उत्तर प्रदेश में पीआरडी स्वयंसेवकों के दैनिक ड्यूटी भत्ते को 500 से बढ़ाकर 600 रुपये करने की घोषणा हुई है। 31 हजार से अधिक स्वयंसेवकों और परिवारों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज मिलेगा। फैसला पीआरडी की बढ़ती जिम्मेदारियों और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की सरकारी पहल दर्शाता है।
स्थान: गोरखपुर, उत्तर प्रदेश
तारीख: 18 अगस्त 2026
बाय:Mohd Naved
उत्तर प्रदेश में प्रांतीय रक्षक दल यानी पीआरडी स्वयंसेवकों के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार ने दो अहम घोषणाएं की हैं। गोरखपुर में आयोजित पीआरडी जवानों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने दैनिक ड्यूटी भत्ते को 500 रुपये से बढ़ाकर 600 रुपये करने का ऐलान किया। साथ ही 31 हजार से अधिक स्वयंसेवकों और उनके परिवारों के लिए पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा शुरू करने की जानकारी दी गई है।
यह फैसला इसलिए अहम है क्योंकि पीआरडी स्वयंसेवक पुलिस और प्रशासन के साथ यातायात प्रबंधन, चुनाव, सरकारी आयोजनों और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों में तैनात किए जाते हैं। मुख्यमंत्री ने भविष्य में उनकी भूमिका को मेट्रो, एयरपोर्ट, सरकारी कार्यालयों और पैमाइश जैसी गतिविधियों तक विस्तार देने की बात भी कही है।
दिए गए समाचार के मुताबिक, सरकार ने पीआरडी स्वयंसेवकों की सेवाओं, अनुशासन और सेवाभाव को देखते हुए चिकित्सा सुविधा को कल्याणकारी कदम के तौर पर पेश किया है।
गोरखपुर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीआरडी स्वयंसेवकों के दैनिक ड्यूटी भत्ते में 100 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की। अब इसे 600 रुपये प्रतिदिन किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, 2019 तक पीआरडी स्वयंसेवकों को 250 रुपये प्रतिदिन मिलते थे। वर्ष 2019 में यह राशि 375 रुपये हुई, 2022 में 395 रुपये और 2025 में 500 रुपये की गई। अब इसे 600 रुपये करने का ऐलान किया गया है।
साथ ही 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को सरकारी तथा सूचीबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक के इलाज की कैशलेस सुविधा देने की बात कही गई है।
पीआरडी उत्तर प्रदेश की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था में सहायक भूमिका निभाने वाला स्वयंसेवी ढांचा है। इसके जवान नियमित पुलिस बल का विकल्प नहीं हैं, लेकिन विभिन्न मौकों पर प्रशासन को अतिरिक्त मानवबल उपलब्ध कराते हैं।
दिए गए समाचार के अनुसार, पीआरडी स्वयंसेवकों की तैनाती यातायात व्यवस्था, चुनाव ड्यूटी, सरकारी आयोजनों और राजस्व संबंधी कार्यों में पुलिस तथा प्रशासन की मदद के लिए होती रही है।
हाल के वर्षों में पीआरडी जवानों की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा भी चर्चा में रहा है। जून 2026 में प्रकाशित हिन्दुस्तान की एक रिपोर्ट में मेरठ के पीआरडी जवानों ने कम मानदेय, चिकित्सा खर्च, वर्दी, जूते, भविष्य की सामाजिक सुरक्षा और पदोन्नति जैसी समस्याएं उठाई थीं। उस रिपोर्ट के अनुसार, उस समय दैनिक मानदेय 500 रुपये था।
पीआरडी भत्ते में बढ़ोतरी एक क्रमिक प्रक्रिया रही है। उपलब्ध समाचार विवरण के मुताबिक, 2019 में 250 रुपये से 375 रुपये, 2022 में 395 रुपये और 2025 में 500 रुपये प्रतिदिन की दर हुई। अब प्रस्तावित नई दर 600 रुपये प्रतिदिन होगी।
