हरियाणा में 1 अक्टूबर 2026 से राज्य में पंजीकृत End-of-Life Vehicles को ईंधन नहीं देने की तैयारी है। पहले चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में 775 ANPR कैमरे लगाए जाएंगे। परियोजना पर ₹41.74 करोड़ खर्च होंगे। व्यवस्था का उद्देश्य पुराने वाहनों की पहचान और पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
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📍 गुरुग्राम | 16 सितंबर 2026 | ✍️ अपूर्वा चौधरी
1 अक्टूबर से पुराने वाहनों को ईंधन देने पर रोक की तैयारी
हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए End-of-Life Vehicles यानी जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों के खिलाफ नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। प्रस्तावित योजना के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से हरियाणा में पंजीकृत ऐसे वाहनों को पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति नहीं की जाएगी, जो लागू पर्यावरणीय और परिवहन नियमों के तहत End-of-Life Vehicle की श्रेणी में आते हैं।
पहले चरण में यह व्यवस्था गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर के एनसीआर क्षेत्रों में लागू की जाएगी। इसके लिए इन जिलों के पेट्रोल पंपों पर Automated Number Plate Recognition यानी ANPR कैमरे लगाए जा रहे हैं।
चार जिलों में लगाए जाएंगे 775 कैमरे
हरियाणा परिवहन विभाग की योजना के तहत चार जिलों में कुल 775 ANPR कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों की मदद से पेट्रोल पंप पर आने वाले वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन कर उनके पंजीकरण और नियामकीय रिकॉर्ड की पहचान की जा सकेगी।
जिलेवार व्यवस्था के तहत गुरुग्राम में 249 कैमरे लगाए जाएंगे। सोनीपत में 215, झज्जर में 195 और फरीदाबाद में 116 कैमरे लगाए जाने हैं। इस चरण में गुरुग्राम को सबसे अधिक कैमरे मिलेंगे।
सरकार का उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर मैनुअल जाँच की आवश्यकता कम करना और तकनीक के माध्यम से पुराने वाहनों की पहचान को अधिक व्यवस्थित बनाना है। इससे पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की प्रक्रिया को भी मजबूत किया जा सकता है।
परियोजना पर ₹41.74 करोड़ खर्च होने का अनुमान
पहले चरण में 775 ANPR कैमरों की स्थापना पर लगभग ₹41.74 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। अधिकारियों को कैमरों और संबंधित तकनीकी व्यवस्था को 30 सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।
परिवहन मंत्री अनिल विज के अनुसार, राज्यभर में लगभग 2,780 ANPR कैमरों की आवश्यकता हो सकती है। चार एनसीआर जिलों में 775 कैमरों की स्थापना इसी व्यापक योजना का पहला चरण है। आगे चलकर इस तकनीक का विस्तार अन्य क्षेत्रों में भी किया जा सकता है।
ANPR कैमरे कैसे काम करेंगे?
Automated Number Plate Recognition कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट को पढ़कर पंजीकरण संख्या की पहचान करते हैं। इस जानकारी को संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से मिलाया जा सकता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कोई वाहन लागू नियमों के तहत सड़क पर चलने के योग्य है या उसे End-of-Life Vehicle के रूप में चिन्हित किया गया है।
यदि किसी वाहन पर ईंधन आपूर्ति रोकने का प्रावधान लागू होता है, तो ANPR प्रणाली पेट्रोल पंप पर उस वाहन की पहचान करने में मदद कर सकती है। इस प्रक्रिया से पुराने वाहनों को सड़क पर रोककर बार-बार जाँच करने की आवश्यकता कम हो सकती है।
हालांकि, वाहन की पहचान और उस पर कार्रवाई के लिए सरकारी रिकॉर्ड का सही होना जरूरी होगा। नंबर प्लेट पढ़ने में तकनीकी त्रुटि, गलत रिकॉर्ड या वाहन के स्वामित्व में बदलाव जैसी स्थितियों के लिए शिकायत और सुधार की व्यवस्था भी आवश्यक होगी।
किन वाहनों पर पड़ेगा असर?
