स्वतंत्रता दिवस से पहले रेलवे पर ISI की नजर, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
रेलवे को निशाना बनाने की नई रणनीति? ISI समर्थित नेटवर्क पर सुरक्षा अलर्ट
फर्जी धमकी से दहशत फैलाने की आशंका, रेलवे स्टेशनों पर बढ़ी निगरानी
स्वतंत्रता दिवस से पहले भारतीय रेलवे को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, खुफिया इनपुट में ISI समर्थित तत्वों द्वारा रेलवे नेटवर्क की निगरानी, संभावित हमले और फर्जी अलार्म के जरिए लोगों में दहशत फैलाने की रणनीति का उल्लेख है। दिल्ली में भी प्रमुख ट्रांजिट हब और रेलवे परिसरों के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई है।
15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह से ठीक पहले भारतीय रेलवे को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता बढ़ गई है। ताजा खुफिया इनपुट में रेलवे नेटवर्क को संभावित निशाना बनाने की कोशिशों को लेकर चेतावनी दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा अधिकारियों का आकलन है कि पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी ISI से जुड़े तत्व रेलवे से संबंधित निगरानी और जासूसी गतिविधियों पर फोकस कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे को निशाना बनाने की रणनीति का मकसद केवल वास्तविक हमला नहीं, बल्कि फर्जी धमकियों के जरिए भी बड़े पैमाने पर दहशत पैदा करना हो सकता है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि उपलब्ध रिपोर्टिंग में किसी नए रेलवे हमले की पुष्टि नहीं हुई है। मौजूदा मामला खुफिया इनपुट और संभावित खतरे के आकलन से जुड़ा है।
रिपोर्ट के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, ISI की गतिविधियों में सैन्य प्रतिष्ठानों के साथ रेलवे से संबंधित सूचनाओं पर भी फोकस बताया गया है।
सैन्य क्षेत्र में जुटाई जाने वाली जानकारी का संबंध सैनिकों की लॉजिस्टिक्स और आवाजाही से बताया गया है। रेलवे के मामले में सुरक्षा अधिकारियों का आकलन है कि जानकारी का इस्तेमाल संभावित आतंकी हमले की तैयारी के लिए किया जा सकता है।
लेकिन इस रणनीति का दूसरा पहलू ज्यादा मनोवैज्ञानिक बताया गया है। किसी रेलवे स्टेशन, ट्रेन या रेल नेटवर्क से जुड़ी फर्जी धमकी भी यात्रियों में भय पैदा कर सकती है और सुरक्षा बलों पर तत्काल दबाव बढ़ा सकती है।
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, हर मामले में वास्तविक हमला करना जरूरी नहीं है। एक फर्जी बम धमकी या संदिग्ध वस्तु की सूचना भी रेलवे संचालन को प्रभावित कर सकती है।
ऐसे मामलों में स्टेशन खाली कराने, ट्रेन रोकने, तलाशी अभियान चलाने और यात्रियों की आवाजाही नियंत्रित करने जैसी कार्रवाई करनी पड़ती है।
इसका सीधा असर रेलवे संचालन और यात्रियों की मानसिक स्थिति पर पड़ सकता है। रिपोर्ट में इसी तरह की “माइंड गेम” रणनीति की आशंका जताई गई है।
स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली में प्रमुख ट्रांजिट हब की सुरक्षा बढ़ाए जाने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर खतरे को देखते हुए दिल्ली के प्रमुख रेलवे हब और आसपास के इलाकों में बॉर्डर तथा एरियल सर्विलांस बढ़ाया गया है।
यह सुरक्षा व्यवस्था स्वतंत्रता दिवस के व्यापक सिक्योरिटी ग्रिड का हिस्सा है। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बस टर्मिनल और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थान इस अवधि में सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता में रहते हैं।
भारतीय रेलवे देश के सबसे बड़े सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क में शामिल है। रोजाना बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनों और स्टेशनों का इस्तेमाल करते हैं।
यही वजह है कि रेलवे को निशाना बनाने से संभावित नुकसान केवल किसी एक स्थान तक सीमित नहीं रहता। किसी बड़े स्टेशन या प्रमुख रेल मार्ग पर व्यवधान पैदा होने से यात्रियों, माल ढुलाई और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।
इसी कारण सुरक्षा एजेंसियां रेलवे नेटवर्क को महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर के तौर पर देखती हैं।
खुफिया एजेंसियों के लिए एक अहम चिंता यह है कि किसी संभावित हमले से पहले संदिग्ध नेटवर्क रेलवे की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी जुटाने की कोशिश कर सकते हैं।
इस तरह की निगरानी में सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को समझने की कोशिश शामिल हो सकती है। हालांकि उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में किसी विशिष्ट स्टेशन, रूट या सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों का विस्तृत खुलासा नहीं किया गया है।
