मुजफ्फरनगर की रात्रि महापंचायत में भाकियू ने गन्ने का भाव 500 रुपये, एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्जमाफी, मुफ्त कृषि बिजली और खाद की उपलब्धता की मांग उठाई।
मुजफ्फरनगर में रात्रि महापंचायत, किसानों ने उठाए गन्ना मूल्य से लेकर एमएसपी तक के मुद्दे
मुजफ्फरनगर। राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में भारतीय किसान यूनियन की किसान मजदूर महापंचायत में बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ पहुंचे। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत और अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत की मौजूदगी में आयोजित इस पंचायत में गन्ने के मूल्य, एमएसपी, कृषि ऋण, बिजली, खाद, फसल बीमा और भूमि अधिग्रहण समेत कई मुद्दों पर संगठन की मांगें सामने रखी गईं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, यह भाकियू की पहली रात्रि महापंचायत थी।
गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग
महापंचायत में नए पेराई सत्र के लिए गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। भाकियू की ओर से चीनी मिलों पर किसानों के लंबित भुगतान को ब्याज सहित कराने की मांग भी रखी गई। गन्ने के मूल्य को लेकर राकेश टिकैत पहले भी 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल के बीच मूल्य घोषित करने की मांग उठा चुके हैं। सितंबर में उन्होंने कहा था कि नए पेराई सत्र से पहले गन्ने का मूल्य घोषित किया जाना चाहिए। महापंचायत में किसानों की ओर से यह मुद्दा भी उठाया गया कि उत्पादन लागत बढ़ने के बीच फसल का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।
एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग
महापंचायत में फसलों के लिए स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी की मांग रखी गई। संगठन ने सरकारी खरीद व्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने की बात कही।एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य वह घोषित मूल्य है जिस पर सरकार कुछ निर्धारित कृषि उपज की खरीद के लिए मूल्य तय करती है। हालांकि सभी फसलों की सरकारी खरीद एक समान स्तर पर नहीं होती। इसी वजह से एमएसपी को लेकर कानूनी गारंटी की मांग लंबे समय से किसान संगठनों की प्रमुख मांगों में शामिल रही है।
संपूर्ण कर्जमाफी और ब्याजमुक्त कृषि ऋण की मांग
पंचायत में किसानों और कृषि मजदूरों के लिए संपूर्ण कर्जमाफी की मांग भी रखी गई। इसके साथ ही किसानों को ब्याजमुक्त कृषि ऋण उपलब्ध कराने की मांग की गई। भाकियू की ओर से कृषि लागत और किसानों पर बढ़ते वित्तीय दबाव का मुद्दा उठाते हुए ऋण व्यवस्था में राहत देने की जरूरत बताई गई। संगठन ने कृषि क्षेत्र से जुड़े परिवारों के लिए आर्थिक दबाव कम करने की मांग सरकार के सामने रखी।
कृषि बिजली और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी मांग
बिजली को लेकर भी महापंचायत में कई मांगें सामने आईं। इनमें कृषि कार्य के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने तथा स्मार्ट मीटर और बिजली के निजीकरण को वापस लेने की मांग शामिल रही। इसके अलावा घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की मांग भी उठाई गई। महापंचायत में बिजली की अनियमित आपूर्ति, वोल्टेज और कृषि नलकूपों से संबंधित समस्याओं को भी किसानों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया।
डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता पर जोर
खेती के लिए जरूरी उर्वरकों की उपलब्धता का मुद्दा भी पंचायत में प्रमुखता से उठाया गया। भाकियू ने डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की। किसान संगठनों की ओर से समय पर खाद नहीं मिलने की स्थिति में खेती प्रभावित होने की बात कही जाती रही है। महापंचायत में खाद की उपलब्धता के साथ इसकी आपूर्ति व्यवस्था को सुचारु रखने की मांग रखी गई।
फसल बीमा और प्राकृतिक आपदा में मुआवजा
