भारत सरकार का कपास उत्पादकता मिशन देश में कपास उत्पादन, गुणवत्ता और निर्यात को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम है। मिशन के तहत 2031 तक उत्पादन बढ़ाने, MSP में वृद्धि, CCI की खरीद मजबूत करने और 'कस्तूरी कॉटन भारत' ब्रांडिंग को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है।
📍 नई दिल्ली
📰 21 जुलाई 2026
✍️ अपूर्वा चौधरी
भारत वैश्विक कपास उत्पादन में मजबूत स्थिति में
भारत दुनिया का एकमात्र देश है जहां कपास की चारों प्रमुख प्रजातियों—G. Arboreum, G. Herbaceum, G. Barbadense और G. Hirsutum—की खेती की जाती है। क्षेत्रफल के लिहाज से भारत विश्व में पहले और उत्पादन के मामले में दूसरे स्थान पर है। अब सरकार गुणवत्ता, उत्पादकता और ब्रांडिंग के माध्यम से वैश्विक कपास बाजार में देश की स्थिति को और मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है।
वर्ष 2025-26 (अस्थायी आंकड़ों) के अनुसार देश में 290.91 लाख गांठ (करीब 4.95 मिलियन टन) कपास का उत्पादन हुआ, जबकि घरेलू खपत 328 लाख गांठ तक पहुंच गई। कपास व्यापार में एक गांठ का मानक वजन 170 किलोग्राम माना जाता है।
कपास उत्पादकता मिशन बना परिवर्तन का आधार
सरकार ने कपास क्षेत्र को नई गति देने के लिए 5,659.22 करोड़ रुपये के बजट वाला कपास उत्पादकता मिशन शुरू किया है। इस मिशन का लक्ष्य वर्ष 2031 तक उत्पादन को 498 लाख गांठ तक पहुंचाना है।
मिशन के तहत जलवायु-प्रतिरोधी, उच्च उपज देने वाली और अतिरिक्त लंबे रेशे (ELS) वाली कपास की नई किस्मों के विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर बीजों के माध्यम से किसानों की उत्पादकता बढ़ाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।
MSP में बढ़ोतरी और CCI की रिकॉर्ड खरीद
कपास किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में भी बढ़ोतरी की है। 2026-27 विपणन सीजन के लिए मध्यम रेशे वाली कपास का MSP 8,267 रुपये प्रति क्विंटल और लंबे रेशे वाली कपास का MSP 8,667 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और कपास की खेती को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं, कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने वर्ष 2025-26 के दौरान 105.09 लाख गांठ कपास की खरीद की, जिसकी कुल कीमत 41,530 करोड़ रुपये रही। यह खरीद किसानों को बाजार में मूल्य गिरने की स्थिति में सुरक्षा प्रदान करने और उनकी आय को स्थिर बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
'कस्तूरी कॉटन भारत' से वैश्विक ब्रांडिंग को बढ़ावा
भारतीय कपास की गुणवत्ता और वैश्विक पहचान मजबूत करने के लिए सरकार 'कस्तूरी कॉटन भारत' ब्रांडिंग कार्यक्रम को भी तेजी से आगे बढ़ा रही है। इस पहल के तहत ट्रेसबिलिटी, ब्लॉकचेन तकनीक और QR कोड आधारित प्रमाणीकरण की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे खरीदार कपास की गुणवत्ता और स्रोत की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।
अब तक 3.29 लाख गांठ कपास को इस प्रणाली के तहत प्रमाणित किया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय कपास की विश्वसनीयता बढ़ेगी, निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत होगी।
किसानों और उद्योग को होगा दोहरा लाभ
कपास केवल वस्त्र उद्योग का कच्चा माल नहीं है, बल्कि इससे खाद्य तेल, पशु चारा, मेडिकल कॉटन और बायोमास ईंधन जैसे कई उत्पाद भी तैयार किए जाते हैं। इसलिए इस क्षेत्र में निवेश और तकनीकी सुधार का लाभ सीधे किसानों के साथ-साथ वस्त्र उद्योग, निर्यात क्षेत्र और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मिलेगा।
सरकार का लक्ष्य आधुनिक तकनीक, बेहतर बाजार व्यवस्था और मूल्य समर्थन के माध्यम से कपास क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है, ताकि किसानों की आय बढ़े और भारत वैश्विक कपास उद्योग में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रख सके।
कपास उत्पादकता मिशन भारत के कृषि और वस्त्र उद्योग को नई दिशा देने की महत्वाकांक्षी पहल है। उत्पादन बढ़ाने, उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों को बढ़ावा देने, किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने और वैश्विक बाजार में भारतीय कपास की पहचान मजबूत करने के लिए सरकार बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है।
MSP में बढ़ोतरी, CCI की रिकॉर्ड खरीद, 'कस्तूरी कॉटन भारत' ब्रांडिंग और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से आने वाले वर्षों में कपास क्षेत्र के अधिक प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनने की उम्मीद है। यदि मिशन अपने निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करता है, तो इससे किसानों की आय, निर्यात और देश की अर्थव्यवस्था—तीनों को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा।