रेजरपे का नया एआई मॉडल पेमेंट सिस्टम बदलेगा
पेमेंट फेलियर और फ्रॉड पर एआई की सीधी निगरानी
तीन ट्रिलियन डेटा पॉइंट्स से तैयार रेजरपे वल्कन
रेजरपे ने वल्कन नामक एआई पेमेंट फाउंडेशन मॉडल लॉन्च किया है। कंपनी के मुताबिक मॉडल करीब तीन ट्रिलियन डेटा पॉइंट्स से विकसित हुआ और रूटिंग, फ्रॉड डिटेक्शन तथा रिस्क आकलन में इस्तेमाल हो रहा है। रेजरपे ने पेमेंट सक्सेस में दस प्रतिशत तक सुधार और अंतरराष्ट्रीय कार्ड फ्रॉड पहचान में आठ गुना वृद्धि का दावा किया है।
Location: नई दिल्ली
Date: 18 अगस्त 2026
By Mohd Naved
भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल को लेकर एक अहम पहल सामने आई है। फिनटेक कंपनी रेजरपे ने ‘रेजरपे वल्कन’ नाम से पेमेंट्स फाउंडेशन मॉडल पेश किया है। कंपनी के मुताबिक यह ट्रांसफॉर्मर आधारित मॉडल खास तौर पर पेमेंट ट्रांजैक्शन को समझने, जोखिम का आकलन करने और भुगतान प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने के लिए विकसित किया गया है।
रेजरपे का दावा है कि वल्कन के शुरुआती घटकों को उसके पेमेंट नेटवर्क के करीब तीन ट्रिलियन डेटा पॉइंट्स पर लागू किया जा चुका है। कंपनी के अनुसार इसका इस्तेमाल रीयल-टाइम ट्रांजैक्शन रूटिंग, रिस्क असेसमेंट और फ्रॉड डिटेक्शन जैसे क्षेत्रों में किया गया है।
रेजरपे के मुताबिक इस तकनीक से पेमेंट सक्सेस रेट में दस प्रतिशत तक सुधार हुआ है। अंतरराष्ट्रीय कार्ड फ्रॉड की पहचान और रोकथाम की क्षमता आठ गुना तक बढ़ने तथा बिना अतिरिक्त अलर्ट बढ़ाए पांच गुना अधिक संदिग्ध और विवादित ट्रांजैक्शन पहचानने का भी कंपनी ने दावा किया है।
यहां एक अहम संपादकीय सावधानी जरूरी है। ‘भारत का पहला’ और प्रदर्शन में बताए गए सुधार रेजरपे के अपने दावे हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए कंपनी के विस्तृत तकनीकी मूल्यांकन और स्वतंत्र ऑडिट संबंधी जानकारी सार्वजनिक होना महत्वपूर्ण होगा।
रेजरपे ने भारत के पेमेंट इकोसिस्टम के लिए अपना नया एआई फाउंडेशन मॉडल वल्कन लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार इसे एनवीडिया और अमेजन वेब सर्विसेज की तकनीक के सहयोग से तैयार किया गया है।
फाउंडेशन मॉडल की अवधारणा सामान्य मशीन लर्निंग मॉडल से अलग है। पारंपरिक व्यवस्था में अलग-अलग काम के लिए अलग मॉडल तैयार किए जाते हैं। उदाहरण के लिए फ्रॉड डिटेक्शन के लिए एक मॉडल, पेमेंट रूटिंग के लिए दूसरा और रिस्क स्कोरिंग के लिए तीसरा।
पेमेंट फाउंडेशन मॉडल का मकसद ट्रांजैक्शन डेटा में मौजूद व्यापक पैटर्न को समझना है, ताकि एक साझा इंटेलिजेंस लेयर के आधार पर अलग-अलग पेमेंट संबंधी काम किए जा सकें।
एनवीडिया के विशेषज्ञों ने भी पेमेंट फाउंडेशन मॉडल को ट्रांजैक्शन डेटा में पैटर्न और व्यवहार समझने वाली नई एआई दिशा के रूप में रेखांकित किया है। एनवीडिया के 2026 के एक तकनीकी सत्र में पेमेंट ट्रांजैक्शन को अनुक्रम के रूप में मॉडल करने और ट्रांसफॉर्मर तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा हुई थी।
भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार तेजी से हुआ है। यूपीआई, कार्ड, नेट बैंकिंग और वॉलेट जैसे माध्यमों ने भुगतान को तत्काल और डिजिटल बनाया है। लेकिन इस विस्तार के साथ पेमेंट फेलियर, फ्रॉड, गलत रूटिंग, ऑथेंटिकेशन और डिस्प्यूट जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं।
रेजरपे पहले से एआई और मशीन लर्निंग आधारित पेमेंट रूटिंग पर काम करता रहा है। कंपनी ने 2024 में बताया था कि उसका ऑप्टिमाइज़र सिस्टम 150 से अधिक पैरामीटर और करोड़ों पेमेंट डेटा पॉइंट्स के आधार पर रूटिंग निर्णय लेता है और पेमेंट सक्सेस रेट में दस प्रतिशत तक सुधार का लक्ष्य रखता है।
वल्कन इसी दिशा को अधिक व्यापक फाउंडेशन मॉडल स्तर तक ले जाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
रेजरपे पिछले कुछ वर्षों में पेमेंट इन्फ्रास्ट्रक्चर में एआई का दायरा बढ़ा रहा है। 2024 में कंपनी ने एआई आधारित पेमेंट ऑप्टिमाइज़ेशन और स्मार्ट रूटिंग पर जोर दिया था। बाद में उसने एजेंटिक पेमेंट्स, एआई एजेंट्स और एआई आधारित बिजनेस बैंकिंग जैसी पहलों पर भी काम बढ़ाया।
2025 में रेजरपे, एनपीसीआई और ओपनएआई ने भारत में एजेंटिक पेमेंट्स को लेकर सहयोग की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य एआई सिस्टम को उपयोगकर्ता की अनुमति के साथ डिजिटल भुगतान प्रक्रिया में शामिल करना था।
2026 में रेजरपे ने एआई आधारित बैंकिंग और पेमेंट ऑपरेशंस पर अपनी रणनीति को और विस्तारित किया। कंपनी ने एआई एजेंट्स को कारोबारी भुगतान, कलेक्शन और कैश फ्लो जैसे कार्यों से जोड़ने की दिशा में भी पहल की है।
इस पृष्ठभूमि में वल्कन को रेजरपे की व्यापक एआई पेमेंट रणनीति का अगला चरण माना जा सकता है।
रेजरपे के सह-संस्थापक और सीईओ हर्षिल माथुर के मुताबिक पहल का एक बड़ा मकसद डिजिटल पेमेंट को लेकर उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाना है। खास तौर पर उन लोगों के लिए, जो अभी भी नकद और डिजिटल भुगतान के बीच फैसला करते हैं।
एनवीडिया के ग्लोबल इंडस्ट्री बिजनेस डेवलपमेंट एंड पेमेंट्स प्रमुख पहल पटांगिया ने भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को पेमेंट सिस्टम में एआई इंटेलिजेंस के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण बाजार बताया है।
अमेजन वेब सर्विसेज की ओर से भी पेमेंट डेटा पर आधारित फाउंडेशन मॉडल को लगातार सीखने और अलग-अलग पेमेंट कार्यों में इस्तेमाल करने वाली तकनीक के रूप में पेश किया गया है।
यह दृष्टिकोण वैश्विक फिनटेक सेक्टर में उभर रही प्रवृत्ति से मेल खाता है। एनवीडिया ने 2026 में पेमेंट फाउंडेशन मॉडल के उदाहरणों के तौर पर स्ट्राइप और अन्य वित्तीय संस्थानों की पहलों का भी उल्लेख किया है।
