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शाहजाद भट्टी नेटवर्क पर केंद्र का बड़ा शिकंजा, यूएपीए के तहत आतंकी संगठन घोषित
Harish Qureshi
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2026-09-16 16:15:58
केंद्र सरकार ने शाहजाद भट्टी नेटवर्क को यूएपीए के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया है। गृह मंत्रालय के अनुसार नेटवर्क हथियारों, विस्फोटकों और मादक पदार्थों की सीमा पार तस्करी तथा आतंकी गतिविधियों के लिए युवाओं की भर्ती से जुड़ा था।
नई दिल्ली, भारत | 16 सितंबर 2026
By Mohd Haris
शाहजाद भट्टी नेटवर्क पर गृह मंत्रालय का बड़ा एक्शन
केंद्र सरकार ने पाकिस्तान से संचालित बताए जा रहे शाहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को इस नेटवर्क को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया।
गृह मंत्रालय के मुताबिक नेटवर्क पर सीमा पार से हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थ भारत में पहुंचाने, युवाओं और छोटे अपराधों में शामिल लोगों को आतंकवाद की ओर उकसाने तथा भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और सांप्रदायिक सौहार्द को निशाना बनाने वाले डिजिटल कंटेंट के प्रसार के आरोप हैं।
सरकार के मुताबिक नेटवर्क की भूमिका क्या थी?
गृह मंत्रालय का आरोप है कि शाहजाद भट्टी नेटवर्क पाकिस्तान से संचालित एक आतंकी सिंडिकेट के तौर पर काम कर रहा था। सुरक्षा एजेंसियों ने इस नेटवर्क को हथियारों और विस्फोटकों की सीमा पार तस्करी के अलावा भारत में हिंसक गतिविधियों से जोड़ा है।
सरकारी दावों के मुताबिक नेटवर्क से जुड़े लोगों पर ग्रेनेड, आईईडी और पेट्रोल बम हमलों तथा लक्षित हत्याओं में भूमिका होने के आरोप हैं। इन आरोपों की जांच अलग-अलग मामलों में संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।
14 राज्यों में पहले हो चुकी है कार्रवाई
इस फैसले से पहले 12 अगस्त 2026 को सुरक्षा एजेंसियों ने शाहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाया था।
सरकार के अनुसार यह कार्रवाई 14 राज्यों में हुई और इसमें 253 लोगों को हिरासत में लिया गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नेटवर्क से जुड़े मामलों में 80 से अधिक एफआईआर दर्ज हुईं और 200 से अधिक गिरफ्तारियां की गईं।
कार्रवाई का दायरा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल तक बताया गया था।
किन राज्यों में सबसे ज्यादा कार्रवाई हुई?
गृह मंत्रालय द्वारा अगस्त में जारी आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में 62, हरियाणा में 52, दिल्ली में 51 और पंजाब में 44 लोगों को हिरासत में लिया गया था।
राजस्थान में 15, महाराष्ट्र में 8 और उत्तराखंड में 5 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। कर्नाटक, गुजरात और बिहार में 3-3 तथा तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में 2-2 लोगों को हिरासत में लेने की जानकारी सरकार ने दी थी।
क्या-क्या बरामद होने का दावा?
सरकार के मुताबिक कार्रवाई के दौरान आईईडी, पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री की मार्किंग वाले ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सीसीटीवी कैमरे बरामद किए गए।
गृह मंत्रालय ने इन बरामदगियों को नेटवर्क के कथित सीमा पार संपर्कों से जोड़ा है। हालांकि किसी बरामद सामग्री का किसी विशिष्ट हमले से संबंध अंतिम रूप से अदालत में साबित होना अलग कानूनी प्रक्रिया का विषय है।
युवाओं की ऑनलाइन भर्ती का आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ऑनलाइन गतिविधियों से जुड़ा था।
एजेंसियों का आरोप है कि सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल माध्यमों के जरिए युवाओं को नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जाती थी। आर्थिक रूप से कमजोर या छोटे-मोटे अपराधों में शामिल लोगों को कथित तौर पर आतंकवादी गतिविधियों की ओर आकर्षित करने का आरोप भी लगाया गया है।
इस मामले में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक अहम जांच बिंदु बन गई है।
रेकी और निगरानी का भी आरोप
गृह मंत्रालय के अगस्त के बयान में कहा गया था कि नेटवर्क से जुड़े स्थानीय सहयोगियों को पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों की रेकी करने के लिए पैसे दिए जाते थे।
सरकार के अनुसार कुछ स्थानों पर निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी आरोप है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित नेटवर्क में स्थानीय स्तर पर कितने लोग जुड़े थे और उन्हें किस तरह के निर्देश दिए जाते थे।
एनआईए की जांच में भी भट्टी का नाम
शाहजाद भट्टी का नाम पहले से राष्ट्रीय जांच एजेंसी की कुछ जांचों में सामने आ चुका है।
