भारत का वर्ल्ड कप मिशन शुरू, हरमनप्रीत की टीम तैयार
हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की बड़ी चुनौती, पूल डी में कड़े मुकाबले
51 साल बाद खिताब का इंतज़ार खत्म करेगा भारत?
भारत 15 अगस्त से एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप में अभियान शुरू करेगा। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली टीम पूल डी में वेल्स, इंग्लैंड और पाकिस्तान से भिड़ेगी। अनुभवी खिलाड़ियों और युवा प्रतिभाओं के संतुलन के साथ भारत की चुनौती खिताब पर है। 1975 के बाद वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीतने का इंतज़ार इस अभियान को खास बनाता है।
नई दिल्ली | 11 अगस्त 2026 | Asif khan
एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप 2026 के शुरू होने में अब चार दिन बाकी हैं और भारतीय पुरुष हॉकी टीम खिताब की चुनौती के लिए तैयार है। 15 से 30 अगस्त तक बेल्जियम और नीदरलैंड्स में होने वाले टूर्नामेंट में भारत को पूल डी में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स के साथ रखा गया है। भारत अपना पहला मुकाबला 15 अगस्त को वेल्स के खिलाफ खेलेगा।
हरमनप्रीत सिंह टीम की कप्तानी करेंगे। डिफेंडर और ड्रैग-फ्लिकर हरमनप्रीत के साथ टीम में लंबे अंतरराष्ट्रीय अनुभव वाले खिलाड़ी मौजूद हैं, जबकि कुछ युवा चेहरों को भी वर्ल्ड कप जैसे बड़े मंच पर अपनी जगह बनाने का मौका मिला है। हॉकी इंडिया ने 21 जुलाई को 20 सदस्यीय टीम की घोषणा की थी।
भारत के सामने चुनौती केवल पूल मैच जीतने तक सीमित नहीं है। टीम की बड़ी कोशिश टूर्नामेंट के अगले दौर में जगह बनाने और 1975 के बाद पहली बार पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप का खिताब जीतने की होगी। मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने भी टीम के संतुलन और प्रदर्शन के आधार पर चुने गए खिलाड़ियों पर भरोसा जताया है।
भारत को पूल डी में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स के साथ रखा गया है। एफआईएच के आधिकारिक ड्रॉ के मुताबिक पुरुष वर्ग के चार पूल में चार-चार टीमें हैं और भारत का पूरा पूल चरण नीदरलैंड्स में खेला जाएगा।
भारत का पहला मुकाबला 15 अगस्त को वेल्स से अम्स्टेलवीन के वागेनर स्टेडियम में होगा। इसके बाद 17 अगस्त को इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला है। पूल चरण का सबसे चर्चित मैच 19 अगस्त को पाकिस्तान के खिलाफ होगा।
शेड्यूल पर एक अहम बात ध्यान देने वाली है। भारत का वेल्स के खिलाफ मैच 15 अगस्त को है, जबकि इंग्लैंड और पाकिस्तान भी इसी पूल में हैं। इसका मतलब है कि शुरुआती तीन मुकाबलों में हर अंक की अहमियत रहेगी, खासकर तब जब टीमों के बीच गोल अंतर जैसी स्थिति आगे की राह प्रभावित कर सकती है।
भारतीय टीम की कमान हरमनप्रीत सिंह के हाथों में है। वह टीम के डिफेंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ पेनल्टी कॉर्नर पर ड्रैग-फ्लिक के जरिए भारत के लिए गोल का बड़ा माध्यम भी हैं। हॉकी इंडिया के आधिकारिक स्क्वॉड रिकॉर्ड में हरमनप्रीत के साथ अमित रोहिदास, जरमनप्रीत सिंह, जुगराज सिंह, संजय, सुमित और यशदीप सिवाच को डिफेंस में रखा गया है।
