Gen-Z के विरोध प्रदर्शन के बाद संसद में उनकी भाषा दिखने लगी, लेकिन असली दूरी अभी भी बरकरार है।
📍 नई दिल्ली
📰 4 अगस्त 2026
✍️ By Mohd Haris
अब संसद में भी Gen-Z का असर साफ दिख रहा है।
जैसे शब्द नेताओं के भाषणों में सुनाई दिए।
यह बदलाव दिखाता है कि सियासत अब युवा भाषा को अपनाने की कोशिश कर रही है।
भाषा बदलने के बावजूद असली समस्या कायम है।
यही मुद्दे Gen-Z को सड़क पर लाए।
Gen-Z का विरोध अलग है
यह पारंपरिक आंदोलन से बिल्कुल अलग मॉडल है।
सरकार ने भी एप्रोच बदली है
लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है।
दिल्ली में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए
करीब 12,000 लोग मार्च में शामिल हुए।
क्या सिर्फ भाषा बदलने से भरोसा बनेगा?
जवाब साफ है
Gen-Z की भाषा अब सत्ता तक पहुंच चुकी है।
लेकिन असली चुनौती अब भी वही है
युवाओं के मुद्दों का ठोस समाधान।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।