मुजफ्फरनगर में व्यापारी सुरक्षा गोष्ठी के दौरान पुलिस ने सीसीटीवी, रात्रि प्रकाश और नकदी परिवहन पर सतर्कता की सलाह दी। साइबर ठगी की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन की जानकारी भी दी गई।
📍 मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश
🗓️ 21 अक्टूबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
व्यापारियों की सुरक्षा पर पुलिस की बैठक
मुजफ्फरनगर में व्यापारियों की सुरक्षा और ऑनलाइन ठगी से बचाव को लेकर 21 अक्टूबर को रिजर्व पुलिस लाइन सभागार में गोष्ठी आयोजित हुई। पुलिस मीडिया सेल के उपलब्ध प्रेस नोट के अनुसार, एसपी अपराध इन्दु सिद्धार्थ ने बैठक की अध्यक्षता की। इस दौरान व्यापार मंडल के पदाधिकारियों से उनकी समस्याओं और सुरक्षा संबंधी जरूरतों पर बातचीत हुई।
समस्याएं सुनकर निस्तारण के निर्देश
पुलिस के मुताबिक, गोष्ठी में व्यापारियों से सुझाव और फीडबैक लिया गया। एसपी अपराध ने उनकी समस्याओं की जानकारी लेकर संबंधित अधिकारियों को त्वरित और विधिक निस्तारण के निर्देश दिए।
प्रेस नोट में बताया गया कि बैठक में सीएफओ अनुराग कुमार, व्यापार मंडल के पदाधिकारी, नगर क्षेत्र के थाना प्रभारी और उपनिरीक्षक मौजूद रहे। पीडब्ल्यूडी, विद्युत विभाग और यातायात से जुड़े अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया।
सीसीटीवी की गुणवत्ता के साथ दिशा पर जोर
पुलिस के अनुसार, व्यापारियों को अपने प्रतिष्ठानों पर अच्छी गुणवत्ता के सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनकी दिशा सही रखने के लिए जागरूक किया गया। मुख्य मार्गों पर आपसी समन्वय से अतिरिक्त कैमरे लगाने की सलाह भी दी गई।
रात्रि सुरक्षा के लिए बाजारों में पर्याप्त रोशनी और सामूहिक रूप से सुरक्षा गार्ड या चौकीदार रखने पर जोर दिया गया।
व्यापारियों को दिए गए प्रमुख सुझाव
- प्रतिष्ठानों पर अच्छी गुणवत्ता के सीसीटीवी कैमरे लगाएं।
- कैमरों की दिशा सही रखें।
- मुख्य मार्गों पर समन्वय से अतिरिक्त कैमरों की व्यवस्था करें।
- रात में प्रकाश व्यवस्था मजबूत रखें।
- बाजार में सामूहिक सुरक्षा गार्ड या चौकीदार रखें।
- नकदी के परिवहन से पहले स्थानीय पुलिस को सूचित करें।
- संदिग्ध गतिविधि या किसी व्यक्ति से खतरे की स्थिति में पुलिस को तत्काल जानकारी दें।
ये सभी सुझाव उपलब्ध पुलिस प्रेस नोट में दर्ज हैं। इन्हें किसी नए अनिवार्य आदेश या दंडात्मक नियम के रूप में नहीं बताया गया है।
पुलिस का सुरक्षा आश्वासन
प्रेस नोट के मुताबिक, एसपी अपराध ने व्यापारियों को सुरक्षा का आश्वासन दिया और अपराधियों के खिलाफ चल रहे अभियानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुलिस गश्त और चेकिंग कर रही है। साथ ही व्यापारियों से अपने स्तर पर सतर्कता बरतने की अपेक्षा रखी गई।
उपलब्ध सामग्री में गश्त की संख्या, चेकिंग के नतीजे या अपराध में कमी के आंकड़े नहीं दिए गए हैं।
ऑनलाइन ठगी और 1930 की जानकारी
पुलिस के अनुसार, गोष्ठी में साइबर फ्रॉड के प्रचलित तरीकों और उनसे बचाव पर भी जानकारी दी गई। व्यापारियों को साइबर हेल्पलाइन 1930 तथा अन्य आपातकालीन सेवाओं के इस्तेमाल से अवगत कराया गया।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल भी ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 का उल्लेख करता है। cybercrime.gov.in
समन्वय बैठकों की पृष्ठभूमि
मुजफ्फरनगर पुलिस के मुताबिक, व्यापारियों और ट्रांसपोर्टर संघ के पदाधिकारियों के साथ समय-समय पर समन्वय गोष्ठियां आयोजित की जाती हैं। यह बैठक भी उसी क्रम का हिस्सा थी।
हालांकि, उपलब्ध प्रेस नोट में किसी खास चोरी, लूट या साइबर ठगी की घटना को इस गोष्ठी की वजह नहीं बताया गया है। इसलिए बैठक को किसी ताजा वारदात से जोड़ना उचित नहीं होगा।
अहम तारीख और जानकारी
- आयोजन की तारीख: 21 अक्टूबर 2026
- स्थान: रिजर्व पुलिस लाइन सभागार, मुजफ्फरनगर
- अध्यक्षता: एसपी अपराध इन्दु सिद्धार्थ
- उपस्थित अधिकारी: सीएफओ अनुराग कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी
- बताई गई साइबर हेल्पलाइन: 1930
आगे की कार्रवाई पर क्या जानकारी है?
पुलिस प्रेस नोट में संबंधित अधिकारियों को व्यापारियों की समस्याओं के निस्तारण के निर्देश देने की जानकारी है। अगली समीक्षा बैठक, कार्रवाई पूरी करने की समयसीमा या अतिरिक्त कैमरों की प्रस्तावित संख्या का उल्लेख नहीं है।
उपलब्ध पुलिस विवरण के अनुसार, गोष्ठी का केंद्र व्यापारियों की समस्याएं सुनना, बाजारों की निगरानी बेहतर करना और साइबर ठगी के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। इन निर्देशों के अमल और शिकायतों के निस्तारण की स्थिति आगे मिलने वाली जानकारी से स्पष्ट होगी।
सुरक्षा के सुझावों से आगे अमल की जरूरत
प्रेस नोट के आधार पर बैठक में पुलिस गश्त, बाजार की निगरानी और व्यापारियों की सतर्कता को साथ लेकर चलने पर जोर दिखता है। पीडब्ल्यूडी और विद्युत विभाग की मौजूदगी सुरक्षा संबंधी समस्याओं पर विभागीय समन्वय का अवसर देती है।
इस पहल के असर का आकलन शिकायतों के निस्तारण, कैमरों की कार्यशीलता और रात्रि प्रकाश व्यवस्था की वास्तविक स्थिति से होगा। उपलब्ध सामग्री में इन बिंदुओं के परिणाम या आंकड़े नहीं हैं। इसलिए अभी सुरक्षा व्यवस्था में सुधार का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।