दिशा सालियान मौत मामले में CBI ने हाई कोर्ट के आदेश के बाद FIR दर्ज की है। शिकायत में कई चर्चित नामों का उल्लेख है। अब जांच एजेंसी सबूतों और आरोपों की पड़ताल करेगी।
📍 मुंबई
🗓️ 14 September 2026
✍️ Wasi Siddiqui
दिशा सालियान मौत मामले में 6 साल बाद जांच ने नया मोड़ लिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है। FIR और शिकायत से जुड़े बयानों में शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के नेता आदित्य ठाकरे, अभिनेता डिनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती और सूरज पंचोली समेत कई नामों का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन नामों का FIR में होना अपने आप में अपराध या दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।
इस मामले की जांच अब CBI के जिम्मे है। एजेंसी को दिशा सालियान की मौत से जुड़े पुराने रिकॉर्ड, उपलब्ध साक्ष्य और शिकायत में लगाए गए आरोपों की नए सिरे से जांच करनी है।
दिशा सालियान की मौत का मामला क्या है
दिशा सालियान एक सेलिब्रिटी मैनेजर थीं और उन्होंने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के साथ भी काम किया था। 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक आवासीय इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हुई थी।
मुंबई पुलिस की शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या से जुड़ा मामला माना गया था और पुलिस ने किसी आपराधिक साजिश या बाहरी हस्तक्षेप की पुष्टि नहीं की थी। बाद में दिशा के पिता सतीश सालियान ने इस निष्कर्ष पर सवाल उठाते हुए उनकी मौत की परिस्थितियों की नए सिरे से जांच की मांग की।
हाई कोर्ट ने CBI जांच का आदेश क्यों दिया
2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिशा सालियान की मौत के मामले में CBI जांच का आदेश दिया। अदालत ने पुराने पुलिस रिकॉर्ड और जांच प्रक्रिया में कई विसंगतियों का उल्लेख किया और कहा कि मामले में व्यापक और ठोस जांच की जरूरत है।
अदालत ने साथ ही एक महत्वपूर्ण कानूनी सावधानी भी दर्ज की। कोर्ट ने कहा कि जांच के दौरान पर्याप्त सामग्री सामने आने तक किसी व्यक्ति को आरोपी के तौर पर नहीं माना जाना चाहिए। अदालत ने किसी खास व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध होने संबंधी कोई निष्कर्ष नहीं दिया था।
FIR में किन नामों का उल्लेख हुआ
CBI की FIR को लेकर सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक दिशा के पिता की शिकायत और बयान में आदित्य ठाकरे, डिनो मोरिया, रिया चक्रवर्ती और सूरज पंचोली समेत कई लोगों के नामों का उल्लेख है।
इसके अलावा पूर्व मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह, पुलिस अधिकारी सचिन वाझे और कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों का भी शिकायत से जुड़े बयान में जिक्र किया गया है। शिकायत में पुलिस अधिकारियों, डॉक्टरों, अस्पताल स्टाफ और सुरक्षा कर्मियों से जुड़े पहलुओं की जांच की मांग भी की गई है।
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप और जांच एजेंसी की अंतिम जांच एक ही चीज नहीं हैं। FIR दर्ज होना जांच की शुरुआत है। किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप तभी कानूनी तौर पर स्थापित माने जाएंगे जब जांच में पर्याप्त साक्ष्य सामने आए और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में आरोप टिकें।
दिशा के पिता ने क्या आरोप लगाए
दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपनी शिकायत और CBI के समक्ष दिए बयान में मौत की परिस्थितियों को संदिग्ध बताया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मामले में आपराधिक साजिश, सबूतों को दबाने या नष्ट करने और घटना को आत्महत्या के रूप में पेश करने जैसे पहलुओं की जांच होनी चाहिए।
उनके वकील निलेश ओझा ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं और गैंगरेप तथा हत्या के आरोपों की जांच की मांग की है। हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता और उनके वकील की ओर से लगाए गए दावे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि या न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सुशांत सिंह राजपूत से कनेक्शन क्यों चर्चा में है
