फेसबुक पर मां ने मांगी किडनी, अजनबी ने आगे बढ़कर दे दिया जिंदगी का अनमोल तोहफा
Harish Qureshi
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2026-09-17 15:42:30
किडनी फेल्योर से जूझ रही 41 वर्षीय करेन डेवी ने फेसबुक पर डोनर की अपील की। 60 वर्षीय गैरी समरफील्ड ने पोस्ट देखी और चिकित्सकीय जांच में अनुकूलता मिलने के बाद जुलाई में अपनी एक किडनी दान कर दी।
वेल्स | 17 सितंबर 2026
By Mohd Haris
फेसबुक की अपील बनी उम्मीद
वेल्स की 41 वर्षीय करेन डेवी के लिए किडनी डोनर की तलाश लंबे समय से बड़ी चुनौती बनी हुई थी। परिवार और दोस्तों में उपयुक्त डोनर नहीं मिलने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया का सहारा लिया।
करेन ने फेसबुक पर अपनी स्थिति साझा करते हुए मदद की अपील की। उनकी सबसे बड़ी चिंता अपने बच्चों को लेकर थी। इसी पोस्ट को 60 वर्षीय गैरी समरफील्ड ने देखा और उनकी मदद के लिए आगे आने का फैसला किया।
अजनबी ने क्यों लिया फैसला?
गैरी समरफील्ड ट्रेदेगर में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर काम करते हैं। बीबीसी के मुताबिक उन्होंने करेन की अपील संयोग से देखी।
गैरी ने बताया कि पोस्ट में करेन के बच्चों का जिक्र था। उन्हें लगा कि अगर ऐसी स्थिति उनकी अपनी बेटी के सामने होती, तो वह भी उम्मीद करते कि कोई अजनबी मदद के लिए आगे आए। इसी सोच ने उन्हें डोनर बनने की दिशा में कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।
पहले हुई मेडिकल जांच
किडनी दान करना केवल इच्छा जताने से संभव नहीं होता। गैरी को अनुकूलता और स्वास्थ्य से जुड़ी विस्तृत जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल और मनोवैज्ञानिक आकलन के बाद यह पुष्टि हुई कि वह करेन के लिए उपयुक्त डोनर हैं। इसके बाद ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
जुलाई में हुआ ट्रांसप्लांट
करेन को 15 जुलाई को कार्डिफ स्थित यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ऑफ वेल्स में किडनी ट्रांसप्लांट मिला। रिपोर्ट के मुताबिक ऑपरेशन करीब 6 घंटे चला।
करेन के लिए यह दूसरा बड़ा अंग प्रत्यारोपण था। करीब 10 साल पहले उनका हार्ट ट्रांसप्लांट भी हुआ था। रिपोर्ट में बताया गया है कि इसके बाद किडनी फेल्योर की समस्या सामने आई।
मां की सबसे बड़ी चिंता बच्चे
करेन चार बच्चों की मां हैं। अपनी फेसबुक अपील में उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि वह अपने बच्चों के साथ रहना चाहती हैं।
उन्होंने बताया कि उनके परिवार ने पहले भी कठिन दौर देखा है। हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद किडनी की समस्या उनके लिए एक और बड़ी चुनौती बन गई थी।
गैरी ने कहा, एक किडनी देने का फैसला क्यों किया
गैरी के मुताबिक उन्होंने करेन की कहानी पढ़ने के बाद सोचा कि अगर वह किसी जरूरतमंद की जगह होते तो शायद किसी अजनबी से इसी तरह की मदद की उम्मीद करते।
उन्होंने अपनी सोच को सरल शब्दों में रखा। उनके मुताबिक करेन को उनकी एक किडनी की जरूरत उनसे ज्यादा थी, क्योंकि उनके पास दो किडनी थीं और करेन को जीवन बचाने के लिए एक किडनी की जरूरत थी।
किडनी डोनेशन कितना महत्वपूर्ण है
किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत वाले मरीजों के लिए जीवित डोनर एक महत्वपूर्ण विकल्प हैं। उपलब्ध रिपोर्टिंग के मुताबिक ब्रिटेन में मृत डोनर से किडनी मिलने का औसत इंतजार करीब 2 से 3 साल हो सकता है, जबकि जीवित डोनर मिलने पर प्रक्रिया अपेक्षाकृत जल्दी आगे बढ़ सकती है।
हालांकि हर मरीज के लिए जीवित डोनर उपयुक्त नहीं होता। ब्लड ग्रुप, टिश्यू अनुकूलता, डोनर का स्वास्थ्य और अन्य चिकित्सकीय मानदंडों की जांच जरूरी होती है।
सोशल मीडिया ने जोड़ा दो अनजान लोगों को
करेन और गैरी एक-दूसरे को पहले नहीं जानते थे। एक फेसबुक पोस्ट ने दोनों को जोड़ा।
यह मामला सोशल मीडिया के एक अलग इस्तेमाल को भी सामने लाता है। जहां सोशल प्लेटफॉर्म पर गलत सूचना और धोखाधड़ी का खतरा रहता है, वहीं कुछ मामलों में लोगों की व्यक्तिगत अपील जरूरतमंद व्यक्ति तक मदद पहुंचाने का माध्यम भी बनती है।
इस मामले में डोनर बनने की प्रक्रिया सोशल मीडिया संदेश पर खत्म नहीं हुई। गैरी को औपचारिक मेडिकल और मनोवैज्ञानिक जांच से गुजरना पड़ा और अनुकूलता की पुष्टि के बाद ही ट्रांसप्लांट हुआ।
परिवार ने जताया आभार
करेन के परिवार ने गैरी के फैसले को बेहद अहम बताया। उनके मुताबिक इस दान ने करेन को अपने बच्चों के साथ जीवन आगे बढ़ाने का एक और मौका दिया।
गैरी ने भी इस फैसले को करेन के बच्चों से जोड़कर देखा। उनके लिए यह केवल किसी अनजान व्यक्ति की मदद नहीं थी, बल्कि एक परिवार को संकट से बाहर निकलने में मदद करने का फैसला था।
इस कहानी का बड़ा संदेश
करेन और गैरी की कहानी मानवीय मदद की एक मिसाल के रूप में सामने आई है, लेकिन इसे किडनी डोनेशन की सामान्य प्रक्रिया का विकल्प नहीं समझना चाहिए।
जीवित अंगदान एक गंभीर चिकित्सकीय निर्णय है। इसके लिए विशेषज्ञों की जांच, डोनर की स्वैच्छिक सहमति और ट्रांसप्लांट सेंटर की निर्धारित प्रक्रिया जरूरी होती है।
करेन के मामले में फेसबुक पोस्ट ने एक संभावित डोनर तक पहुंच बनाई। इसके बाद मेडिकल जांच और अनुकूलता की पुष्टि ने उस मदद को वास्तविक ट्रांसप्लांट में बदला। यही इस पूरी कहानी का सबसे अहम पहलू है।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।