ईरान सितंबर तक 95 मिलियन घन मीटर गैस बहाल करेगा
दक्षिण पार्स से ईरान की गैस रिकवरी को रफ्तार
युद्ध के बाद गैस उत्पादन बहाली में जुटा ईरान
ईरान ने संघर्ष के दौरान प्रभावित गैस उत्पादन को तेजी से बहाल करने की योजना बनाई है। सितंबर के अंत तक करीब 95 मिलियन घन मीटर दैनिक उत्पादन वापस लाने का लक्ष्य बताया गया है। दक्षिण पार्स इसकी केंद्रीय कड़ी है। हालांकि आधिकारिक ईरानी रिपोर्टों में खोई क्षमता की बहाली का आंकड़ा 100 मिलियन घन मीटर भी दिया गया है।
तेहरान | 11 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
ईरान ने युद्ध और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को हुए नुकसान के बाद गैस उत्पादन बहाल करने की कवायद तेज कर दी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक तेहरान सितंबर के अंत तक करीब 95 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन गैस उत्पादन वापस लाने की योजना पर काम कर रहा है। ईरान के लिए यह केवल उत्पादन का आंकड़ा नहीं है, बल्कि बिजली, उद्योग, घरेलू ईंधन और पेट्रोकेमिकल सेक्टर की स्थिरता से जुड़ा अहम मामला है।
ईरानी पेट्रोलियम मंत्रालय से जुड़े आधिकारिक बयानों में युद्ध के दौरान प्रभावित गैस उत्पादन को बहाल करने की योजना सामने आई है। मंत्रालय की शाना में प्रकाशित एक रिपोर्ट में खोई हुई गैस उत्पादन क्षमता में 100 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन की बहाली का लक्ष्य बताया गया था। इसलिए 95 मिलियन घन मीटर का आंकड़ा और आधिकारिक 100 मिलियन घन मीटर का आंकड़ा अलग-अलग रिपोर्टिंग चरणों या लक्ष्य के अलग दायरे को दर्शा सकते हैं।
ईरान के गैस सेक्टर में दक्षिण पार्स की स्थिति केंद्रीय है। यह विशाल गैस फील्ड कतर के नॉर्थ फील्ड से जुड़ी साझा भूगर्भीय संरचना का हिस्सा है और ईरान की घरेलू ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण योगदान देता है।
मई में ईरान ने दक्षिण पार्स की तीन ऑफशोर प्लेटफॉर्म से उत्पादन फिर शुरू करने की घोषणा की थी। पार्स ऑयल एंड गैस कंपनी के प्रमुख के मुताबिक इन प्लेटफॉर्म को सीधे नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन संबंधित ऑनशोर प्रोसेसिंग क्षमता को हुए नुकसान के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ था।
इससे एक अहम तथ्य सामने आता है। गैस उत्पादन बहाल करने के लिए केवल गैस फील्ड में कुओं को चालू करना पर्याप्त नहीं है। प्लेटफॉर्म, पाइपलाइन, प्रोसेसिंग यूनिट, कंप्रेशन सिस्टम और दूसरे सहायक ढांचे को भी सुरक्षित और परिचालन योग्य बनाना पड़ता है।
2026 के संघर्ष में ईरान के तेल, गैस और पेट्रोकेमिकल ढांचे को नुकसान पहुंचा। दक्षिण पार्स से जुड़ी सुविधाएं भी प्रभावित हुईं और ऊर्जा उत्पादन की सामान्य प्रक्रिया में व्यवधान आया।
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार मई के अंत तक दक्षिण पार्स की तीन ऑफशोर प्लेटफॉर्म से उत्पादन बहाल किया गया था। उत्पादन को वैकल्पिक प्रोसेसिंग प्लांट की ओर भेजने की व्यवस्था की गई, जबकि क्षतिग्रस्त सुविधाओं की मरम्मत जारी थी।
ईरान के लिए यह स्थिति इसलिए मुश्किल है क्योंकि गैस का बड़ा हिस्सा घरेलू खपत में जाता है। बिजली उत्पादन, घरेलू हीटिंग, उद्योग और पेट्रोकेमिकल गतिविधियां गैस आपूर्ति पर निर्भर हैं। उत्पादन में कमी इसलिए पूरे ऊर्जा सिस्टम पर असर डालती है।
95 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन का उत्पादन अंतरराष्ट्रीय गैस बाजार के संदर्भ में देखने पर बड़ा आंकड़ा है। हालांकि इसे ईरान के कुल उत्पादन के बराबर नहीं समझना चाहिए। यहां बात संघर्ष के कारण खोई उत्पादन क्षमता के एक हिस्से को वापस लाने की योजना से जुड़ी है।
ईरान पहले से ही दुनिया के प्रमुख प्राकृतिक गैस उत्पादकों में शामिल है। अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के पुराने उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2019 में ईरान ने 8.4 ट्रिलियन क्यूबिक फीट ड्राई नेचुरल गैस का उत्पादन किया था।
