अनिल अंबानी समूह से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामलों में ईडी ने ₹510.17 करोड़ की नई संपत्तियां कुर्क की हैं। एजेंसी के मुताबिक़, अब तक कुल कार्रवाई लगभग ₹23,100 करोड़ तक पहुंच चुकी है।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 4 नवंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
अनिल अंबानी के रिलायंस समूह से जुड़े विभिन्न मामलों में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए करोड़ों रुपये की अतिरिक्त संपत्तियां कुर्क की हैं। एजेंसी की ओर से 3 नवंबर 2026 को सामने आई जानकारी के मुताबिक़, ताज़ा कार्रवाई में ₹510.17 करोड़ की परिसंपत्तियां शामिल हैं।
इनमें 2 चार्टर्ड विमान, महाराष्ट्र में ज़मीन और कार्यालय परिसर, तमिलनाडु में पवनचक्कियां तथा बैंक जमा और निवेश से जुड़ी वित्तीय परिसंपत्तियां शामिल हैं।
प्रवर्तन निदेशालय के मुताबिक़, समूह से संबंधित अलग-अलग जांचों में अब तक कुर्क या ज़ब्त संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग ₹23,100 करोड़ पहुंच चुका है। यह आंकड़ा किसी एक दिन की कार्रवाई का नहीं, बल्कि कई मामलों में अब तक की गई कार्रवाइयों का संयुक्त मूल्य है।
ईडी की जानकारी के अनुसार, ताज़ा कुर्की मुख्य रूप से 2 अलग-अलग जांचों से संबंधित है।
जांच से संबंधित कंपनियां | कुर्क संपत्तियों का मूल्य |
|---|---|
रिलायंस कम्युनिकेशंस | ₹247.12 करोड़ |
रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस | ₹263.05 करोड़ |
कुल | ₹510.17 करोड़ |
इन मामलों में बैंकिंग लेनदेन और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की जा रही है। संबंधित रकम कुर्क संपत्तियों का मूल्य दर्शाती है। इसे अदालत द्वारा प्रमाणित धोखाधड़ी की राशि समझना सही नहीं होगा।
रिलायंस कम्युनिकेशंस से संबंधित मामले में जिन संपत्तियों को कुर्क किया गया है, उनमें 2 चार्टर्ड विमान शामिल हैं।
इनकी पहचान डसॉल्ट फाल्कन 2000 और एम्ब्रेयर ईएमबी-135बीजे के रूप में बताई गई है। इनके अलावा महाराष्ट्र में 6 भूखंड और एक कार्यालय परिसर भी कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस से संबंधित मामले में तमिलनाडु की 2 पवनचक्कियां, बैंक बैलेंस, सावधि जमा, निवेश और प्राप्तियों से जुड़ी परिसंपत्तियां शामिल हैं।
प्रवर्तन निदेशालय की जांच में अनिल अंबानी समूह से संबंधित कई कंपनियों के नाम सामने आए हैं।
इनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस होम फाइनेंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस, रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस पावर और रिलायंस कैपिटल शामिल हैं।
हालांकि, किसी कंपनी का जांच के दायरे में होना उसके ख़िलाफ़ आरोप साबित होने के बराबर नहीं है। अलग-अलग कंपनियों से संबंधित आरोपों, लेनदेन और संपत्तियों का कानूनी परीक्षण संबंधित मामलों में किया जाना है।
ईडी के अनुसार, जांच में बैंकों और वित्तीय संस्थानों से प्राप्त धन के कथित दुरुपयोग, कॉरपोरेट परिसंपत्तियों को व्यक्तिगत फ़ायदे के लिए इस्तेमाल करने और विदेशों में धन स्थानांतरित करने जैसी गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है।
एजेंसी ने दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता के कथित दुरुपयोग का मुद्दा भी उठाया है।
ईडी का आरोप है कि सार्वजनिक धन का एक हिस्सा प्रमोटरों और उनके परिवार के व्यक्तिगत लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया।
ये प्रवर्तन निदेशालय के आरोप और जांच संबंधी निष्कर्ष हैं। इन्हें अदालत द्वारा स्थापित अपराध या अंतिम न्यायिक फ़ैसले के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक़, मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित जांच की बुनियाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और पुलिस की आर्थिक अपराध शाखाओं द्वारा दर्ज विभिन्न प्राथमिकियों पर आधारित है।
प्रवर्तन निदेशालय धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और उनसे जुड़ी संपत्तियों की जांच कर रहा है।
इसके अतिरिक्त विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के अंतर्गत भी संबंधित मामलों की पड़ताल की गई है।
एजेंसी के अनुसार, इन मामलों में अब तक 10 व्यक्तियों को गिरफ़्तार किया गया है और धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत 6 अभियोजन शिकायतें दाख़िल की गई हैं। विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत भी एक शिकायत दाख़िल किए जाने की जानकारी सामने आई है।
यह इस पूरे मामले का एक अहम कानूनी पहलू है।
प्रवर्तन निदेशालय की ओर से संपत्ति की अस्थायी कुर्की का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति या कंपनी को अदालत ने दोषी ठहरा दिया है।
कुर्की का मक़सद जांच और कानूनी कार्यवाही के दौरान संबंधित परिसंपत्तियों के हस्तांतरण या निपटान पर पाबंदी लगाना होता है।
अस्थायी कुर्की, संपत्ति की ज़ब्ती और अंतिम रूप से सरकार के पक्ष में संपत्ति का अधिग्रहण अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।
इसलिए लगभग ₹23,100 करोड़ के आंकड़े को अब तक कुर्क या ज़ब्त बताई गई परिसंपत्तियों के संयुक्त मूल्य के रूप में ही समझा जाना चाहिए।
4 नवंबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों में ताज़ा कार्रवाई पर समूह की ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक़, समूह के प्रवक्ता से संपर्क किए जाने पर टिप्पणी नहीं की गई, जबकि दूसरी रिपोर्ट में बताया गया कि भेजे गए सवाल का जवाब नहीं मिला।
समूह या संबंधित कंपनियों की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण आने पर उसे इस रिपोर्ट में शामिल किया जाना आवश्यक होगा।
इस मामले में अब निगाहें कुर्की आदेशों की कानूनी समीक्षा, वित्तीय लेनदेन की जांच और संबंधित अदालतों में चलने वाली कार्यवाही पर रहेंगी।
जांच एजेंसी को अपने आरोपों के समर्थन में दस्तावेज़ और अन्य साक्ष्य पेश करने होंगे। संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों को भी कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार है।
मामले की अंतिम स्थिति जांच, न्यायिक परीक्षण और सक्षम प्राधिकरणों के फ़ैसलों पर निर्भर करेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।