India
यूपी में 1606 करोड़ की 65 मेडिकल परियोजनाएं, लखनऊ में 1010 बेड का अस्पताल
Mohammad Naved
•
2026-09-12 11:10:33
उत्तर प्रदेश में 1606.83 करोड़ रुपये की 65 मेडिकल परियोजनाओं से अस्पताल, ट्रॉमा सेंटर, नर्सिंग कॉलेज और दूसरी स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा। लखनऊ में 1010 बेड का अस्पताल प्रस्तावित है।
📍 लखनऊ, उत्तर प्रदेश
🗓️ 12 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
उत्तर प्रदेश में चिकित्सा सेवाओं के बुनियादी ढांचे को विस्तार देने की तैयारी तेज हुई है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत प्रदेश के अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानों में कुल 1606.83 करोड़ रुपये की 65 परियोजनाएं शिलान्यास और लोकार्पण के लिए तैयार बताई गई हैं। इनमें सबसे बड़ी परियोजना लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान से जुड़ी है, जहां 1010 बेड के अस्पताल भवन का प्रस्ताव है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अस्पतालों को “होटल जैसा” बनाने का दावा आधिकारिक परियोजना का तकनीकी विवरण नहीं है। उपलब्ध जानकारी में जोर नए अस्पताल भवन, मरीजों की क्षमता, ट्रॉमा और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं, मेडिकल शिक्षा तथा संस्थानों की बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर है।
1606 करोड़ रुपये की 65 परियोजनाएं
उपलब्ध विवरण के मुताबिक 65 परियोजनाओं में 44 परियोजनाएं शिलान्यास से संबंधित हैं। इनकी अनुमानित लागत करीब 1400.70 करोड़ रुपये बताई गई है। दूसरी तरफ 21 परियोजनाएं ऐसी हैं, जिनका निर्माण पूरा हो चुका है और उन्हें लोकार्पण के लिए तैयार बताया गया है। इनकी लागत करीब 206.13 करोड़ रुपये है।
इन परियोजनाओं का दायरा केवल अस्पताल की इमारतों तक सीमित नहीं है। मेडिकल कॉलेजों में छात्रावास, लेक्चर थिएटर, परीक्षा भवन, नर्सिंग कॉलेज, ट्रॉमा सेंटर, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुविधाएं, संक्रामक रोग अस्पताल और दूसरी संस्थागत सुविधाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।
लखनऊ में 1010 बेड का अस्पताल
इस पूरे पैकेज में सबसे ज्यादा ध्यान लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की परियोजना पर है। गोमतीनगर विस्तार स्थित नए परिसर में बेसमेंट के ऊपर 1010 बेड के अस्पताल भवन के निर्माण की योजना है। इसकी अनुमानित लागत करीब 855.04 करोड़ रुपये बताई गई है।
इस परियोजना को मई 2026 में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी मिलने की रिपोर्ट सामने आई थी। परियोजना से संबंधित विवरण में मल्टी स्पेशियलिटी इमरजेंसी सेंटर, नए ओपीडी ब्लॉक और टीचिंग ब्लॉक का भी उल्लेख किया गया था।
इसका सीधा मतलब यह है कि परियोजना केवल बेड की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। इसमें उपचार, आपात चिकित्सा और मेडिकल शिक्षा से जुड़े ढांचे को एक साथ विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
मरीजों की क्षमता बढ़ाना क्यों अहम है
उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी को देखते हुए सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव लगातार एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य प्रशासनिक मुद्दा रहा है। बड़े मेडिकल संस्थानों में गंभीर मरीजों के साथ प्रदेश के अलग-अलग जिलों से रेफर होकर आने वाले मरीज भी पहुंचते हैं।
ऐसे में नए बेड, आपात चिकित्सा इकाइयां और सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार अस्पतालों की क्षमता पर असर डाल सकता है। हालांकि केवल बेड बढ़ना पर्याप्त नहीं होता। डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, तकनीकी कर्मचारी, दवाओं की उपलब्धता और जांच सुविधाएं भी उतनी ही अहम होती हैं।
इसी वजह से इन परियोजनाओं का मूल्यांकन केवल निर्माण की लागत से नहीं, बल्कि इनके संचालन और मरीजों तक वास्तविक पहुंच के आधार पर करना होगा।
ट्रॉमा और संक्रामक रोग सेवाओं पर भी फोकस
परियोजनाओं में ट्रॉमा सेंटर और संक्रामक रोग अस्पताल जैसी सुविधाओं का विस्तार भी शामिल बताया गया है। कानपुर मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध चिकित्सालयों में करीब 49.40 करोड़ रुपये की लागत से नए संक्रामक रोग अस्पताल की तैयारी का उल्लेख सामने आया है।
स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐसी सुविधाओं की अपनी अहमियत है। गंभीर संक्रमण, महामारी जैसी परिस्थितियों और विशेष निगरानी वाले मरीजों के लिए अलग संस्थागत ढांचा सामान्य वार्डों पर दबाव कम करने में मदद करता है।
गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में करीब 43.68 करोड़ रुपये की लागत से बहुमंजिला रोगी सहायक आधुनिक कैंटीन का प्रस्ताव भी इन परियोजनाओं में शामिल बताया गया है। यह हिस्सा मरीजों के उपचार से सीधे जुड़ा नहीं है, लेकिन अस्पताल परिसर की सहायक सुविधाओं के विस्तार का संकेत देता है।
