मंगलवार, 18 August 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
Book Your Ads With Shah Times
Business & Economy

भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक, वैश्विक हिस्सेदारी 31.24%

Asif Khan 2026-08-18 16:02:45
भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक, वैश्विक हिस्सेदारी 31.24%

भारत के नारियल उत्पादन ने बनाया वैश्विक रिकॉर्ड

नारियल उत्पादन में भारत सबसे आगे, 31.24% हिस्सेदारी

उत्पादन से निर्यात तक बढ़ रहा भारत का नारियल सेक्टर


भारत वैश्विक नारियल उत्पादन में 31.24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है। 2024-25 में 2.19 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र से 20,301 मिलियन से अधिक नारियल का उत्पादन हुआ। सरकार ने नई खेती, बागानों और मूल्यवर्धित उत्पादों के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाई है। अब फोकस उत्पादकता, निर्यात और किसानों की आय पर है।


स्थान: नई दिल्ली
तारीख: 18 अगस्त 2026
बायलाइन: Mohd Naved

भारत बना दुनिया का सबसे बड़ा नारियल उत्पादक, वैश्विक हिस्सेदारी 31.24 प्रतिशत

भारत ने वैश्विक नारियल अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और मजबूत की है। आधिकारिक फैक्टशीट के मुताबिक भारत वैश्विक नारियल उत्पादन में 31.24 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ पहले स्थान पर है। खेती के क्षेत्रफल के लिहाज़ से भारत 17.90 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दुनिया में तीसरे स्थान पर है।

यह आंकड़ा केवल कृषि उत्पादन की तस्वीर नहीं दिखाता। इसके पीछे लाखों किसानों की आजीविका, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य प्रसंस्करण, निर्यात और मूल्यवर्धन का पूरा तंत्र जुड़ा है। केंद्र सरकार अब नारियल क्षेत्र को कच्चे कृषि उत्पाद से आगे ले जाकर मूल्यवर्धित और निर्यात-उन्मुख सेक्टर के तौर पर विकसित करने की नीति पर काम कर रही है। संलग्न न्यूज़रूम ब्रीफ के अनुरूप रिपोर्टिंग में तथ्य, स्रोत और विश्लेषण को अलग रखा गया है।

क्या हुआ?

2024-25 के दौरान भारत ने करीब 2.19 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में 20,301 मिलियन से अधिक नारियल का उत्पादन किया। इस अवधि में औसत उत्पादकता 9,249 नारियल प्रति हेक्टेयर रही।

सरकारी जानकारी के मुताबिक 2025-26 में नारियल बागानों की स्थापना और रखरखाव के लिए 632.77 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी गई। इसका मकसद दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता को मजबूत करना है।

2024-25 में 2,979 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को नारियल की नई खेती के तहत लाने के लिए करीब 209.24 लाख रुपये खर्च किए गए। इस पहल से विभिन्न राज्यों के 13,068 किसानों को लाभ मिलने की बात कही गई है।

पूरा संदर्भ क्या है?

भारत के नारियल क्षेत्र की खासियत यह है कि देश कम वैश्विक खेती क्षेत्र हिस्सेदारी के बावजूद उत्पादन में पहला स्थान रखता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार खेती क्षेत्र में भारत की वैश्विक हिस्सेदारी 17.90 प्रतिशत है, जबकि उत्पादन में हिस्सेदारी 31.24 प्रतिशत है।

इस अंतर से उत्पादकता का महत्व सामने आता है। भारत की नीति अब केवल खेती का रकबा बढ़ाने तक सीमित नहीं है। उत्पादन क्षमता, बेहतर बागान प्रबंधन, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धित उत्पादों पर भी जोर दिया जा रहा है।

केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने Coconut Promotion Scheme की घोषणा की। बजट भाषण में सरकार ने नारियल को हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर के तहत प्रमुख फसलों में शामिल करते हुए उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने की नीति सामने रखी।

पृष्ठभूमि और घटनाक्रम

भारत में नारियल उत्पादन का सबसे बड़ा क्षेत्र केरल में है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक केरल में करीब 7.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में नारियल की खेती होती है और उत्पादन लगभग 5,149.87 मिलियन नारियल बताया गया है।

उत्पादन के मामले में तमिलनाडु आगे है। वहीं उत्पादकता में आंध्र प्रदेश शीर्ष स्थान पर है। इसके बाद पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु का स्थान बताया गया है।

इससे यह स्पष्ट होता है कि नारियल सेक्टर में क्षेत्रफल और उत्पादकता दो अलग-अलग पैमाने हैं। बड़े क्षेत्रफल वाला राज्य जरूरी नहीं कि प्रति हेक्टेयर उत्पादन में भी सबसे आगे हो।

प्रमुख पक्षकारों का रुख

केंद्र सरकार ने नारियल क्षेत्र को मजबूत करने के लिए Coconut Development Board के जरिए कई कार्यक्रम लागू किए हैं। 2025-26 में बोर्ड की गतिविधियों के लिए 147.21 करोड़ रुपये जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।

Coconut Development Board कृषि मंत्रालय के तहत काम करने वाला वैधानिक निकाय है। इसका फोकस उत्पादन बढ़ाने के साथ प्रसंस्करण, उत्पाद विविधीकरण और बाजार विकास पर भी है।

सरकार की नीति में कोपरा के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, लक्षित विकास योजनाएं और मूल्य श्रृंखला में कौशल विकास शामिल हैं।

उपलब्ध साक्ष्य क्या बताते हैं?