लेकिन ईरान की चुनौती केवल उत्पादन क्षमता नहीं है। घरेलू मांग लगातार ऊंची है और गैस का बड़ा हिस्सा देश के भीतर इस्तेमाल होता है। इसी वजह से उत्पादन में किसी बड़े व्यवधान का असर बिजली उत्पादन और औद्योगिक गतिविधियों तक पहुंच सकता है।
ईरान में प्राकृतिक गैस ऊर्जा सिस्टम की रीढ़ है। बिजली उत्पादन के अलावा घरेलू उपयोग और औद्योगिक गतिविधियों में इसकी व्यापक जरूरत है।
ईरान ओपन डेटा की जुलाई रिपोर्ट में कहा गया था कि देश में गैस उत्पादन में गिरावट दर्ज हुई है और ऊर्जा संकट के कारण बिजली आयात की स्थिति भी बनी। रिपोर्ट ने दक्षिण पार्स पर दबाव, पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश की कमी और बढ़ती घरेलू मांग को दीर्घकालिक चुनौतियों से जोड़ा।
इस पृष्ठभूमि में युद्ध के बाद 95 मिलियन घन मीटर दैनिक उत्पादन वापस लाने का लक्ष्य केवल युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई नहीं है। यह पहले से मौजूद संरचनात्मक दबाव को संभालने की कोशिश भी है।
ईरान युद्ध के बीच भी दक्षिण पार्स में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के प्रयास करता रहा है। जून में फेज 11 में एक नया उत्पादन कुआं चालू किया गया था। ईरानी अधिकारियों के अनुसार इससे इस फेज का दैनिक रिच गैस उत्पादन 26 मिलियन घन मीटर से अधिक हो गया।
नए कुएं से लगभग 2.5 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन अतिरिक्त उत्पादन क्षमता जुड़ने की बात कही गई थी। इससे संकेत मिलता है कि ईरान की रणनीति केवल क्षतिग्रस्त सुविधाओं की मरम्मत तक सीमित नहीं है। वह उत्पादन को स्थिर रखने और साझा गैस रिजर्व से अपनी हिस्सेदारी सुरक्षित करने के लिए नई क्षमता भी जोड़ना चाहता है।
95 मिलियन घन मीटर की बहाली का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसकी सफलता कई परिचालन कारकों पर निर्भर करेगी। सबसे पहले क्षतिग्रस्त प्रोसेसिंग और यूटिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत पूरी करनी होगी।
दूसरी चुनौती उपकरण और तकनीकी सप्लाई की है। ईरान पर लंबे समय से प्रतिबंध हैं, जिनका असर विदेशी तकनीक, वित्तपोषण और कुछ औद्योगिक उपकरणों तक पहुंच पर पड़ता है। इससे बड़े ऊर्जा प्रोजेक्ट की मरम्मत और आधुनिकीकरण की गति प्रभावित हो सकती है।
तीसरी चुनौती सुरक्षा है। यदि ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर दोबारा हमले होते हैं तो उत्पादन बहाली की टाइमलाइन बदल सकती है। इसलिए सितंबर का लक्ष्य एक योजना है, सुनिश्चित परिणाम नहीं।
गैस उत्पादन की बहाली का संबंध केवल घरेलू ईंधन से नहीं है। गैस फीडस्टॉक और ऊर्जा के रूप में पेट्रोकेमिकल उद्योग के लिए भी अहम है।
जून में अनादोलु एजेंसी ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया था कि युद्ध में बंद हुई करीब 89 प्रतिशत पेट्रोकेमिकल यूनिट दोबारा उत्पादन में लौट चुकी थीं। हालांकि कुछ इकाइयां अभी पूर्ण क्षमता तक नहीं पहुंची थीं।
इससे ऊर्जा सिस्टम की आपसी निर्भरता स्पष्ट होती है। गैस उत्पादन में सुधार से बिजली और घरेलू आपूर्ति को राहत मिल सकती है, लेकिन पेट्रोकेमिकल सेक्टर की पूरी रिकवरी के लिए गैस, बिजली, रिफाइनिंग और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर का समानांतर सामान्य होना जरूरी है।
ईरान की गैस उत्पादन बहाली का तत्काल असर वैश्विक बाजार पर सीमित रह सकता है, क्योंकि ईरान की अधिकांश प्राकृतिक गैस घरेलू खपत में जाती है। ईरान का गैस निर्यात भी तेल की तुलना में सीमित है।
फिर भी क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है। दक्षिण पार्स और फारस की खाड़ी का ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रीय गैस और एलएनजी सिस्टम से जुड़ा हुआ है। लंबे समय तक उत्पादन बाधित रहने पर बिजली, पेट्रोकेमिकल और ऊर्जा परिवहन से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं।
