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मिट्टी की जांच क्यों जरूरी है? किसान कैसे करा सकते हैं मृदा परीक्षण, आइए जानते हैं

Neelam Saini • 2026-09-19 13:56:03
मिट्टी की जांच क्यों जरूरी है? किसान कैसे करा सकते हैं मृदा परीक्षण, आइए जानते हैं


मिट्टी की जांच क्यों जरूरी है? किसान कैसे करा सकते हैं मृदा परीक्षण, आइए जानते हैं


खेती में अच्छी पैदावार के लिए केवल बेहतर बीज, सिंचाई और मौसम ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि खेत की मिट्टी की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की वास्तविक स्थिति जाने बिना लगातार खाद और उर्वरकों का इस्तेमाल करने से किसान जरूरत से अधिक या कम मात्रा में पोषक तत्व दे सकते हैं। ऐसे में मृदा परीक्षण किसानों को खेत की मिट्टी के बारे में वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। 

मृदा परीक्षण के जरिए यह समझने में मदद मिलती है कि मिट्टी में किन पोषक तत्वों की उपलब्धता है और किन तत्वों की कमी हो सकती है। भारत सरकार की मृदा स्वास्थ्य कार्ड व्यवस्था में मिट्टी की स्थिति का आकलन करने के लिए बारह प्रमुख मानकों को शामिल किया गया है। इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम जैसे प्रमुख पोषक तत्वों के साथ सल्फर तथा जिंक, लोहा, तांबा, मैंगनीज और बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व शामिल हैं। इसके अलावा मिट्टी की अम्लीयता, विद्युत चालकता और जैविक कार्बन की स्थिति भी दर्ज की जाती है। 

मिट्टी की जांच क्यों है जरूरी?

हर खेत की मिट्टी एक जैसी नहीं होती। एक ही गांव या आसपास के खेतों में भी मिट्टी के गुण और पोषक तत्वों की उपलब्धता अलग हो सकती है। इसलिए केवल अनुमान के आधार पर खाद और उर्वरक की मात्रा तय करना हमेशा उचित नहीं माना जाता।

मृदा परीक्षण से किसान को अपनी जमीन की वर्तमान पोषक स्थिति की जानकारी मिल सकती है। इसके आधार पर फसल के लिए पोषक तत्वों के प्रबंधन और मिट्टी में सुधार से जुड़े उपाय तय करने में मदद मिलती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड भी मिट्टी की स्थिति के आधार पर उर्वरक तथा मिट्टी सुधारक सामग्री के इस्तेमाल संबंधी सलाह देने के उद्देश्य से बनाया गया है। 

मिट्टी में किन चीजों की जांच होती है?

मृदा स्वास्थ्य कार्ड व्यवस्था के तहत मिट्टी के बारह प्रमुख मानकों का परीक्षण किया जाता है। इनमें तीन प्रमुख पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटैशियम शामिल हैं। सल्फर को द्वितीयक पोषक तत्व के रूप में देखा जाता है।सूक्ष्म पोषक तत्वों में जिंक, लोहा, तांबा, मैंगनीज और बोरॉन शामिल हैं। इसके साथ मिट्टी की अम्लीयता, विद्युत चालकता और जैविक कार्बन की स्थिति भी देखी जाती है। इन परिणामों के आधार पर किसान को मिट्टी के पोषण प्रबंधन से संबंधित सलाह उपलब्ध कराई जा सकती है। 

किसान मिट्टी की जांच कैसे करा सकते हैं?

किसान अपने क्षेत्र के कृषि विभाग से संपर्क करके मृदा परीक्षण की सुविधा के बारे में जानकारी ले सकते हैं। सरकारी व्यवस्था में स्थायी मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं के अलावा चलती-फिरती, छोटी और गांव स्तर की प्रयोगशालाएं तथा पंजीकृत निजी प्रयोगशालाएं भी उपलब्ध हो सकती हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़े संस्थानों और कृषि विज्ञान केंद्रों में भी पंजीकृत प्रयोगशालाओं के माध्यम से परीक्षण की सुविधा हो सकती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड की आधिकारिक व्यवस्था में नजदीकी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रयोगशाला खोजने की सुविधा भी दी गई है। किसान अपने राज्य और क्षेत्र के अनुसार संबंधित कृषि विभाग या नजदीकी प्रयोगशाला से संपर्क कर सकते हैं। 

मिट्टी का नमूना कैसे लिया जाता है?

मिट्टी का नमूना सही तरीके से लेना बेहद जरूरी है, क्योंकि गलत तरीके से लिया गया नमूना परीक्षण के परिणाम को प्रभावित कर सकता है। आधिकारिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड व्यवस्था के अनुसार प्रशिक्षित व्यक्ति खेत से सामान्यतः पंद्रह से बीस सेंटीमीटर गहराई से मिट्टी का नमूना लेता है।नमूना लेते समय मिट्टी को अंग्रेजी के अक्षर वी जैसी आकृति में काटकर लिया जाता है। खेत के चारों कोनों और बीच के हिस्से से मिट्टी लेकर उसे अच्छी तरह मिलाया जाता है और उसमें से निर्धारित नमूना अलग किया जाता है। छायादार स्थानों को नमूना लेने के लिए सामान्यतः नहीं चुना जाता। इसके बाद नमूने को पहचान संबंधी जानकारी के साथ प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाता है। 

फसल खड़ी होने पर मिट्टी का नमूना लेना चाहिए?

