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तमिलनाडु में विजय बनाम राहुल गांधी की सियासी जंग, 9 सितंबर की बैठक पर निगाहें

Mohammad Naved • 2026-09-05 12:39:20
तमिलनाडु में विजय बनाम राहुल गांधी की सियासी जंग, 9 सितंबर की बैठक पर निगाहें

तमिलनाडु में टीवीके और कांग्रेस के बीच 2029 के नेतृत्व को लेकर मतभेद बढ़े हैं। टीवीके के कुछ नेता विजय को पीएम चेहरा बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस राहुल गांधी पर कायम है।

Location

चेन्नई, तमिलनाडु

Date 5/9/26

By Mohd Naved


तमिलनाडु की सियासत में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम और कांग्रेस के बीच 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर नेतृत्व का सवाल उभर आया है। टीवीके के कुछ नेताओं ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को प्रधानमंत्री पद के लिए संभावित चेहरा बनाने की पैरवी शुरू की है। कांग्रेस ने इस रुख से असहमति जताते हुए राहुल गांधी को 2029 के लिए अपना प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बताया है। इसी बीच टीवीके ने 9 सितंबर को अपने सहयोगी दलों के साथ बैठक बुलाई है, जिससे गठबंधन की आगे की रणनीति पर निगाहें टिक गई हैं।

9 सितंबर की बैठक क्यों अहम

टीवीके की ओर से 9 सितंबर को सहयोगी दलों की बैठक प्रस्तावित है। रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी के नेताओं ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कझगम के नेताओं से संपर्क किया है। हालांकि कांग्रेस को इस बैठक में औपचारिक तौर पर बुलाए जाने की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

इस बैठक का आधिकारिक एजेंडा पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। लेकिन इसकी टाइमिंग महत्वपूर्ण है। टीवीके के भीतर से विजय को राष्ट्रीय राजनीति में आगे बढ़ाने की आवाज़ें आने के बाद कांग्रेस के साथ मतभेद सार्वजनिक हुए हैं। सहयोगी दलों के साथ बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि टीवीके अपने राजनीतिक मोर्चे को लेकर आगे की दिशा तय करने की कोशिश कर रही है।

टीवीके नेताओं ने विजय के नाम पर क्या कहा

विवाद की शुरुआत टीवीके के कुछ विधायकों और नेताओं के उन बयानों से हुई, जिनमें विजय को 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का संभावित उम्मीदवार बताया गया।

कवुंडमपालयम से टीवीके विधायक कनिमोझी ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि 2029 में विजय को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री बनने का फैसला तमिलनाडु की जनता की राजनीतिक ताकत तय करेगी, दिल्ली अकेले नहीं।

टीवीके के दूसरे नेताओं ने भी विजय की राष्ट्रीय भूमिका की वकालत की। ऊर्जा, संसाधन और कानून मंत्री आर. निर्मल कुमार सहित पार्टी के कुछ नेताओं की ओर से विजय को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने के बयान सामने आए हैं।

हालांकि इन बयानों को टीवीके का औपचारिक और अंतिम प्रधानमंत्री पद का फैसला मानना जल्दबाजी होगी। पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं के बयान और आधिकारिक गठबंधन नीति के बीच अंतर रखना जरूरी है।

कांग्रेस ने क्यों जताई आपत्ति

कांग्रेस ने विजय को प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर पेश किए जाने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया है। कांग्रेस की विधानसभा नेता थरहाई कथबर्ट ने इसे कुछ नए टीवीके विधायकों की व्यक्तिगत राजनीतिक उत्सुकता से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी का रुख राहुल गांधी के पक्ष में है।

कांग्रेस का कहना है कि विजय ने पहले राहुल गांधी को गठबंधन के प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर स्वीकार किया था। पार्टी के मुताबिक कुछ विधायकों के व्यक्तिगत बयान को पूरे गठबंधन की नीति नहीं माना जाना चाहिए।

तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष मणिकम टैगोर ने भी विजय को प्रधानमंत्री पद के लिए पेश करने की कवायद को खारिज करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री का फैसला अंततः मतदाता करेंगे।

इससे साफ है कि दोनों दलों के बीच मतभेद केवल व्यक्तिगत बयान तक सीमित नहीं रह गए हैं। अब सवाल यह है कि भविष्य में दोनों दल राष्ट्रीय नेतृत्व के मुद्दे को किस तरह संभालते हैं।

कांग्रेस के मंत्रियों की चेतावनी ने बढ़ाया दबाव

इस विवाद को उस समय और तूल मिला जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तमिलनाडु सरकार में मंत्री एस. राजेश कुमार ने कहा कि अगर टीवीके राहुल गांधी को 2029 के लिए प्रधानमंत्री पद के चेहरे के तौर पर स्वीकार नहीं करती, तो कांग्रेस के मंत्रियों के सरकार से बाहर होने की स्थिति पैदा हो सकती है।

यह बयान गठबंधन के भीतर राजनीतिक दबाव का संकेत माना गया। हालांकि इसके बाद कांग्रेस और टीवीके के बीच बातचीत तथा सार्वजनिक बयानों से यह भी संकेत मिला कि दोनों पक्ष तत्काल गठबंधन तोड़ने की स्थिति में नहीं हैं।

