BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भारत मंडपम में 37 भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स की तकनीकें प्रदर्शित की गईं। इनमें AI आधारित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग, फ्लोटिंग सोलर, मरीन रोबोटिक्स, रेयर-अर्थ-फ्री मोटर और मातृ-भ्रूण मॉनिटरिंग शामिल हैं। आयोजन का लक्ष्य भारतीय इनोवेशन को वैश्विक निवेशकों, उद्योगों, विश्वविद्यालयों और संस्थागत साझेदारों से जोड़ना है।
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नई दिल्ली | 12 सितंबर 2026 | Apurva Choudhary
ब्रिक्स मंच पर भारत की Deep-Tech ताकत
भारत ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के साथ अपनी उभरती डीप-टेक क्षमता को अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों और निवेशकों के सामने पेश किया है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 11 और 12 सितंबर को आयोजित ‘भारत इनोवेट्स एक्सपोज़िशन’ में 37 भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स और वेंचर्स की तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। यह आयोजन शिक्षा मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के समन्वय से किया है।
इस एक्सपोज़िशन का मकसद सिर्फ तकनीकी उत्पादों का प्रदर्शन करना नहीं है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक इसे भारतीय स्टार्टअप्स, उच्च शिक्षण संस्थानों, प्रयोगशालाओं और रिसर्च इकोसिस्टम को ब्रिक्स देशों के निवेशकों, कंपनियों, विश्वविद्यालयों, रिसर्च संस्थानों और अन्य वैश्विक साझेदारों से जोड़ने के प्लेटफॉर्म के तौर पर तैयार किया गया है।
37 इनोवेशन में क्या खास है
भारत इनोवेट्स के आधिकारिक स्टार्टअप कम्पेंडियम में हेल्थकेयर, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, एनर्जी, मोबिलिटी, रोबोटिक्स, सेमीकंडक्टर, स्पेस और अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे स्टार्टअप्स को शामिल किया गया है। ब्रिक्स एक्सपोज़िशन में इन्हीं व्यापक इनोवेशन इकोसिस्टम से चुने गए 37 स्टार्टअप्स और वेंचर्स को प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शित तकनीकों में AI आधारित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग, फ्लोटिंग सोलर पीवी, मरीन रोबोटिक्स, रेयर-अर्थ-फ्री इलेक्ट्रिक मोटर और AI आधारित मातृ-भ्रूण मॉनिटरिंग जैसे समाधान शामिल हैं। इन क्षेत्रों का दायरा दिखाता है कि भारतीय डीप-टेक गतिविधि केवल सॉफ्टवेयर या डिजिटल सर्विस तक सीमित नहीं है, बल्कि हेल्थकेयर, ऊर्जा, हार्डवेयर और औद्योगिक तकनीक तक फैल रही है।
AI सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग क्यों चर्चा में
प्रदर्शनी में Periwinkle Technologies की AI-सक्षम सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग और ट्रायेज तकनीक प्रमुख उदाहरणों में है। भारत इनोवेट्स के आधिकारिक प्रोफाइल के मुताबिक इसका AI प्लेटफॉर्म रियल-टाइम जोखिम आकलन 60 सेकंड से कम समय में करने के लिए विकसित किया गया है। प्रोफाइल इसे FDA-cleared प्लेटफॉर्म के रूप में भी दर्ज करता है।
इस तकनीक में सर्वाइकल इमेजिंग डिवाइस और AI आधारित एप्लिकेशन के जरिए स्क्रीनिंग तथा जोखिम आकलन की प्रक्रिया को अधिक तेज बनाने का प्रयास किया गया है। कंपनी के आधिकारिक प्रोफाइल में 4.5 लाख से अधिक स्क्रीनिंग और तीन महाद्वीपों में 1,000 से अधिक यूजर साइट्स का भी उल्लेख है। ये आंकड़े कंपनी के प्रोफाइल में दिए गए हैं और इन्हें स्वतंत्र सार्वजनिक स्वास्थ्य अध्ययन के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