सरकारी बजट दस्तावेज़ यह पुष्टि करता है कि सरकार नारियल उत्पादन को हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर के जरिए बढ़ाना चाहती है। बजट में कहा गया है कि करीब 30 मिलियन लोग, जिनमें लगभग 10 मिलियन किसान शामिल हैं, नारियल से अपनी आजीविका जोड़ते हैं।

Coconut Development Board के आधिकारिक प्रकाशन भी बोर्ड के दायित्वों में उत्पादन, उत्पादकता, प्रसंस्करण, बाजार विकास और निर्यात से जुड़े कार्यक्रमों को शामिल करते हैं।

इसलिए मौजूदा नीति का दायरा केवल नारियल की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं दिखता। लक्ष्य पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है।

संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं?

भारत के नारियल निर्यात पोर्टफोलियो में अब पारंपरिक उत्पादों के साथ Virgin Coconut Oil, Coconut Milk और Activated Carbon जैसे मूल्यवर्धित उत्पाद भी शामिल हो रहे हैं।

इस बदलाव का सीधा असर किसानों और प्रसंस्करण उद्योग पर पड़ सकता है। यदि कच्चे नारियल के बजाय प्रोसेस्ड उत्पादों की मांग बढ़ती है, तो प्रति इकाई उत्पादन से अधिक आर्थिक मूल्य हासिल करने की गुंजाइश बनेगी।

हालांकि इसके लिए गुणवत्ता मानक, प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, कोल्ड चेन, ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक स्थिर पहुंच जरूरी होगी।

राजनीतिक और नीतिगत प्रभाव

कृषि नीति में नारियल को हाई-वैल्यू क्रॉप के रूप में देखना ग्रामीण आय बढ़ाने की व्यापक रणनीति से जुड़ा है। 2026-27 के बजट में Coconut Promotion Scheme इसी दिशा का प्रमुख नीतिगत कदम है।

सरकार का जोर उत्पादन, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर है। इसके साथ किसान सहायता और न्यूनतम समर्थन मूल्य व्यवस्था को भी जोड़ा गया है।

कोपरा उन अनिवार्य कृषि फसलों में शामिल है जिन्हें एमएसपी व्यवस्था के तहत कवर किया जाता है। इससे किसानों को बाजार कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान एक नीतिगत सुरक्षा मिलती है।

आर्थिक और सामाजिक असर

नारियल भारत के तटीय और दक्षिणी राज्यों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खेती के साथ इससे तेल, खाद्य उत्पाद, कोयर, चारकोल और अन्य प्रसंस्कृत उत्पादों का उद्योग जुड़ा है।

सरकारी सहायता का दूसरा पहलू रोजगार और उद्यमिता है। यदि मूल्यवर्धित उत्पादों का उत्पादन देश में बढ़ता है, तो किसानों के अलावा प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात क्षेत्र में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं।

लेकिन उत्पादन बढ़ाने के साथ जलवायु जोखिम, कीट एवं रोग प्रबंधन और बागानों की उत्पादकता बनाए रखना भी अहम चुनौती रहेगी।

अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय प्रभाव

वैश्विक उत्पादन में 31.24 प्रतिशत हिस्सेदारी भारत को नारियल बाजार में महत्वपूर्ण स्थान देती है। इसका अर्थ है कि घरेलू उत्पादन में बदलाव का अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है।

भारत के लिए अगला रणनीतिक लक्ष्य केवल उत्पादन में नेतृत्व बनाए रखना नहीं, बल्कि मूल्यवर्धित उत्पादों के वैश्विक बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाना होगा।

Coconut Development Board के आधिकारिक प्रकाशनों में भी उत्पाद विविधीकरण और बाजार प्रोत्साहन को सेक्टर विकास के प्रमुख हिस्सों के तौर पर रेखांकित किया गया है।

कौन से सवाल अभी अनुत्तरित हैं?

सबसे अहम सवाल यह है कि उत्पादन में वैश्विक नेतृत्व को किसानों की आय में कितनी तेजी से बदला जा सकेगा।

दूसरा सवाल उत्पादकता का है। अलग-अलग राज्यों के बीच उत्पादकता में अंतर को कम करने के लिए बेहतर पौध सामग्री, सिंचाई, बागान प्रबंधन और तकनीकी सहायता कितनी प्रभावी साबित होती है, यह महत्वपूर्ण रहेगा।

तीसरा मुद्दा निर्यात का है। मूल्यवर्धित उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और प्रतिस्पर्धी कीमतों को बनाए रखना भारतीय उद्योग के लिए चुनौती रहेगा।

आगे क्या होगा?

Coconut Promotion Scheme के साथ सरकार का रुख उत्पादन बढ़ाने और सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता मजबूत करने की ओर है। आने वाले वर्षों में नई खेती, पुराने बागानों का पुनरुद्धार, उत्पादकता सुधार और प्रोसेसिंग क्षमता पर जोर रहने की संभावना है।

भारत की मौजूदा बढ़त को बनाए रखने के लिए केवल उत्पादन आंकड़े पर्याप्त नहीं होंगे। किसानों को बेहतर बाजार, स्थिर कीमत, तकनीकी सहायता और मूल्यवर्धन से जोड़ना अधिक महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय निष्कर्ष

भारत का 31.24 प्रतिशत वैश्विक उत्पादन हिस्सा नारियल क्षेत्र में उसकी मजबूत स्थिति को दर्शाता है। 2.19 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र से 20,301 मिलियन से अधिक नारियल का उत्पादन इस सेक्टर के बड़े पैमाने को स्पष्ट करता है।

अब नीति की असली कसौटी यह होगी कि उत्पादन में मिली बढ़त किस हद तक किसानों की आमदनी, ग्रामीण रोजगार और निर्यात मूल्य में बदलती है। सरकारी योजनाओं, एमएसपी समर्थन और Coconut Promotion Scheme के बीच बेहतर तालमेल इस बदलाव की दिशा तय करेगा।

वीडियो देखें

ADVERTISEMENT
Asif Khan

Asif Khan

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर