दिल्ली एसआईआर में पुराने मतदाताओं से फ़ॉर्म 6 भरवाने पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए। अदालत ने प्रक्रिया स्पष्ट करने का सुझाव दिया। आयोग ने सुझावों पर विचार करने की बात कही।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 29 अक्टूबर 2026
✍️ Mohd Naved
पुराने मतदाता से नया आवेदन क्यों?
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण, यानी एसआईआर, की प्रक्रिया पर चुनाव आयोग से जवाब माँगा है। सुनवाई के दौरान पीठ ने पूछा कि पहले से पंजीकृत व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं आने पर उससे नए मतदाता वाला फ़ॉर्म 6 क्यों भरवाया जा रहा है। यह सवाल 28 अक्टूबर की सुनवाई में उठा।
किस मामले में हुई सुनवाई?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ अंजलि भारद्वाज और अमृता जौहरी की याचिका सुन रही थी। याचिका में दिल्ली एसआईआर के दौरान मतदाताओं को जारी नोटिस की पारदर्शिता से मुताल्लिक़ सवाल उठाए गए हैं।
फ़ॉर्म 6 और फ़ॉर्म 8 का फ़र्क़
चुनाव आयोग के आधिकारिक दस्तावेज़ में फ़ॉर्म 6 को नए मतदाताओं के आवेदन का फ़ॉर्म बताया गया है। फ़ॉर्म 8 निवास बदलने और मौजूदा मतदाता सूची की प्रविष्टियों में सुधार समेत निर्धारित सेवाओं के लिए है। पता बदलने का आवेदन और पहली बार पंजीकरण अलग स्थितियाँ हैं।
अदालत ने क्या सुझाव दिया?
सुनवाई के विवरण के मुताबिक़, पीठ ने पूछा कि जो पुराने मतदाता समय पर एन्यूमरेशन फ़ॉर्म जमा नहीं कर पाए, उन्हें अंतिम सूची बनने से पहले एक और अवसर क्यों नहीं दिया जाए। निवास बदल चुके लोगों के मामले में फ़ॉर्म 8 के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठा।
याचिकाकर्ताओं की आपत्ति क्या है?
याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि कुछ पुराने मतदाताओं को एन्यूमरेशन फ़ॉर्म मिला ही नहीं। उनका कहना था कि ऐसे लोगों से नए मतदाता की घोषणा करवाना प्रक्रियागत समस्या पैदा करता है। यह याचिकाकर्ताओं की दलील है, अदालत का अंतिम निष्कर्ष नहीं।
चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?
आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्री नायडू ने कहा कि किसी को स्थायी रूप से बाहर करने का सवाल नहीं है। उन्होंने प्रक्रिया में सामने आ रही परेशानियों को दूर करने और अदालत के सुझावों पर विचार करने का भरोसा दिया। ज़रूरत होने पर समयसीमा बढ़ाने की बात भी कही गई।
सुझाव और अंतिम आदेश में फ़र्क़
उपलब्ध सुनवाई विवरण में प्रक्रिया सुधारने पर अदालत के सवाल और सुझाव सामने आए हैं। इनके आधार पर फ़ॉर्म 6 रद्द होने, एसआईआर रुकने या सभी प्रभावित नाम स्वतः बहाल होने का दावा सही नहीं होगा। मामले की अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद रखे जाने की जानकारी है।
आप अपने मामले में क्या जाँचें?
अपना नाम और विवरण चुनाव आयोग के आधिकारिक वोटर पोर्टल पर जाँचें। नाम नहीं मिलने पर पुराने पंजीकरण की जानकारी के साथ संबंधित निर्वाचन अधिकारी से प्रक्रिया स्पष्ट कराएँ। अदालत की मौखिक टिप्पणियों को अपने आवेदन पर लागू अंतिम निर्देश मानकर फैसला न लें।