📍 मुजफ्फरनगर/अलीगढ़ 🗓️ 17 सितंबर 2026 ✍️ wasi siddiqui
मुजफ्फरनगर की रहने वाली डॉ. सारा इकबाल ने चिकित्सा शोध के क्षेत्र में अहम उपलब्धि हासिल की है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एनेस्थीसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विभाग में जूनियर रेजिडेंट के तौर पर कार्यरत डॉ. सारा को आईसीएसीओएन-2026 में उनके मूल शोधपत्र के लिए प्रथम पुरस्कार मिला है।
11 से 13 सितंबर 2026 तक अलीगढ़ में आयोजित सम्मेलन में उनके शोधपत्र को पोस्टग्रेजुएट अवॉर्ड पेपर कैटेगरी में पहला स्थान दिया गया। सम्मेलन में देश और विदेश से एनेस्थीसियोलॉजी के विशेषज्ञ चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और पोस्टग्रेजुएट प्रशिक्षुओं ने हिस्सा लिया।
आईसीएसीओएन-2026 में शोधपत्र को मिली पहचान
इंडियन कॉलेज ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स की ओर से आयोजित 7वें इंटरनेशनल और 17वें नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडियन कॉलेज ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स का आयोजन जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, एएमयू के एनेस्थीसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विभाग ने किया था।
सम्मेलन का केंद्रीय विषय स्मार्ट एनेस्थीसिया की दिशा में तकनीक, इंटेलिजेंस और प्रिसीजन का एकीकरण रहा। वैज्ञानिक सत्रों, वर्कशॉप और शोध प्रस्तुतियों के दौरान एनेस्थीसिया, आधुनिक चिकित्सा तकनीक, प्रिसीजन मेडिसिन और मरीजों की बेहतर देखभाल से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
किस विषय पर था डॉ. सारा का शोध
डॉ. सारा इकबाल ने ऑफ-पंप कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी से जुड़े मरीजों पर अपना मूल शोध प्रस्तुत किया। उनके अध्ययन में इस बात का आकलन किया गया कि सर्जरी के बाद होने वाली तीव्र किडनी इंजरी की पहचान में साधारण ब्लड काउंट आधारित मार्कर और उन्नत साइटोकाइन बायोमार्कर में से किसकी उपयोगिता अधिक है।
शोध में सिस्टमेटिक इम्यून-इन्फ्लेमेशन इंडेक्स और इंटरल्यूकिन-6 को प्रमुख बायोमार्कर के तौर पर देखा गया। अध्ययन का फोकस पोस्टऑपरेटिव एक्यूट किडनी इंजरी की पहचान से जुड़ा था।
शोध में 80 मरीज शामिल
अध्ययन के दौरान ऑफ-पंप कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी से गुजरने वाले 80 मरीजों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने किडनी इंजरी के अलावा कई दूसरे क्लिनिकल आउटकम्स का भी आकलन किया।
इनमें पोस्टऑपरेटिव एट्रियल फिब्रिलेशन, मेजर एडवर्स कार्डियोवस्कुलर इवेंट्स, वासोएक्टिव-इनोट्रोपिक स्कोर, मैकेनिकल वेंटिलेशन की अवधि, आईसीयू में रहने की अवधि और 30-दिन की मृत्यु दर जैसे मानक शामिल थे।
साधारण और उन्नत बायोमार्कर की तुलना
शोध का एक महत्वपूर्ण पहलू साधारण ब्लड काउंट से हासिल होने वाले मार्कर और उन्नत साइटोकाइन बायोमार्कर की तुलनात्मक उपयोगिता का परीक्षण करना था। इस तरह अध्ययन ने सर्जरी के बाद मरीजों में संभावित जटिलताओं की पहचान से जुड़े दो अलग-अलग तरह के संकेतकों को एक साथ परखा।
ऑफ-पंप कोरोनरी बाईपास सर्जरी में हार्ट-लंग मशीन के इस्तेमाल के बिना कोरोनरी धमनियों में बाईपास ग्राफ्टिंग की जाती है। ऐसे मरीजों में सर्जरी के बाद विभिन्न क्लिनिकल पैरामीटर की निगरानी महत्वपूर्ण रहती है। डॉ. सारा का शोध इसी पोस्टऑपरेटिव मूल्यांकन के एक विशिष्ट पहलू पर केंद्रित रहा।
