ब्रिक्स समिट के दौरान पेजेशकियान और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस की अहम मुलाकात हुई। पेजेशकियान ने कहा कि दोनों पक्षों ने अतीत पीछे छोड़कर भविष्य की ओर बढ़ने पर सहमति जताई।
नई दिल्ली | 14 सितंबर 2026
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क सामने आया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने 12 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की।
मुलाकात के बाद पेजेशकियान ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच “अच्छी बातचीत” हुई। उनके मुताबिक बातचीत का मकसद आपसी चिंता के मुद्दों पर चर्चा करना और अतीत को पीछे छोड़कर भविष्य की तरफ देखने का रास्ता तलाशना था। उन्होंने भविष्य को मिलकर बनाने की बात भी कही।
पेजेशकियान की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ईरान और UAE के रिश्ते हाल के महीनों में गंभीर तनाव से गुजरे हैं। ऐसे माहौल में दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच आमने-सामने बातचीत को क्षेत्रीय डिप्लोमेसी के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
पेजेशकियान ने कहा कि दोनों पक्षों ने अपने सामने मौजूद मसलों पर बातचीत की और भविष्य के निर्माण पर ध्यान देने की सहमति बनाई। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इस मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच सभी विवाद खत्म हो गए हैं।
अबू धाबी सरकार के आधिकारिक बयान के मुताबिक, शेख खालिद और पेजेशकियान ने कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की। दोनों पक्षों ने तनाव कम करने, डी-एस्केलेशन को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय स्थिरता मजबूत करने की कोशिशों के महत्व पर जोर दिया।
आधिकारिक बयान में शांति और विकास के अवसरों को आगे बढ़ाने की जरूरत का भी उल्लेख किया गया। इससे संकेत मिलता है कि बातचीत केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं थी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
यह मुलाकात ऐसे दौर में हुई है जब पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव ने क्षेत्रीय देशों के लिए सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियां बढ़ाई हैं। ईरान और खाड़ी देशों के रिश्तों पर इस संघर्ष का सीधा असर पड़ा है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और UAE के बीच यह युद्ध शुरू होने के बाद उच्चतम स्तर की मुलाकातों में से एक थी। दोनों देशों ने ब्रिक्स के संयुक्त बयान में पश्चिम एशिया में अधिकतम संयम बरतने और तनाव बढ़ाने वाली कार्रवाइयों से बचने की अपील का समर्थन भी किया।
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन ने ईरान और UAE को सीधे संवाद का एक अहम मंच दिया। दोनों देश क्षेत्रीय संघर्ष को लेकर अलग-अलग सुरक्षा चिंताओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन ब्रिक्स के बहुपक्षीय मंच ने बातचीत का अवसर उपलब्ध कराया।
विशेषज्ञों के लिए इस मुलाकात का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह दिखाती है कि गंभीर क्षेत्रीय तनाव के बावजूद कूटनीतिक चैनल पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
पेजेशकियान का बयान सकारात्मक संकेत जरूर देता है, लेकिन इसे ईरान और UAE के रिश्तों में पूर्ण सामान्यीकरण की घोषणा नहीं माना जा सकता।
दोनों देशों के बीच सुरक्षा, व्यापार, क्षेत्रीय संघर्ष और आपसी भरोसे से जुड़े कई जटिल मुद्दे मौजूद हैं। इसलिए असली परीक्षा आने वाले दिनों में होगी, जब यह देखा जाएगा कि मुलाकात के बाद व्यावहारिक स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
पेजेशकियान ने अपनी टिप्पणी में आर्थिक सहयोग के विस्तार की संभावनाओं की ओर भी संकेत किया। उन्होंने कहा कि आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए एक आशाजनक दृष्टिकोण उभर रहा है।
ईरान और UAE के बीच आर्थिक रिश्तों को मजबूत करना दोनों पक्षों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक वातावरण में स्थिरता इसके लिए अहम शर्त होगी।
ईरान और UAE के रिश्तों को समझने में होर्मुज़ की रणनीतिक अहमियत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा और व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
पेजेशकियान की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बातचीत में भी पश्चिम एशिया की स्थिति, होर्मुज़ और समुद्री व्यापार की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे सामने आए। भारत ने लगातार संवाद और डिप्लोमेसी के जरिए विवादों के समाधान पर जोर दिया है।
यह मुलाकात भारत की मेजबानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई। इसलिए इसका एक अहम पहलू यह भी है कि नई दिल्ली ने एक ऐसे मंच की मेजबानी की जहां पश्चिम एशिया के अलग-अलग पक्षों के बीच प्रत्यक्ष बातचीत का अवसर बना।
संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मुलाकात का स्वागत किया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने कहा कि संघर्ष से जुड़े पक्षों के लिए बातचीत करना महत्वपूर्ण है और भारत की भूमिका को ब्रिज-बिल्डर के तौर पर देखा जा सकता है।
पेजेशकियान का “अतीत को पीछे छोड़ने” वाला संदेश राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण है। लेकिन डिप्लोमेसी में बयान से ज्यादा महत्व उसके बाद होने वाली कार्रवाई का होता है।
अगर दोनों देश बातचीत को नियमित करते हैं, व्यापारिक संपर्क बढ़ाते हैं और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर संवाद कायम रखते हैं, तो यह मुलाकात वास्तविक कूटनीतिक बदलाव की शुरुआत बन सकती है।
इसके उलट अगर क्षेत्रीय सैन्य तनाव दोबारा बढ़ता है, तो इस बातचीत का असर सीमित भी रह सकता है।
अब नजर इस बात पर होगी कि तेहरान और अबू धाबी इस मुलाकात के बाद किस तरह के व्यावहारिक कदम उठाते हैं। तनाव कम करने की कोशिश, व्यापारिक रिश्तों में सुधार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर संवाद इसके प्रमुख संकेतक होंगे।
फिलहाल पेजेशकियान और शेख खालिद की मुलाकात ने यह संदेश जरूर दिया है कि पश्चिम एशिया के गंभीर संकट के बीच भी कूटनीतिक बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं।
नई दिल्ली में पेजेशकियान और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद की मुलाकात पश्चिम एशिया की मौजूदा जियोपॉलिटिक्स में एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम है। पेजेशकियान ने इसे सकारात्मक बातचीत बताते हुए कहा कि दोनों पक्ष अतीत को पीछे छोड़कर भविष्य की ओर बढ़ने पर सहमत हुए।
अब इस बयान की असली अहमियत आने वाले कदमों से तय होगी। अगर बातचीत लगातार जारी रहती है और तनाव कम करने के ठोस प्रयास सामने आते हैं, तो नई दिल्ली की यह मुलाकात ईरान-UAE रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत साबित हो सकती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।