रेजरपे के दावों के मुताबिक वल्कन के शुरुआती घटकों का इस्तेमाल लगभग तीन ट्रिलियन डेटा पॉइंट्स पर किया गया है। कंपनी का कहना है कि इससे रीयल-टाइम पेमेंट रूटिंग, जोखिम मूल्यांकन और फ्रॉड पहचान में मदद मिली।
कंपनी ने पेमेंट सक्सेस रेट में दस प्रतिशत तक सुधार का दावा किया है। इसके साथ अंतरराष्ट्रीय कार्ड फ्रॉड की पहचान और रोकथाम में आठ गुना तक सुधार की बात कही गई है।
हालांकि इन आंकड़ों को कंपनी के प्रदर्शन दावे के तौर पर देखना चाहिए। स्वतंत्र परीक्षण, पीयर-रिव्यू रिसर्च या विस्तृत ऑडिट रिपोर्ट उपलब्ध होने पर इन परिणामों का अधिक ठोस मूल्यांकन संभव होगा।
पेमेंट फाउंडेशन मॉडल की तकनीकी अवधारणा अपने आप में नई दिशा है। वीजा रिसर्च ने भी 2026 में बड़े पैमाने के ट्रांजैक्शन को समझने के लिए अपने पेमेंट फाउंडेशन मॉडल पर शोध प्रकाशित किया है।
इससे स्पष्ट है कि वित्तीय उद्योग में ट्रांसफॉर्मर आधारित ट्रांजैक्शन मॉडलिंग व्यापक शोध और कारोबारी प्रयोग का हिस्सा बन चुकी है।
अगर वल्कन के दावे बड़े पैमाने पर स्वतंत्र परीक्षणों में भी कायम रहते हैं, तो इसका सबसे सीधा असर पेमेंट फेलियर और फ्रॉड मैनेजमेंट पर पड़ सकता है।
रीयल-टाइम रूटिंग में एआई अलग-अलग भुगतान मार्गों की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण कर अधिक उपयुक्त रास्ता चुनने में मदद कर सकता है। इससे बैंकिंग नेटवर्क, पेमेंट गेटवे और अन्य तकनीकी प्रणालियों के बीच ट्रांजैक्शन के सफल होने की संभावना बेहतर हो सकती है।
फ्रॉड डिटेक्शन में भी ट्रांजैक्शन को अकेले देखने के बजाय उसके संदर्भ और पुराने व्यवहार को समझना अहम होता है। ट्रांसफॉर्मर आधारित मॉडल इस तरह के अनुक्रमिक पैटर्न को पकड़ने के लिए डिजाइन किए जा सकते हैं।
यही वजह है कि वैश्विक पेमेंट कंपनियां फाउंडेशन मॉडल को फ्रॉड, ऑथेंटिकेशन और डिस्प्यूट जैसे अलग-अलग उपयोग मामलों से जोड़ रही हैं।
इस पहल का सीधा राजनीतिक प्रभाव सीमित है, लेकिन इसका नीतिगत महत्व बढ़ सकता है। भारत में डिजिटल भुगतान का विस्तार केवल निजी कंपनियों की कारोबारी रणनीति नहीं है। यह देश के डिजिटल सार्वजनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय समावेशन से भी जुड़ा विषय है।
एआई आधारित भुगतान प्रणाली के विस्तार के साथ डेटा गवर्नेंस, प्राइवेसी, साइबर सुरक्षा, मॉडल बायस और जवाबदेही जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण होंगे।
खास तौर पर तब, जब कोई एआई सिस्टम किसी ट्रांजैक्शन को संदिग्ध मानकर उसे रोकने या अतिरिक्त सत्यापन के लिए भेजता है। ऐसे फैसलों में सटीकता के साथ पारदर्शिता भी जरूरी होगी।
पेमेंट फेलियर का असर केवल उपभोक्ता पर नहीं पड़ता। छोटे कारोबारियों के लिए असफल डिजिटल भुगतान सीधे बिक्री और कैश फ्लो को प्रभावित कर सकता है।
रेजरपे के अनुसार उसके मैजिक चेकआउट प्लेटफॉर्म पर पसंदीदा यूपीआई ऐप दिखाए जाने की क्षमता में सुधार से हर महीने अतिरिक्त एक से दो लाख खरीदारी ट्रांजैक्शन संभव हुए हैं। यह भी कंपनी का अपना प्रदर्शन आंकड़ा है।