महापंचायत में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने और फसल बीमा व्यवस्था को प्रभावी बनाने की मांग भी रखी गई। बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि और अन्य प्राकृतिक कारणों से फसल को होने वाले नुकसान की स्थिति में किसानों को समय पर राहत उपलब्ध कराने की मांग संगठन की ओर से उठाई गई। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण के मामलों में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे से जुड़े प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने की बात कही गई। 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के पालन की मांग भी सामने रखी गई।
व्यापार समझौतों को लेकर भी चिंता
महापंचायत में अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के संभावित प्रभावों का मुद्दा भी उठाया गया। भाकियू की ओर से मांग की गई कि ऐसे व्यापार समझौतों से देश के कृषि और डेयरी क्षेत्र के किसानों के हित प्रभावित न हों। किसान संगठन का तर्क है कि कृषि क्षेत्र से जुड़े नीतिगत फैसलों में किसानों की आय, उत्पादन लागत और घरेलू बाजार को ध्यान में रखा जाना चाहिए। यह संगठन की ओर से रखा गया पक्ष है।
स्थानीय मुद्दों पर भी राकेश टिकैत ने बात रखी
महापंचायत में केवल कृषि से जुड़े मुद्दे ही नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े कुछ स्थानीय विषय भी उठाए गए। राकेश टिकैत ने सहारनपुर के मस्जिद प्रकरण, रामपुर यूनिवर्सिटी, अस्पतालों और सरकारी स्कूलों से जुड़े मुद्दों पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। इन विषयों पर उनके वक्तव्य राजनीतिक और नीतिगत आलोचना के रूप में सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों में भी महापंचायत के दौरान इन मुद्दों के उठाए जाने की पुष्टि हुई है।
किसानों से खर्च कम करने और जमीन बचाने की अपील
महापंचायत में किसानों से खेती से जुड़े खर्चों को नियंत्रित करने और अपनी जमीन को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया गया। राकेश टिकैत ने किसानों को संगठित होकर अपने मुद्दों को सामने रखने की बात कही। महापंचायत में कृषि लागत, फसल मूल्य और जमीन से जुड़े सवालों को किसान परिवारों की आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखा गया।
आगे लखनऊ में पंचायत का ऐलान
महापंचायत के दौरान 23 अक्टूबर को लखनऊ स्थित गन्ना भवन पर पंचायत आयोजित करने का ऐलान किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह घोषणा किसान संगठन की आगामी गतिविधियों से जुड़ी है।इससे पहले भाकियू की ओर से उत्तर प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर किसान पंचायतें आयोजित करने की बात भी कही गई थी। मुजफ्फरनगर की पंचायत में भी संगठन ने किसानों के मुद्दों को लेकर आगे की गतिविधियों का संकेत दिया।
16 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन
महापंचायत के दौरान किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को शामिल करते हुए प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री के नाम 16 सूत्रीय ज्ञापन दिए जाने की बात सामने आई। उपलब्ध रिपोर्टों में ज्ञापन के संबोधन और बिंदुओं की संख्या को लेकर अलग-अलग विवरण प्रकाशित हुए हैं, इसलिए इस संबंध में आधिकारिक ज्ञापन की मूल प्रति को अंतिम आधार माना जाना उचित होगा। ज्ञापन में गन्ने के मूल्य और बकाया भुगतान से लेकर एमएसपी, कृषि ऋण, बिजली, खाद, फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा और भूमि अधिग्रहण जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई।
क्या होगा आगे?
मुजफ्फरनगर की महापंचायत में उठी मांगों पर अब सरकार और संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। विशेष रूप से आगामी गन्ना पेराई सत्र से पहले गन्ने के मूल्य की घोषणा, लंबित भुगतान और किसानों की एमएसपी संबंधी मांग पर आगे की स्थिति पर किसानों की नजर रहेगी। महापंचायत ने एक बार फिर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कृषि से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक विमर्श में प्रमुखता से सामने रखा है। अब संगठन की आगामी पंचायतों और सरकार की ओर से इन मांगों पर उठाए जाने वाले कदमों से आगे की दिशा तय होगी।