Power Sector पर Coal Supply को लेकर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। 9 सितंबर 2026 तक देश के 59 Coal-based Thermal Power Plants में कोयले का स्टॉक Critical स्तर पर पहुंच गया था। इन संयंत्रों में भंडार निर्धारित मानक के 25 प्रतिशत से कम या सीमित दिनों के उत्पादन के लिए ही पर्याप्त बताया गया है।
अगस्त के अंत में ऐसे Critical Stock वाले संयंत्रों की संख्या 45 के आसपास थी। कुछ ही दिनों में यह संख्या बढ़कर 59 हो गई, जिससे Power Generation के लिए Fuel Availability पर निगरानी और तेज हो गई है।
हालांकि इस आंकड़े को तत्काल देशव्यापी बिजली संकट का संकेत मानना सही नहीं होगा। सरकार और Coal Ministry ने उन Thermal Plants तक अतिरिक्त कोयला पहुंचाने के लिए Supply और Logistics को तेज किया है, जहां स्टॉक अपेक्षाकृत कम है।

गर्मी और Power Demand ने बढ़ाया दबाव
इस स्थिति की एक बड़ी वजह देश के कई हिस्सों में लंबे समय से बना गर्म मौसम है। El Niño से जुड़ी कमजोर बारिश और ऊंचे तापमान ने Cooling तथा Irrigation Demand को भी प्रभावित किया है।
सितंबर में भी Peak Power Demand सामान्य मौसमी स्तर से काफी ऊपर रही है। 8 सितंबर को देश की Peak Demand 260 GW के पार पहुंच गई थी, जबकि इस दौरान कई दिनों में मांग 249 GW से ऊपर रही।
मई में भारत ने लगभग 270.70 GW की रिकॉर्ड Peak Power Demand दर्ज की थी। ऐसे में गर्म मौसम के दौरान बिजली की ऊंची खपत Thermal Generation पर अतिरिक्त दबाव डाल रही है।
दिन के समय Solar Power Generation मांग का एक बड़ा हिस्सा संभालती है, लेकिन शाम और रात के Non-Solar Hours में Battery Storage की सीमित क्षमता के कारण Thermal और अन्य Dispatchable Sources की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहती है।

कमजोर Hydro Generation ने बढ़ाई Thermal Power पर निर्भरता
Coal Stock पर दबाव का दूसरा अहम पहलू Hydropower Generation है। सितंबर के शुरुआती दिनों में कमजोर बारिश के कारण Hydro Generation में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई।
ऐसे माहौल में Solar Generation के उपलब्ध न रहने वाले घंटों में Coal-based Generation की अहमियत बढ़ जाती है। इससे Thermal Plants को लगातार ऊंचे Load पर चलाना पड़ सकता है और Coal Consumption भी बढ़ता है।
CRISIL के आकलन के अनुसार अगस्त में भारत की Power Consumption रिकॉर्ड करीब 169 Billion Units तक पहुंची। इसी दौरान Coal-based Generation में भी मजबूत वृद्धि हुई, जबकि कमजोर मानसून के कारण Hydropower Generation में गिरावट आई।
इसका सीधा असर Coal Inventories पर पड़ा। बढ़ी हुई Generation के कारण औसत दैनिक Coal Requirement भी पिछले वर्ष की तुलना में ऊपर रही और Power Plants का Stock Cover कम हुआ।

59 Plants Critical Zone में कैसे पहुंचे?
Central Electricity Authority के मानकों में ऐसे Thermal Power Plants को Critical स्थिति में माना जाता है जहां Coal Stock निर्धारित Normative Requirement के 25 प्रतिशत से नीचे हो।
9 सितंबर तक ऐसे Plants की संख्या 59 बताई गई। यह संख्या अगस्त के अंत के 45 के मुकाबले काफी अधिक है। यानी Supply Chain पर दबाव कुछ ही दिनों में तेज हुआ है।
इसमें केवल Coal Production ही मुद्दा नहीं है। Monsoon के दौरान Mining Areas में भारी बारिश, Internal Roads की स्थिति और Rail Evacuation में व्यवधान ने भी Coal Movement को प्रभावित किया।
यही वजह है कि देश के Mine Pitheads पर उपलब्ध Coal और Power Plants तक पहुंचने वाले Coal के बीच Logistics महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

