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कश्मीर में NIA की ताबड़तोड़ छापेमारी, 10 ठिकाने जांच के दायरे में

Harish Qureshi • 2026-09-12 12:44:56
कश्मीर में NIA की ताबड़तोड़ छापेमारी, 10 ठिकाने जांच के दायरे में

NIA ने 12 सितंबर को जम्मू-कश्मीर में क्रॉस-बॉर्डर टेरर कॉन्सपिरेसी केस में 10 ठिकानों पर तलाशी ली। अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कथित नेटवर्क की जांच का हिस्सा है।


श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर | 12 सितंबर 2026

By Mohd Haris


जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने क्रॉस-बॉर्डर टेरर कॉन्सपिरेसी से जुड़े मामले में 10 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया है। अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कथित नेटवर्क और पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स से जुड़े संपर्कों की जांच का हिस्सा है।


तलाशी अभियान के दौरान कश्मीर के कई इलाकों में जांच टीमें पहुंचीं। अधिकारियों ने बताया कि कार्रवाई का मकसद मामले से जुड़े लोगों और संभावित नेटवर्क के बारे में अतिरिक्त सबूत जुटाना है।


10 ठिकानों पर तलाशी


NIA ने 10 स्थानों पर तलाशी की कार्रवाई की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इनमें कुपवाड़ा, कुलगाम, बांदीपोरा, बारामूला और सोपोर क्षेत्र शामिल हैं।


अधिकारियों ने बताया कि कई आवासीय परिसरों में सर्च ऑपरेशन चलाया गया। फिलहाल जांच एजेंसी ने बरामदगी या हिरासत में लिए गए लोगों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।


लश्कर से जुड़े मामले की जांच


यह कार्रवाई NIA के केस नंबर आरसी-02/2026/एनआईए/जेएमयू से संबंधित है। एजेंसी के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक मामले की शुरुआत ज़कूरा पुलिस स्टेशन क्षेत्र में एक व्यक्ति को रोककर तलाशी लेने के बाद हुई थी। उसके पास से 1 ग्रेनेड और 15 जिंदा कारतूस बरामद होने की बात दर्ज है।


NIA ने बाद में इस मामले को अपने स्तर पर दर्ज किया और जांच का दायरा बढ़ाया। एजेंसी का कहना है कि जांच में सीमा पार मौजूद कथित हैंडलर्स और स्थानीय सहयोगियों के बीच संबंधों की पड़ताल की जा रही है।


ओवरग्राउंड वर्कर्स की कथित भूमिका


जांच का एक प्रमुख पहलू कथित ओवरग्राउंड वर्कर्स नेटवर्क है। NIA के मुताबिक ऐसे स्थानीय सहयोगियों की कथित भूमिका संचार, ठिकाने उपलब्ध कराने, आवाजाही, लॉजिस्टिक सहायता और अन्य तरह की मदद से जुड़ी हो सकती है।


यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोप जांच का हिस्सा हैं। तलाशी या जांच के दायरे में होना अपने आप में किसी व्यक्ति के अपराधी होने का प्रमाण नहीं है। अंतिम जिम्मेदारी अदालत में उपलब्ध सबूतों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।


पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स पर फोकस


NIA इस मामले में पाकिस्तान स्थित कथित हैंडलर्स और जम्मू-कश्मीर में मौजूद स्थानीय संपर्कों के बीच संभावित संबंधों की भी जांच कर रही है। एजेंसी के मुताबिक कथित नेटवर्क का इस्तेमाल आतंकवादियों की आवाजाही, छिपने की जगह, संचार और अन्य लॉजिस्टिक मदद के लिए किया जा सकता था।


जांच एजेंसी के लिए अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे और उनकी भूमिका क्या थी।


डिजिटल और दस्तावेजी सबूत की तलाश


NIA की तलाशी का एक उद्देश्य दस्तावेजी, डिजिटल और अन्य सामग्री जुटाना भी है। एजेंसी इन सबूतों को पहले से उपलब्ध जांच सामग्री के साथ जोड़कर मामले की कड़ियों को स्थापित करने की कोशिश कर रही है।


ऐसे मामलों में डिजिटल संचार, वित्तीय लेनदेन और संपर्कों से जुड़े रिकॉर्ड जांच के महत्वपूर्ण हिस्से बनते हैं। हालांकि मौजूदा कार्रवाई में वास्तव में क्या बरामद हुआ, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।


मार्च की गिरफ्तारी से शुरू हुई थी जांच


NIA के आधिकारिक केस रिकॉर्ड के अनुसार मामले की एक अहम कड़ी 31 मार्च 2026 की कार्रवाई से जुड़ी है। ज़कूरा इलाके में जांच के दौरान एक मोटरसाइकिल सवार को रोका गया था। एजेंसी के रिकॉर्ड में उसके पास से 1 ग्रेनेड और 15 जिंदा कारतूस मिलने का उल्लेख है।


इसके बाद जांच का दायरा बढ़ा और कथित सीमा पार संपर्कों तथा स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल शुरू हुई।


जांच का दायरा बढ़ा


NIA ने अगस्त में भी जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में 10 स्थानों पर तलाशी ली थी। उस कार्रवाई में श्रीनगर, कुपवाड़ा, अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम के स्थान शामिल थे। एजेंसी ने इसे पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स और स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स से जुड़े क्रॉस-बॉर्डर टेरर कॉन्सपिरेसी केस की जांच बताया था।


सितंबर की ताजा कार्रवाई इस जांच के जारी रहने का संकेत देती है। हालांकि दोनों कार्रवाइयों में शामिल स्थानों का पूरा विवरण एक जैसा नहीं है, इसलिए उन्हें एक ही सर्च ऑपरेशन मानना उचित नहीं होगा।


सुरक्षा एजेंसियों के लिए क्या मायने


जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू केवल सक्रिय आतंकवादियों की पहचान नहीं है। सुरक्षा एजेंसियां उन कथित स्थानीय नेटवर्क की भी पड़ताल करती हैं जो ठिकाना, संचार या लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने में भूमिका निभा सकते हैं।


NIA की मौजूदा जांच इसी व्यापक सपोर्ट नेटवर्क को समझने की कोशिश का हिस्सा है। जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि कथित नेटवर्क कितना व्यापक था और सीमा पार मौजूद तत्वों के साथ उसके संपर्क किस स्तर तक थे।


आगे क्या होगा


ताजा छापेमारी के बाद बरामद सामग्री की जांच और संदिग्ध संपर्कों की पड़ताल आगे बढ़ सकती है। अगर जांच में पर्याप्त सबूत सामने आते हैं तो NIA आगे कानूनी कार्रवाई कर सकती है।


फिलहाल एजेंसी ने सभी तलाशी स्थलों से जुड़ी विस्तृत बरामदगी या संभावित गिरफ्तारियों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच अपडेट का इंतजार जरूरी है।


निष्कर्ष


जम्मू-कश्मीर में NIA की 10 ठिकानों पर कार्रवाई क्रॉस-बॉर्डर टेरर कॉन्सपिरेसी केस की जांच को आगे बढ़ाने वाला अहम कदम है। जांच एजेंसी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कथित स्थानीय सपोर्ट नेटवर्क और पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के बीच संभावित संपर्कों की पड़ताल कर रही है।


फिलहाल जांच जारी है और तलाशी से मिली सामग्री का आकलन किया जा रहा है। इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई जांच से सामने आने वाले सबूतों पर निर्भर करेगी।

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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