यही वजह है कि मौजूदा विवाद को तत्काल सरकार गिरने या गठबंधन टूटने के रूप में देखना उचित नहीं होगा। फिलहाल यह नेतृत्व और राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर बढ़ती खींचतान है।

सरकार के लिए राजनीतिक गणित

टीवीके की सरकार को कांग्रेस और अन्य सहयोगी दलों का समर्थन हासिल है। कांग्रेस इस गठबंधन में महत्वपूर्ण संख्या रखती है और उसके नेता सरकार में मंत्री भी हैं।

इस वजह से लंबे समय तक चलने वाला टकराव सरकार की राजनीतिक स्थिरता पर असर डाल सकता है। हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में सरकार के तत्काल संकट में होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।

गठबंधन की मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों दल राज्य की सत्ता और राष्ट्रीय राजनीति के मुद्दों के बीच संतुलन कैसे कायम करते हैं।

राष्ट्रीय राजनीति में इसका असर

विजय और राहुल गांधी के बीच संभावित नेतृत्व की चर्चा का असर तमिलनाडु की सीमाओं से बाहर भी देखा जा रहा है। इसकी एक वजह यह है कि टीवीके और कांग्रेस के बीच राज्य में साझेदारी है, लेकिन टीवीके अभी विपक्षी दलों के राष्ट्रीय इंडिया गठबंधन में औपचारिक रूप से शामिल नहीं है।

इस स्थिति ने दोनों दलों को राज्य में साथ काम करने और राष्ट्रीय राजनीति में अलग-अलग राजनीतिक रुख रखने की गुंजाइश दी है। लेकिन 2029 का चुनाव नजदीक आने के साथ यह व्यवस्था कठिन हो सकती है।

कांग्रेस के लिए राहुल गांधी का राष्ट्रीय नेतृत्व एक केंद्रीय राजनीतिक मुद्दा है। दूसरी ओर, टीवीके के लिए विजय की लोकप्रियता को तमिलनाडु से बाहर राष्ट्रीय राजनीति तक ले जाने की कोशिश पार्टी के भविष्य की दिशा तय कर सकती है।

क्या 2029 का चेहरा अभी तय है

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का अंतिम उम्मीदवार अभी तय नहीं हुआ है। किसी दल के विधायक या नेता द्वारा किसी नाम का समर्थन करना और औपचारिक गठबंधन स्तर पर उम्मीदवार घोषित करना दो अलग राजनीतिक प्रक्रियाएं हैं।

टीवीके के भीतर विजय के समर्थन में बयान जरूर आए हैं। कांग्रेस राहुल गांधी को लेकर अपना रुख भी स्पष्ट कर चुकी है। लेकिन दोनों दलों की संयुक्त रणनीति क्या होगी, यह आगे की बैठकों और बातचीत से स्पष्ट होगा।

9 सितंबर की बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे टीवीके के सहयोगी दलों के साथ उसके राजनीतिक रिश्तों और प्रस्तावित मोर्चे की दिशा के बारे में संकेत मिल सकते हैं। बैठक का अंतिम एजेंडा और इसमें शामिल होने वाले सभी दलों की सूची स्पष्ट होने के बाद तस्वीर ज्यादा साफ होगी।

सहयोगी दलों का रुख भी महत्वपूर्ण

मरुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कझगम के नेता वाइको ने बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है। दूसरी ओर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने टीवीके के गठबंधन और मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार किया है, हालांकि उसने भाजपा विरोध और तमिलनाडु में वाम राजनीति को मजबूत करने की अपनी प्राथमिकता दोहराई है।

इससे संकेत मिलता है कि टीवीके के लिए चुनौती केवल कांग्रेस के साथ तालमेल बनाने तक सीमित नहीं है। उसे अलग-अलग सहयोगी दलों की राजनीतिक प्राथमिकताओं को भी साथ लेकर चलना होगा।

आगे क्या होगा

आने वाले दिनों में तीन मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण रहेंगे। पहला, क्या टीवीके आधिकारिक रूप से विजय को 2029 के लिए प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने की रणनीति अपनाती है। दूसरा, क्या कांग्रेस राहुल गांधी के नाम पर अपने रुख से पीछे हटती है। तीसरा, क्या दोनों दल राज्य सरकार में साझेदारी को राष्ट्रीय नेतृत्व के विवाद से अलग रखने में सफल होते हैं।

फिलहाल दोनों पक्षों के बीच मतभेद सार्वजनिक हैं, लेकिन गठबंधन टूटने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए मौजूदा स्थिति को राजनीतिक दबाव और रणनीतिक बातचीत के दौर के तौर पर देखना ज्यादा सटीक होगा।

तमिलनाडु की राजनीति में विजय का उभार और कांग्रेस का राहुल गांधी पर जोर आने वाले वर्षों में विपक्षी राजनीति की दिशा को प्रभावित कर सकता है। लेकिन 2029 के प्रधानमंत्री पद का फैसला अभी दूर है। फिलहाल 9 सितंबर की बैठक यह समझने के लिए अहम होगी कि टीवीके अपने सहयोगियों के साथ किस तरह का राजनीतिक मोर्चा तैयार करना चाहती है और कांग्रेस इस बदलते समीकरण में अपनी भूमिका कैसे तय करती है।

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Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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