रेयर-अर्थ-फ्री मोटर से सप्लाई-चेन पर फोकस
डीप-टेक शोकेस में रेयर-अर्थ-फ्री इलेक्ट्रिक मोटर भी अहम तकनीक है। Chara Technologies के भारत इनोवेट्स प्रोफाइल के मुताबिक कंपनी 8 से 30 किलोवाट क्षमता वाले रेयर-अर्थ-फ्री मोटर विकसित करती है, जिनमें घरेलू स्तर पर उपलब्ध कराई जा सकने वाली सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है। प्रोफाइल में इन मोटरों को ARAI और ICAT certified बताया गया है।
रेयर-अर्थ मैग्नेट पर निर्भरता वैश्विक इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और औद्योगिक सप्लाई-चेन के लिए रणनीतिक मुद्दा बन चुकी है। ऐसे में वैकल्पिक मोटर तकनीकें महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई से जुड़े जोखिम को कम करने की संभावित दिशा प्रस्तुत करती हैं। हालांकि किसी तकनीक का प्रदर्शन अपने आप में यह प्रमाण नहीं है कि वह पूरे बाजार में पारंपरिक तकनीकों का स्थान ले चुकी है।
फ्लोटिंग सोलर से ऊर्जा क्षेत्र में नया विकल्प
ऊर्जा क्षेत्र में Quantsolar Technologies की फ्लोटिंग सोलर पीवी तकनीक भी भारत इनोवेट्स के स्टार्टअप पोर्टफोलियो में शामिल है। आधिकारिक प्रोफाइल इसे जटिल जल निकायों के लिए विकसित फ्लोटिंग सोलर प्लेटफॉर्म बताता है, जिसमें एंकरिंग और फ्लोटेशन से जुड़े तकनीकी समाधान शामिल हैं।
फ्लोटिंग सोलर का महत्व उन परिस्थितियों में बढ़ सकता है जहां जमीन की उपलब्धता सीमित हो या जलाशयों का उपयोग ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जा सके। लेकिन ऐसे प्रोजेक्ट्स में पर्यावरणीय प्रभाव, जल निकाय की प्रकृति, रखरखाव, एंकरिंग और लागत जैसे पहलुओं का आकलन जरूरी रहता है।
मरीन रोबोटिक्स से समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर की निगरानी
भारत के डीप-टेक पोर्टफोलियो में मरीन रोबोटिक्स भी प्रमुख क्षेत्र है। EyeROV को भारत इनोवेट्स ने फुल-स्टैक मरीन रोबोटिक्स प्लेटफॉर्म के रूप में सूचीबद्ध किया है, जिसमें ROV, ASV, AUV और AI आधारित एनालिटिक्स शामिल हैं।
ऐसी तकनीकें पानी के भीतर निरीक्षण, इंफ्रास्ट्रक्चर मॉनिटरिंग और ऐसे वातावरण में डेटा संग्रह में उपयोगी हो सकती हैं जहां मानव पहुंच कठिन या महंगी हो। इसका असर बंदरगाह, समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा परियोजनाओं और औद्योगिक निरीक्षण जैसे क्षेत्रों में दिखाई दे सकता है, हालांकि हर उपयोग के लिए अलग तकनीकी और नियामकीय मूल्यांकन जरूरी होगा।
मातृ-भ्रूण मॉनिटरिंग में AI का इस्तेमाल
हेल्थटेक क्षेत्र में Janitri Innovations का AI आधारित maternal, fetal और newborn monitoring प्लेटफॉर्म भी शामिल है। आधिकारिक स्टार्टअप प्रोफाइल के मुताबिक यह सिस्टम गर्भावस्था और नवजात देखभाल के विस्तृत चरण में clinical risk detection के लिए विकसित किया गया है और इसमें wearable monitoring hardware तथा signal processing तकनीक शामिल है।
कंपनी के प्रोफाइल में 800 से अधिक अस्पतालों में deployment और 1,500 से अधिक clinicians को training दिए जाने का दावा दर्ज है। यह जानकारी कंपनी के आधिकारिक प्रोफाइल से आती है, इसलिए इसके व्यापक प्रभाव का स्वतंत्र मूल्यांकन अलग clinical evidence और वास्तविक-world outcomes के आधार पर किया जाना चाहिए।
