दिल्ली-ग्वांगझोऊ सीधी उड़ान 6 साल बाद बहाल, 21 सितंबर से रोजाना सेवा
Mohammad Naved
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2026-09-12 11:20:44
दिल्ली-ग्वांगझोऊ सीधी उड़ान 21 सितंबर से फिर शुरू होगी। चाइना सदर्न एयरलाइंस की दैनिक सेवा भारत-चीन हवाई संपर्क को कोविड काल के बाद नए सिरे से मजबूत करेगी।
📍 नई दिल्ली 🗓️ 12 सितंबर 2026 ✍️ Mohd Naved
6 साल बाद फिर जुड़ेंगे दिल्ली और ग्वांगझोऊ
भारत और चीन के बीच हवाई संपर्क को लेकर एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। चाइना सदर्न एयरलाइंस ने दिल्ली और चीन के ग्वांगझोऊ के बीच सीधी यात्री उड़ानें फिर शुरू करने का ऐलान किया है। यह सेवा 21 सितंबर से दैनिक आधार पर संचालित होगी। एयरलाइन की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक दिल्ली-ग्वांगझोऊ मार्ग पर रोजाना उड़ान उपलब्ध होगी।
यह हवाई संपर्क करीब 6 साल से बंद था। कोविड-19 महामारी के दौरान दोनों देशों के बीच यात्री विमान सेवाओं पर व्यापक असर पड़ा था। इसके बाद भारत-चीन संबंधों में आए तनाव ने सामान्य हवाई संपर्क की बहाली को भी प्रभावित किया।
अब सीधी उड़ान की वापसी ऐसे समय हुई है, जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत यात्रा पर हैं और नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय संवाद भी इस समय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में है।
21 सितंबर से रोजाना उड़ान
चाइना सदर्न एयरलाइंस की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक 21 सितंबर से दिल्ली और ग्वांगझोऊ के बीच दैनिक उड़ानें संचालित होंगी। दिल्ली से ग्वांगझोऊ जाने वाली उड़ान संख्या सीजेड360 रात 8 बजकर 20 मिनट पर रवाना होगी और अगले दिन सुबह 4 बजकर 15 मिनट पर ग्वांगझोऊ पहुंचेगी।
ग्वांगझोऊ से दिल्ली आने वाली उड़ान संख्या सीजेड359 दोपहर 3 बजकर 35 मिनट पर रवाना होकर शाम 7 बजे दिल्ली पहुंचेगी। एयरलाइन ने इस मार्ग को अपनी नई बहाल की गई सेवाओं में शामिल किया है।
इससे यात्रियों को दोनों देशों के बीच सीधे आवागमन का एक अहम विकल्प फिर उपलब्ध होगा। खासतौर पर कारोबार, शिक्षा, पर्यटन और पारिवारिक यात्राओं से जुड़े यात्रियों के लिए सीधी उड़ान कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण है।
भारत-चीन संबंधों में सावधानी के साथ सुधार
दिल्ली-ग्वांगझोऊ उड़ान की बहाली को भारत और चीन के संबंधों में व्यापक बदलाव के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि इसे दोनों देशों के बीच सभी मतभेदों के खत्म होने का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत-चीन संबंधों में गंभीर तनाव आया था। सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ी और दोनों देशों के बीच राजनीतिक तथा आर्थिक रिश्तों पर भी इसका असर पड़ा।
इसके बाद कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत हुई। 2024 में पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध कम करने की दिशा में सहमति बनी। इसके बाद दोनों देशों ने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
बीजिंग और कोलकाता से भी हवाई संपर्क बहाल
दिल्ली-ग्वांगझोऊ मार्ग की बहाली अकेला घटनाक्रम नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दिल्ली और बीजिंग के बीच विमान सेवा अप्रैल में फिर शुरू हुई थी। कोलकाता और कुनमिंग के बीच भी 18 अप्रैल से हवाई संपर्क बहाल होने की जानकारी सामने आई थी।
इससे संकेत मिलता है कि महामारी और उसके बाद के राजनयिक तनाव के दौरान बाधित हुए नागरिक संपर्क को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जा रहा है।
