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सत्येंद्र जैन को DJB केस में जमानत, ₹2 लाख बॉन्ड पर राहत

Apurva Choudhary • 2026-09-04 00:44:11
सत्येंद्र जैन को DJB केस में जमानत, ₹2 लाख बॉन्ड पर राहत


दिल्ली जल बोर्ड के कथित टेंडर भ्रष्टाचार मामले में राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने सत्येंद्र जैन को जमानत दी। अदालत ने ₹2 लाख के निजी बॉन्ड और दो जमानतदारों की शर्त रखी। जैन की गिरफ्तारी एफआईआर के 27 महीने बाद हुई थी। कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों और हिरासत की जरूरत को देखते हुए राहत दी।


Location: नई दिल्ली

Date: 3 सितंबर 2026

Byline: Apurva Choudhary


सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड केस में जमानत

दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व दिल्ली मंत्री सत्येंद्र जैन को दिल्ली जल बोर्ड से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और टेंडर अनियमितता मामले में जमानत दे दी है। स्पेशल जज Dig Vinay Singh ने जैन को ₹2 लाख के निजी बॉन्ड और इसी राशि के दो जमानतदार पेश करने का निर्देश दिया।

जैन को Anti-Corruption Branch ने 18 अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया था और 19 अगस्त को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। अदालत ने अब उनकी नियमित जमानत मंजूर करते हुए कहा कि मौजूदा स्तर पर उनके खिलाफ उपलब्ध सामग्री ऐसी नहीं है कि जमानत से इनकार किया जाए।


27 महीने की देरी पर कोर्ट की अहम टिप्पणी

जमानत के विस्तृत आदेश में अदालत ने एफआईआर दर्ज होने और जैन की गिरफ्तारी के बीच करीब 27 महीने के अंतर को महत्वपूर्ण माना। मामले की एफआईआर मई 2024 में दर्ज हुई थी, जबकि जैन को अगस्त 2026 में गिरफ्तार किया गया।

अदालत के मुताबिक जांच एजेंसी ने इतने लंबे समय तक जैन की शारीरिक हिरासत को जरूरी नहीं माना था और गिरफ्तारी के लिए कोई नया या अचानक पैदा हुआ ऐसा आधार स्पष्ट नहीं किया गया, जिससे इतने लंबे अंतराल के बाद तत्काल हिरासत जरूरी साबित होती।

कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी आरोपी को मुकदमे से पहले लंबे समय तक हिरासत में रखना सजा का विकल्प नहीं बन सकता। अदालत के अनुसार प्री-ट्रायल कस्टडी का मकसद आरोपी की अदालत में मौजूदगी सुनिश्चित करना और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा रोकना है।


इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्य भी बने आधार

कोर्ट ने माना कि जांच का बड़ा हिस्सा दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर आधारित है। जांच एजेंसी के पास नोट्स, फाइलें, तकनीकी प्रस्ताव, बैठक के रिकॉर्ड और बैंक ट्रांजैक्शन स्टेटमेंट जैसे दस्तावेज पहले से मौजूद हैं।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि मौजूदा रिकॉर्ड में ऐसे WhatsApp चैट, कॉल रिकॉर्ड या SMS सामने नहीं आए हैं जो जैन को कथित किकबैक और हवाला लेनदेन से सीधे जोड़ते हों। हालांकि अदालत ने यह नहीं कहा कि जैन आरोपों से मुक्त हैं; उसने स्पष्ट रूप से माना कि अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी का फैसला ट्रायल में साक्ष्यों के आधार पर होगा।


DJB टेंडर मामले में क्या है आरोप

यह मामला दिल्ली जल बोर्ड की सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया से जुड़ा है। ACB का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में इस तरह बदलाव किए गए जिससे एक विशेष तकनीक और कंपनी को फायदा पहुंचा तथा प्रतिस्पर्धा सीमित हुई।

जांच एजेंसी ने जैन के कार्यकाल के दौरान STP परियोजनाओं से जुड़े फैसलों और कथित वित्तीय लेनदेन की जांच की है। ACB ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ फैसलों के कारण परियोजना लागत में करीब ₹123 करोड़ की बढ़ोतरी हुई। ये सभी आरोप जांच एजेंसी के हैं और इनका अंतिम न्यायिक निर्धारण अभी बाकी है।


