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सूडान में सोने की खदान बनी मौत का मलबा, 60 मजदूरों की जान गई, कई अब भी फंसे
Harish Qureshi
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2026-09-16 15:49:16
सूडान के पश्चिमी कोर्डोफान में अल-नुहूद के उत्तर स्थित सोने की खदान ढहने से कम से कम 60 लोगों की मौत हुई है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार कई खनिक अब भी लापता हैं। खदान में सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
पश्चिमी कोर्डोफान, सूडान | 16 सितंबर 2026
By Mohd Haris
सूडान में सोने की खदान में बड़ा हादसा
सूडान के पश्चिमी कोर्डोफान क्षेत्र से एक बड़े खनन हादसे की खबर सामने आई है। एक सोने की खदान के ढहने से कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई है।
स्थानीय सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि हादसा रविवार को पश्चिमी कोर्डोफान के एक दूरदराज इलाके में हुआ। यह खदान अल-नुहूद शहर के उत्तर में स्थित बताई गई है।
हादसे के बाद मलबे में दबे लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर अभी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक कई अन्य खनिक लापता हैं और उनके भी मलबे में दबे होने की आशंका है।
अल-ज़राआ खदान में धंसी सुरंगें
रिपोर्टों में खदान का नाम अल-ज़राआ बताया गया है। एएफपी को दो बचे हुए खनिकों ने बताया कि खदान की सुरंगें ढह गईं और अगले दिन तक करीब 60 शव बाहर निकाले जा चुके थे।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार खदान में कई छोटे और आपस में बेहद करीब स्थित शाफ्ट थे। इनके ढहने से बड़ी संख्या में खनिक मलबे के नीचे फंस गए।
यह क्षेत्र पारंपरिक या छोटे पैमाने के सोने के खनन के लिए जाना जाता है। ऐसे इलाकों में कई बार खनन गतिविधियां सीमित सुरक्षा संसाधनों के साथ संचालित होती हैं।
कई खनिक अब भी लापता
हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता उन लोगों को लेकर है जिनका अब तक पता नहीं चल सका है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार कई लोग मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं। हालांकि, लापता लोगों की सटीक संख्या अभी सार्वजनिक रूप से स्थापित नहीं हुई है।
दूरदराज इलाके में हादसा होने के कारण राहत और बचाव कार्य भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। स्थानीय रिपोर्टों में पर्याप्त भारी उपकरणों की कमी की बात कही गई है।
इस वजह से शुरुआती मृतक संख्या अंतिम आंकड़ा नहीं मानी जा सकती।
सोने के लिए मशहूर है सूडान
सूडान अफ्रीका के प्रमुख सोना उत्पादक देशों में शामिल है। लेकिन देश के सोने के उत्पादन का बड़ा हिस्सा औपचारिक औद्योगिक खनन के बजाय छोटे पैमाने और पारंपरिक खनन से आता है।
रॉयटर्स के अनुसार देश में सोने का बड़ा हिस्सा खतरनाक पारंपरिक खनन तकनीकों के जरिए निकाला जाता है और इसका कुछ हिस्सा बाद में तस्करी के जरिए देश से बाहर चला जाता है।
यही वजह है कि सोने का कारोबार सूडान की अर्थव्यवस्था और स्थानीय आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन इसके साथ गंभीर सुरक्षा और नियमन संबंधी चुनौतियां भी जुड़ी हुई हैं।
युद्ध ने बढ़ाया छोटे पैमाने के खनन पर दबाव
सूडान अप्रैल 2023 से सेना और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के बीच युद्ध से जूझ रहा है। इस संघर्ष ने देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और बुनियादी सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
रिपोर्ट के मुताबिक संघर्ष के कारण 1 करोड़ 40 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं और देश में गंभीर मानवीय संकट बना हुआ है।
ऐसे माहौल में सोने का छोटा पैमाने वाला खनन कई लोगों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण जरिया बन गया है। लेकिन जब लोग सीमित संसाधनों और सुरक्षा व्यवस्था के बीच खदानों में काम करते हैं, तो दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
पश्चिमी कोर्डोफान की घटना ने एक बार फिर अनौपचारिक खनन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
भूमिगत खनन में सुरंगों की मजबूती, वेंटिलेशन, आपातकालीन निकासी और नियमित तकनीकी निरीक्षण बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इनमें से किसी एक व्यवस्था की कमी भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
हालांकि, मौजूदा हादसे में खदान क्यों ढही, इसका आधिकारिक तकनीकी कारण अभी सामने नहीं आया है। इसलिए किसी एक वजह को दुर्घटना का निश्चित कारण बताना फिलहाल उचित नहीं होगा।
बचाव कार्य सबसे बड़ी चुनौती