यह नीति मुख्य रूप से उन वाहनों को प्रभावित करेगी, जो लागू नियमों के तहत अपनी निर्धारित संचालन-अवधि पूरी कर चुके हैं या जिन्हें पर्यावरणीय मानकों के अनुसार सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं है।
दिल्ली-एनसीआर में पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों को लेकर लंबे समय से प्रतिबंध संबंधी प्रावधान लागू हैं। सामान्य तौर पर 15 वर्ष से पुराने पेट्रोल वाहनों और 10 वर्ष से पुराने डीजल वाहनों का उल्लेख किया जाता है। हालांकि, किसी वाहन की वास्तविक स्थिति उसके पंजीकरण, ईंधन के प्रकार, उत्सर्जन मानक, न्यायालयी आदेशों और संबंधित प्रशासनिक रिकॉर्ड पर निर्भर कर सकती है।
इसलिए हर पुराने वाहन को बिना जाँच के स्वतः End-of-Life Vehicle मानना उचित नहीं होगा। वाहन मालिकों को अपने वाहन की श्रेणी और लागू नियमों की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से करनी चाहिए।
CAQM के निर्देशों के अनुरूप पहल
यह पहल वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी Commission for Air Quality Management के निर्देशों के अनुरूप बताई गई है। एनसीआर में वाहन उत्सर्जन को वायु प्रदूषण के महत्वपूर्ण स्रोतों में गिना जाता है। ऐसे में पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान तथा निगरानी को प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था का हिस्सा बनाया गया है।
सरकार का कहना है कि ANPR तकनीक से पुराने वाहनों की पहचान अधिक प्रभावी और व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी। पेट्रोल पंपों पर नंबर प्लेट स्कैन होने के कारण ऐसे वाहनों की पहचान ईंधन भरवाने के समय ही की जा सकती है, जिन पर संबंधित नियमों के तहत रोक लागू है।
वाहन मालिकों को क्या करना चाहिए?
पुराने वाहन रखने वाले लोगों को सबसे पहले अपनी आरसी यानी पंजीकरण प्रमाणपत्र की जानकारी जाँचनी चाहिए। वाहन की पहली पंजीकरण तारीख, ईंधन का प्रकार, प्रदूषण प्रमाणपत्र और लागू क्षेत्रीय नियमों की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
यदि वाहन End-of-Life श्रेणी में आता है, तो उसके इस्तेमाल, स्थानांतरण, पुनः पंजीकरण या स्क्रैपिंग से संबंधित नियमों की जानकारी परिवहन विभाग से लेनी चाहिए। वाहन मालिक अधिकृत Vehicle Scrapping Facility के बारे में भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
किसी अनौपचारिक सोशल मीडिया संदेश के आधार पर वाहन चलाना या स्क्रैप करना उचित नहीं होगा। अंतिम निर्णय से पहले संबंधित विभाग की अधिसूचना और वाहन के आधिकारिक रिकॉर्ड की जाँच जरूरी है।
पेट्रोल पंप संचालकों के लिए नई व्यवस्था
ANPR कैमरों की स्थापना के बाद पेट्रोल पंपों पर वाहन की नंबर प्लेट स्कैन करने की प्रक्रिया विकसित की जाएगी। इससे ईंधन भरने से पहले वाहन की नियामकीय स्थिति की जाँच संभव होगी।
पेट्रोल पंप संचालकों को कैमरों, सॉफ्टवेयर और संबंधित तकनीकी प्रणाली के संचालन से जुड़ी प्रक्रिया अपनानी होगी। साथ ही, सिस्टम में तकनीकी खराबी या गलत पहचान की स्थिति में वैकल्पिक जाँच और शिकायत निवारण व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी।
सरकार के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि तकनीक के कारण नियमों का पालन तो हो, लेकिन वैध वाहनों को गलत पहचान के चलते अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
आगे अन्य जिलों में हो सकता है विस्तार
पहले चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर को शामिल किया गया है। राज्यभर में लगभग 2,780 ANPR कैमरों की आवश्यकता का आकलन किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि भविष्य में इस व्यवस्था को हरियाणा के अन्य एनसीआर क्षेत्रों और दूसरे जिलों तक बढ़ाया जा सकता है।
हालांकि, दूसरे चरण की समय-सारिणी, नए जिलों और कैमरों की स्थापना से संबंधित अंतिम जानकारी विभागीय आदेशों के माध्यम से स्पष्ट होगी।