आधिकारिक दिशा-निर्देशों में मिट्टी के नमूने सामान्यतः रबी और खरीफ फसल की कटाई के बाद या उस समय लिए जाने की बात कही गई है, जब खेत में खड़ी फसल न हो। हालांकि स्थानीय परिस्थितियों और परीक्षण की आवश्यकता के अनुसार किसान को अपने कृषि विभाग या संबंधित प्रयोगशाला से उचित समय की जानकारी लेनी चाहिए। 

मृदा स्वास्थ्य कार्ड में क्या जानकारी मिलती है?

मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसान की जमीन की मिट्टी की पोषक स्थिति का एक रिपोर्ट कार्ड है। इसमें मिट्टी के प्रमुख पोषक तत्वों और अन्य निर्धारित मानकों के परिणाम दर्ज किए जाते हैं। इसके साथ खेत की मिट्टी के अनुसार उर्वरक और मिट्टी सुधार से संबंधित सलाह भी दी जा सकती है। इसका उद्देश्य किसान को केवल खाद डालने की सामान्य जानकारी देना नहीं, बल्कि मिट्टी की वास्तविक स्थिति के आधार पर पोषक तत्वों के प्रबंधन में मदद करना है। इससे किसान अपनी खेती में पोषक तत्वों के इस्तेमाल को अधिक व्यवस्थित तरीके से समझ सकता है।

क्या हर साल मिट्टी की जांच और कार्ड जरूरी है?

मृदा स्वास्थ्य कार्ड व्यवस्था के आधिकारिक विवरण के अनुसार कार्ड एक तीन वर्षीय चक्र में उपलब्ध कराया जाता है और अगले चक्र में मिट्टी की स्थिति में हुए बदलाव को दर्ज किया जा सकता है। इसका अर्थ यह है कि कार्ड को हर फसल के लिए अलग-अलग जारी करने की व्यवस्था नहीं बताई गई है। हालांकि किसी किसान को विशेष फसल, मिट्टी की समस्या या स्थानीय कृषि सलाह के कारण अतिरिक्त परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है। ऐसे मामलों में संबंधित कृषि विशेषज्ञ या मृदा परीक्षण प्रयोगशाला से सलाह लेना उचित है।

किसान खाद का इस्तेमाल कैसे बेहतर कर सकते हैं?

मृदा परीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि किसान को खेत की मिट्टी की स्थिति के बारे में वैज्ञानिक जानकारी मिलती है। इसके आधार पर पोषक तत्वों के प्रबंधन की योजना बनाई जा सकती है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड में भी मिट्टी की स्थिति के आधार पर उर्वरक और मिट्टी सुधारक सामग्री की सलाह देने का प्रावधान है। किसानों को केवल पड़ोसी किसान के खेत में इस्तेमाल हो रही खाद की मात्रा देखकर अपने खेत में वही मात्रा डालने से बचना चाहिए। खेत की मिट्टी, फसल, सिंचाई और स्थानीय कृषि परिस्थितियां अलग हो सकती हैं। इसलिए जहां संभव हो, मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर पोषक तत्वों का प्रबंधन करना अधिक वैज्ञानिक तरीका है।

नमूना जांच के बाद क्या होता है?

मिट्टी का नमूना निर्धारित प्रयोगशाला में भेजे जाने के बाद उसके निर्धारित मानकों का परीक्षण किया जाता है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड व्यवस्था में सरकारी प्रयोगशालाओं के अलावा कृषि अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों और कुछ अन्य पंजीकृत प्रयोगशालाओं में भी परीक्षण की व्यवस्था हो सकती है। 

मृदा परीक्षण की प्रक्रिया में नमूने की पहचान और रिकॉर्ड रखने के लिए डिजिटल व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जाता है। आधिकारिक व्यवस्था में नमूने की पहचान के लिए क्यूआर कोड का प्रावधान भी दिया गया है। 

किसानों के लिए जरूरी सावधानी

मिट्टी का नमूना खेत के प्रतिनिधि हिस्से से लेना जरूरी है। असामान्य स्थानों से लिया गया नमूना पूरे खेत की सही स्थिति को नहीं दर्शा सकता। इसलिए किसान को स्वयं अनुमान से किसी एक जगह की मिट्टी लेकर परिणाम निकालने के बजाय प्रशिक्षित व्यक्ति या मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।

इसके अलावा मृदा परीक्षण की रिपोर्ट मिलने के बाद उसमें दी गई सलाह को समझना भी जरूरी है। यदि रिपोर्ट में किसी पोषक तत्व की कमी या अधिकता सामने आती है तो किसान स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर फसल और खेत की स्थिति के अनुसार आगे की योजना बना सकता है।

निष्कर्ष

मिट्टी केवल फसल उगाने का माध्यम नहीं, बल्कि खेती की बुनियाद है। खेत में कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं और उनकी स्थिति क्या है, इसकी जानकारी किसानों को खाद और उर्वरक प्रबंधन के फैसले अधिक वैज्ञानिक तरीके से लेने में मदद कर सकती है। मृदा परीक्षण और मृदा स्वास्थ्य कार्ड इसी दिशा में उपयोगी साधन हैं। 

किसान अपने क्षेत्र के कृषि विभाग, नजदीकी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर मिट्टी की जांच की उपलब्ध सुविधा और स्थानीय प्रक्रिया की जानकारी ले सकते हैं। आधिकारिक मृदा स्वास्थ्य कार्ड पोर्टल पर नजदीकी प्रयोगशाला की जानकारी हासिल करने की सुविधा भी उपलब्ध है। 


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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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