रॉयटर्स के अनुसार हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात अभी सामान्य स्तर पर नहीं लौटा है और तेल निर्यात भी प्रभावित हुआ है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ईरान की ऊर्जा रिकवरी व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा और शिपिंग हालात से अलग नहीं है।
नहीं। उत्पादन बहाली एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यह ईरान के ऊर्जा संकट का पूरा समाधान नहीं है।
देश को पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश की कमी, उच्च घरेलू मांग और दक्षिण पार्स के उत्पादन दबाव जैसी दीर्घकालिक चुनौतियों का सामना करना है। ईरान ओपन डेटा ने भी गैस उत्पादन में गिरावट और घरेलू ऊर्जा मांग के दबाव को संरचनात्मक समस्या के रूप में रेखांकित किया है।
यानी सितंबर तक 95 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन की क्षमता बहाल हो जाती है तो यह युद्ध के बाद की रिकवरी में अहम पेशरफ़्त होगी। लेकिन इससे ईरान की दीर्घकालिक गैस आपूर्ति सुरक्षा अपने आप सुनिश्चित नहीं होगी।
उपलब्ध रिपोर्टिंग में सितंबर के अंत तक करीब 95 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन उत्पादन बहाल करने की योजना सामने आई है। ईरानी पेट्रोलियम मंत्रालय की एक रिपोर्ट में खोई उत्पादन क्षमता की बहाली का आंकड़ा 100 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन भी दिया गया है।
दक्षिण पार्स ईरान की गैस व्यवस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां उत्पादन और प्रोसेसिंग से जुड़ी सुविधाओं की स्थिति देश की घरेलू ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर डालती है।
हां। मई में दक्षिण पार्स की तीन ऑफशोर प्लेटफॉर्म से उत्पादन बहाल होने की सूचना दी गई थी। इसके साथ क्षतिग्रस्त प्रोसेसिंग सुविधाओं की मरम्मत भी जारी थी।
ईरान बड़ा गैस उत्पादक है, लेकिन उसकी घरेलू खपत भी बहुत अधिक है। इसलिए उत्पादन में बढ़ोतरी का बड़ा हिस्सा पहले घरेलू ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में इस्तेमाल होता है।
नहीं। यह ईरानी योजना और लक्ष्य है। वास्तविक उपलब्धि मरम्मत की गति, सुरक्षा हालात, उपकरणों की उपलब्धता और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति पर निर्भर करेगी।
सितंबर तक ईरान की गैस रिकवरी पर नजर रखने के लिए वास्तविक उत्पादन आंकड़े सबसे महत्वपूर्ण होंगे। केवल सरकारी घोषणा से यह तय नहीं होगा कि 95 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन की क्षमता वास्तव में सिस्टम में वापस आई या नहीं।
दक्षिण पार्स की प्लेटफॉर्म गतिविधि, प्रोसेसिंग प्लांट की क्षमता, घरेलू गैस आपूर्ति और बिजली उत्पादन से जुड़े आंकड़े ज्यादा स्पष्ट तस्वीर देंगे। इसके साथ हॉर्मुज़ में सुरक्षा हालात भी अहम रहेंगे, क्योंकि क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे की स्थिरता समुद्री और सैन्य घटनाक्रम से प्रभावित हो सकती है।
ईरान का सितंबर तक 95 मिलियन घन मीटर प्रतिदिन गैस उत्पादन बहाल करने का लक्ष्य युद्ध के बाद ऊर्जा सिस्टम को स्थिर करने की बड़ी कोशिश है। उपलब्ध रिकॉर्ड यह भी दिखाते हैं कि दक्षिण पार्स में उत्पादन की बहाली शुरू हो चुकी है और नए कुओं से क्षमता बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।
हालांकि 95 और 100 मिलियन घन मीटर के आंकड़ों में रिपोर्टिंग का अंतर मौजूद है। इसलिए अंतिम उपलब्धि का आकलन आधिकारिक उत्पादन डेटा आने के बाद ही करना ज्यादा मुनासिब होगा।
ईरान के लिए असली चुनौती सितंबर की समयसीमा से आगे है। उसे युद्ध से क्षतिग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत के साथ पुराने ऊर्जा ढांचे, निवेश की कमी और बढ़ती घरेलू मांग से भी निपटना होगा। गैस उत्पादन की बहाली इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा है, लेकिन अकेले इससे ईरान का ऊर्जा संकट खत्म नहीं होगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।