बारिश में कपड़ों की बदबू से ऐसे पाएं छुटकारा
कपड़ों से आने लगी सीलन की गंध? अपनाएं ये आसान तरीके
बारिश में कपड़ों की बदबू क्यों आती है? जानिए बचाव
बारिश में हवा में नमी बढ़ने और कपड़ों के देर से सूखने के कारण उनमें बासी या सीलन जैसी गंध आ सकती है। कपड़ों को जल्दी और पूरी तरह सुखाना, हवा का प्रवाह बनाए रखना तथा जरूरत पड़ने पर दोबारा धोना मददगार है। लगातार बदबू या फफूंदी दिखे तो कारण की जांच जरूरी है।
बारिश में कपड़ों से सीलन की बदबू क्यों आती है?
बारिश का मौसम आते ही कपड़ों को सुखाना एक आम घरेलू चुनौती बन जाता है। लगातार बादल, कम धूप और हवा में ज्यादा नमी के कारण कपड़े सामान्य दिनों की तुलना में देर से सूखते हैं। अगर कपड़े लंबे समय तक नम या आधे गीले रह जाएं तो उनमें बासी या सीलन जैसी गंध महसूस हो सकती है। इस समस्या का संबंध सिर्फ कपड़ों से नहीं, बल्कि आसपास के वातावरण में मौजूद नमी से भी है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के मुताबिक नमी को नियंत्रित करना फफूंदी की वृद्धि रोकने का अहम तरीका है और गीली या नम चीजों को जल्द सुखाना जरूरी है। इसलिए बारिश में कपड़ों की बदबू दूर करने का सबसे प्रभावी तरीका केवल खुशबूदार उत्पाद इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि नमी के स्रोत और कपड़े के पूरी तरह सूखने पर ध्यान देना है।
सबसे पहले कपड़ों को दोबारा अच्छी तरह धोएं
अगर कपड़े में सीलन की बदबू आ गई है तो उन्हें सिर्फ धूप में डाल देना हमेशा पर्याप्त नहीं होता। खासकर तब, जब कपड़े लंबे समय तक गीले रहे हों या उनमें बासी गंध अच्छी तरह बस गई हो। ऐसे कपड़ों को सामान्य डिटर्जेंट से दोबारा धोना एक आसान उपाय है। कपड़े के लेबल पर दिए गए धुलाई संबंधी निर्देशों का पालन करें और जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट डालने से बचें। धुलाई के बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण है कपड़ों को पूरी तरह सुखाना। नम कपड़े को अलमारी में रखने से समस्या दोबारा लौट सकती है।
कपड़ों को आधा गीला न छोड़ें
बारिश के दिनों में कई लोग कपड़े कमरे के अंदर सुखाते हैं। अगर कमरे में हवा का आवागमन कम हो और कपड़े लंबे समय तक गीले रहें तो कमरे की नमी बढ़ सकती है। एनएचएस से जुड़ी सलाह में भी घर के भीतर कपड़े सुखाने से बचने की बात कही गई है। अगर ऐसा करना जरूरी हो तो कपड़ों को अतिरिक्त स्पिन साइकिल देने और कपड़ों के स्टैंड को खुले खिड़की वाले स्थान के पास रखने की सलाह दी गई है। इसलिए वॉशिंग मशीन से कपड़े निकालने के बाद उन्हें तुरंत फैलाएं और कपड़ों के बीच पर्याप्त दूरी रखें। इससे हवा कपड़े के चारों ओर आसानी से पहुंच सकेगी।
कमरे में हवा का आवागमन बनाए रखें
कपड़ों की सीलन भरी गंध कम करने में वेंटिलेशन की अहम भूमिका है। अगर मौसम और बाहरी हवा की स्थिति अनुमति देती हो तो खिड़कियां खोलकर कमरे में ताजी हवा आने दें। एनएचएस की घरेलू नमी संबंधी सलाह में भी वेंटिलेशन, खिड़कियों और एग्जॉस्ट फैन के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताया गया है। कपड़े घर के अंदर सुखाने की स्थिति में छोटे कमरे में खिड़की खोलकर और दरवाजा बंद रखकर नमी को दूसरे कमरों में फैलने से कम किया जा सकता है। अगर घर में एग्जॉस्ट फैन या डीह्यूमिडिफायर उपलब्ध है तो जरूरत के अनुसार उसका इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
कपड़ों को अलमारी में रखने से पहले पूरी तरह सुखाएं