ट्रांसप्लांट सेवाओं का भी विस्तार
लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं से जुड़ी परियोजनाएं भी सूची में हैं। संस्थान की मुख्य चिकित्सा इमारत की छठी और सातवीं मंजिल पर किडनी, लिवर और बोन मैरो ट्रांसप्लांटेशन यूनिट स्थापित करने की परियोजना का उल्लेख किया गया है। इसकी लागत करीब 18.22 करोड़ रुपये बताई गई है।
अगर ऐसी सुविधाएं पूरी क्षमता के साथ संचालित होती हैं, तो गंभीर बीमारियों के मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार के लिए दूसरे राज्यों की ओर जाने की जरूरत कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक असर सेवा शुरू होने, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता और नियमित संचालन पर निर्भर करेगा।
मेडिकल कॉलेजों में छात्रों के लिए भी सुविधाएं
स्वास्थ्य ढांचे का यह विस्तार केवल मरीजों तक सीमित नहीं है। मेडिकल कॉलेजों में बढ़ी सीटों के अनुरूप छात्रावास, लेक्चर थिएटर और परीक्षा भवन जैसी सुविधाओं को भी परियोजनाओं में शामिल किया गया है।
मेरठ मेडिकल कॉलेज से संबंधित तैयार परियोजनाओं में छात्रावासों, परीक्षा भवन विस्तार और लेक्चर थिएटर जैसी सुविधाओं का उल्लेख है। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भी छात्रावास से जुड़ा निर्माण कार्य सूची में शामिल बताया गया है।
इसका मकसद मेडिकल शिक्षा के विस्तार के साथ संस्थानों की क्षमता को उसके अनुरूप विकसित करना है।
केवल नई इमारतें पर्याप्त नहीं
स्वास्थ्य क्षेत्र में किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की सफलता का पैमाना केवल भवन तैयार होना नहीं होता। अस्पताल शुरू होने के बाद उसमें पर्याप्त चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिकल कर्मचारी, दवाएं, जांच उपकरण और आपात सेवाएं उपलब्ध रहना जरूरी है।
इसी तरह नए बेड की घोषणा और वास्तविक बेड संचालन में भी अंतर हो सकता है। किसी अस्पताल की घोषित क्षमता तभी मरीजों को राहत देती है, जब वह क्षमता नियमित रूप से उपलब्ध हो।
इसलिए इन 65 परियोजनाओं की असली परीक्षा इनके निर्माण और लोकार्पण के बाद शुरू होगी।
स्वास्थ्य बजट से आगे की चुनौती
बड़ी परियोजनाओं के लिए पूंजीगत निवेश जरूरी है, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था में लगातार खर्च भी उतना ही महत्वपूर्ण है। नई इमारत के साथ बिजली, पानी, स्वच्छता, सीवरेज, उपकरणों का रखरखाव और मानव संसाधन पर नियमित खर्च होता है।
उपलब्ध परियोजना विवरण में जलापूर्ति, सीवरेज और दूसरी संस्थागत सुविधाओं के विकास का भी उल्लेख है। इससे संकेत मिलता है कि योजना में केवल मुख्य अस्पताल भवन के बजाय सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को भी जगह दी गई है।
फिर भी मरीजों के नजरिये से सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि इन सुविधाओं का इस्तेमाल कब से शुरू होता है और रोजमर्रा के इलाज में कितना सुधार दिखाई देता है।
उत्तर प्रदेश की मेडिकल व्यवस्था में बड़ा विस्तार
उत्तर प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानों का विस्तार पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य नीति का प्रमुख हिस्सा रहा है। सरकारी दस्तावेजों में भी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ाने और चिकित्सा शिक्षा क्षमता के विस्तार पर जोर दर्ज किया गया है।
अब 65 नई या पूरी हो चुकी परियोजनाओं के जरिए अस्पतालों के साथ उससे जुड़े शैक्षणिक और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की कोशिश सामने आई है।
लखनऊ में 1010 बेड की परियोजना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इसके साथ ट्रॉमा, संक्रामक रोग, नर्सिंग, छात्रावास और अन्य सुविधाओं का विस्तार प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को अधिक व्यापक बनाने की दिशा में कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
आगे क्या होगा
अब इन परियोजनाओं के निर्माण, समयसीमा और संचालन पर नजर रहेगी। जिन परियोजनाओं का शिलान्यास होना है, उनके निर्माण के बाद ही मरीजों को वास्तविक लाभ मिलेगा। वहीं लोकार्पण के लिए तैयार परियोजनाओं को सेवा में शामिल करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
खास तौर पर लखनऊ के 1010 बेड वाले अस्पताल को लेकर लोगों की निगाहें इसकी निर्माण प्रगति और भविष्य में शुरू होने वाली सेवाओं पर रहेंगी।
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार एक अहम सार्वजनिक मुद्दा है। बड़ी राशि और बड़ी परियोजनाएं निश्चित रूप से बुनियादी ढांचे को बढ़ाने की क्षमता रखती हैं, लेकिन अंतिम कसौटी मरीज को मिलने वाली सेवा होगी। अस्पताल में बेड उपलब्ध हो, इलाज समय पर मिले, विशेषज्ञ डॉक्टर और जरूरी जांच मौजूद हों और सामान्य नागरिक को इलाज के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े, तभी इस निवेश का वास्तविक असर जमीन पर दिखाई देगा।
Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।