उत्तराखंड: राहुल गांधी पर एफआईआर के विरोध में देहरादून में कांग्रेस का मार्च शुरू
Mohammad Naved
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2026-09-01 12:07:47
राहुल गांधी पर दर्ज एफआईआर के विरोध में उत्तराखंड कांग्रेस ने देहरादून में सचिवालय मार्च शुरू किया। मामला हल्द्वानी के कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद से जुड़ा है।
📍 देहरादून, उत्तराखंड
🗓️ 01 सितंबर 2026
✍️ Mohd Naved
देहरादून में कांग्रेस का मार्च
राहुल गांधी के खिलाफ उत्तराखंड में दर्ज एफआईआर को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को देहरादून में विरोध प्रदर्शन शुरू किया। पार्टी कार्यकर्ता सचिवालय की ओर मार्च कर रहे हैं और एफआईआर वापस लेने की मांग उठा रहे हैं। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक तौर पर गलत बताते हुए हल्द्वानी के मूल विवाद में भी कार्रवाई की मांग की है।
कांग्रेस ने पहले ही 01 सितंबर को सचिवालय मार्च का ऐलान किया था। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शन सुबह करीब 10:30 बजे शुरू होने का कार्यक्रम था। सोमवार को भी पार्टी कार्यकर्ताओं ने देहरादून में पुलिस मुख्यालय की ओर मार्च किया था और पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपा था।
एफआईआर की वजह क्या है
राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मामला हल्द्वानी के रामलीला मैदान से जुड़े कथित ‘शुद्धिकरण’ विवाद को लेकर है। पुलिस के अनुसार, 08 अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की जनसभा के बाद 11 अगस्त को वहां कथित तौर पर धार्मिक अनुष्ठान किया गया था। इसी घटना को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई।
रिपोर्टों के मुताबिक, राहुल गांधी की विवाद से जुड़ी टिप्पणियों को लेकर एक शिकायत पुलिस के पास पहुंची। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने धार्मिक अनुष्ठान को जातिगत नजरिये से पेश किया और इससे वाल्मीकि समाज की भावनाएं आहत हुईं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शिकायत में लगाए गए आरोप अभी आरोप ही हैं। एफआईआर दर्ज होना किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों के साबित होने के बराबर नहीं है।
किन कानूनों के तहत मामला दर्ज हुआ
पुलिस के अनुसार एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की ऐसी धाराएं शामिल हैं, जो अलग-अलग समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से किए गए कृत्यों से संबंधित हैं। इसके साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।
शिकायतकर्ता की ओर से पुलिस को कथित तौर पर प्रेस वार्ता की रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया पोस्ट और 08 तथा 11 अगस्त के कार्यक्रमों से संबंधित फोटो और वीडियो भी दिए गए थे।
कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस ने एफआईआर को लेकर कड़ा एतराज़ जताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि हल्द्वानी में हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ की घटना की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के बजाय राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने एफआईआर पर सवाल उठाते हुए कहा कि संविधान और कानून छुआछूत तथा जातिगत भेदभाव को स्वीकार नहीं करते। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी एफआईआर पर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया।
कांग्रेस की मांग है कि राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाए और हल्द्वानी की घटना को लेकर भी निष्पक्ष कार्रवाई की जाए। पार्टी ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय, संवैधानिक अधिकारों और जातिगत भेदभाव से जोड़ते हुए अपना विरोध तेज किया है।
भाजपा और मुख्यमंत्री धामी का जवाब
दूसरी तरफ, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राहुल गांधी पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस नेता हर जगह जाति और भेदभाव का मुद्दा तलाश रहे हैं। धामी ने इसे संकीर्ण राजनीति बताया।
भाजपा की ओर से हल्द्वानी के कार्यक्रम को लेकर यह तर्क भी सामने आया है कि कांग्रेस की जनसभा के दौरान कथित तौर पर गंदगी हुई थी और धार्मिक स्थल से जुड़े स्थान पर आपत्तिजनक नारे लगाए गए थे। भाजपा ने इसी संदर्भ में कथित धार्मिक अनुष्ठान का बचाव किया है।
इस तरह पूरे विवाद में दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। कांग्रेस इसे जातिगत अपमान और सामाजिक भेदभाव के नजरिये से देख रही है, जबकि भाजपा इसे धार्मिक भावनाओं और कार्यक्रम स्थल की कथित स्थिति से जोड़कर देख रही है।
विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बना
हल्द्वानी की स्थानीय घटना अब उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गई है। राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर के बाद कांग्रेस ने प्रदेश स्तर पर आंदोलन का रुख अपनाया है। देहरादून के अलावा दूसरे स्थानों पर भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं।
देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का सचिवालय मार्च इसी राजनीतिक टकराव की अगली कड़ी है। पार्टी का मकसद सरकार और पुलिस पर दबाव बनाना है कि एफआईआर की कार्रवाई की समीक्षा की जाए और हल्द्वानी विवाद में भी समान रूप से कानूनी कार्रवाई हो।
कानून और राजनीति की कसौटी
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल एफआईआर से आगे की कानूनी प्रक्रिया का है। पुलिस को शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करनी होगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करनी होगी।
राजनीतिक आरोप और कानूनी जांच अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। कांग्रेस एफआईआर को राजनीतिक दबाव बता रही है, जबकि शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी की टिप्पणियों से समुदाय की भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया है। अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।
आगे क्या होगा
देहरादून में कांग्रेस का मार्च आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में इस मुद्दे को और तेज कर सकता है। कांग्रेस की ओर से राज्यभर में आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है। दूसरी तरफ भाजपा और मुख्यमंत्री धामी ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देना शुरू कर दिया है।
अब निगाह पुलिस की जांच, एफआईआर में आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई और दोनों पक्षों की राजनीतिक रणनीति पर रहेगी। इस विवाद का असर केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन तक सीमित रहेगा या यह उत्तराखंड में जाति, सामाजिक न्याय और धार्मिक पहचान की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनेगा, यह आने वाले दिनों में सामने आएगा।
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Mohammad Naved
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।