📍 नई दिल्ली
🗓️ 18 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
राहुल गांधी के ‘पार्टी चोरी’ संबंधी आरोपों के बाद बीजेपी ने पलटवार किया है। सुधांशु त्रिवेदी ने ममता बनर्जी और शरद पवार के कांग्रेस से अलग होने का हवाला देते हुए राहुल गांधी के राजनीतिक इतिहास संबंधी ज्ञान पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से बीजेपी पर लगाए गए ‘पार्टी चोरी’ के आरोपों के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जिन दलों का उल्लेख करके बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं, उनमें से कई दल कांग्रेस से अलग होकर बने हैं।
त्रिवेदी ने अपने बयान में खास तौर पर तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के गठन का जिक्र किया। उनके मुताबिक, ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर अपनी पार्टी बनाई थी, जबकि शरद पवार ने भी कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया था। बीजेपी नेता ने इसी आधार पर राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल खड़े किए।
ममता बनर्जी और शरद पवार का दिया हवाला
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राजनीतिक दलों के गठन और विभाजन का इतिहास समझे बिना मौजूदा राजनीतिक विवाद को देखना अधूरा होगा। उन्होंने राहुल गांधी को कांग्रेस के पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का अध्ययन करने की सलाह दी।
ममता बनर्जी ने 1997 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। शरद पवार ने 1999 में कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बनाई थी। इन घटनाओं का इस्तेमाल बीजेपी अब कांग्रेस के खिलाफ राजनीतिक जवाबी नैरेटिव के तौर पर कर रही है।
हालांकि, इन ऐतिहासिक घटनाओं का मौजूदा राजनीतिक विवाद पर क्या असर पड़ता है, यह अलग राजनीतिक व्याख्या का विषय है। तथ्य यह है कि दोनों दल कांग्रेस से अलग होकर अस्तित्व में आए थे।
कांग्रेस के पुराने राजनीतिक घटनाक्रम भी चर्चा में
त्रिवेदी ने कांग्रेस के पुराने आंतरिक संघर्षों और राजनीतिक विभाजनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इंदिरा गांधी के दौर में कांग्रेस के विभाजन सहित कई ऐतिहासिक घटनाओं को मौजूदा बहस से जोड़ने की कोशिश की।
बीजेपी नेता ने अपने बयान में चौधरी चरण सिंह और राजस्थान में बहुजन समाज पार्टी के विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने जैसे राजनीतिक घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए।
इन दावों के संदर्भ में यह जरूरी है कि अलग-अलग राजनीतिक घटनाओं की परिस्थितियां और संवैधानिक स्थिति अलग रही हैं। इसलिए किसी एक घटना को दूसरी घटना के समान मानने से पहले उसका ऐतिहासिक संदर्भ देखना जरूरी है।
राहुल गांधी की राजनीति पर लगातार हमले
सुधांशु त्रिवेदी इससे पहले भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर कई मुद्दों को लेकर हमला करते रहे हैं। अगस्त 2026 में उन्होंने संसद की कार्यवाही और विपक्ष की रणनीति को लेकर राहुल गांधी पर सवाल उठाए थे। बीजेपी ने आरोप लगाया था कि विपक्ष सार्थक चर्चा से बच रहा है।
सितंबर 2026 में भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों को लेकर भी त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधा था। उन्होंने उत्तराखंड की 2016 की ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षा और झारखंड में भर्ती परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामलों का हवाला दिया था।
इन बयानों से स्पष्ट है कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक नैरेटिव को लेकर टकराव लगातार जारी है। दोनों दल अलग-अलग मुद्दों को लेकर एक-दूसरे की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं।
‘पार्टी चोरी’ विवाद का सियासी संदर्भ
मौजूदा विवाद की शुरुआत राहुल गांधी की उस टिप्पणी से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने राजनीतिक दलों के अस्तित्व और उन्हें कमजोर करने की कथित कोशिशों को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा था। बीजेपी ने इस आरोप का जवाब कांग्रेस के अपने संगठनात्मक इतिहास और उससे अलग हुए दलों का हवाला देकर दिया है।
बीजेपी का तर्क है कि कांग्रेस से अलग होकर कई प्रभावशाली राजनीतिक दल बने और बाद में उन्होंने अपने-अपने राज्यों में मजबूत राजनीतिक आधार बनाया। कांग्रेस की तरफ से इन घटनाओं की अलग राजनीतिक व्याख्या की जाती रही है।
इसलिए मौजूदा बहस केवल दो नेताओं के बीच बयानबाजी तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में भारतीय दलगत राजनीति में विभाजन, संगठनात्मक संघर्ष और क्षेत्रीय दलों के उभार का लंबा इतिहास भी शामिल है।
राजनीतिक बयानबाजी से आगे क्या
राहुल गांधी और सुधांशु त्रिवेदी के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है जब बीजेपी और कांग्रेस के बीच कई राष्ट्रीय मुद्दों पर टकराव जारी है। चुनावी राजनीति, संसद की कार्यवाही, संस्थागत मुद्दों और विपक्ष की भूमिका को लेकर दोनों खेमे लगातार एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
मौजूदा विवाद में दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक तर्क पेश कर रहे हैं। बीजेपी कांग्रेस के पुराने विभाजनों को मुद्दा बना रही है, जबकि कांग्रेस बीजेपी की राजनीतिक रणनीति और विपक्ष के प्रति उसके रवैये पर सवाल उठाती रही है।
आगे की सियासी तस्वीर
सुधांशु त्रिवेदी के बयान के बाद ‘पार्टी चोरी’ को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। हालांकि, इस विवाद को समझने के लिए नेताओं के आरोपों के साथ-साथ संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं और उनके वास्तविक राजनीतिक संदर्भ को देखना जरूरी होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि बीजेपी ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब सीधे कांग्रेस के संगठनात्मक इतिहास को सामने रखकर दिया है। आने वाले दिनों में कांग्रेस की ओर से इस पर प्रतिक्रिया इस सियासी टकराव की अगली कड़ी तय करेगी।