दिशा सालियान की मौत के कुछ ही दिन बाद 14 जून 2020 को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की भी मौत हुई थी। इसी वजह से दोनों मामलों के बीच संभावित संबंध को लेकर लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा होती रही है।
हालांकि, दोनों मौतों के बीच आपराधिक संबंध साबित होना अभी बाकी है। CBI जांच के सामने प्रमुख सवाल यही है कि क्या दोनों घटनाओं के बीच कोई वास्तविक और साक्ष्य आधारित कड़ी मौजूद है या दोनों घटनाएं अलग-अलग थीं।
पुरानी जांच और नए सवाल
मुंबई पुलिस की पुरानी जांच में दिशा की मौत को आत्महत्या माना गया था। बाद में उनके परिवार ने जांच की प्रक्रिया और कुछ रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए।
बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी अपने आदेश में पुरानी जांच की प्रक्रिया से जुड़े सवालों को गंभीरता से लिया। अदालत ने कहा कि पुलिस जांच कई सवालों के जवाब देने के बजाय और सवाल खड़े करती है। इसी आधार पर CBI को नए सिरे से जांच की जिम्मेदारी दी गई।
CBI अब क्या करेगी
CBI ने मामले से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इससे पहले एजेंसी ने मालवणी पुलिस से दिशा सालियान की मौत से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा था।
अब जांच में घटनास्थल से जुड़े रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम दस्तावेज, पुराने पुलिस रिकॉर्ड, डिजिटल सामग्री, गवाहों के बयान और शिकायत में उठाए गए दूसरे बिंदुओं की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। जांच एजेंसी को यह तय करना होगा कि उपलब्ध सामग्री किसी संज्ञेय अपराध की ओर इशारा करती है या नहीं।
आदित्य ठाकरे के संदर्भ में कानूनी स्थिति
आदित्य ठाकरे का नाम इस मामले में पहले भी राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का हिस्सा रहा है। दिशा के पिता की ओर से उन पर आरोप लगाए गए हैं। दूसरी तरफ ठाकरे की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है और उनके वकील ने आरोपों को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए उनके मामले से किसी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध से इनकार किया था।
इसलिए मौजूदा स्थिति को समझने के लिए शिकायत, FIR और दोषसिद्धि के बीच अंतर रखना जरूरी है। CBI की जांच अभी यह तय करेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सामग्री मौजूद है या नहीं।
सूरज पंचोली ने आरोपों पर क्या कहा
अभिनेता सूरज पंचोली का नाम भी इस मामले से जुड़े आरोपों में सामने आया है। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अपने खिलाफ लगाए जा रहे दावों को खारिज किया है और कहा है कि उन्हें गलत तरीके से मामले में खलनायक के तौर पर पेश किया जा रहा है। उन्होंने CBI से कथित दुर्भावनापूर्ण प्रचार के पहलू की जांच की मांग भी की थी।
मामले में आगे क्या होगा
अब सबसे अहम चरण CBI की जांच है। एजेंसी को शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच करनी होगी और उपलब्ध साक्ष्यों की पुष्टि करनी होगी।
यदि जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त सामग्री मिलती है, तो कानूनी प्रक्रिया उसी आधार पर आगे बढ़ेगी। यदि आरोपों की पुष्टि नहीं होती है, तो जांच का निष्कर्ष उसी के अनुरूप होगा। बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने आदेश में इसी कानूनी सिद्धांत को स्पष्ट किया है।
दिशा सालियान मौत मामले में CBI की FIR ने 2020 से चले आ रहे विवाद को फिर जांच के औपचारिक दायरे में ला दिया है। कई चर्चित नामों का शिकायत और FIR से जुड़े दस्तावेजों में उल्लेख हुआ है, लेकिन फिलहाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना कानूनी और तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
अब इस मामले में असली महत्व आरोपों से ज्यादा उन साक्ष्यों का है जिन्हें CBI अपनी जांच के दौरान जुटाती है। छह साल पुराने मामले में जांच एजेंसी की निष्पक्षता, साक्ष्य की वैज्ञानिक जांच और अदालत के निर्देशों का पालन ही आगे की पूरी कानूनी दिशा तय करेगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।