राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग हुई। शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि याचिका लंबे समय से सूचीबद्ध नहीं हुई। सीजेआई सूर्यकांत ने सभी पक्षों को समान बताते हुए उचित आवेदन की बात कही।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 09 सितंबर 2026
✍️Mohd Naved
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग का मुद्दा उठा। शिकायतकर्ता पक्ष ने अदालत के सामने कहा कि राहुल गांधी की ओर से दाखिल याचिका पिछले कई महीनों से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है।
इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के सामने सभी पक्ष समान हैं। अदालत ने जल्द सुनवाई के लिए निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन करने पर जोर दिया।
जल्द सुनवाई की मांग क्यों उठी
शिकायतकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने अदालत के सामने दलील रखी कि राहुल गांधी कोई विशेष श्रेणी के पक्षकार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की ओर से मजिस्ट्रेट अदालत के संज्ञान आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पिछले करीब 5 महीनों से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है।
शिकायतकर्ता पक्ष ने इसी आधार पर मामले की जल्द सुनवाई की मांग की।
अदालत ने क्या कहा
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले में स्पष्ट किया कि उसके सामने सभी पक्षों के साथ समान व्यवहार होता है।
अदालत ने शिकायतकर्ता पक्ष से कहा कि यदि वह मामले की जल्द सुनवाई चाहता है तो इसके लिए उचित आवेदन दाखिल किया जाना चाहिए। यानी अदालत ने प्राथमिकता देने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का सहारा लेने का रास्ता बताया।
मामला किससे जुड़ा है
यह आपराधिक मानहानि का मामला शिकायतकर्ता की ओर से दाखिल किया गया है। शिकायतकर्ता सीमा सड़क संगठन के पूर्व निदेशक हैं।
मामले में राहुल गांधी ने निचली अदालत की ओर से संज्ञान लिए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि इस याचिका की सुनवाई लंबे समय से सूचीबद्ध नहीं हुई है।
इस स्तर पर अदालत के सामने मुख्य मुद्दा मामले के गुण-दोष पर अंतिम फैसला देना नहीं, बल्कि जल्द सुनवाई की मांग और उसके लिए अपनाई जाने वाली न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा रहा।
बहस में वीवीआईपी का मुद्दा
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से राहुल गांधी को वीवीआईपी दर्जा दिए जाने की दलील से इनकार किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि राहुल गांधी कोई वीवीआईपी नहीं हैं।
इसके जवाब में पीठ की टिप्पणी का केंद्रीय संदेश न्यायिक बराबरी से जुड़ा रहा। अदालत ने साफ किया कि किसी व्यक्ति की राजनीतिक या सार्वजनिक हैसियत के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया में अलग व्यवहार नहीं किया जाता।
न्यायिक प्रक्रिया का महत्व
सुप्रीम कोर्ट में मामलों की सुनवाई के लिए सूचीकरण एक निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया के तहत होता है। किसी मामले की जल्द सुनवाई के लिए पक्षकार को अदालत के सामने उचित आवेदन रखना होता है।
इस मामले में भी पीठ ने इसी प्रक्रिया की ओर इशारा किया। अदालत की टिप्पणी का व्यापक अर्थ यह है कि जल्द सुनवाई की मांग को भी तय न्यायिक व्यवस्था के भीतर ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद राहुल गांधी की उन कथित टिप्पणियों से जुड़े मानहानि मामले से संबंधित है, जिन पर शिकायतकर्ता ने आपत्ति जताई थी। शिकायतकर्ता पूर्व सैन्य अधिकारी और सीमा सड़क संगठन के पूर्व निदेशक हैं।
मामले में निचली अदालत की कार्रवाई के खिलाफ राहुल गांधी ने न्यायिक राहत की मांग की है। इससे पहले इस प्रकरण में उच्च न्यायालय और निचली अदालत की कार्यवाही भी हो चुकी है।
अब आगे क्या होगा
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता पक्ष को जल्द सुनवाई के लिए उचित आवेदन दाखिल करने की दिशा दिखाई है। आगे मामले की सूचीबद्धता और आवेदन पर अदालत के निर्देश इस बात को तय करेंगे कि याचिका कब सुनवाई के लिए सामने आती है।
इस स्तर पर यह कहना उचित नहीं होगा कि अदालत ने राहुल गांधी के खिलाफ मामले के आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष दिया है। बुधवार की कार्यवाही मुख्य रूप से जल्द सुनवाई की मांग और प्रक्रिया से संबंधित रही।
बराबरी का संदेश क्यों अहम
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का अहम पहलू यह रहा कि न्यायिक प्रक्रिया में किसी राजनीतिक पद, सार्वजनिक पहचान या प्रभावशाली स्थिति के आधार पर अलग मानक नहीं होना चाहिए।
राहुल गांधी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं, लेकिन अदालत के सामने किसी भी पक्ष की सुनवाई निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही होती है। इस मामले में पीठ ने इसी सिद्धांत को दोहराते हुए शिकायतकर्ता को उचित आवेदन दाखिल करने की राह बताई।
मामले की अगली दिशा
अब निगाह इस बात पर रहेगी कि जल्द सुनवाई के लिए आवेदन कब दाखिल होता है और अदालत उस पर क्या आदेश देती है। इसके बाद राहुल गांधी की याचिका की सुनवाई की तारीख और मामले की आगे की न्यायिक कार्रवाई स्पष्ट होगी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का सबसे अहम संदेश यही है कि न्यायिक प्रक्रिया में सभी पक्षों के लिए समानता और निर्धारित प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।