आईआईएम बेंगलुरु में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की आर्थिक तरक्की का आधार सरकारी खर्च नहीं बल्कि उद्यमिता, मजबूत संस्थाएं और जनविश्वास होना चाहिए। उन्होंने मिशन युवा, वित्तीय पहुंच और गुणवत्ता आधारित विकास मॉडल पर जोर दिया।
📍 स्थान: बेंगलुरु
📰 दिनांक: 01 अगस्त 2026
✍️ By Asif Khan
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि प्रदेश की दीर्घकालिक आर्थिक मजबूती सरकारी अनुदानों या सार्वजनिक खर्च से नहीं बल्कि उद्यमिता, भरोसे और मजबूत संस्थागत ढांचे से सुनिश्चित होगी। उनका कहना है कि सरकार बुनियादी ढांचा तैयार कर सकती है, लेकिन आर्थिक समृद्धि तभी संभव है जब नागरिकों को अपने भविष्य और अपने प्रयासों पर विश्वास हो।
आईआईएम बेंगलुरु एलुमनाई लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026 में दिया गया यह संदेश ऐसे समय आया है जब जम्मू-कश्मीर में निवेश, पर्यटन और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ाने पर लगातार चर्चा हो रही है।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इक्कीसवीं सदी की सबसे महत्वपूर्ण उत्पादक शक्ति उद्यमिता है। उनके अनुसार सरकार का काम कारोबार चलाना नहीं बल्कि ऐसा माहौल तैयार करना है जिसमें नए उद्योग, स्टार्टअप और स्थानीय कारोबार विकसित हो सकें।
उन्होंने कहा कि लोगों को वित्त, बाजार, प्रौद्योगिकी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए ताकि अधिक से अधिक युवा अपना व्यवसाय शुरू कर सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक विकास केवल सड़क, पुल, स्कूल और अस्पताल बनाने से नहीं आता। सबसे बड़ी पूंजी लोगों का विश्वास होता है।
उन्होंने कहा कि यदि नागरिकों को यह भरोसा हो कि उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिलेगा और नीतियां स्थिर रहेंगी, तभी निजी निवेश और उद्यमिता को गति मिलेगी। उनके अनुसार विश्वास किसी भी अर्थव्यवस्था का सबसे उत्पादक बुनियादी ढांचा है।
अपने संबोधन में उमर अब्दुल्ला ने स्वतंत्रता के बाद जम्मू-कश्मीर में लागू भूमि सुधारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में भूमि के व्यापक स्वामित्व ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी थी।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में उसी सोच को उद्यमिता के माध्यम से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। हालांकि उद्यमिता भूमि की तरह वितरित नहीं की जा सकती, इसलिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था और अवसरों का निर्माण आवश्यक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार की "मिशन युवा" योजना इसी दृष्टिकोण के साथ शुरू की गई है। योजना के तहत संभावित उद्यमियों की पहचान व्यापक सर्वेक्षण के माध्यम से की जा रही है।
इसके बाद उन्हें वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, बाजार से जुड़ाव और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि वे आत्मनिर्भर व्यवसाय स्थापित कर सकें।
उमर अब्दुल्ला ने स्वीकार किया कि दशकों तक आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों के कारण जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा आधारित अर्थव्यवस्था विकसित हुई, जहां निवेश और विस्तार की तुलना में सुरक्षा आवश्यकताओं को प्राथमिकता मिली।
उन्होंने कहा कि अब आर्थिक पुनर्निर्माण के लिए सबसे पहले विश्वास बहाल करना होगा ताकि निजी निवेशक और स्थानीय उद्यमी भविष्य को लेकर सकारात्मक निर्णय ले सकें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने बड़े आर्थिक केंद्रों को और अधिक मजबूत बनाया है। उन्होंने स्वीकार किया कि जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियां बेंगलुरु जैसी नहीं हैं।
हालांकि उनका मानना है कि प्रदेश भारत की समग्र आर्थिक वृद्धि का लाभ उठाकर अपने पारंपरिक क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की वास्तविक ताकत बागवानी, हस्तशिल्प और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में मौजूद है। इन क्षेत्रों में केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय गुणवत्ता, ब्रांडिंग और मूल्य संवर्धन पर ध्यान देना होगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार पर्वतीय अर्थव्यवस्थाएं मात्रा नहीं बल्कि विशिष्टता और उच्च गुणवत्ता के आधार पर वैश्विक पहचान बनाती हैं।
अर्थशास्त्रियों का एक वर्ग मानता है कि उद्यमिता आधारित मॉडल दीर्घकालिक विकास के लिए प्रभावी हो सकता है क्योंकि इससे निजी निवेश, रोजगार और स्थानीय नवाचार को बढ़ावा मिलता है।
दूसरी ओर कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सरकारी निवेश और सार्वजनिक व्यय की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण रहेगी। उनके अनुसार उद्यमिता को बढ़ावा देने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और सामाजिक सुरक्षा पर सरकारी खर्च जारी रहना चाहिए।
उमर अब्दुल्ला का दृष्टिकोण निजी क्षेत्र और स्थानीय कारोबार को मजबूत करने पर केंद्रित है, लेकिन इसके सफल होने के लिए नीति स्थिरता, निवेशकों का भरोसा, बेहतर कानून व्यवस्था, वित्तीय पहुंच और बाज़ार से मजबूत जुड़ाव भी आवश्यक होगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इन सभी पहलुओं पर समानांतर काम हुआ तो उद्यमिता रोजगार सृजन और आर्थिक विविधीकरण का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
जम्मू-कश्मीर आने वाले वर्षों में पर्यटन, कृषि आधारित उद्योग, फूड प्रोसेसिंग, हस्तशिल्प, डिजिटल सेवाओं और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
यदि मिशन युवा जैसी योजनाएं प्रभावी क्रियान्वयन के साथ आगे बढ़ती हैं और निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत होता है, तो प्रदेश सरकारी अनुदानों पर निर्भरता घटाकर आत्मनिर्भर आर्थिक मॉडल की ओर बढ़ सकता है।
उमर अब्दुल्ला का संदेश स्पष्ट है कि कश्मीर की उद्यमिता को केंद्र में रखकर विकास का नया मॉडल तैयार किया जाए, जहां सरकार अवसर पैदा करे और नागरिक आर्थिक परिवर्तन के भागीदार बनें।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।