मुजफ्फरनगर में संगठनों ने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और सहयोगियों पर कथित वित्तीय अनियमितताओं, फर्जी लेन-देन और टैक्स चोरी के आरोप लगाए। पुलिस से उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
📍 मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
🗓️ 18 सितंबर 2026
✍️ Wasi Siddqui
मुजफ्फरनगर में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और उसके कथित सहयोगियों के खिलाफ करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। हिंदू रक्षा दल और बजरंगी सेना के पदाधिकारियों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन दिया और पूरे मामले की निष्पक्ष तथा उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
संगठनों का दावा है कि कथित वित्तीय गड़बड़ी का दायरा शुरुआती तौर पर सामने आए ₹5 करोड़ से कहीं अधिक हो सकता है। हालांकि, कई सौ करोड़ रुपये के कथित घोटाले का दावा फिलहाल आरोप और आशंका के स्तर पर है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि जांच एजेंसियों की पड़ताल के बाद ही हो सकेगी।
हिंदू रक्षा दल के जिलाध्यक्ष शंकी शर्मा और बजरंगी सेना के अध्यक्ष सुमित बजरंगी ने पुलिस प्रशासन के समक्ष शिकायत रखी। पदाधिकारियों ने एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और उसके सहयोगियों पर कथित तौर पर फर्जी बिलिंग, संदिग्ध लेन-देन और टैक्स संबंधी अनियमितताओं में शामिल होने के आरोप लगाए।
ज्ञापन के जरिए पुलिस से पूरे वित्तीय नेटवर्क की जांच कराने की मांग की गई है। संगठनों का कहना है कि जांच केवल किसी एक कारोबारी या फर्म तक सीमित न रखी जाए, बल्कि संबंधित लेन-देन और उससे जुड़े लोगों तथा संस्थाओं की भी पड़ताल हो।
शिकायत में एस.एस. पब्लिकेशन, संगम प्रकाशन और हर्ष एंटरप्राइजेज समेत कुछ फर्मों के नाम लिए गए हैं। आरोप है कि इन संस्थाओं के जरिए फर्जी बिलिंग और कथित बोगस लेन-देन का नेटवर्क संचालित किया गया।
यह आरोप अभी पुलिस या किसी सक्षम वित्तीय जांच एजेंसी की जांच से प्रमाणित नहीं हुआ है। इसलिए इन फर्मों और उनसे जुड़े व्यक्तियों की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
बजरंगी सेना के अध्यक्ष सुमित बजरंगी के मुताबिक प्राथमिक स्तर पर करीब ₹5 करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी का मामला सामने आया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उपलब्ध जानकारी और कथित लेन-देन के व्यापक नेटवर्क की जांच होने पर रकम कई सौ करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
यह आंकड़ा शिकायतकर्ताओं के दावे पर आधारित है। फिलहाल ऐसी कोई स्वतंत्र आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं है, जिसके आधार पर कई सौ करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता को स्थापित तथ्य माना जाए।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कथित वित्तीय गतिविधियों का संबंध मुजफ्फरनगर के अलावा दिल्ली और देहरादून से भी हो सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित फर्जीवाड़े से जुड़ी रकम के जरिए विभिन्न स्थानों पर संपत्ति अर्जित की गई।
इन संपत्तियों और उनके स्रोत की जांच के लिए वित्तीय दस्तावेज, बैंक लेन-देन, कर रिकॉर्ड, संपत्ति दस्तावेज और संबंधित फर्मों के कारोबारी रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होगी।
संगठनों ने यह भी बताया कि मामले से संबंधित शिकायत गाजियाबाद में दर्ज कराई जा चुकी है। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री के आधार पर नहीं हो सकी है।
यदि विभिन्न जिलों में एक ही वित्तीय नेटवर्क से संबंधित शिकायतें मौजूद हैं, तो संबंधित एजेंसियों के बीच दस्तावेज और जांच संबंधी जानकारी का समन्वय मामले की वास्तविक तस्वीर सामने लाने में अहम हो सकता है।
ऐसे मामले में केवल आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। निष्पक्ष जांच के दौरान कथित फर्मों का पंजीकरण, जीएसटी रिकॉर्ड, आयकर विवरण, बैंकिंग लेन-देन, चालान, बिल, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड और वास्तविक कारोबारी गतिविधियों की जांच जरूरी होगी।
जांच एजेंसियां यदि वित्तीय अनियमितता की पुष्टि करती हैं, तो रकम के प्रवाह, लाभार्थियों और कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
हिंदू रक्षा दल और बजरंगी सेना ने पुलिस प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की है। उनका कहना है कि कथित वित्तीय गतिविधियों की व्यापक जांच के लिए अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय जरूरी है।
शिकायतकर्ताओं ने दोष सिद्ध होने की स्थिति में आरोपियों के खिलाफ कानून के मुताबिक कठोर कार्रवाई की मांग भी की है। हालांकि, किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम कार्रवाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर होगी।
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू आरोप और प्रमाण के बीच अंतर है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से संगठनों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके द्वारा पुलिस को दिए गए ज्ञापन पर आधारित है।
चार्टर्ड अकाउंटेंट या संबंधित फर्मों का पक्ष इस सामग्री में उपलब्ध नहीं है। निष्पक्ष रिपोर्टिंग के लिए उनका पक्ष सामने आना भी जरूरी है। पुलिस अथवा संबंधित वित्तीय एजेंसियों की आधिकारिक जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि कथित लेन-देन में कानून का उल्लंघन हुआ या नहीं।
यदि पुलिस शिकायत को जांच के लिए स्वीकार करती है, तो वित्तीय दस्तावेजों और संबंधित संस्थाओं के रिकॉर्ड की जांच अगले चरण का अहम हिस्सा होगी। मामले की प्रकृति के आधार पर अन्य सक्षम विभागों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
मुजफ्फरनगर में उठे इस मामले में अब निगाह पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर है। शिकायत में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और कथित वित्तीय नेटवर्क का वास्तविक दायरा कितना है, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
वित्तीय अपराध से जुड़े मामलों में शिकायत, आरोप, प्रारंभिक जांच और अदालत में दोष सिद्ध होना अलग-अलग चरण हैं। इसलिए इस मामले में सामने आए कई सौ करोड़ रुपये के दावे को फिलहाल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए, प्रमाणित घोटाले के रूप में नहीं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।