टीम के पास मिडफील्ड में भी अनुभव है। मनप्रीत सिंह, हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद और नीलकांत शर्मा के साथ राजिंदर सिंह और आदित्य अर्जुन लालागे को शामिल किया गया है। इस संयोजन से भारत के पास गेंद पर नियंत्रण, ट्रांजिशन और अटैक को गति देने के लिए अलग-अलग विकल्प मौजूद हैं।
फॉरवर्ड लाइन में दिलप्रीत सिंह, शिलानंद लाकड़ा, सुखजीत सिंह, मंदीप सिंह और अभिषेक शामिल हैं। इस यूनिट से भारत को सर्कल में तेज मूवमेंट और गोल करने के मौके बनाने की उम्मीद रहेगी।
हॉकी इंडिया की ओर से घोषित टीम में अनुभवी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के साथ ऐसे खिलाड़ी भी हैं जिन्हें बड़े टूर्नामेंट में अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर मिलेगा। गोलकीपिंग में मोहित एचएस और सूरज करकेरा को जगह मिली है।
आधिकारिक रिकॉर्ड में सूरज करकेरा के पास लंबा अंतरराष्ट्रीय अनुभव दर्ज है, जबकि डिफेंस में हरमनप्रीत सिंह और अमित रोहिदास जैसे खिलाड़ी लंबे समय से भारतीय टीम के अहम हिस्से रहे हैं। इससे टीम के पास दबाव वाले मुकाबलों में अनुभव का आधार मौजूद है।
मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने चयन को अनुभव और मौजूदा फॉर्म के संतुलन से जोड़ा है। उनके मुताबिक टीम की रणनीति प्रेस, काउंटर और प्रदर्शन के इर्द-गिर्द रहेगी। यह बयान भारत के संभावित गेम प्लान की दिशा का संकेत देता है, हालांकि वास्तविक असर टूर्नामेंट के मुकाबलों में ही स्पष्ट होगा।
भारत ने पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप का अपना एकमात्र खिताब 1975 में जीता था। एफआईएच और हॉकी इंडिया दोनों ने 2026 अभियान के संदर्भ में 1975 के बाद लंबे खिताबी इंतज़ार को रेखांकित किया है।
यह आंकड़ा भारतीय हॉकी के मौजूदा अभियान को ऐतिहासिक संदर्भ देता है, लेकिन इससे टीम पर अनावश्यक दबाव भी नहीं डाला जाना चाहिए। 2026 का टूर्नामेंट अलग परिस्थितियों में खेला जाएगा और मौजूदा प्रदर्शन ही भारत की वास्तविक स्थिति का पैमाना होगा।
पिछले वर्ल्ड कप में जर्मनी चैंपियन बना था। एफआईएच के मुताबिक 2023 पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप में जर्मनी ने तीसरी बार खिताब जीता था। इससे यह भी साफ होता है कि भारत के सामने केवल पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी ही नहीं, बल्कि यूरोप और ओशिनिया की मजबूत टीमों की चुनौती भी रहेगी।
भारत और पाकिस्तान का मुकाबला पूल चरण के सबसे ज्यादा चर्चा वाले मैचों में रहेगा। दोनों टीमें 19 अगस्त को आमने-सामने होंगी और यह मैच भारत के शुरुआती अभियान के अंतिम पूल मुकाबले के तौर पर निर्धारित है।
इस मुकाबले की अहमियत केवल प्रतिद्वंद्विता तक सीमित नहीं है। पूल चरण में टीम की स्थिति उस समय तक काफी हद तक स्पष्ट हो चुकी होगी, इसलिए पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबला अगले चरण की दिशा तय करने में भी अहम हो सकता है।
फिर भी भारतीय टीम के लिए वेल्स और इंग्लैंड के मुकाबलों को कमतर आंकना जोखिम भरा होगा। टूर्नामेंट के प्रारंभिक चरण में लगातार अंक हासिल करना आगे की राह को आसान करने के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।
भारतीय टीम के पास अनुभवी डिफेंडर और ड्रैग-फ्लिक विकल्प मौजूद हैं, लेकिन वर्ल्ड कप स्तर पर केवल पेनल्टी कॉर्नर की ताकत पर्याप्त नहीं होती। मैच की गति नियंत्रित करना, सर्कल के बाहर गेंद खोने से बचना और विरोधी टीम के काउंटर को रोकना भी उतना ही अहम होगा।