सुरक्षा की दृष्टि से ऐसे संवेदनशील ऑपरेशनल विवरण सार्वजनिक करना भी उचित नहीं होगा।
15 अगस्त देश के सबसे बड़े राष्ट्रीय समारोहों में शामिल है। इस दौरान दिल्ली और अन्य प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य दिनों की तुलना में अधिक कड़ी रहती है।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती यह भी होती है कि बड़ी संख्या में लोग रेलवे, मेट्रो, बस और एयर ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करते हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली के प्रमुख ट्रांजिट हब पर अतिरिक्त सुरक्षा निगरानी की जा रही है।
इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू मनोवैज्ञानिक युद्ध है।
अगर किसी आतंकी या विदेशी खुफिया नेटवर्क को रेलवे में वास्तविक हमला किए बिना भी बड़े पैमाने पर डर पैदा करना हो, तो फर्जी अलार्म, अफवाह और संदिग्ध गतिविधियों की खबरें दबाव पैदा कर सकती हैं।
इससे सुरक्षा बलों को बार-बार संसाधन तैनात करने पड़ते हैं और यात्रियों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा हो सकती है।
रिपोर्ट में सुरक्षा अधिकारी ने इसी तरह की रणनीति का उल्लेख किया है।
रेलवे नेटवर्क का आकार सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। हजारों किलोमीटर लंबे नेटवर्क, बड़ी संख्या में स्टेशन और भारी यात्री दबाव के बीच हर गतिविधि की निगरानी करना आसान नहीं है।
इसी वजह से इंटेलिजेंस इनपुट, स्थानीय पुलिस, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण हो जाता है।
सुरक्षा व्यवस्था में तकनीकी निगरानी, सीसीटीवी, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र की भूमिका भी बढ़ जाती है।
स्वतंत्रता दिवस के आसपास रेलवे सुरक्षा बढ़ाने की परंपरा नई नहीं है। भारतीय रेलवे और RPF पहले भी राष्ट्रीय समारोहों से पहले विशेष सुरक्षा अभियान चलाते रहे हैं।
2019 में RPF ने स्वतंत्रता दिवस से पहले रेलवे परिसरों में लावारिस और संदिग्ध वाहनों की पहचान के लिए “ऑपरेशन नंबर प्लेट” चलाया था। इस अभियान में 466 रेलवे स्टेशनों को शामिल किया गया था।
इससे पता चलता है कि राष्ट्रीय समारोहों से पहले रेलवे सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी लंबे समय से सुरक्षा रणनीति का हिस्सा रही है।
नहीं। उपलब्ध रिपोर्टिंग में भारतीय रेलवे पर किसी नए बड़े आतंकी हमले की पुष्टि नहीं हुई है।
मौजूदा खबर खुफिया इनपुट और संभावित खतरे को लेकर है। सुरक्षा एजेंसियां संभावित निगरानी, हमले और फर्जी धमकियों के जोखिम को ध्यान में रखकर सतर्कता बढ़ा रही हैं।
इसलिए खबर को “हमला होने वाला है” के बजाय “संभावित खतरे को लेकर सुरक्षा अलर्ट” के रूप में पेश करना अधिक सटीक है।
रेलवे यात्रियों के लिए सबसे अहम संदेश यही है कि सुरक्षा जांच और अतिरिक्त निगरानी को असामान्य घटना का प्रमाण न माना जाए।
स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियां अक्सर स्टेशन, एयरपोर्ट और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर जांच बढ़ाती हैं।
अगर किसी यात्री को संदिग्ध वस्तु, लावारिस सामान या असामान्य गतिविधि दिखाई देती है, तो उसे खुद जांच करने के बजाय संबंधित सुरक्षा कर्मियों को सूचना देनी चाहिए।
आने वाले दिनों में रेलवे स्टेशनों और प्रमुख रेल मार्गों पर निगरानी जारी रहने की उम्मीद है।
दिल्ली समेत बड़े शहरों में सुरक्षा एजेंसियां संभावित खतरे से जुड़े इंटेलिजेंस इनपुट की समीक्षा करेंगी। किसी भी फर्जी धमकी या संदिग्ध सूचना को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, क्योंकि उसका उद्देश्य वास्तविक हमले से अलग होकर भी सार्वजनिक दहशत पैदा करना हो सकता है।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती सुरक्षा बढ़ाने और यात्रियों की सामान्य आवाजाही बनाए रखने के बीच संतुलन की भी है।
स्वतंत्रता दिवस से पहले भारतीय रेलवे को लेकर सामने आया सुरक्षा अलर्ट देश की महत्वपूर्ण परिवहन व्यवस्था की संवेदनशीलता को रेखांकित करता है।
रिपोर्ट में ISI समर्थित तत्वों पर रेलवे नेटवर्क की निगरानी और संभावित हमले की तैयारी का आरोप लगाया गया है। साथ ही फर्जी धमकियों के जरिए यात्रियों में दहशत पैदा करने की संभावित रणनीति का भी उल्लेख है।
दिल्ली में प्रमुख रेलवे हब के आसपास सुरक्षा और निगरानी बढ़ाए जाने की स्वतंत्र रिपोर्टिंग भी सामने आई है।
फिलहाल किसी नए रेलवे आतंकी हमले की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस खबर का सही नज़रिया संभावित खतरे, खुफिया इनपुट और सुरक्षा तैयारियों पर होना चाहिए, न कि किसी अपुष्ट हमले को तथ्य के रूप में पेश करना।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।