Coal India के पास बड़ा Stock, चुनौती Supply Movement की
एक अहम पहलू यह है कि Coal India के Pitheads पर करीब 76 Million Tonnes Coal Stock उपलब्ध बताया गया है। इसका मतलब यह नहीं कि देश में Coal पूरी तरह खत्म हो रहा है। असली चुनौती उपलब्ध Coal को जरूरत वाले Power Plants तक तेजी से पहुंचाने की है।
इसी को देखते हुए Rail Rake Loading में तेजी लाई गई है। Ministry of Coal के अनुसार Power Sector के लिए Rake Loading 3 सितंबर के 370 Rakes प्रतिदिन से बढ़कर 6 सितंबर को 444 Rakes प्रतिदिन हो गई। चार दिनों में यह करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी थी।
Coal Supply को केवल Railway Network तक सीमित नहीं रखा जा रहा है। Critical Plants के लिए Road-based movement और अन्य Logistics उपायों पर भी जोर दिया जा रहा है।

सरकार की Supply Strategy क्या है?
Coal Ministry और Coal India की तरफ से Critical Thermal Plants की लगातार निगरानी की जा रही है। जिन Plants में Stock Normative Requirement से काफी नीचे है, वहां Corrective Supply Measures लागू किए जा रहे हैं।
Rake Loading बढ़ाने के साथ Coal-producing States में Mining और Evacuation Operations को भी तेज किया जा रहा है। बारिश में कमी आने के बाद कुछ Coal Mines में Production और Dispatch की रफ्तार में सुधार देखा गया है।
Northern Coalfields और Coal India की अन्य Subsidiaries ने भी Production और Power Sector Dispatch बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं। इससे आने वाले दिनों में Critical Plants के Stock Position में सुधार की उम्मीद है।

क्या देश में बिजली संकट का खतरा है?
59 Plants का Critical Stock निश्चित तौर पर Energy Security के लिहाज से एक महत्वपूर्ण संकेत है, लेकिन इसे सीधे देशव्यापी Power Crisis कहना जल्दबाजी होगी।
मौजूदा स्थिति में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती Peak Demand और Fuel Supply के बीच संतुलन बनाए रखने की है। अगर गर्म मौसम लंबे समय तक बना रहता है और बिजली की मांग ऊंची रहती है, तो Thermal Plants पर Coal Consumption का दबाव भी जारी रह सकता है।
दूसरी ओर, Coal Production और Rake Movement में हालिया सुधार एक सकारात्मक संकेत है। अगर Mine-to-Plant Supply Chain सुचारु रहती है तो Critical Plants में Stock तेजी से सुधर सकता है।

Power Security के लिए आगे क्या अहम होगा?
आने वाले दिनों में तीन संकेतक बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे। पहला, Peak Power Demand किस स्तर पर रहती है। दूसरा, Thermal Plants तक रोजाना कितना Coal पहुंचता है। तीसरा, Monsoon और Hydro Generation की स्थिति में कितना सुधार आता है।
इसके साथ Solar Generation और Battery Storage की उपलब्धता भी Non-Solar Hours में Power Supply के लिए महत्वपूर्ण रहेगी।
मौजूदा तजज़िया यही बताता है कि भारत के Power Sector के सामने तत्काल बिजली उत्पादन रोकने की स्थिति नहीं है, लेकिन Fuel Logistics को लेकर दबाव गंभीर है। 59 Critical Plants का आंकड़ा Supply Chain की कमजोरी को सामने लाता है और आने वाले दिनों में Coal Movement पर सरकार की निगरानी को और अहम बनाता है।
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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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