अमित शाह ने शहज़ाद भट्टी नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित ISI समर्थित आतंकी सिंडिकेट बताया है। 12 अगस्त की कार्रवाई में 14 राज्यों से 253 लोग हिरासत में लिए गए। NIA पहले ही भट्टी को जालंधर, सिरसा और अंबाला के मामलों से जोड़ चुकी है। हालांकि ISI कनेक्शन पर पाकिस्तान ने आरोप खारिज किए हैं।
नई दिल्ली |20 अगस्त 2026 |शाह टाइम्स
By Mohd Haris
शहज़ाद भट्टी का नाम अब भारत की आतंकवाद-रोधी जांच के केंद्र में है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 17 अगस्त को कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने स्वतंत्रता दिवस से पहले पाकिस्तान स्थित और ISI समर्थित शहज़ाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ 14 राज्यों में समन्वित कार्रवाई की। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 12 अगस्त की कार्रवाई में 253 लोगों को हिरासत में लिया गया और नेटवर्क से जुड़े मामलों में 80 से ज्यादा FIR तथा 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां दर्ज हो चुकी हैं।
सरकार का दावा है कि इस नेटवर्क को ग्रेनेड, IED और पेट्रोल बम हमलों तथा टारगेटेड किलिंग से जुड़े मामलों में जोड़ा गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक नेटवर्क स्थानीय लोगों का इस्तेमाल पुलिस, डिफेंस और धार्मिक स्थलों की रेकी तथा CCTV लगाने जैसे कामों के लिए करता था।
यहां एक जरूरी कानूनी और पत्रकारिता संबंधी फर्क है। अमित शाह और सुरक्षा एजेंसियों के आरोपों को उसी रूप में पेश करना जरूरी है। किसी आरोपी या नेटवर्क के खिलाफ जांच और अदालत में अपराध सिद्ध होना दो अलग बातें हैं।
NIA की कार्रवाई केवल अगस्त 2026 के बड़े अभियान तक सीमित नहीं है। एजेंसी जून में पंजाब और हरियाणा के नौ जिलों में 18 ठिकानों पर तलाशी ले चुकी थी। यह कार्रवाई तीन अलग-अलग टेरर-गैंगस्टर मामलों में की गई थी, जिनमें पाकिस्तान स्थित शहज़ाद भट्टी का नाम सामने आया था।
NIA के मुताबिक इन मामलों में मार्च 2025 में पंजाब के जालंधर में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रोजर संधू के घर पर हुए ग्रेनेड हमले की जांच शामिल थी। अप्रैल 2026 में एजेंसी ने इस मामले में भट्टी को फरार आरोपी के तौर पर चार्जशीट किया था।
दूसरा मामला नवंबर 2025 में हरियाणा के सिरसा महिला पुलिस स्टेशन में हुए विस्फोट का है। NIA ने मई 2026 में इस मामले में नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, जिनमें शहज़ाद भट्टी और पाकिस्तान स्थित हैंडलर सोहेल अहमद उर्फ सोहेल बलोच शामिल थे।
तीसरा मामला जनवरी 2026 में अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन में हुए कार बम विस्फोट से जुड़ा है। NIA के मुताबिक इस मामले में गिरफ्तार एक आरोपी के भट्टी के संपर्क में होने की बात जांच में सामने आई। जुलाई में एजेंसी ने इस केस में भट्टी समेत आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट की जानकारी भी जारी की।
भारतीय जांच एजेंसियों के सामने जो तस्वीर बन रही है, उसमें सोशल मीडिया की भूमिका अहम दिखाई देती है। हालिया मीडिया जांचों के मुताबिक भट्टी ने सोशल मीडिया पर ऐसी छवि बनाई जिसमें वह गैंगस्टर के साथ-साथ अपने समर्थकों का मददगार और प्रभावशाली व्यक्ति दिखाई देता था। इस डिजिटल पहचान का इस्तेमाल युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए किए जाने का आरोप है।
