राजस्थान के श्रीगंगानगर में भाखड़ा, गंगनहर और इंदिरा गांधी नहर में सिंचाई जल की कमी को लेकर सांसद कुलदीप इंदौरा के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों ने मुख्य अभियंता से मुलाकात की। बैठक में खरीफ फसलों को संभावित नुकसान, नहरों की सफाई और किसानों को समय पर पानी उपलब्ध कराने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
📍 Location: श्रीगंगानगर, राजस्थान
📰 Date: 2 अगस्त 2026
✍️ Byline: Apurva Choudhary
सिंचाई जल संकट पर जनप्रतिनिधियों की बैठक
राजस्थान के श्रीगंगानगर में सिंचाई जल की कमी को लेकर रविवार को महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। सांसद कुलदीप इंदौरा के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों ने सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता से मुलाकात कर क्षेत्र के किसानों की समस्याओं को विस्तार से रखा।
बैठक में बताया गया कि श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और आसपास के इलाकों में इस वर्ष पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खरीफ फसलें पूरी तरह नहरों के पानी पर निर्भर हैं। ऐसे में भाखड़ा, गंगनहर और इंदिरा गांधी नहर में पर्याप्त जल उपलब्ध नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है।
खरीफ फसलों पर मंडरा रहा संकट
बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों ने कहा कि यदि समय पर सिंचाई जल उपलब्ध नहीं कराया गया तो मूंग, ग्वार, कपास और अन्य खरीफ फसलों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने अधिकारियों से मांग की कि किसानों की जरूरत को प्राथमिकता देते हुए नहरों में पर्याप्त जल प्रवाह सुनिश्चित किया जाए, ताकि लाखों किसानों की आजीविका और कृषि उत्पादन प्रभावित न हो।
नहरों की सफाई और जल वितरण पर जोर
बैठक में गंगनहर की लंबित सफाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि नहर की सफाई शीघ्र पूरी कर राजस्थान को उसके निर्धारित हिस्से का पूरा पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उनका कहना था कि यदि समय पर सफाई और जल प्रबंधन नहीं हुआ तो सिंचाई व्यवस्था और अधिक प्रभावित हो सकती है।
इसके साथ ही इंदिरा गांधी नहर परियोजना में किसानों की आवश्यकता को देखते हुए तत्काल दो समूहों में पानी छोड़े जाने की मांग की गई। प्रतिनिधियों ने भाखड़ा परियोजना से भी पर्याप्त जल उपलब्ध कराने पर जोर देते हुए कहा कि तीनों प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं से किसानों की जरूरत के अनुरूप पानी मिलना आवश्यक है।
किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता
सांसद कुलदीप इंदौरा ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सिंचाई जल की समस्या का समाधान बिना किसी देरी के किया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस विषय पर गंभीरता से कार्रवाई करने और जल वितरण व्यवस्था को प्रभावी बनाने की अपील की।
बैठक में मौजूद अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी कहा कि यदि समय पर पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध नहीं हुआ तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से समन्वित प्रयास कर जल संकट का स्थायी समाधान निकालने की मांग की।
खरीफ सीजन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा
राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी जिलों में खरीफ खेती का बड़ा हिस्सा नहर आधारित सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर करता है। कम वर्षा की स्थिति में किसानों के लिए नहरों का पानी ही सबसे बड़ा सहारा होता है। ऐसे समय में जलापूर्ति में किसी भी प्रकार की कमी फसलों की उत्पादकता और किसानों की आय दोनों को प्रभावित कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जल प्रबंधन, नहरों का रखरखाव और निर्धारित हिस्से के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यदि इन पहलुओं पर प्रभावी ढंग से काम किया जाता है तो संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आगे क्या होगा
बैठक के दौरान अधिकारियों से सिंचाई जल उपलब्धता बढ़ाने, नहरों की सफाई तेज करने और किसानों की आवश्यकताओं के अनुसार जल वितरण सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया। अब किसानों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर रहेगी कि मांगों पर कितना शीघ्र और प्रभावी निर्णय लिया जाता है।