उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। श्रमिक आंदोलनों और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार में विभिन्न दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
Dehradun, उत्तराखंड
🗓️ 27 जुलाई 2026
✍️ Shahnazar
उत्तराखंड की सार्वजनिक और जनसंघर्ष आधारित राजनीति के एक प्रमुख चेहरे, पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हीरा सिंह बिष्ट का शनिवार देर रात निधन हो गया। 81 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने के कारण उनका देहांत हुआ। रविवार को देहरादून में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें सत्ता और विपक्ष के अनेक वरिष्ठ नेताओं, सामाजिक संगठनों, श्रमिक प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनके निधन को केवल एक राजनीतिक नेता की विदाई नहीं, बल्कि उत्तराखंड में श्रमिक अधिकारों, जनसरोकारों और राज्य आंदोलन से जुड़े एक लंबे सार्वजनिक जीवन के समापन के रूप में देखा जा रहा है।
हीरा सिंह बिष्ट पांच दशकों से अधिक समय तक सक्रिय राजनीति में रहे। उन्होंने कांग्रेस संगठन के भीतर विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं और श्रमिकों, कर्मचारियों तथा कमजोर तबकों के मुद्दों को लगातार उठाया। इंटक के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठित और असंगठित श्रमिकों के अधिकारों से जुड़े अनेक अभियानों का नेतृत्व किया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उन्होंने अपनी पहचान सत्ता से अधिक जनसंपर्क और जनआंदोलनों के माध्यम से बनाई।
देहरादून स्थित उनके आवास पर सुबह से ही श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह, डॉ. हरक सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और अन्य जनप्रतिनिधियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर शोक व्यक्त किया।
राजकीय सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार में सामाजिक संगठनों, राज्य आंदोलनकारियों और श्रमिक संगठनों की भी बड़ी भागीदारी रही।
हीरा सिंह बिष्ट ने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत डीएवी पीजी कॉलेज, देहरादून के छात्रसंघ अध्यक्ष के रूप में की। इसके बाद वे युवा कांग्रेस से जुड़े और धीरे-धीरे प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
वर्ष 1985 में पहली बार विधायक निर्वाचित हुए। बाद में 2002 और 2014 में भी विधानसभा पहुंचे। इस प्रकार उन्होंने तीन बार विधायक के रूप में जनता का प्रतिनिधित्व किया।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकारों में कैबिनेट मंत्री रहते हुए उन्होंने परिवहन, श्रम और तकनीकी शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली। प्रशासनिक अनुभव और सरल कार्यशैली के कारण उन्हें राजनीतिक विरोधियों के बीच भी सम्मान प्राप्त था।
पृथक उत्तराखंड राज्य की मांग के दौरान हीरा सिंह बिष्ट आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। उन्होंने विभिन्न जनसभाओं, धरनों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से अलग राज्य की आवश्यकता को व्यापक स्तर पर उठाया। राज्य आंदोलन में उनकी भागीदारी को उत्तराखंड के राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
उनकी पहचान लंबे समय तक श्रमिक हितों के पैरोकार के रूप में रही। न्यूनतम वेतन, श्रमिक सुरक्षा, कर्मचारी अधिकार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दे उनके राजनीतिक जीवन के केंद्र में रहे। इसी वजह से श्रमिक संगठनों के बीच उन्हें विशेष सम्मान प्राप्त था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट का सार्वजनिक जीवन जनसेवा, सादगी और सामाजिक प्रतिबद्धता का उदाहरण था। उन्होंने उनके निधन को राज्य की अपूरणीय क्षति बताया।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट मूल्य आधारित राजनीति के प्रतिनिधि थे। कांग्रेस नेताओं ने उनके निधन को संगठन के लिए बड़ी क्षति बताया और उनके संघर्षपूर्ण जीवन को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बताया।
हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक जीवन केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने श्रमिक संगठनों, सामाजिक आंदोलनों और उत्तराखंड राज्य निर्माण की प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभाई। जनसंपर्क, सादगी और आम लोगों तक सहज पहुंच उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं रहीं।
हीरा सिंह बिष्ट का निधन उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसे दौर के अंत का प्रतीक है, जिसमें जनसंघर्ष, श्रमिक अधिकार और सार्वजनिक जीवन की सादगी को विशेष महत्व दिया जाता था। उनकी राजनीतिक विरासत आने वाले समय में भी राज्य की लोकतांत्रिक और सामाजिक राजनीति का महत्वपूर्ण संदर्भ बनी रहेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।