कोर्ट ने जैन की भूमिका पर क्या कहा

अदालत ने अपने आदेश में यह संकेत दिया कि मामले में जैन के कुछ फैसलों पर सवाल उठते हैं और उन्हें इस स्तर पर पूरी तरह निर्दोष मानना उचित नहीं होगा। लेकिन अदालत का निष्कर्ष यह भी था कि मौजूदा सामग्री अपने आप में उन्हें जमानत से वंचित रखने के लिए पर्याप्त नहीं है।

कोर्ट ने इस स्तर पर यह देखा कि जांच में जैन की आगे की हिरासत क्यों जरूरी है। चूंकि ACB ने उनकी गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस कस्टडी नहीं मांगी थी और मामला मुख्य रूप से पहले से जब्त दस्तावेजी तथा इलेक्ट्रॉनिक सामग्री पर आधारित था, इसलिए लगातार न्यायिक हिरासत को उचित ठहराने का आधार कमजोर माना गया।


जमानत के साथ लगीं कड़ी शर्तें

जैन को जमानत पूरी तरह बिना शर्त नहीं मिली है। अदालत ने उन्हें ₹2 लाख का निजी बॉन्ड और दो जमानतदार देने के साथ पासपोर्ट सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

उन्हें अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश छोड़ने की इजाजत नहीं होगी। साथ ही उन्हें मामले से जुड़े गवाहों से संपर्क कर उन्हें प्रभावित या धमकाने की कोशिश नहीं करनी होगी और जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसी के सामने पेश होना होगा।


बाकी आरोपियों की स्थिति अलग

इस मामले में जैन के अलावा कई अन्य आरोपी भी गिरफ्तार किए गए हैं। इनमें पूर्व DJB CEO Udit Prakash Rai, पूर्व कॉन्ट्रैक्चुअल कंसल्टेंट Ankit Srivastava और टेंडर से जुड़े कुछ निजी पक्षों के लोग शामिल हैं।

जैन को जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि अन्य आरोपियों को भी स्वतः वही राहत मिल गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक कोर्ट ने अन्य आरोपियों की न्यायिक हिरासत को आगे बढ़ाया है और उनके मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी है।


जमानत और बरी होने में अंतर

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी अंतर यह है कि जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। अदालत ने फिलहाल यह तय किया है कि जांच और ट्रायल के दौरान जैन को हिरासत में रखना जरूरी नहीं है, जबकि मामले के आरोपों की अंतिम सच्चाई का फैसला अभी होना बाकी है।

ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों को साक्ष्यों से साबित करना होगा और बचाव पक्ष को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। जमानत आदेश में की गई टिप्पणियां भी अंतिम दोषसिद्धि या बरी किए जाने का फैसला नहीं हैं।


राजनीतिक प्रतिक्रिया से अलग कोर्ट का फैसला

जैन की जमानत के बाद AAP नेताओं ने अदालत के फैसले को राहत के रूप में पेश किया है। दूसरी ओर, बीजेपी की ओर से यह जोर दिया गया है कि जमानत को मामले में अंतिम क्लीन चिट नहीं माना जाना चाहिए।

दोनों पक्षों की राजनीतिक प्रतिक्रियाओं से अलग अदालत का आदेश कानूनी कसौटी पर आधारित है। इसलिए इस स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि कोर्ट ने जैन को जमानत दी है, जबकि DJB टेंडर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया अभी जारी रहेगी।


अब आगे क्या होगा

जैन की रिहाई के बाद भी ACB की जांच और मामले की न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी। अदालत ने उन्हें जांच में सहयोग करने की शर्त के साथ राहत दी है, इसलिए जांच एजेंसी जरूरत पड़ने पर उन्हें पूछताछ या अन्य जांच प्रक्रिया के लिए बुला सकती है।

आगे मामले की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि अभियोजन पक्ष जैन और अन्य आरोपियों के बीच कथित टेंडर हेरफेर, वित्तीय लेनदेन और आपराधिक साजिश का संबंध किस तरह साबित करता है। वहीं बचाव पक्ष अदालत के सामने इन आरोपों और साक्ष्यों को चुनौती देगा।

फिलहाल राउज़ एवेन्यू कोर्ट का फैसला जैन के लिए तत्काल राहत है, लेकिन इसे मामले का अंतिम निष्कर्ष मानना कानूनी रूप से सही नहीं होगा।

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Apurva Choudhary

Apurva Choudhary

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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