फिर भी दोनों देशों के बीच सामान्य हवाई संपर्क पूरी तरह पुराने स्तर पर लौट आया है, ऐसा कहना अभी उचित नहीं होगा। प्रत्यक्ष उड़ानों की संख्या, वीजा व्यवस्था, कारोबारी संपर्क और निवेश संबंधी नीतियां अभी भी व्यापक द्विपक्षीय रिश्तों का हिस्सा हैं।
शी जिनपिंग की भारत यात्रा के बीच अहम घटनाक्रम
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है।
दोनों नेताओं के बीच बातचीत में सीमा संबंध, व्यापार, निवेश, बाजार पहुंच और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे अहम हो सकते हैं। भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार की कोशिशों के बावजूद कई रणनीतिक मतभेद अभी कायम हैं।
ऐसे माहौल में सीधी उड़ान सेवा की बहाली लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में व्यावहारिक कदम है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले महीनों में यात्रियों की मांग और दोनों देशों की नीतिगत स्थिति से स्पष्ट होगा।
कारोबार और यात्रियों के लिए क्या बदलेगा
सीधी उड़ान बहाल होने से दिल्ली और दक्षिण चीन के प्रमुख औद्योगिक एवं कारोबारी केंद्र ग्वांगझोऊ के बीच यात्रा आसान होगी। ग्वांगझोऊ चीन का प्रमुख कारोबारी और विनिर्माण केंद्र है।
सीधी कनेक्टिविटी से यात्रियों को दूसरे शहरों में विमान बदलने की जरूरत कम होगी। इससे यात्रा का समय और संचालन संबंधी जटिलताएं भी घट सकती हैं।
भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंध व्यापक हैं, हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन और बाजार पहुंच को लेकर भारत की चिंताएं बनी हुई हैं। रॉयटर्स के अनुसार चीन वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत रहा और दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों में सुधार के बावजूद कई अड़चनें अभी कायम हैं।
क्या यह संबंध सामान्य होने का संकेत है?
हवाई सेवा की बहाली को सकारात्मक घटनाक्रम जरूर माना जा सकता है, लेकिन इसे भारत-चीन संबंधों में पूर्ण सामान्य स्थिति की घोषणा के तौर पर देखना उचित नहीं होगा।
सीमा विवाद, सुरक्षा चिंताएं, निवेश पर नियामकीय निगरानी और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दे अभी भी दोनों देशों के रिश्तों में महत्वपूर्ण हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार दोनों देशों के बीच संबंधों में हाल के समय में स्थिरता आई है, लेकिन रणनीतिक अविश्वास पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
इसलिए दिल्ली-ग्वांगझोऊ उड़ान की वापसी को एक व्यावहारिक और सीमित लेकिन महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखना ज्यादा सटीक होगा।
आगे क्या होगा
अब निगाह इस बात पर होगी कि 21 सितंबर के बाद इस मार्ग पर यात्री मांग कैसी रहती है और दोनों देशों के बीच अन्य बाधित हवाई मार्गों को लेकर क्या फैसले होते हैं।
साथ ही, मोदी और शी के बीच होने वाली बातचीत से भारत-चीन संबंधों की आगे की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं। सीमा पर स्थिरता, व्यापार, निवेश और नागरिक संपर्क में प्रगति होने पर हवाई संपर्क के विस्तार की गुंजाइश बढ़ सकती है।
दिल्ली-ग्वांगझोऊ उड़ान की वापसी इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही को फिर से सामान्य करने की प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन वास्तविक रिश्तों में बदलाव का पैमाना केवल विमान सेवा नहीं, बल्कि सीमा, व्यापार और रणनीतिक संवाद पर होने वाली प्रगति तय करेगी।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।