विशेषज्ञों के बीच शोध प्रस्तुति
आईसीएसीओएन-2026 में पोस्टग्रेजुएट अवॉर्ड पेपर प्रस्तुतियों के साथ कई वैज्ञानिक सत्र और वर्कशॉप आयोजित किए गए। सम्मेलन में एनेस्थीसियोलॉजी से जुड़े विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने अपने कार्य और वैज्ञानिक निष्कर्ष प्रस्तुत किए।
इसी क्रम में डॉ. सारा इकबाल ने अपने शोधपत्र की प्रस्तुति दी। सम्मेलन के समापन पर आयोजित वैलेडिक्टरी समारोह में अलग-अलग श्रेणियों के विजेताओं को सम्मानित किया गया। इसी अवसर पर उन्हें पोस्टग्रेजुएट अवॉर्ड पेपर कैटेगरी में प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया।
अलीगढ़ में प्रशिक्षण के साथ शोध पर फोकस
डॉ. सारा इकबाल वर्तमान में एएमयू के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के एनेस्थीसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विभाग में जूनियर रेजिडेंट हैं। उनकी पुरस्कार प्राप्ति उनके पोस्टग्रेजुएट प्रशिक्षण के साथ शोध गतिविधियों में भागीदारी को भी रेखांकित करती है।
मेडिकल शिक्षा में क्लिनिकल रिसर्च का महत्व इसलिए भी बढ़ता है क्योंकि मरीजों के इलाज से जुड़े निर्णयों के लिए वैज्ञानिक प्रमाण और व्यवस्थित अध्ययन अहम भूमिका निभाते हैं। डॉ. सारा का अध्ययन सर्जरी के बाद किडनी से जुड़े जोखिमों की पहचान के लिए अलग-अलग बायोमार्कर की उपयोगिता का परीक्षण करता है।
मुजफ्फरनगर से अलीगढ़ तक उपलब्धि
डॉ. सारा इकबाल की उपलब्धि का एक स्थानीय पहलू भी है। वह मुजफ्फरनगर की रहने वाली हैं और फिलहाल अलीगढ़ में मेडिकल प्रशिक्षण और शोध कार्य कर रही हैं। राष्ट्रीय स्तर के चिकित्सा सम्मेलन में शोधपत्र को प्रथम पुरस्कार मिलना उनके अकादमिक सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर सामने आया है।
इस उपलब्धि से उनके संस्थान के एनेस्थीसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विभाग के शोध कार्य को भी मंच मिला है। साथ ही यह घटना मेडिकल शिक्षा में पोस्टग्रेजुएट स्तर पर शोध प्रस्तुतियों की भूमिका को सामने लाती है।
आगे शोध के लिए क्या मायने
किसी भी शोध के निष्कर्षों को व्यापक चिकित्सा उपयोग में लाने से पहले अलग-अलग आबादी, बड़े अध्ययन और स्वतंत्र शोध के जरिए उनकी पुष्टि जरूरी होती है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर डॉ. सारा का अध्ययन 80 मरीजों के डेटा पर आधारित है। इसलिए इसके निष्कर्षों को उसी अध्ययन के दायरे में समझना उचित होगा।
फिलहाल इस शोध की खासियत यह है कि इसमें एक साधारण ब्लड काउंट आधारित मार्कर की तुलना उन्नत साइटोकाइन बायोमार्कर से की गई। पोस्टऑपरेटिव जटिलताओं की शुरुआती पहचान के संदर्भ में ऐसे तुलनात्मक अध्ययन भविष्य के शोध के लिए आधार उपलब्ध करा सकते हैं।
सम्मेलन में प्रथम पुरस्कार मिलने के बाद डॉ. सारा इकबाल की उपलब्धि ने मुजफ्फरनगर और अलीगढ़ के चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में ध्यान खींचा है। उनका शोध हार्ट सर्जरी के बाद मरीजों की निगरानी और संभावित किडनी जटिलताओं की पहचान से जुड़े वैज्ञानिक विमर्श का हिस्सा है।
यह सम्मान उनके अकादमिक और रिसर्च प्रोफाइल में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ है। साथ ही यह पोस्टग्रेजुएट मेडिकल प्रशिक्षण के दौरान क्लिनिकल रिसर्च और वैज्ञानिक प्रस्तुति के महत्व को भी रेखांकित करता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।