एनआईए के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक जुलाई 2026 में अंबाला के बलदेव नगर थाने में हुए कार विस्फोट मामले में पाकिस्तानी आतंकी शाहजाद भट्टी समेत 8 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया था। जून 2026 में भी एनआईए ने भट्टी से जुड़े आतंकी-गैंगस्टर मामलों में पंजाब और हरियाणा में कई स्थानों पर तलाशी ली थी।
ये मामले मौजूदा यूएपीए अधिसूचना से अलग कानूनी कार्यवाहियां हैं, लेकिन जांच एजेंसियों द्वारा भट्टी के नाम को पहले से ट्रैक किए जाने का संकेत देते हैं।
जालंधर और रांची की घटनाओं की भी जांच
जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के कथित संबंधों को कई हिंसक घटनाओं से जोड़कर देख रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक एजेंसियां जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर हुए आईईडी हमले और रांची में आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम हमले में नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही हैं।
इन घटनाओं से जुड़े मामलों में अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भी सुरक्षा अलर्ट
सितंबर की शुरुआत में सुरक्षा एजेंसियों ने शाहजाद भट्टी नेटवर्क को लेकर दिल्ली और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता की सलाह दी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक खुफिया एजेंसियों ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान संभावित कम तीव्रता वाले हमलों या व्यवधान की आशंका जताई थी। इसके बाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में निगरानी बढ़ाने को कहा गया था।
रिपोर्ट में संभावित लक्षित गोलीबारी, ग्रेनेड हमले और ऑनलाइन भर्ती प्रयासों पर नजर रखने की बात भी कही गई थी।
यूएपीए के तहत आतंकी संगठन घोषित होने का मतलब
गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत किसी संगठन को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने के बाद उसके खिलाफ कानूनी और वित्तीय कार्रवाई का दायरा व्यापक हो जाता है।
ऐसी अधिसूचना के बाद संगठन से जुड़े नेटवर्क, संपत्तियों, वित्तीय स्रोतों और सहयोगियों की जांच में संबंधित एजेंसियों को आगे कार्रवाई करने का आधार मिलता है।
इस मामले में शाहजाद भट्टी नेटवर्क को यूएपीए की आतंकवादी संगठनों वाली सूची में शामिल किए जाने से सरकार की कार्रवाई अब केवल अलग-अलग आपराधिक मामलों तक सीमित नहीं रहेगी।
क्या यह सिर्फ गैंगस्टर नेटवर्क था?
शाहजाद भट्टी को सुरक्षा एजेंसियां एक ऐसे व्यक्ति के तौर पर देख रही हैं जिसके खिलाफ गैंगस्टर और आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामले सामने आए हैं।
सरकारी जांच का दावा है कि इस नेटवर्क ने संगठित अपराध, हथियारों की तस्करी, ड्रग्स और आतंकवादी गतिविधियों के बीच एक कड़ी बनाने की कोशिश की।
इसी वजह से सुरक्षा एजेंसियां इसे केवल पारंपरिक गैंगस्टर नेटवर्क के बजाय आतंकी-गैंगस्टर नेटवर्क के रूप में जांच रही हैं।
आगे की जांच में क्या सामने आ सकता है?
अब जांच एजेंसियों का ध्यान नेटवर्क की पूरी संरचना, फंडिंग, हथियारों की सप्लाई और डिजिटल भर्ती के कथित तंत्र पर हो सकता है।
यह भी जांच का विषय रहेगा कि पाकिस्तान में बैठे कथित संचालकों और भारत में मौजूद स्थानीय सहयोगियों के बीच संपर्क किस माध्यम से होता था।
इसके अलावा एजेंसियां यह भी स्थापित करने की कोशिश करेंगी कि अलग-अलग आपराधिक मामलों में गिरफ्तार आरोपियों का इस नेटवर्क से वास्तविक संबंध किस स्तर तक था।
सरकार की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया
गृह मंत्रालय की अधिसूचना एक प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई है, जबकि अलग-अलग आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामलों का फैसला अदालतों में साक्ष्यों के आधार पर होगा।
किसी संगठन को आतंकवादी घोषित किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति के खिलाफ हर आरोप अपने आप सिद्ध हो गया। व्यक्तिगत आपराधिक जिम्मेदारी संबंधित मामलों में न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।
यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस नेटवर्क के खिलाफ कई अलग-अलग कानूनों के तहत मामले दर्ज हैं।
निष्कर्ष
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शाहजाद भट्टी नेटवर्क को यूएपीए के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। सरकार का कहना है कि नेटवर्क सीमा पार हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थों की तस्करी के साथ युवाओं की आतंकी भर्ती और हिंसक गतिविधियों से जुड़ा रहा है।
यह फैसला अगस्त में 14 राज्यों में हुई व्यापक कार्रवाई के बाद आया है, जिसमें सरकार के अनुसार 253 लोगों को हिरासत में लिया गया और 80 से अधिक एफआईआर दर्ज हुईं।
अब जांच का अगला अहम चरण नेटवर्क की फंडिंग, डिजिटल भर्ती, हथियारों की आपूर्ति और भारत में मौजूद कथित स्थानीय मॉड्यूल की पूरी संरचना को सामने लाना होगा।
Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।