सूडान के कोरडोफान में जंग, 2 लाख से ज्यादा विस्थापित
कोरडोफान में लड़ाई तेज, 2 लाख लोगों ने छोड़े घर
सूडान में विस्थापन संकट गहराया, कोरडोफान सबसे ज्यादा प्रभावित
सूडान के कोरडोफान क्षेत्र में 2025 के आखिर से तेज होती लड़ाई के कारण 2 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। नॉर्थ कोरडोफान के कई गांवों से हजारों लोग हाल में भागे हैं। ड्रोन हमलों ने बिजली, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और संचार व्यवस्था को प्रभावित किया है। बाढ़ ने मानवीय संकट और बढ़ा दिया है।
सूडान के कोरडोफान क्षेत्र में तेज होती लड़ाई ने मानवीय संकट को और गंभीर कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन, आईओएम, के मुताबिक 2025 के आखिर से कोरडोफान क्षेत्र में 2 लाख से ज्यादा लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं।
कोरडोफान में नॉर्थ, साउथ और वेस्ट कोरडोफान शामिल हैं। यहां सूडानी सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्सेज, आरएसएफ, के बीच संघर्ष तेज हुआ है। इसके साथ ड्रोन हमलों और जरूरी बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ाई हैं।
आईओएम के अनुसार, कोरडोफान क्षेत्र में 2025 के आखिर से 2 लाख से ज्यादा लोग नए सिरे से विस्थापित हुए हैं। अकेले नॉर्थ कोरडोफान के शेकान इलाके में पिछले आठ महीनों के दौरान विस्थापन में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह आंकड़ा सूडान के पहले से मौजूद विस्थापन संकट में एक और बड़ी पेशरफ़्त को दिखाता है। युद्ध के कारण देशभर में पहले ही करोड़ों लोग अपने घरों से दूर हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक सूडान में मानवीय सहायता की जरूरत भी बेहद व्यापक है।
नॉर्थ कोरडोफान में हालात तेजी से बिगड़े हैं। आईओएम की फील्ड मॉनिटरिंग टीमों के मुताबिक 16 से 18 अगस्त के बीच शेकान इलाके के उम्म सुमैमा और अबू हराज़ गांवों से करीब 11,000 लोग सुरक्षा हालात खराब होने के कारण विस्थापित हुए। विस्थापित परिवार शेकान इलाके के दूसरे हिस्सों में चले गए हैं। आईओएम के मुताबिक वहां भी हालात तनावपूर्ण और अस्थिर बने हुए हैं। इससे स्थानीय समुदायों और पहले से विस्थापित आबादी पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इससे पहले भी शेकान इलाके के तीन गांवों से करीब 4,250 लोग दो दिनों के दौरान सुरक्षा बिगड़ने और संघर्ष के कारण भागे थे। लगातार हो रहे नए विस्थापन से साफ है कि आबादी को स्थायी सुरक्षा और राहत की जरूरत बनी हुई है।
नॉर्थ कोरडोफान की राजधानी एल ओबेद भी संघर्ष के असर से जूझ रही है। आईओएम के अनुसार शहर के मुख्य बिजली ट्रांसफॉर्मर पर बार-बार हुए ड्रोन हमलों और लड़ाई के कारण लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। बिजली संकट का सीधा असर पानी की पंपिंग, अस्पतालों और टेलीकम्युनिकेशन सेवाओं पर पड़ा है। यानी लड़ाई का असर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की बुनियादी सेवाओं की उपलब्धता भी प्रभावित हो रही है। एल ओबेद पहले से ही बड़ी संख्या में विस्थापित लोगों को शरण दे रहा है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध से पहले शहर की आबादी करीब 7.5 लाख थी, जबकि स्थानीय अधिकारियों के अनुमान में अब यह संख्या करीब 34 लाख तक पहुंच गई है।
कोरडोफान में जारी लड़ाई सूडान के व्यापक गृहयुद्ध का हिस्सा है। सेना और आरएसएफ के बीच युद्ध अप्रैल 2023 में शुरू हुआ था और अब तक देश के कई हिस्सों को प्रभावित कर चुका है। कोरडोफान की रणनीतिक अहमियत भी है। क्षेत्र में सड़क संपर्क और दूसरे इलाकों तक पहुंच के रास्ते मौजूद हैं, इसलिए यहां नियंत्रण को लेकर संघर्ष का असर सैन्य गतिविधियों के साथ मानवीय आवाजाही पर भी पड़ता है।
हाल के महीनों में ड्रोन का इस्तेमाल भी बढ़ा है। नॉर्थ कोरडोफान में सेना और आरएसएफ से जुड़े सैन्य ठिकानों तथा आवाजाही के रास्तों के आसपास ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं। इससे नागरिक इलाकों और जरूरी बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।
कोरडोफान का मानवीय संकट केवल सैन्य संघर्ष से नहीं बढ़ रहा। पड़ोसी नॉर्थ दारफुर में मौसमी बाढ़ ने भी विस्थापन और राहत व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाला है। आईओएम के मुताबिक ताविला इलाके में भारी बारिश से पिछले सप्ताह करीब 1,350 घर क्षतिग्रस्त या तबाह हुए और 1,000 से ज्यादा परिवार विस्थापित हुए। इस स्थिति ने राहत एजेंसियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ संघर्ष प्रभावित इलाकों तक पहुंच मुश्किल है, दूसरी तरफ बाढ़ ने लोगों के रहने और राहत सामग्री पहुंचाने की जरूरत बढ़ा दी है। आईओएम ने चेताया है कि संघर्ष, बुनियादी ढांचे को नुकसान और बाढ़ का संयुक्त असर परिवारों पर गंभीर दबाव डाल रहा है। यह स्थिति मानवीय सहायता के लिए अतिरिक्त संसाधनों और सुरक्षित पहुंच की जरूरत को रेखांकित करती है।