खनन हादसे के बाद बचाव अभियान का पहला उद्देश्य मलबे में जीवित बचे लोगों का पता लगाना होता है। लेकिन गहरी और अस्थिर सुरंगों में बचाव कार्य स्वयं बेहद जोखिमपूर्ण होता है।
स्थानीय रिपोर्टों में बताया गया है कि पश्चिमी कोर्डोफान की इस खदान में शाफ्ट काफी गहरे और एक-दूसरे के करीब थे। इससे मलबे को हटाने और अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अगर पर्याप्त भारी मशीनरी उपलब्ध न हो तो बचाव कार्य में और अधिक समय लग सकता है।
छह खनिकों के बचने की भी खबर
स्थानीय रिपोर्टों में कुछ खनिकों के बच निकलने की जानकारी भी सामने आई है। एक स्थानीय स्रोत के मुताबिक कम से कम 6 खनिक हादसे से बच गए, हालांकि उनमें से कुछ घायल बताए गए हैं।
एक अन्य स्थानीय रिपोर्ट में एक ऐसे जीवित बचे खनिक का उल्लेख है जो कई दिनों तक खदान के भीतर रहने के बाद बाहर निकल पाया। हालांकि इन विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है।
इसलिए बचाव और लापता लोगों की संख्या को लेकर आने वाली नई सूचनाओं की प्रतीक्षा जरूरी है।
सोना और सूडान की जंग का संबंध
सूडान में सोना सिर्फ खनन उद्योग का हिस्सा नहीं है। यह देश की मौजूदा आर्थिक और सुरक्षा परिस्थितियों से भी जुड़ा हुआ है।
हाल की एक जांच में बताया गया है कि युद्ध और आर्थिक संकट के बीच अनौपचारिक सोना खनन बढ़ा है। इससे पर्यावरणीय नुकसान, स्वास्थ्य जोखिम और स्थानीय समुदायों पर दबाव बढ़ने की चिंता भी सामने आई है।
यानी पश्चिमी कोर्डोफान का यह हादसा केवल एक औद्योगिक दुर्घटना नहीं है। यह उस व्यापक संकट की ओर भी इशारा करता है जिसमें आर्थिक मजबूरी, अनौपचारिक रोजगार और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं।
पश्चिमी कोर्डोफान पहले से संकटग्रस्त क्षेत्र
पश्चिमी कोर्डोफान सूडान के उन इलाकों में शामिल है जहां युद्ध और मानवीय संकट का असर गंभीर रहा है।
ब्रिटेन सरकार की सितंबर 2026 की मानवीय स्थिति संबंधी रिपोर्ट में कोर्डोफान और दारफुर को सूडान के उन क्षेत्रों में शामिल किया गया है जहां सक्रिय संघर्ष और मानवीय परिस्थितियों के कारण गंभीर जोखिम बने हुए हैं।
ऐसे इलाके में किसी खनन दुर्घटना के बाद तत्काल चिकित्सा और बचाव सहायता पहुंचाना सामान्य परिस्थितियों की तुलना में अधिक मुश्किल हो सकता है।
मृतकों की संख्या बढ़ सकती है
फिलहाल कम से कम 60 मौतों की पुष्टि स्थानीय सूत्रों के हवाले से हुई है। लेकिन कई लोग लापता बताए जा रहे हैं।
इसलिए अंतिम मृतक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। यदि मलबे के नीचे और शव मिलते हैं तो आंकड़ा बढ़ सकता है।
साथ ही, बचाव दल अगर किसी जीवित व्यक्ति तक पहुंचने में सफल होते हैं तो हादसे की पूरी तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
सिर्फ एक हादसा नहीं, बड़ी सुरक्षा चुनौती
सोने की खदानों में होने वाले हादसे अक्सर केवल प्राकृतिक भू-स्खलन या सुरंग ढहने की वजह से नहीं होते। खनन तकनीक, भूगर्भीय स्थिति, शाफ्ट का निर्माण, सुरक्षा निरीक्षण और काम करने की परिस्थितियां भी जोखिम को प्रभावित करती हैं।
अनौपचारिक खनन में इन सभी मानकों की निगरानी करना अधिक कठिन होता है।
सूडान के मौजूदा आर्थिक और सुरक्षा संकट के बीच यह समस्या और जटिल हो जाती है। इसलिए इस हादसे की जांच में केवल तत्काल कारण नहीं, बल्कि खनन सुरक्षा व्यवस्था और स्थानीय परिस्थितियों को भी देखना महत्वपूर्ण होगा।
हादसे ने फिर याद दिलाया सोने की कीमत
सोना दुनिया के सबसे मूल्यवान खनिजों में से एक है, लेकिन इसके पीछे काम करने वाले खनिकों के लिए इसकी कीमत कई बार बेहद भारी पड़ती है।
पश्चिमी कोर्डोफान में कम से कम 60 लोगों की मौत इसी जोखिम की भयावह तस्वीर पेश करती है। मलबे के नीचे दबे लोगों की वास्तविक संख्या सामने आने के बाद ही इस त्रासदी का पूरा पैमाना स्पष्ट होगा।
निष्कर्ष
सूडान के पश्चिमी कोर्डोफान में सोने की खदान ढहने से कम से कम 60 लोगों की मौत हुई है। हादसा अल-नुहूद के उत्तर स्थित एक दूरदराज खनन क्षेत्र में हुआ और कई अन्य खनिकों के अब भी लापता होने की खबर है।
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब सूडान युद्ध, आर्थिक संकट और गंभीर मानवीय परिस्थितियों से गुजर रहा है। देश में छोटे पैमाने के सोने के खनन पर बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका निर्भर है, लेकिन सुरक्षा संसाधनों और नियमन की कमी गंभीर जोखिम पैदा कर सकती है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल मलबे के नीचे फंसे लोगों की स्थिति और बचाव अभियान को लेकर है। जब तक राहत और जांच एजेंसियां पूरी जानकारी सामने नहीं लातीं, तब तक 60 का आंकड़ा शुरुआती मृतक संख्या माना जाना चाहिए।
Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।