अमेरिका में जन्म से नागरिकता के अधिकार को सीमित करने के ट्रंप के नए आदेश ने कानूनी और सियासी बहस को फिर तेज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस पहल पर रोक लगा चुका है। अब ‘बर्थ टूरिज़्म’ पर कार्रवाई केंद्र में है।
वॉशिंगटन
07 अगस्त 2026
Asif Khan
अमेरिकी सियासत में जन्म से नागरिकता का मसला फिर केंद्र में आ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो नए एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत किए हैं। इनका मकसद अमेरिका में पैदा होने वाले हर बच्चे को मिलने वाली नागरिकता के दायरे को सीमित करना और ‘बर्थ टूरिज़्म’ पर रोक लगाना है।
यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस तरह की पहल पर रोक लगा चुका है। इससे साफ है कि यह मसला अब सिर्फ पॉलिसी नहीं, बल्कि गहरा कानूनी और संवैधानिक टकराव बन चुका है।
इन आदेशों में चार खास श्रेणियों को टारगेट किया गया है। प्रशासन का दावा है कि यह कदम सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने के लिए है।
पहला, विदेशी राजनयिकों के बच्चों को नागरिकता देने के नियम पर सख्ती।
दूसरा, उन लोगों की संतानों पर रोक, जिन्हें ‘एलियन एनिमी’ माना गया है।
तीसरा, अमेरिकी टेरिटरी में जन्म लेने वालों पर संभावित बदलाव, अगर कांग्रेस कानून बदले।
चौथा, ‘बर्थ टूरिज़्म’ के जरिए सिर्फ नागरिकता पाने के इरादे से आने वाली महिलाओं पर कार्रवाई।
यहां सरकार का फोकस उस नेटवर्क पर है जिसे प्रशासन ‘बर्थ टूरिज़्म इंडस्ट्री’ कह रहा है।
अमेरिका में जन्म से नागरिकता का अधिकार 14वें संशोधन से आता है। यह कहता है कि अमेरिका में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति नागरिक होगा, चाहे उसके माता-पिता की स्थिति कुछ भी हो।
ट्रंप प्रशासन लंबे समय से इस व्याख्या को चुनौती देता रहा है। उनका तर्क है कि यह प्रावधान गलत तरीके से इस्तेमाल हो रहा है।
लेकिन कई संवैधानिक विशेषज्ञ इसे सीधा-सीधा कानून के खिलाफ मानते हैं। उनका कहना है कि एग्जीक्यूटिव ऑर्डर से संविधान नहीं बदला जा सकता।
30 जून को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की इसी तरह की पहल पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कहा कि नागरिकता अधिकार को सीमित करना गंभीर संवैधानिक मसला है।
इसके बाद न्याय विभाग ने चेतावनी जारी की। इसमें कहा गया कि सिर्फ बच्चे को जन्म देने के मकसद से टूरिस्ट वीज़ा का इस्तेमाल करना कानून का उल्लंघन है।
अब नए आदेशों के साथ प्रशासन ने एक बार फिर इस मुद्दे को आगे बढ़ाया है।
‘बर्थ टूरिज़्म’ वह प्रक्रिया है जिसमें विदेशी नागरिक अमेरिका आकर बच्चे को जन्म देते हैं ताकि उसे अमेरिकी नागरिकता मिल सके।
अमेरिकी एजेंसियों का दावा है कि यह एक संगठित नेटवर्क बन चुका है। इसमें एजेंट, अस्पताल और ट्रैवल चैनल शामिल होते हैं।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इस खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और इमिग्रेशन कंट्रोल का हिस्सा मानता है। उनका कहना है कि यह सिस्टम के दुरुपयोग को रोकने का कदम है।
दूसरी तरफ, सिविल राइट्स ग्रुप और लीगल एक्सपर्ट इसे नागरिक अधिकारों पर हमला बताते हैं। उनका कहना है कि इससे संविधान की मूल भावना कमजोर होगी।
कई डेमोक्रेट नेताओं ने भी इस कदम का विरोध किया है। उनका कहना है कि यह फैसला राजनीतिक एजेंडा का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश कोर्ट में तुरंत चुनौती झेलेगा।
मुख्य सवाल यह होगा कि क्या राष्ट्रपति एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए जन्म से नागरिकता के अधिकार को बदल सकते हैं।
अब तक की न्यायिक प्रवृत्ति को देखें तो कोर्ट इस तरह के बदलाव के लिए कांग्रेस और संविधान संशोधन की जरूरत मानता है।
अगर ये आदेश लागू होते हैं तो कई प्रवासी परिवार सीधे प्रभावित होंगे।
हॉस्पिटल सिस्टम, वीज़ा प्रोसेस और इमिग्रेशन चेकिंग में सख्ती बढ़ेगी।
विदेशी महिलाओं के लिए अमेरिका में डिलीवरी कराना मुश्किल हो सकता है।
लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन नियमों को कैसे लागू किया जाएगा।
यह मुद्दा अमेरिकी चुनावी राजनीति में भी अहम बन सकता है।
इमिग्रेशन पहले से ही एक बड़ा चुनावी मुद्दा है। ट्रंप का यह कदम उनके समर्थकों के बीच मजबूत संदेश देता है।
विपक्ष इसे मानवाधिकार और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बता रहा है।
‘बर्थ टूरिज़्म’ से जुड़ा हेल्थकेयर और ट्रैवल सेक्टर भी प्रभावित हो सकता है।
कई निजी अस्पताल और सर्विस प्रोवाइडर इस पर निर्भर हैं।
सख्ती से इन सेवाओं की मांग घट सकती है।
अभी तक औपचारिक वैश्विक प्रतिक्रिया सीमित है।
लेकिन इमिग्रेशन पॉलिसी में बदलाव का असर कई देशों के नागरिकों पर पड़ेगा।
यह कदम अमेरिका की इमिग्रेशन इमेज पर भी असर डाल सकता है।
अब नजर कोर्ट पर होगी।
क्या यह आदेश लागू रहेगा या फिर कानूनी अड़चन में फंस जाएगा, यह आने वाले हफ्तों में साफ होगा।
कांग्रेस की भूमिका भी अहम रहेगी।
ट्रंप नागरिकता आदेश सिर्फ एक प्रशासनिक कदम नहीं है। यह अमेरिका के संवैधानिक ढांचे, इमिग्रेशन पॉलिसी और सियासी बहस का केंद्र बन चुका है।
आने वाला दौर तय करेगा कि जन्म से नागरिकता का सिद्धांत कायम रहता है या इसमें बदलाव की शुरुआत होती है
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।