सूडान में मानवीय राहत अभियान पहले से कठिन हालात में चल रहे हैं। लड़ाई के कारण कई इलाकों में आवाजाही बाधित है और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। आईओएम ने वैश्विक सप्लाई चेन में देरी, खासकर रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से जुड़े परिवहन दबावों को भी राहत पहुंचाने की चुनौती से जोड़ा है। एल ओबेद में बिजली की समस्या इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। बिजली की कमी से पानी की पंपिंग और स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं, जिससे विस्थापित परिवारों की स्थिति और नाज़ुक हो जाती है। ऐसे हालात में राहत एजेंसियों के लिए केवल भोजन और आश्रय उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं होता। पानी, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, संचार और सुरक्षित आवाजाही जैसी बुनियादी जरूरतों को भी एक साथ पूरा करना पड़ता है।
कोरडोफान की स्थिति सूडान के व्यापक मानवीय संकट से अलग नहीं है। अल जज़ीरा ने संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के हवाले से बताया कि अप्रैल 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद अनुमानित 59,000 लोग मारे गए हैं और करीब 86 लाख लोग देश के भीतर विस्थापित हुए हैं। 42 लाख से ज्यादा लोग पड़ोसी देशों में जा चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार करीब 3.37 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत है। ये आंकड़े बताते हैं कि कोरडोफान में नया विस्थापन पहले से चल रहे एक बड़े राष्ट्रीय संकट में जुड़ रहा है। अनादोलु एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, व्यापक संघर्ष के कारण सूडान में करीब 1.3 करोड़ लोग विस्थापित हो चुके हैं। अलग-अलग समय और परिभाषाओं के आधार पर विस्थापन के आंकड़ों में अंतर दिखता है, इसलिए स्थानीय और नए विस्थापन के आंकड़ों को पूरे देश के कुल आंकड़े से अलग समझना जरूरी है।
एल ओबेद की आबादी में भारी इज़ाफा विस्थापन के पैमाने को समझने का एक अहम संकेत है। शहर में पहुंच रहे परिवारों के लिए आवास, भोजन, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग बढ़ रही है। सेव द चिल्ड्रेन के मुताबिक इस साल के पहले छह महीनों में करीब 39,000 बच्चे शहर पहुंचे हैं। बच्चों की इतनी बड़ी संख्या में आमद शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों पर अतिरिक्त दबाव डालती है।
यहां चुनौती केवल नए विस्थापितों को जगह देने की नहीं है। उन्हें लंबे समय तक सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने के लिए स्थानीय बुनियादी ढांचे को भी मजबूत करना होगा।
कोरडोफान में हालात का अगला रुख लड़ाई की तीव्रता, नागरिक इलाकों में सुरक्षा और मानवीय संगठनों की पहुंच पर निर्भर करेगा। अगर संघर्ष और ड्रोन हमले जारी रहते हैं, तो नए विस्थापन की आशंका बनी रहेगी। दूसरी तरफ सुरक्षित रास्तों और राहत पहुंच की बहाली से दबाव कुछ कम हो सकता है। लेकिन इसके लिए केवल स्थानीय राहत प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। संघर्ष प्रभावित इलाकों में मानवीय पहुंच और नागरिकों की सुरक्षा के लिए व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन की जरूरत रहेगी।
सूडान के कोरडोफान में 2 लाख से ज्यादा नए विस्थापितों का आंकड़ा एक गंभीर मानवीय चेतावनी है। नॉर्थ कोरडोफान में हजारों लोगों का कुछ ही दिनों में घर छोड़ना बताता है कि सुरक्षा हालात अब भी तेजी से बदल रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता यह है कि लड़ाई का असर बिजली, पानी, अस्पताल और संचार जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुंच चुका है। इसके साथ बाढ़ और राहत आपूर्ति की मुश्किलें संकट को और जटिल बना रही हैं।
कोरडोफान में संकट का स्थायी समाधान केवल विस्थापित लोगों को राहत देने से नहीं होगा। नागरिकों की सुरक्षा, मानवीय पहुंच और संघर्ष को कम करने की कोशिशें साथ-साथ आगे बढ़ानी होंगी। फिलहाल उपलब्ध आंकड़े यही बताते हैं कि सूडान में मानवीय जरूरत लगातार बढ़ रही है और कोरडोफान इस संकट के सबसे गंभीर केंद्रों में बना हुआ है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।