राष्ट्रीय रिपोर्ट की डेटा जांच के मुताबिक भट्टी से जुड़े सोशल मीडिया नेटवर्क में पंजाबी गानों, बॉलीवुड डायलॉग और भारतीय सोशल मीडिया ट्रेंड्स का इस्तेमाल दिखाई देता है। रिपोर्ट के अनुसार उसका ऑनलाइन नैरेटिव खास तौर पर ऐसे युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश करता था जो आर्थिक या सामाजिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आते हैं।
यह पहलू सुरक्षा एजेंसियों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि पारंपरिक आतंकी भर्ती मॉडल में आम तौर पर संगठन, विचारधारा और प्रत्यक्ष संपर्क प्रमुख भूमिका निभाते थे। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस प्रक्रिया को अधिक विकेंद्रीकृत और कम दिखाई देने वाला बना दिया है।
हालांकि सोशल मीडिया पर मौजूद किसी अकाउंट या कंटेंट को अकेले आतंकवादी गतिविधि का सबूत नहीं माना जा सकता। वास्तविक कानूनी स्थिति के लिए जांच में जुटे डिजिटल डेटा, संचार रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और दूसरे साक्ष्यों की पुष्टि जरूरी है।
17 अगस्त को गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों ने स्वतंत्रता दिवस से पहले शहज़ाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई कर उसके मंसूबों को नाकाम किया। PIB की आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक 12 अगस्त को 14 राज्यों में कार्रवाई हुई और 253 लोगों को हिरासत में लिया गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों को हिरासत में लिया गया। राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में 8, उत्तराखंड में 5 और कर्नाटक, गुजरात तथा बिहार में 3-3 लोग हिरासत में लिए गए। तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में 2-2 लोगों को हिरासत में लिया गया। सरकार के मुताबिक कार्रवाई में IED, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री के निशान वाले ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले CCTV कैमरे बरामद हुए। इन बरामदगियों को सरकार ने नेटवर्क के सीमा पार संपर्क का संकेत बताया है। यहां भी शब्दों की सटीकता जरूरी है। 12 अगस्त की कार्रवाई में 253 लोगों को हिरासत में लेने की बात सरकारी विज्ञप्ति में है, जबकि नेटवर्क के खिलाफ अब तक 200 से ज्यादा गिरफ्तारियों और 80 से अधिक FIR का संचयी आंकड़ा अलग से दिया गया है। दोनों आंकड़ों को एक ही अर्थ में इस्तेमाल करना सही नहीं होगा।
भारतीय सरकार और सुरक्षा एजेंसियां शहज़ाद भट्टी नेटवर्क को ISI समर्थित बताती हैं। PIB की विज्ञप्ति में नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित और ISI समर्थित टेरर सिंडिकेट बताया गया है। लेकिन यह आरोप एकतरफा नहीं छोड़ा जा सकता। पाकिस्तान ने भट्टी नेटवर्क को ISI से जोड़ने के भारतीय आरोपों को खारिज किया है। इसके जवाब में भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत आतंकवाद से मुकाबले के लिए जरूरी कदम उठाता रहेगा।
इसलिए फिलहाल रिपोर्टिंग की सबसे सटीक भाषा यही है कि भारतीय सरकार और जांच एजेंसियां ISI कनेक्शन का आरोप लगा रही हैं, जबकि पाकिस्तान इसे खारिज करता है। इस दावे का अंतिम न्यायिक निर्धारण अभी बाकी है।
NIA की जांच में सामने आए तीन मामले इस नेटवर्क की कथित गतिविधियों की एक टाइमलाइन देते हैं।
