नासिक से आदिवासी छात्रों का उलगुलान मार्च मुंबई राजभवन की ओर बढ़ा। प्रदर्शनकारियों ने आश्रमशालाओं में बेहतर भोजन, पानी, आवास और बुनियादी सुविधाओं, लंबित DBT भुगतान तथा गडचिरौली में मृत और घायल छात्रों के परिवारों के मुआवजे की मांग उठाई। पुलिस कार्रवाई के दौरान लोगों को हिरासत में लिया गया।
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📍 Nashik, Maharashtra 📰 29 September 2026 ✍️ Apurva Choudhary
नासिक से मुंबई की ओर आदिवासी छात्रों का उलगुलान मार्च
महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों और समुदाय के सदस्यों का ‘उलगुलान’ लॉन्ग मार्च नासिक से मुंबई स्थित राजभवन की ओर शुरू हुआ है। आंदोलनकारी आश्रमशालाओं और आदिवासी हॉस्टलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति, भोजन और आवास से जुड़े मुद्दों तथा कई लंबित मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं।
यह मार्च सकल आदिवासी विद्यार्थी आंदोलन कृति समिति और उससे जुड़े संगठनों की ओर से आयोजित किया गया है। अलग-अलग रिपोर्टों में मार्च की दूरी करीब 180 से 190 किलोमीटर बताई गई है। प्रदर्शनकारियों का लक्ष्य मुंबई पहुंचकर राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी मांगें रखना है।
मार्च को लेकर सोमवार को नासिक के ईदगाह मैदान के आसपास पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने अनुमति का हवाला देते हुए मार्च को रोकने की कोशिश की।
नवभारत लाइव और देशदूत की रिपोर्टों में करीब 15 प्रमुख नेताओं या प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई है। वहीं इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कम-से-कम 30 प्रतिभागियों को हिरासत में लिए जाने का उल्लेख है। इसलिए हिरासत में लिए गए लोगों की अंतिम संख्या को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
एनडीटीवी मराठी की रिपोर्ट में भी आंदोलन की अनुमति नहीं होने के कारण पुलिस कार्रवाई और कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई है।
मार्च में कितने लोग शामिल हुए?
प्रदर्शन में शामिल लोगों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग रिपोर्ट सामने आई हैं। लोकसत्ता ने मार्च में 100 से अधिक छात्रों के शामिल होने की बात कही है, जबकि हिंदुस्तान टाइम्स ने सोमवार को 500 से अधिक आदिवासी कॉलेज छात्रों के मार्च शुरू करने की रिपोर्ट दी।
इससे पहले टाइम्स ऑफ इंडिया ने मार्च में महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से 1,000 से अधिक कॉलेज छात्रों और आदिवासी समुदाय के सदस्यों के शामिल होने की संभावना बताई थी। ऐसे में भीड़ की एक निश्चित संख्या बताना फिलहाल उचित नहीं होगा।
आश्रमशालाओं की सुविधाओं को लेकर मुख्य मांगें
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में महाराष्ट्र की आदिवासी आश्रमशालाओं और हॉस्टलों में बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है।
प्रदर्शनकारी बेहतर भोजन, स्वच्छ पेयजल, रहने की उचित व्यवस्था और हॉस्टल की स्थिति सुधारने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आश्रमशालाओं में इस्तेमाल होने वाली केंद्रीय रसोई व्यवस्था को बंद करने की मांग भी उठाई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केंद्रीय रसोई से मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर समस्याएं हैं। यह आरोप आंदोलनकारियों के हैं, जिनकी स्वतंत्र जांच का निष्कर्ष अलग विषय है।
लंबित DBT राशि जारी करने की मांग
छात्रों की मांगों में ‘स्वयं’ योजना के तहत लंबित Direct Benefit Transfer यानी DBT राशि जारी करना भी शामिल है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि छात्रों को मिलने वाली सहायता राशि समय पर उपलब्ध होनी चाहिए ताकि शिक्षा और रहने से जुड़े खर्चों में परेशानी न हो। मार्च के दौरान इस मांग को भी राज्य सरकार के सामने प्रमुखता से रखने की बात कही गई है।
गडचिरौली की घटना के बाद मुआवजे की मांग
आंदोलनकारियों ने गडचिरौली के एक आदिवासी स्कूल हॉस्टल में सर्पदंश की घटना के बाद मृत और घायल छात्रों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की मांग भी उठाई है।
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने मृत तीन आदिवासी छात्राओं के परिवारों के लिए प्रत्येक को ₹1 करोड़ और घायल तीन छात्रों के लिए ₹50 लाख की सहायता की मांग रखी है। यह मांग आंदोलनकारियों द्वारा रखी गई है; इसे सरकार द्वारा स्वीकृत मुआवजा नहीं माना जाना चाहिए।
लोकसत्ता की रिपोर्ट में भी गडचिरौली की घटना से जुड़े मुआवजे, केंद्रीय भोजन व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही से संबंधित मांगों का उल्लेख है।
आदिवासी विकास मंत्री के इस्तीफे की मांग