बारिश के मौसम में कई बार कपड़े बाहर से सूखे लगते हैं, लेकिन उनकी मोटी सिलाई, जेब, कॉलर या कमर वाले हिस्से में नमी बची रह सकती है। ऐसे कपड़े सीधे अलमारी में रखने से बासी गंध पैदा हो सकती है। इसलिए कपड़ों को रखने से पहले खास तौर पर मोटे हिस्सों को जांचें। अगर कहीं हल्की नमी महसूस हो रही है तो उन्हें कुछ और समय के लिए हवा में रखें। अलमारी में भी कपड़ों को बहुत ज्यादा ठूंसकर रखने से बचना चाहिए। हवा का थोड़ा आवागमन कपड़ों और अलमारी दोनों में नमी जमा होने की संभावना कम करने में मदद कर सकता है।
धूप निकलने पर कपड़ों को जरूर सुखाएं
बारिश के बीच अगर कुछ घंटों के लिए अच्छी धूप निकलती है तो उसका फायदा उठाया जा सकता है। धुले हुए कपड़ों को पर्याप्त समय तक खुले और हवादार स्थान पर फैलाएं। लेकिन केवल धूप पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। अगर मौसम लगातार नम है तो हवा का प्रवाह और कपड़ों का पूरी तरह सूखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के मुताबिक गीली या नम वस्तुओं को जल्द सुखाना फफूंदी के विकास को रोकने में महत्वपूर्ण है।
कपड़ों के बीच रखें पर्याप्त दूरी
कपड़े एक-दूसरे के ऊपर या बहुत पास-पास लटकाने से उनके बीच हवा का प्रवाह कम हो जाता है। नतीजतन सूखने में ज्यादा समय लग सकता है। कपड़ों को हैंगर या स्टैंड पर इस तरह फैलाएं कि हवा दोनों तरफ से गुजर सके। मोटे तौलिये, जींस और जैकेट जैसे कपड़ों को विशेष रूप से पर्याप्त जगह देना बेहतर होता है। अगर संभव हो तो कपड़े सुखाने के लिए ऐसी जगह चुनें जहां हवा का आवागमन अच्छा हो और कमरे में अत्यधिक नमी जमा न हो।
सिरका या बेकिंग सोडा इस्तेमाल करने से पहले सावधानी
सीलन की बदबू दूर करने के लिए इंटरनेट पर सिरका और बेकिंग सोडा जैसे घरेलू उपाय खूब बताए जाते हैं। हालांकि हर कपड़े पर हर घरेलू पदार्थ इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं होता। कपड़े का रंग, फैब्रिक और निर्माता के निर्देश महत्वपूर्ण हैं। इसलिए किसी घरेलू मिश्रण को पूरे कपड़े पर लगाने से पहले उसके छोटे और छिपे हिस्से पर जांच करना बेहतर है। विशेष रूप से नाजुक कपड़े, ऊन, रेशम या ऐसे कपड़े जिन्हें ड्राई-क्लीनिंग की जरूरत होती है, उनके मामले में घरेलू प्रयोग करने के बजाय लेबल के निर्देशों का पालन करें।
खुशबूदार स्प्रे से सिर्फ बदबू छिपाने से बचें
कपड़ों पर परफ्यूम या फ्रेशनर छिड़कने से कुछ समय के लिए अच्छी खुशबू आ सकती है, लेकिन अगर कपड़े में नमी बनी हुई है तो मूल समस्या खत्म नहीं होगी। सीलन की गंध अगर लगातार बनी रहती है तो कपड़े को दोबारा साफ करके पूरी तरह सुखाना ज्यादा तार्किक तरीका है। केवल खुशबू से नमी या संभावित फफूंदी की समस्या दूर नहीं होती। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के मुताबिक बासी या मोल्ड जैसी गंध कभी-कभी फफूंदी की मौजूदगी का संकेत हो सकती है, इसलिए लगातार बनी गंध के स्रोत की जांच करना जरूरी है।
घर के अंदर कपड़े सुखाते समय इन बातों का रखें ध्यान
अगर बारिश के कारण बाहर कपड़े सुखाना संभव नहीं है तो घर के अंदर भी कुछ सावधानियां अपनाई जा सकती हैं। कपड़ों को बंद कमरे में ढेर करके सुखाने के बजाय ऐसे स्थान पर रखें जहां हवा का प्रवाह हो। एनएचएस की सलाह के अनुसार घर में कपड़े सुखाने की स्थिति में खिड़की खोलना, अंदर के दरवाजे बंद रखना और एग्जॉस्ट फैन का इस्तेमाल करना नमी को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। अगर घर में नमी लगातार ज्यादा रहती है तो ह्यूमिडिटी मीटर से स्थिति की निगरानी की जा सकती है। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी घर के अंदर सापेक्ष आर्द्रता 60 प्रतिशत से नीचे और संभव हो तो 30 से 50 प्रतिशत के बीच रखने की सलाह देती है।
अलमारी में सीलन की बदबू हो तो क्या करें?
