IIT बॉम्बे के दूसरे वर्ष के छात्र साहिल रवींद्र वाकोड़े की 18 सितंबर को मौत हुई। संस्थान के मुताबिक परीक्षा में मोबाइल मिलने के बाद प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड किया गया था। संस्थान ने औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई से इनकार किया है। घटना के बाद छात्रों ने प्रदर्शन किया और मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं स्थगित की गईं।
मुंबई, महाराष्ट्र | 19 सितंबर 2026
By Mohd Haris
IIT बॉम्बे में परीक्षा से जुड़े एक विवाद के बाद दूसरे वर्ष के छात्र की मौत ने पूरे कैंपस में गंभीर चिंता पैदा कर दी है। संस्थान के मुताबिक, 18 सितंबर को Energy Science and Engineering विभाग के छात्र साहिल रवींद्र वाकोड़े परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन इस्तेमाल करते पाए गए थे। संस्थान ने बताया कि उन्होंने प्रश्नपत्र को ChatGPT पर अपलोड कर जवाब हासिल करने की कोशिश की थी।
घटना के बाद छात्र बड़ी संख्या में कैंपस में जुटे। छात्रों ने प्रशासन से घटना की पूरी जानकारी, जवाबदेही और छात्र कल्याण से जुड़े इंतजामों पर स्पष्टता की मांग की। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शन में 400 से अधिक छात्र शामिल हुए और मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं।
परीक्षा में क्या हुआ?
IIT बॉम्बे के आधिकारिक पक्ष के मुताबिक, परीक्षा के दौरान छात्र के पास मोबाइल फोन पाया गया। संस्थान ने कहा कि प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड करके उसके जवाब हासिल करने की कोशिश की गई थी। इसके बाद शिक्षक और विभागाध्यक्ष ने छात्र से बातचीत की और काउंसलिंग की।
संस्थान का कहना है कि इस घटना को लेकर कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी। छात्र को यह भी बताया गया था कि परीक्षा से जुड़ी घटना का उसके अकादमिक करियर पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
इसके बाद क्या हुआ?
उसी दिन बाद में छात्र अपने हॉस्टल में मृत पाए गए। संस्थान ने घटना पर दुख जताते हुए कहा है कि मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जा रही है। पुलिस ने भी मामले की जांच शुरू की है।
छात्रों के दावे और संस्थान का पक्ष पूरी तरह एक जैसा नहीं है। कुछ छात्रों ने परीक्षा कक्ष में हुई कार्रवाई और संभावित अनुशासनात्मक दबाव को लेकर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर संस्थान ने स्पष्ट किया है कि कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं हुई थी। इन दावों की स्वतंत्र जांच अभी जरूरी है।
कैंपस में क्यों हुआ प्रदर्शन?
छात्रों का एक बड़ा समूह IIT बॉम्बे के मुख्य प्रवेश द्वार पर जमा हुआ। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से पारदर्शिता, घटना की स्वतंत्र समीक्षा और छात्र कल्याण व्यवस्था पर जवाब मांगा। कुछ छात्रों ने संस्थान के नेतृत्व की जवाबदेही को लेकर भी सवाल उठाए।
रिपोर्टों के मुताबिक, छात्रों ने संस्थान के निदेशक से बातचीत भी की। बातचीत के बाद भी प्रदर्शन जारी रहा और छात्र प्रशासन से विस्तृत जवाब की मांग करते रहे।
मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं स्थगित
घटना और प्रदर्शन के बीच IIT बॉम्बे की चल रही मिड-सेमेस्टर परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं। छात्रों के मुताबिक यह फैसला कैंपस में बने हालात को देखते हुए लिया गया।
परीक्षाओं को लेकर आगे की व्यवस्था और नई तारीखों की जानकारी संस्थान की ओर से दी जानी है। छात्रों के लिए अकादमिक प्रक्रिया और मानसिक स्वास्थ्य सहायता दोनों इस समय अहम मुद्दे बने हुए हैं।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
मुंबई पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने घटना से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए प्रक्रिया शुरू की है। मौत और परीक्षा विवाद के बीच संबंध को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि परीक्षा में ChatGPT इस्तेमाल ही मौत का एकमात्र कारण था। घटनाओं का क्रम सामने आया है, लेकिन किसी व्यक्ति की आत्महत्या के पीछे एक ही वजह तय करना बिना जांच के सही नहीं होगा।
IIT बॉम्बे में छात्र सुरक्षा पर फिर सवाल
इस घटना ने IIT बॉम्बे में छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को लेकर भी बहस तेज कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह 2026 में संस्थान के परिसर में दर्ज तीसरी छात्र आत्महत्या है। इस आंकड़े ने छात्रों और प्रशासन के सामने तनाव, काउंसलिंग और सहायता व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
IIT बॉम्बे के Student Wellness Centre में काउंसलर उपलब्ध हैं और संस्थान की वेबसाइट पर छात्र सहायता व्यवस्था की जानकारी भी दी गई है।
AI और परीक्षा व्यवस्था की नई चुनौती
इस घटना ने परीक्षा में जनरेटिव AI के इस्तेमाल को लेकर भी नया सवाल खड़ा किया है। ChatGPT जैसे AI टूल अब छात्रों की पढ़ाई का हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन परीक्षा कक्ष में बिना अनुमति उनका इस्तेमाल अकादमिक ईमानदारी और परीक्षा नियमों से जुड़ा अलग मुद्दा है।
शिक्षण संस्थानों के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ परीक्षा की निष्पक्षता और नियमों को लागू करना है। दूसरी तरफ किसी अनुशासनात्मक घटना के बाद छात्र को पर्याप्त काउंसलिंग और संस्थागत सहायता देना भी जरूरी है।
क्या कारण था, इसका फैसला जांच करेगी
इस मामले में सबसे जरूरी तथ्य और आरोप अलग-अलग रखना होगा। यह स्थापित है कि छात्र परीक्षा के दौरान मोबाइल इस्तेमाल करते पाए गए थे और संस्थान के अनुसार प्रश्नपत्र ChatGPT पर अपलोड किया गया था। यह भी संस्थान का पक्ष है कि कोई औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।
लेकिन छात्र की मौत के पीछे मानसिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों की पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है। इसलिए किसी एक घटना को अंतिम कारण बताना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा।
आगे क्या होगा?
अब पुलिस जांच के साथ IIT बॉम्बे प्रशासन के सामने छात्रों के सवालों का जवाब देना बड़ी चुनौती है। परीक्षा विवाद की प्रक्रिया, छात्र को दी गई काउंसलिंग, संस्थान की प्रतिक्रिया और मौत से पहले की परिस्थितियों की जांच अहम रहेगी।
कैंपस में विरोध के बाद प्रशासन से पारदर्शिता की मांग तेज हुई है। साथ ही मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं के नए कार्यक्रम और छात्र सहायता व्यवस्था पर भी निगाह रहेगी।
यह घटना AI के इस्तेमाल, अकादमिक अनुशासन और छात्र मानसिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन की जरूरत को सामने लाती है। परीक्षा नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन किसी भी गंभीर अनुशासनात्मक स्थिति में संस्थानों की जिम्मेदारी केवल नियम लागू करने तक सीमित नहीं रहती। छात्र सहायता, काउंसलिंग और समय पर हस्तक्षेप भी उतने ही अहम हैं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।