भारत इनोवेट्स का बड़ा उद्देश्य
ब्रिक्स संस्करण में शामिल 37 स्टार्टअप्स मूल 120-स्टार्टअप cohort में से चुने गए हैं, जिसे 2026 में नीस, फ्रांस में आयोजित Bharat Innovates कार्यक्रम के दौरान प्रदर्शित किया गया था। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार नीस कार्यक्रम में 29 देशों के 2,000 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था और 1,350 B2B meetings के बाद 30 से अधिक collaboration MoUs और partnerships तथा 254.5 million डॉलर के funding commitments दर्ज किए गए।
ब्रिक्स एक्सपोज़िशन उसी मॉडल को अधिक रणनीतिक बहुपक्षीय मंच से जोड़ने की कोशिश है। भारत सरकार के मुताबिक इसका उद्देश्य B2B engagement, technology partnerships, investment discussions, business linkages और international market access के अवसर पैदा करना है।
क्या यह भारत के Deep-Tech सेक्टर के लिए बड़ा मोड़ है?
इस पहल को भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण मंच जरूर माना जा सकता है, लेकिन इसके असर को केवल प्रदर्शनी के आधार पर तय करना जल्दबाजी होगी। किसी डीप-टेक कंपनी की वास्तविक सफलता के लिए रिसर्च के साथ commercial scalability, manufacturing capacity, regulatory approvals, capital access, intellectual property और global market adoption भी जरूरी हैं।
इसीलिए 37 तकनीकों का अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने प्रदर्शन एक शुरुआती उपलब्धि है, अंतिम परिणाम नहीं। अगर प्रदर्शनी के बाद वास्तविक निवेश, संयुक्त रिसर्च, पायलट प्रोजेक्ट और technology-transfer agreements होते हैं, तो इसका प्रभाव ज्यादा ठोस माना जाएगा।
वैश्विक बाजार में भारतीय तकनीक की अगली परीक्षा
भारत इनोवेट्स की पहल का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका फोकस उच्च शिक्षा और रिसर्च आधारित innovation को वैश्विक stakeholders से जोड़ने पर है। शिक्षा मंत्रालय ने Bharat Innovates को भारतीय higher-education innovation ecosystem और वैश्विक corporates, investors, universities तथा research institutions के बीच लंबे समय की collaboration बनाने वाला कार्यक्रम बताया है।
भारत के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि डीप-टेक कंपनियों को सामान्य डिजिटल स्टार्टअप्स की तुलना में लंबा R&D cycle, अधिक पूंजी और कई स्तरों पर technical validation की जरूरत पड़ सकती है। अंतरराष्ट्रीय साझेदारी इन कंपनियों को पूंजी और बाजार के साथ-साथ research collaboration तथा विशेषज्ञता तक पहुंच दे सकती है।
आगे क्या देखना होगा
अब इस पहल की अगली कसौटी यह होगी कि ब्रिक्स एक्सपोज़िशन में हुई मुलाकातें कितने ठोस कारोबारी और तकनीकी परिणामों में बदलती हैं। खासकर हेल्थटेक, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, मरीन रोबोटिक्स और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में पायलट प्रोजेक्ट और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।
यह भी देखना होगा कि प्रदर्शित तकनीकों में से कितनी बड़े पैमाने पर commercial deployment तक पहुंचती हैं। निवेश या partnership की संभावनाओं को तत्काल उपलब्धि मानने के बजाय उनके वास्तविक execution को आधार बनाना ज्यादा सटीक नज़रिया होगा।