आंदोलनकारियों ने महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। उनका आरोप है कि आदिवासी छात्रों और आश्रमशालाओं से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई।
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार आंदोलनकारियों ने आदिवासी विकास सचिव और आयुक्त के तबादले की मांग भी रखी है। दूसरी ओर, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार आंदोलन से जुड़े एक प्रतिनिधि ने कहा कि छात्रों की कुछ मांगों को लेकर मंत्री से बातचीत हुई थी और लिखित आश्वासन मिलने की स्थिति में आगे विचार किया जा सकता है।
इन आरोपों और मांगों को प्रदर्शनकारियों के पक्ष के रूप में देखा जाना चाहिए। मंत्री या विभाग की ओर से इन सभी आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष इस रिपोर्ट में नहीं निकाला जा रहा है।
नासिक में पहले से चल रहा था आंदोलन
मुंबई मार्च अचानक शुरू हुआ आंदोलन नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक नासिक में आदिवासी छात्रों का प्रदर्शन कई हफ्तों से चल रहा था।
नवभारत लाइव की रिपोर्ट के अनुसार ईदगाह मैदान में करीब 42 दिनों से धरना जारी था। टाइम्स ऑफ इंडिया ने भी बताया कि मौजूदा लॉन्ग मार्च से पहले अगस्त और सितंबर में कई प्रदर्शन हुए थे और छात्रों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी शुरू की थी।
आंदोलनकारियों का कहना है कि पहले के प्रयासों के बावजूद कई मांगों पर ठोस समाधान सामने नहीं आया, जिसके बाद उन्होंने अपनी बात मुंबई में राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंचाने का फैसला किया।
प्रशासन ने बैठक का आश्वासन दिया
मार्च शुरू होने से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की कोशिश की। नवभारत लाइव की रिपोर्ट के अनुसार अधिकारियों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के आगामी नासिक दौरे के दौरान आदिवासी छात्रों की समस्याओं पर बैठक कराने का आश्वासन दिया।
हालांकि आंदोलनकारियों ने इस प्रस्ताव को पर्याप्त नहीं माना और मुंबई की ओर मार्च जारी रखने का निर्णय लिया। उनका कहना था कि उन्हें पहले भी आश्वासन मिल चुके हैं और अब वे ठोस समाधान चाहते हैं।
एनडीटीवी मराठी की 29 सितंबर की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि आंदोलन से जुड़ा एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने के लिए मुंबई जाने वाला है।
राजभवन तक पहुंचने की तैयारी
मार्च का घोषित लक्ष्य मुंबई स्थित राजभवन तक पहुंचना है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मार्च नासिक से शुरू होकर घोटी, इगतपुरी, कसारा, शाहपुर, भिवंडी और मुलुंड होते हुए मुंबई की ओर बढ़ने की योजना है।
आंदोलनकारी रास्ते में खुले स्थानों पर रात में रुकने और दिन के समय पैदल आगे बढ़ने की योजना के साथ निकले हैं। रिपोर्टों में मार्च के मुंबई पहुंचने का लक्ष्य अक्टूबर की शुरुआत बताया गया है।
आंदोलन में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं
आंदोलन के समर्थन में कुछ राजनीतिक नेताओं और संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार आंदोलन से जुड़े आयोजकों ने कहा है कि राहुल गांधी, शिवसेना यूबीटी विधायक आदित्य ठाकरे और कुछ अन्य नेता मार्च के मुंबई पहुंचने पर इसमें शामिल हो सकते हैं।
हालांकि किसी नेता के प्रस्तावित या संभावित समर्थन को मार्च की आधिकारिक मांगों या संगठनात्मक नेतृत्व के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। मूल आंदोलन छात्र और आदिवासी समुदाय से जुड़ी मांगों को लेकर आयोजित किया गया है।
पुलिस कार्रवाई पर अलग-अलग रिपोर्ट
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव को लेकर सामने आई रिपोर्टों में भी विवरण अलग हैं। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में बैरिकेड हटाने और पुलिस द्वारा मार्च रोकने की कोशिश के दौरान झड़प का उल्लेख है। दूसरी ओर एनडीटीवी की रिपोर्ट में अनुमति नहीं होने को पुलिस कार्रवाई का आधार बताया गया है।
हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर भी 15 और कम-से-कम 30 जैसी अलग-अलग संख्याएं सामने आई हैं। इसलिए इस चरण पर किसी एक आंकड़े को अंतिम मानना उचित नहीं होगा।
आगे क्या होगा?
अब आंदोलन की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों पर किस स्तर पर बातचीत करती है और क्या कोई लिखित आश्वासन या प्रशासनिक कार्रवाई सामने आती है।
प्रदर्शनकारियों ने मुंबई पहुंचकर राजभवन और राज्य सरकार के सामने अपनी मांगें रखने की बात कही है। दूसरी ओर प्रशासन की ओर से बातचीत और मुख्यमंत्री के स्तर पर बैठक का आश्वासन दिए जाने की रिपोर्ट है।
फिलहाल उलगुलान मार्च महाराष्ट्र में आदिवासी शिक्षा, आश्रमशाला व्यवस्था, हॉस्टल सुविधाओं, छात्र सहायता और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ले आया है। पुलिस कार्रवाई और हिरासत के बीच मार्च आगे किस रूप में बढ़ता है, इस पर अब नजर रहेगी।