मार्च 2025 में जालंधर में रोजर संधू के घर पर ग्रेनेड हमला हुआ। NIA ने बाद में शहज़ाद भट्टी को इस केस में आरोपी बनाया और अप्रैल 2026 में उसे फरार आरोपी के तौर पर चार्जशीट किया। नवंबर 2025 में सिरसा महिला पुलिस स्टेशन में विस्फोट हुआ। NIA के मुताबिक भट्टी की इस मामले में भी कथित भूमिका सामने आई और मई 2026 में नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई।
जनवरी 2026 में अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन के बाहर कार बम विस्फोट हुआ। जांच में एक गिरफ्तार आरोपी के भट्टी से संपर्क का दावा सामने आया और NIA ने जुलाई में इस केस में भट्टी को भी चार्जशीट किया। जून 2026 में NIA ने इन मामलों से जुड़े 18 ठिकानों पर छापे मारे। एजेंसी ने डिजिटल डिवाइस, दस्तावेज, संचार और वित्तीय गतिविधियों से जुड़ी सामग्री की जांच की बात कही।
सीमा पार से संचालित किसी भी कथित नेटवर्क के लिए भारत के भीतर मौजूद स्थानीय संपर्क महत्वपूर्ण होते हैं। सरकारी बयान के मुताबिक भट्टी नेटवर्क स्थानीय लोगों को रेकी और निगरानी जैसे कामों के लिए भुगतान करता था।
यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई केवल एक कथित हैंडलर तक सीमित नहीं है। जांच का दायरा स्थानीय सहयोगियों, डिजिटल कम्युनिकेशन, वित्तीय लेनदेन और संभावित लॉजिस्टिक सपोर्ट तक फैला हुआ है।
लेकिन यहां भी एक सावधानी जरूरी है। 253 लोगों को हिरासत में लिया जाना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि सभी लोग समान भूमिका में थे या सभी पर आतंकवादी गतिविधि का अपराध सिद्ध हो चुका है। हर आरोपी की भूमिका और उसके खिलाफ साक्ष्य अलग-अलग कानूनी जांच का विषय होगा।
शहज़ाद भट्टी के मामले में सोशल मीडिया को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की चिंता इसलिए बढ़ी है क्योंकि कथित नेटवर्किंग और भर्ती के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जांच का हिस्सा बन चुका है। राष्ट्रीय रिपोर्ट की हालिया डेटा रिपोर्ट ने भट्टी से जुड़े ऑनलाइन नेटवर्क की संरचना और उसकी सोशल मीडिया गतिविधियों का विश्लेषण किया है। ऐसे मामलों में सोशल मीडिया केवल प्रचार का माध्यम नहीं रहता। यह संपर्क बनाने, भरोसा कायम करने, छोटे काम सौंपने और फिर संपर्क को निजी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म तक ले जाने का माध्यम बन सकता है। यही वजह है कि सुरक्षा जांच में डिजिटल फॉरेंसिक की भूमिका बढ़ रही है। फोन, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट, वित्तीय रिकॉर्ड और लोकेशन डेटा किसी कथित नेटवर्क की संरचना समझने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
नहीं। NIA की शुरुआती जांच में पंजाब और हरियाणा के मामले प्रमुख रहे, लेकिन अगस्त की कार्रवाई का विस्तार 14 राज्यों तक हुआ। सबसे ज्यादा हिरासत उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब में हुई। इससे जांच का दायरा राष्ट्रीय स्तर का दिखाई देता है। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि 14 राज्यों में मौजूद सभी संदिग्धों की भूमिका एक जैसी थी या वे एक ही कमांड संरचना के तहत काम कर रहे थे। जांच एजेंसियों के लिए अब अगला चरण इन अलग-अलग मामलों और संदिग्धों के बीच वास्तविक कड़ियों की पुष्टि करना होगा।
