प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के भोगापुरम स्थित अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। यह उत्तर आंध्र के लिए बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इससे क्षेत्रीय विकास, निवेश, पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
📍 भोगापुरम, विजयनगरम, आंध्र प्रदेश
📰1 अगस्त 2026
✍️ By Haris
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम ज़िले के भोगापुरम में अल्लूरी सीताराम राजू अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। यह राज्य की सबसे महत्वपूर्ण एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में शामिल है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों इसे उत्तर आंध्र के आर्थिक भविष्य से जोड़कर देख रही हैं।
सरकार का कहना है कि नया एयरपोर्ट केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा। इसका मकसद क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स, पर्यटन और निर्यात गतिविधियों को भी मज़बूत करना है।
भोगापुरम एयरपोर्ट लंबे समय से प्रस्तावित परियोजना थी। तकनीकी स्वीकृति, पर्यावरण मंज़ूरी, भूमि अधिग्रहण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी की प्रक्रिया के बाद इसका निर्माण आगे बढ़ा। परियोजना का विकास जीएमआर समूह के नेतृत्व में किया गया।
निर्माण के दौरान भूमि अधिग्रहण को लेकर स्थानीय स्तर पर आपत्तियां भी सामने आई थीं। बाद में राज्य सरकार ने पुनर्वास और अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी करते हुए निर्माण कार्य को आगे बढ़ाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित भारत की बुनियाद है। उन्होंने कहा कि उत्तर आंध्र को नई एयर कनेक्टिविटी मिलने से उद्योग, पर्यटन और रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। समारोह में मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू समेत कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि यह परियोजना उत्तर आंध्र से पलायन कम करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने में मदद करेगी।
पहले चरण में एयरपोर्ट की वार्षिक क्षमता लगभग 60 लाख यात्रियों की बताई गई है। भविष्य में इसे कई गुना बढ़ाने की योजना है। यहां चौड़े आकार के विमानों के संचालन योग्य रनवे, आधुनिक टर्मिनल और कार्गो सुविधाएं विकसित की गई हैं।
कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर से कृषि उत्पाद, समुद्री निर्यात और औद्योगिक सामान की ढुलाई को भी लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
उत्तर आंध्र लंबे समय से औद्योगिक निवेश के मामले में राज्य के अन्य हिस्सों से पीछे माना जाता रहा है। बेहतर एयर कनेक्टिविटी निवेशकों के लिए क्षेत्र को अधिक आकर्षक बना सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरपोर्ट के आसपास होटल, वेयरहाउस, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क और सेवा क्षेत्र में नई गतिविधियां विकसित हो सकती हैं। हालांकि इन संभावनाओं का वास्तविक असर आने वाले वर्षों में निवेश और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगा।
विशाखापत्तनम, अराकू घाटी, समुद्री तट और उत्तर आंध्र के धार्मिक तथा प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच पहले की तुलना में अधिक आसान होने की उम्मीद है।
पर्यटन उद्योग से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि बेहतर हवाई संपर्क घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या बढ़ा सकता है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव एयरलाइन नेटवर्क और उड़ानों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
सरकार का दावा है कि एयरपोर्ट क्षेत्रीय विकास का इंजन बनेगा और लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष अवसर मिलेंगे।
दूसरी ओर, कुछ स्थानीय समूह पहले भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास के मुद्दे उठाते रहे हैं। उनका कहना रहा है कि विकास परियोजनाओं के साथ प्रभावित परिवारों के हितों की भी समान रूप से रक्षा होनी चाहिए। इन चिंताओं पर राज्य सरकार समय-समय पर पुनर्वास उपायों का हवाला देती रही है।
भारत पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्रीय एयर कनेक्टिविटी और ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। भोगापुरम एयरपोर्ट उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य नए आर्थिक केंद्रों को वैश्विक बाज़ार से जोड़ना है।
एयरपोर्ट का उद्घाटन किसी परियोजना का अंतिम चरण नहीं बल्कि संचालन की शुरुआत है। इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितनी एयरलाइंस नियमित सेवाएं शुरू करती हैं, कार्गो नेटवर्क कितना विकसित होता है और आसपास औद्योगिक निवेश कितनी तेजी से आता है।
यदि योजनाएं अपेक्षित गति से आगे बढ़ती हैं तो भोगापुरम एयरपोर्ट उत्तर आंध्र की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है। वहीं यदि निवेश और कनेक्टिविटी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचते, तो इसकी पूरी क्षमता हासिल करने में अधिक समय लग सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।