अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन 286 दिन समुद्र में रहने के बाद थाईलैंड पहुंचा। लंबे अभियान के बाद जहाज के बाहरी हिस्से पर जंग साफ दिखाई दी।
लाएम चाबांग, थाईलैंड | 5 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
286 दिनों बाद बंदरगाह पहुंचा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर
अमेरिकी नौसेना का विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन 286 दिनों तक समुद्र में रहने के बाद 2 सितंबर को थाईलैंड के लाएम चाबांग बंदरगाह पहुंचा। यह लंबे सैन्य अभियान के बाद जहाज की पहली नियमित और लंबी बंदरगाह यात्रा थी।
करीब 1,100 फीट लंबे इस युद्धपोत के बाहरी हिस्से पर जगह-जगह जंग और पेंट के खराब होने के निशान दिखाई दिए। तस्वीरों के सामने आने के बाद जहाज की हालत को लेकर अंतरराष्ट्रीय
स्तर पर चर्चा शुरू हुई।
जंग क्यों दिखाई दी
लंबे समय तक समुद्र में रहने वाले किसी भी बड़े युद्धपोत के लिए खारे पानी का लगातार संपर्क बड़ी चुनौती होता है। जहाज की जलरेखा और बाहरी धातु पर क्षरण की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
अमेरिकी नौसेना के पूर्व अधिकारी कार्ल शूस्टर ने सीएनएन को बताया कि 60 दिन या उससे अधिक समय तक लगातार समुद्र में रहने वाले जहाज पर जलरेखा के आसपास जंग दिखाई देना
असामान्य नहीं है। उनके मुताबिक इस तरह की मरम्मत समुद्र में सक्रिय अभियान के दौरान करना मुश्किल होता है।
उनके आकलन के अनुसार जंग हटाने के लिए सतह को घिसना, जंग-रोधी प्राइमर लगाना और फिर नौसैनिक पेंट की कई परतें चढ़ाना पड़ती हैं। इस काम में करीब 30 दिन लग सकते हैं।
जहाज कहां से आया
यूएसएस अब्राहम लिंकन ने नवंबर 2025 में सैन डिएगो से अपना अभियान शुरू किया था। इस दौरान जहाज और उसके करीब 5,000 नौसैनिकों तथा मरीन ने लंबे समय तक समुद्र में रहकर
अभियान जारी रखा।
अमेरिकी नौसेना के मुताबिक जहाज ने 286 दिनों की तैनाती के दौरान मध्य पूर्व में लंबे समय तक अभियान चलाया। इस अवधि में अमेरिकी सेना और ईरान के बीच जारी युद्ध के दौरान लिंकन
कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ने क्षेत्र में सैन्य अभियानों को समर्थन दिया।
208 दिनों का लगातार समुद्री सफर
लिंकन की पूरी तैनाती 286 दिनों की रही, लेकिन इसमें एक लगातार समुद्री अवधि 208 दिनों तक चली। यह अमेरिकी नौसेना के लिए असाधारण रूप से लंबी अवधि है।
स्टार्स एंड स्ट्राइप्स के मुताबिक एयरक्राफ्ट कैरियर आम तौर पर लगभग 30 से 45 दिनों के अंतराल पर बंदरगाह पहुंचते हैं। वहां उन्हें रखरखाव, ईंधन और सामान की आपूर्ति तथा चालक दल
को आराम देने का अवसर मिलता है।
लिंकन के मामले में यह नियमित व्यवस्था लंबे समय तक संभव नहीं रही।
ईरान युद्ध ने बढ़ाई चुनौती
यूएसएस अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया में बीता। अमेरिकी नौसेना के अनुसार कैरियर स्ट्राइक ग्रुप ने अमेरिकी सैन्य अभियानों के दौरान ईरान के खिलाफ
अभियान में भूमिका निभाई।
लंबी तैनाती के दौरान आपूर्ति भी चुनौती बनी। यूएसएनआई न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी हमलों के खतरे के कारण मध्य पूर्व के कुछ लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक पहुंच प्रभावित हुई और
अमेरिकी आपूर्ति जहाजों को लंबी दूरी तय करके ईंधन तथा अन्य सामग्री पहुंचानी पड़ी।
चालक दल की स्थिति पर भी सवाल
जहाज की बाहरी हालत के साथ चालक दल की स्थिति को लेकर भी सवाल उठे हैं। कुछ रिपोर्टों में लंबे अभियान के दौरान मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं और भोजन तथा दूसरी आवश्यक
वस्तुओं की कमी का जिक्र किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार कुछ परिवारों ने भी इतने लंबे अभियान को लेकर चिंता जताई। दूसरी ओर अमेरिकी नौसेना ने जहाज के लंबे अभियान और चालक दल की पेशेवर क्षमता पर जोर दिया।
क्या जंग से जहाज की क्षमता प्रभावित हुई?
इस सवाल का जवाब अभी सावधानी से देना होगा। जहाज पर दिखाई देने वाली जंग अपने आप में यह साबित नहीं करती कि यूएसएस अब्राहम लिंकन की युद्ध क्षमता या सुरक्षा प्रभावित हुई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक लंबे समय तक समुद्र में रहने वाले जहाजों पर बाहरी क्षरण सामान्य रखरखाव की समस्या हो सकती है। सक्रिय सैन्य अभियान के दौरान प्राथमिकता संचालन को दी जाती
है, जबकि व्यापक बाहरी संरक्षण और पेंटिंग का काम बंदरगाह पर किया जाता है।
थाईलैंड में मिला आराम और रखरखाव का मौका
लाएम चाबांग में पहुंचने के बाद चालक दल को आराम और मनोरंजन का अवसर दिया गया। करीब 5,000 नौसैनिकों और मरीन के लिए यह लंबी तैनाती के बाद पहला बड़ा विश्राम पड़ाव बना।
जहाज के साथ कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के दूसरे युद्धपोत भी थाईलैंड पहुंचे। यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर और यूएसएस रॉबर्ट स्मॉल्स ने आसपास के बंदरगाहों पर ठहराव किया।
अगला चरण क्या होगा
अमेरिकी नौसेना ने लिंकन के थाईलैंड प्रवास को चालक दल के आराम और पुनर्स्थापन के लिए महत्वपूर्ण बताया है। जहाज की वापसी यात्रा के दौरान आगे रखरखाव और आपूर्ति की जरूरतें
भी अहम रहेंगी।
यूएसएस अब्राहम लिंकन की 286 दिनों की तैनाती अमेरिकी नौसेना के लंबे एयरक्राफ्ट कैरियर अभियानों की बढ़ती प्रवृत्ति को भी सामने लाती है। यूएसएनआई न्यूज के अनुसार हाल के वर्षों में
अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की तैनाती पहले की तुलना में अधिक लंबी हुई है।
तस्वीर से बड़ा सवाल
थाईलैंड के बंदरगाह पर यूएसएस अब्राहम लिंकन की तस्वीरों ने जहाज के बाहरी क्षरण को सामने ला दिया है। लेकिन इस कहानी का व्यापक पहलू केवल जंग नहीं है।
286 दिनों तक समुद्र में लगातार सैन्य अभियान चलाना किसी भी नौसैनिक बल के लिए लॉजिस्टिक्स, रखरखाव और मानव संसाधन की बड़ी परीक्षा है। लिंकन की वापसी इस बात का भी संकेत
है कि लंबे समय तक चलने वाले युद्ध अभियानों में जहाज की मशीनरी के साथ-साथ उसके चालक दल पर पड़ने वाले दबाव को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।