इस पूरे मामले में दो अलग नैरेटिव सामने हैं। भारत की सुरक्षा एजेंसियां नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित और ISI समर्थित बताती हैं, जबकि पाकिस्तान ने ISI से जुड़े आरोपों को खारिज किया है। ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण चीज सार्वजनिक बयान नहीं, बल्कि अदालत में पेश होने वाला साक्ष्य होता है। डिजिटल रिकॉर्ड, हथियारों की बरामदगी, वित्तीय ट्रेल, कम्युनिकेशन रिकॉर्ड और आरोपियों के बयान तभी निर्णायक महत्व हासिल करेंगे जब वे कानूनी जांच में टिकें। इसलिए इस मामले को केवल भारत-पाकिस्तान आरोप-प्रत्यारोप के नजरिये से देखना अधूरा होगा। असली जांच नेटवर्क की कमांड संरचना, स्थानीय मॉड्यूल और सीमा पार संपर्क की वास्तविकता पर केंद्रित है।
NIA और दूसरी सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब तीन बड़े स्तर पर जांच का काम है। पहला, पहले से दर्ज आतंकी मामलों में भट्टी की वास्तविक भूमिका को साक्ष्यों के साथ स्थापित करना। दूसरा, अगस्त की कार्रवाई में हिरासत में लिए गए लोगों के बीच वास्तविक नेटवर्क संबंधों की पहचान करना।
तीसरा, कथित सीमा पार हैंडलिंग और स्थानीय ऑपरेटिव के बीच संचार तथा वित्तीय कड़ी की पुष्टि करना। NIA ने जून की कार्रवाई के समय भी कहा था कि जांच जारी है और एजेंसी इन मामलों में सभी लिंक तलाश रही है।
भारतीय जांच एजेंसियां शहज़ाद भट्टी को पाकिस्तान स्थित गैंगस्टर से आतंकी नेटवर्क संचालक के रूप में देखती हैं। NIA ने उसे कई टेरर-गैंगस्टर मामलों में आरोपी बनाया है।
अमित शाह ने 17 अगस्त को 14 राज्यों में हुई कार्रवाई के संदर्भ में शहज़ाद भट्टी नेटवर्क का नाम लिया। सरकार के मुताबिक 12 अगस्त को 253 लोगों को हिरासत में लिया गया और 80 से ज्यादा FIR तथा 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां नेटवर्क से जुड़े मामलों में दर्ज थीं।
NIA की जांच में जालंधर के रोजर संधू ग्रेनेड हमले, सिरसा महिला पुलिस स्टेशन विस्फोट और अंबाला के बलदेव नगर पुलिस स्टेशन कार बम विस्फोट का जिक्र है।
भारतीय सरकार और सुरक्षा एजेंसियां नेटवर्क को ISI समर्थित बताती हैं। पाकिस्तान ने इस आरोप को खारिज किया है। इसलिए इसे फिलहाल भारतीय एजेंसियों का आरोप और जांच का विषय कहना अधिक सटीक है।
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 12 अगस्त की कार्रवाई में 253 लोग हिरासत में लिए गए। इसके अलावा नेटवर्क के खिलाफ संचयी रूप से 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां और 80 से अधिक FIR दर्ज होने की बात कही गई है। हिरासत में लिए गए हर व्यक्ति की भूमिका और कानूनी स्थिति अलग से जांच का विषय है।
शहज़ाद भट्टी की कहानी फिलहाल किसी एक व्यक्ति की कहानी नहीं रह गई है। NIA के कई मामलों, अगस्त में 14 राज्यों की कार्रवाई और अमित शाह के बयान ने इसे सीमा पार आतंकवाद, स्थानीय अपराधी नेटवर्क और डिजिटल भर्ती के संभावित गठजोड़ के बड़े मामले में बदल दिया है।
जो बातें आधिकारिक रिकॉर्ड में स्पष्ट हैं, उनमें NIA की कई मामलों में भट्टी को आरोपी बनाने की कार्रवाई, 12 अगस्त को 14 राज्यों में 253 लोगों की हिरासत और 80 से अधिक FIR तथा 200 से ज्यादा गिरफ्तारियों का सरकारी आंकड़ा शामिल है।
जो बातें अभी जांच और कानूनी प्रक्रिया के दायरे में हैं, उनमें नेटवर्क की पूरी कमांड संरचना, प्रत्येक आरोपी की भूमिका और ISI के साथ कथित संबंध की अंतिम पुष्टि शामिल है।
इसीलिए इस मामले का सबसे अहम सवाल यह नहीं है कि शहज़ाद भट्टी का नाम कितनी बार सामने आया। असली सवाल यह है कि जांच एजेंसियां उसके कथित नेटवर्क की हर कड़ी को कितने ठोस साक्ष्यों के साथ अदालत के सामने रख पाती हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।