कई बार समस्या सिर्फ कपड़ों में नहीं होती, बल्कि अलमारी में ही नमी जमा हो जाती है। ऐसे में केवल कपड़े धोने से बदबू पूरी तरह खत्म नहीं हो सकती। अलमारी को खाली करके अंदर की सतह को साफ और पूरी तरह सूखा लें। कुछ समय के लिए दरवाजे खुले रखकर हवा का आवागमन होने दें और कपड़ों को तभी वापस रखें जब अलमारी और कपड़े दोनों सूखे हों। अगर अलमारी की दीवार या पीछे के हिस्से पर लगातार नमी, काले धब्बे या फफूंदी दिखाई देती है तो नमी के स्रोत की पहचान करना जरूरी है। केवल ऊपर से सफाई करने पर समस्या वापस आ सकती है।
क्या कपड़ों की सीलन सेहत को भी प्रभावित कर सकती है?
सीलन की बदबू अपने आप में हमेशा बीमारी का संकेत नहीं होती, लेकिन अगर कपड़ों या आसपास की जगह पर फफूंदी विकसित हो रही है तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी के अनुसार फफूंदी से एलर्जी जैसी प्रतिक्रियाएं और कुछ लोगों में सांस संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों को पहले से मोल्ड से संवेदनशीलता या अस्थमा है, उनके लिए सावधानी विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। इसलिए कपड़ों पर दिखाई देने वाली फफूंदी या घर में लगातार बनी मोल्ड जैसी गंध को केवल परफ्यूम से ढकने के बजाय उसके स्रोत को खत्म करना ज्यादा जरूरी है।
बारिश में कपड़ों को ताजा रखने का आसान तरीका
बारिश के मौसम में कपड़ों की देखभाल का मूल मंत्र है—कम नमी, बेहतर हवा और पूरी तरह सूखना। कपड़े धोने के बाद उन्हें देर तक वॉशिंग मशीन या टोकरी में गीला छोड़ने के बजाय जल्द से जल्द सुखाने के लिए फैलाना बेहतर है। अगर कपड़े घर के अंदर सुखाने पड़ें तो हवा के प्रवाह का ध्यान रखें। मोटे कपड़ों को बीच-बीच में पलटें और पूरी तरह सूखने के बाद ही उन्हें मोड़कर अलमारी में रखें। अगर किसी कपड़े से दोबारा धोने के बाद भी तेज सीलन की गंध आती है या उस पर फफूंदी के निशान दिखाई देते हैं तो उसे सामान्य कपड़े की तरह इस्तेमाल करने के बजाय उचित सफाई या विशेषज्ञ सलाह पर विचार करना चाहिए।
निष्कर्ष
बारिश के मौसम में कपड़ों से आने वाली सीलन की बदबू का सबसे बड़ा कारण अक्सर लंबे समय तक बनी नमी और कपड़ों का ठीक से न सूखना होता है। इसलिए बदबू दूर करने के लिए केवल खुशबूदार उत्पादों पर निर्भर रहने के बजाय कपड़ों को जल्दी धोना, अच्छी तरह निचोड़ना, हवा में फैलाना और पूरी तरह सुखाना ज्यादा अहम है।
घर में कपड़े सुखाने की मजबूरी हो तो वेंटिलेशन पर विशेष ध्यान दें और कमरे में अत्यधिक नमी जमा न होने दें।
अगर बदबू लगातार बनी रहती है, कपड़ों या अलमारी में फफूंदी दिखाई देती है या घर में नमी की समस्या बार-बार लौटती है तो केवल घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं हो सकते। ऐसे में नमी के वास्तविक स्रोत की पहचान और उसका समाधान करना सबसे जरूरी कदम है।