इससे एक तरफ स्वयंसेवकों की दैनिक आय में सुधार होगा, दूसरी तरफ सरकार ने उनके लिए चिकित्सा सुरक्षा का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है।
यह बदलाव उस व्यापक प्रशासनिक नीति से भी जुड़ता है जिसमें राज्य सरकार सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े मानवबल के लिए बेहतर बुनियादी सुविधाओं पर जोर देने का दावा करती रही है। उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की वेबसाइट पर सरकार की विभिन्न सुरक्षा और प्रशासनिक पहलों से संबंधित आधिकारिक सूचनाएं उपलब्ध हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीआरडी स्वयंसेवकों की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश में विभिन्न आयोजनों को सफल बनाने, यातायात व्यवस्था संभालने, चुनाव ड्यूटी और प्रशासनिक कार्यों में सहयोग दिया है।
मुख्यमंत्री ने पीआरडी जवानों को भविष्य में मेट्रो और एयरपोर्ट सुरक्षा, सरकारी कार्यालयों तथा पैमाइश के दौरान सुरक्षा जैसी जिम्मेदारियों में इस्तेमाल करने की संभावना भी जताई।
सरकार की दलील है कि पीआरडी स्वयंसेवकों की जिम्मेदारियां बढ़ी हैं, इसलिए उनके लिए आर्थिक और चिकित्सा सुरक्षा में सुधार जरूरी है।
दूसरी तरफ, पीआरडी जवानों से जुड़ी पहले की रिपोर्टों में स्वयंसेवकों ने अधिक स्थायी सामाजिक सुरक्षा और होमगार्ड के समान सुविधाओं की मांग उठाई थी। मेरठ की रिपोर्ट में ईपीएफ, पेंशन, वर्दी और जूते जैसे मुद्दों का भी उल्लेख हुआ था।
उपलब्ध मूल समाचार में भत्ते की पिछली दरों और नई घोषणा का स्पष्ट क्रम दिया गया है।
सार्वजनिक रिपोर्टिंग से यह भी सामने आता है कि 2025 में पीआरडी स्वयंसेवकों के मानदेय में बढ़ोतरी का प्रावधान किया गया था। उस समय सरकार की बजट संबंधी जानकारी में पीआरडी स्वयंसेवकों के मानदेय में वृद्धि और अतिरिक्त रोजगार दिवस उपलब्ध कराने की बात सामने आई थी।
हालांकि, 18 अगस्त 2026 की इस घोषणा के लिए विस्तृत शासनादेश, पात्रता नियम, कैशलेस योजना में शामिल अस्पतालों की सूची और नई दर के प्रभावी होने की सटीक तारीख उपलब्ध सामग्री में स्पष्ट नहीं है। इसलिए इन बिंदुओं पर अंतिम जानकारी आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही मानी जानी चाहिए।
600 रुपये दैनिक भत्ता होने से पीआरडी स्वयंसेवकों की ड्यूटी के दिनों पर मिलने वाली आय बढ़ेगी। यदि पूरे महीने लगातार ड्यूटी मिले, तो 500 रुपये की तुलना में 100 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोतरी सीधे आर्थिक राहत देगी।
इससे भी महत्वपूर्ण पहल चिकित्सा सुरक्षा है। पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज का प्रावधान परिवारों पर अचानक आने वाले बड़े चिकित्सा खर्च का जोखिम कम कर सकता है।
लेकिन योजना का वास्तविक असर इसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या, इलाज में शामिल बीमारियां, पात्र परिवार के सदस्यों की परिभाषा, कैशलेस प्रक्रिया और दावों के निपटारे की व्यवस्था इसकी उपयोगिता तय करेगी।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में पीआरडी कल्याण के साथ पिछली सरकारों की कार्यशैली पर भी तीखा राजनीतिक हमला किया। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर भ्रष्टाचार, माफिया संरक्षण और विकास की अनदेखी के आरोप लगाए।
ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं। उपलब्ध सामग्री में इन आरोपों के समर्थन में कोई स्वतंत्र दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया है, इसलिए इन्हें सरकारी पक्ष के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
नीतिगत स्तर पर इस घोषणा का बड़ा पहलू पीआरडी की भूमिका का विस्तार है। यदि स्वयंसेवकों को मेट्रो, एयरपोर्ट और सरकारी संस्थानों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील कार्य दिए जाते हैं, तो प्रशिक्षण, जवाबदेही, बीमा, उपकरण और सेवा शर्तों पर भी स्पष्ट नीति की जरूरत होगी।
पीआरडी स्वयंसेवकों की बड़ी चुनौती नियमित आय और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी रही है। 2026 की मेरठ रिपोर्ट में जवानों ने परिवार चलाने, बच्चों की पढ़ाई और इलाज के खर्च को लेकर अपनी कठिनाइयां बताई थीं।
नई भत्ता दर इस समस्या का पूरा समाधान नहीं है, लेकिन दैनिक आय में सीधी बढ़ोतरी है। कैशलेस चिकित्सा सुविधा इसके साथ जुड़कर परिवारों के स्वास्थ्य खर्च को कम करने में मदद कर सकती है।
फिर भी स्थायी सामाजिक सुरक्षा, सेवानिवृत्ति लाभ और ड्यूटी के दौरान दुर्घटना या मृत्यु की स्थिति में सहायता जैसे मुद्दे अलग नीति मांगते हैं। उपलब्ध सामग्री में इन मुद्दों के समाधान की घोषणा नहीं की गई है।
इस फैसले का सीधा अंतरराष्ट्रीय असर नहीं है। इसका महत्व मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक मानवबल और स्वयंसेवी सुरक्षा ढांचे से जुड़ा है।
क्षेत्रीय स्तर पर इसका असर उन जिलों में ज्यादा दिखाई देगा जहां पीआरडी जवानों की नियमित तैनाती यातायात, चुनाव, सरकारी कार्यक्रमों और प्रशासनिक कार्यों में होती है।
सबसे अहम सवाल यह है कि 600 रुपये का नया दैनिक भत्ता किस तारीख से लागू होगा। इसके अलावा यह स्पष्ट होना बाकी है कि कैशलेस चिकित्सा योजना में परिवार के किन सदस्यों को शामिल किया गया है।
सूचीबद्ध अस्पतालों की पूरी सूची, पांच लाख रुपये की सीमा प्रति व्यक्ति है या परिवार के आधार पर, किन उपचारों को कवर किया जाएगा और आपात स्थिति में कैशलेस प्रक्रिया कैसे चलेगी, इन बिंदुओं पर विस्तृत दिशा-निर्देश जरूरी होंगे।
इसी तरह पीआरडी की नई प्रस्तावित जिम्मेदारियों के लिए प्रशिक्षण और जवाबदेही का ढांचा भी स्पष्ट होना चाहिए।
अब अगला अहम चरण शासनादेश और योजना के विस्तृत दिशा-निर्देशों का होगा। भत्ते की नई दर और चिकित्सा योजना के संचालन से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया स्पष्ट होने के बाद ही इसके वास्तविक दायरे का आकलन किया जा सकेगा।
पीआरडी के लिए यह घोषणा आर्थिक राहत के साथ संस्थागत जिम्मेदारियों के विस्तार का संकेत भी देती है। अधिक जिम्मेदारी के साथ प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण और सेवा-संबंधी अधिकारों की स्पष्टता भी जरूरी होगी।
पीआरडी स्वयंसेवकों के दैनिक ड्यूटी भत्ते को 500 से 600 रुपये करना और 31 हजार से अधिक स्वयंसेवकों तथा उनके परिवारों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज देना सरकार की ओर से महत्वपूर्ण कल्याणकारी घोषणा है।
इस फैसले की असली कसौटी क्रियान्वयन होगा। यदि चिकित्सा सुविधा आसानी से उपलब्ध होती है और नई भत्ता दर समय पर लागू होती है, तो इससे पीआरडी परिवारों को सीधा फायदा मिलेगा। साथ ही बढ़ती जिम्मेदारियों के अनुरूप प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा और सेवा शर्तों को मजबूत करना इस व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।