जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर अखिलेश यादव का हमला, ध्वस्तीकरण रोकने की मांग
Asif Khan
•
2026-07-23 21:57:44
जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर सपा का बड़ा कदम, डीएम को सौंपा ज्ञापन
अखिलेश यादव बोले, शिक्षा नहीं राजनीति का निशाना बनी जौहर यूनिवर्सिटी?
रामपुर से उठा नया सियासी सवाल, क्या रुकेगा जौहर यूनिवर्सिटी ध्वस्तीकरण?
रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर विवाद फिर तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी ने प्रतिनिधिमंडल भेजकर जिलााधिकारी को ज्ञापन सौंपा और प्रस्तावित ध्वस्तीकरण रोकने की मांग की। पार्टी का कहना है कि यह शिक्षा और छात्रों के भविष्य का मुद्दा है। प्रशासन का पक्ष और कानूनी प्रक्रिया भी इस विवाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
📍रामपुर,
📰 23 जुलाई 2026
✍️ आसिफ खान
जौहर यूनिवर्सिटी विवाद पर सपा का विरोध
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा संस्थानों को राजनीतिक नजरिये से देख रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की हिफाजत समाज और लोकतंत्र दोनों के लिए जरूरी है।
प्रतिनिधिमंडल ने जिलााधिकारी को सौंपा ज्ञापन
अखिलेश यादव के निर्देश पर उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल रामपुर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने जिलााधिकारी को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि विश्वविद्यालय हजारों आर्थिक रूप से कमजोर, पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक और वंचित विद्यार्थियों की शिक्षा से जुड़ा संस्थान है। पार्टी ने इसे छात्रहित और शिक्षा के अधिकार का विषय बताया।
अखिलेश यादव ने क्या कहा
अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा सरकार शिक्षा, रोजगार और युवाओं के मुद्दों की बजाय राजनीतिक टकराव पर अधिक ध्यान दे रही है। उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए देशभर से समर्थन की अपील की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि रामपुर में शिक्षा को बचाने का आंदोलन चल रहा है और इसे छात्रों के भविष्य से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
विपक्ष का संवैधानिक तर्क
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे ने कहा कि यदि किसी विश्वविद्यालय की इमारत पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होती है तो यह शिक्षा के अधिकार और संवैधानिक भावना के विपरीत माना जा सकता है। यह विपक्ष का राजनीतिक और संवैधानिक तर्क है।
प्रशासनिक और कानूनी पक्ष
जौहर यूनिवर्सिटी पिछले कई वर्षों से विभिन्न कानूनी और प्रशासनिक विवादों का हिस्सा रही है। विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ मामलों में अदालतों और प्रशासनिक एजेंसियों की कार्रवाई पहले भी सामने आ चुकी है। प्रस्तावित ध्वस्तीकरण से जुड़ी प्रक्रिया का अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासनिक और न्यायिक संस्थाओं के अधिकार क्षेत्र में आता है।
समाचार लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से समाजवादी पार्टी के आरोपों पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला
यह विवाद केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं है। इसमें शिक्षा संस्थानों की स्वायत्तता, सरकारी कार्रवाई, संपत्ति संबंधी नियम, न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक विमर्श जैसे कई पहलू जुड़े हुए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रमुख बहस का विषय बन सकता है।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। समाजवादी पार्टी ने कार्रवाई रोकने की मांग की है, जबकि अंतिम स्थिति प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने पर स्पष्ट होगी। इस पूरे मामले में सभी पक्षों के आधिकारिक रुख और न्यायिक निर्णय महत्वपूर्ण रहेंगे।
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Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।