अगर एआई रूटिंग और चेकआउट ऑप्टिमाइज़ेशन बड़े पैमाने पर सफल होते हैं, तो छोटे शहरों और कस्बों के कारोबारियों को भी बेहतर डिजिटल भुगतान अनुभव मिल सकता है।
पेमेंट फाउंडेशन मॉडल अब केवल भारतीय प्रयोग नहीं रह गया है। वीजा, स्ट्राइप और अन्य वैश्विक कंपनियां भी ट्रांजैक्शन डेटा के लिए फाउंडेशन मॉडल विकसित कर रही हैं।
इस प्रतिस्पर्धा में भारत की खास ताकत उसका विशाल डिजिटल भुगतान नेटवर्क और यूपीआई आधारित रीयल-टाइम पेमेंट इकोसिस्टम है।
रेजरपे पहले ही एजेंटिक पेमेंट्स को लेकर एनपीसीआई और अंतरराष्ट्रीय एआई कंपनियों के साथ काम कर चुका है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी भुगतान इन्फ्रास्ट्रक्चर को एआई एजेंट्स के साथ जोड़ने की लंबी अवधि की रणनीति पर काम कर रही है।
वल्कन के लॉन्च के बाद सबसे अहम सवाल इसके स्वतंत्र प्रदर्शन मूल्यांकन का है। कंपनी ने कई प्रभावशाली आंकड़े बताए हैं, लेकिन यह स्पष्ट होना जरूरी है कि इन सुधारों की गणना किस आधार अवधि, किस ट्रांजैक्शन समूह और किन बाजार परिस्थितियों में की गई।
दूसरा सवाल डेटा प्राइवेसी का है। इतने बड़े पैमाने के पेमेंट डेटा से मॉडल विकसित करते समय उपयोगकर्ता की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा के मानकों का पालन निर्णायक रहेगा।
तीसरा सवाल मॉडल की गलती से जुड़ा है। अगर एआई किसी वैध ट्रांजैक्शन को संदिग्ध मानता है, तो उसके कारण उपभोक्ता और व्यापारी दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
रेजरपे के मुताबिक वल्कन का इस्तेमाल भविष्य में केवल पेमेंट रूटिंग तक सीमित नहीं रहेगा। इसे ऑथेंटिकेशन, फ्रॉड डिटेक्शन, रिस्क मैनेजमेंट और डिजिटल लेंडिंग जैसे क्षेत्रों में विस्तार देने की योजना है।
यह दिशा रेजरपे की मौजूदा एआई रणनीति से भी जुड़ती है। कंपनी ने हाल के वर्षों में एआई एजेंट्स, एजेंटिक पेमेंट्स और एआई आधारित वित्तीय ऑपरेशंस पर लगातार निवेश किया है।
अगर फाउंडेशन मॉडल अलग-अलग पेमेंट कार्यों में साझा इंटेलिजेंस लेयर के रूप में सफल रहता है, तो पेमेंट कंपनियों के लिए पारंपरिक अलग-अलग मशीन लर्निंग मॉडल से आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है।
रेजरपे वल्कन का लॉन्च भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में एआई के बढ़ते इस्तेमाल का अहम संकेत है। इसका महत्व केवल एक नए प्रोडक्ट के लॉन्च में नहीं, बल्कि ट्रांजैक्शन डेटा को व्यापक एआई इंटेलिजेंस में बदलने की कोशिश में है।
फिर भी इसकी वास्तविक सफलता कंपनी के दावों से आगे जाकर मापी जाएगी। पेमेंट सक्सेस, फ्रॉड रोकथाम, गलत अलर्ट, डेटा सुरक्षा और उपयोगकर्ता अनुभव जैसे पैमानों पर स्वतंत्र और पारदर्शी मूल्यांकन ही तय करेगा कि वल्कन भारत की पेमेंट व्यवस्था में कितना बड़ा बदलाव ला पाता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।