मिडफील्ड भारत के प्रदर्शन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। हार्दिक सिंह, मनप्रीत सिंह और विवेक सागर प्रसाद जैसे खिलाड़ियों से गेंद को डिफेंस से अटैक तक तेजी से पहुंचाने की जिम्मेदारी रहेगी। यहां संतुलन बिगड़ने पर भारत के फॉरवर्ड खिलाड़ियों को पर्याप्त मौके नहीं मिल सकते।
गोलकीपिंग भी निर्णायक भूमिका निभा सकती है। बड़े टूर्नामेंट में पेनल्टी कॉर्नर और सर्कल के अंदर के सीमित मौकों का परिणाम मैच का रुख बदल देता है। इसलिए भारत की चुनौती पूरे टीम स्ट्रक्चर से जुड़ी है, किसी एक खिलाड़ी से नहीं।
2026 पुरुष वर्ल्ड कप में 16 टीमें हिस्सा ले रही हैं। चार पूल में बांटी गई टीमों के बीच शुरुआती चरण के मुकाबले होंगे, जिसके बाद प्रतियोगिता आगे के चरण में बढ़ेगी। भारत का पूल नीदरलैंड्स में खेला जाएगा।
टूर्नामेंट के दो प्रमुख आयोजन स्थल हैं। नीदरलैंड्स में वागेनर स्टेडियम, अम्स्टेलवीन और बेल्जियम में बेल्फियस हॉकी एरीना, वाव्रे। एफआईएच के मुताबिक वागेनर स्टेडियम को वर्ल्ड कप के लिए 10 हजार से अधिक दर्शकों की मेजबानी के लिहाज से विस्तारित किया गया है।
भारत के सभी पूल मैच अम्स्टेलवीन में होंगे। घरेलू परिस्थितियों का फायदा भारत को नहीं मिलेगा, लेकिन एक ही वेन्यू पर पूल चरण खेलने से यात्रा संबंधी बदलाव कम रहेंगे। मैदान की परिस्थितियों के साथ जल्दी तालमेल बनाना टीम की शुरुआती प्राथमिकताओं में रहेगा।
भारत 15 अगस्त 2026 को वेल्स के खिलाफ अपना पहला पूल डी मुकाबला खेलेगा। इसके बाद 17 अगस्त को इंग्लैंड और 19 अगस्त को पाकिस्तान से मुकाबला होगा।
भारत को पुरुष वर्ग के पूल डी में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स के साथ रखा गया है।
डिफेंडर और ड्रैग-फ्लिकर हरमनप्रीत सिंह भारतीय टीम की कप्तानी करेंगे।
भारत के तीनों पूल मैच नीदरलैंड्स के अम्स्टेलवीन स्थित वागेनर स्टेडियम में होंगे।
भारत को पूल चरण में इंग्लैंड और पाकिस्तान जैसी मजबूत टीमों के साथ मुकाबला करना है। इसके साथ वेल्स के खिलाफ शुरुआती मैच में अच्छी शुरुआत करना भी अहम रहेगा। खिताब जीतने के लिए भारत को पूरे टूर्नामेंट में डिफेंस, मिडफील्ड और अटैक के बीच लगातार संतुलन बनाए रखना होगा।
भारत के लिए पहला लक्ष्य पूल चरण में मजबूत प्रदर्शन करना होगा। वेल्स के खिलाफ शुरुआती मैच में जीत टीम को आत्मविश्वास दे सकती है, जबकि इंग्लैंड और पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले भारत की वास्तविक प्रतिस्पर्धी क्षमता की कठिन परीक्षा होंगे।
टूर्नामेंट की शुरुआत से पहले किसी निश्चित खिताबी नतीजे का दावा करना उचित नहीं होगा। भारत के पास संतुलित स्क्वॉड और अनुभवी नेतृत्व है, लेकिन वर्ल्ड कप में मैच की परिस्थितियां, फिटनेस, पेनल्टी कॉर्नर की दक्षता और दबाव में फैसले परिणाम तय करेंगे।
भारत के सामने पूल डी में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स की चुनौती है। 1975 के बाद खिताब का इंतज़ार इस अभियान को अतिरिक्त महत्व देता है, लेकिन मैदान पर प्रदर्शन ही अंतिम कसौटी रहेगा। भारत का वर्ल्ड कप मिशन अब तैयारी से निकलकर प्रतिस्पर्धा के दौर में प्रवेश करने वाला है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।