एच1एन1 मौसमी इन्फ्लुएंजा ए का एक उपप्रकार है। तेज बुखार, खांसी, बदन दर्द और थकान इसके सामान्य लक्षण हैं, लेकिन सांस लेने में परेशानी गंभीर संकेत हो सकती है।
एच1एन1 और सामान्य फ्लू में क्या अंतर है?
मौसम बदलने के साथ बुखार, खांसी, गले में खराश और बदन दर्द जैसी शिकायतें आम हो जाती हैं। लेकिन हर बुखार को सामान्य वायरल मान लेना उचित नहीं है। इन्फ्लुएंजा यानी फ्लू एक संक्रामक श्वसन संक्रमण है, जो कई तरह के इन्फ्लुएंजा वायरस से हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मनुष्यों में मौसमी इन्फ्लुएंजा मुख्य रूप से इन्फ्लुएंजा ए और बी वायरस के कारण होता है। इनमें एच1एन1 भी इन्फ्लुएंजा ए का एक उपप्रकार है। इसलिए यह समझना जरूरी है कि एच1एन1 और सामान्य मौसमी फ्लू हमेशा दो अलग-अलग बीमारियां नहीं हैं। आज एच1एन1 को मौसमी इन्फ्लुएंजा के एक वायरस के रूप में देखा जाता है। वर्ष २००९ में इसी वायरस से जुड़ी महामारी के बाद यह दुनिया भर में मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस के रूप में प्रसारित होता रहा है।
एच1एन1 क्या है?
एच1एन1 इन्फ्लुएंजा ए वायरस का एक उपप्रकार है। वर्ष २००९ में इसके एक नए रूप ने वैश्विक महामारी का रूप लिया था। उस समय इसे आम बोलचाल में ‘स्वाइन फ्लू’ भी कहा गया, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक आज मानवों में प्रसारित एच1एन1 को मौसमी इन्फ्लुएंजा वायरस के रूप में समझा जाता है। मौजूदा समय में मानवों में प्रसारित इन्फ्लुएंजा ए के प्रमुख उपप्रकारों में एच1एन1 और एच3एन2 शामिल हैं। इसलिए एच1एन1 का नाम सुनकर यह मान लेना सही नहीं है कि हर मामला वर्ष २००९ जैसी महामारी से जुड़ा है।
सामान्य फ्लू क्या है?
सामान्य फ्लू से आमतौर पर मौसमी इन्फ्लुएंजा का मतलब होता है। यह भी इन्फ्लुएंजा वायरस के कारण होने वाला संक्रामक श्वसन संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों और छोटे कणों के जरिए वायरस दूसरे लोगों तक पहुंच सकता है। दूषित हाथों से भी संक्रमण फैल सकता है। मौसमी फ्लू आम तौर पर अचानक शुरू होता है। तेज बुखार, सूखी खांसी, सिरदर्द, गले में खराश, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द तथा अत्यधिक थकान इसके प्रमुख लक्षण हैं। ज्यादातर लोग लगभग एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं, हालांकि खांसी और कमजोरी कुछ समय तक बनी रह सकती है।
एच1एन1 और सामान्य फ्लू के लक्षणों में कितना अंतर?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल लक्षणों को देखकर एच1एन1 और दूसरे इन्फ्लुएंजा वायरस के बीच पक्की पहचान करना मुश्किल है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अलग-अलग इन्फ्लुएंजा संक्रमणों के लक्षण काफी हद तक एक जैसे हो सकते हैं। निश्चित पहचान के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन और जरूरत पड़ने पर प्रयोगशाला जांच की जा सकती है।
आम तौर पर इनमें ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं—
* अचानक बुखार आना
* खांसी, अक्सर सूखी
* गले में खराश
* सिरदर्द
* मांसपेशियों और शरीर में दर्द
* अत्यधिक थकान या कमजोरी
* नाक बहना या बंद होना
* ठंड लगना
कुछ एच1एन1 संक्रमणों में उल्टी या दस्त जैसे लक्षण भी देखे गए हैं, हालांकि ये हर मरीज में जरूरी नहीं होते।
सामान्य सर्दी और फ्लू को भी एक जैसा न समझें
कई लोग सामान्य जुकाम को भी फ्लू कहते हैं, जबकि दोनों एक जैसे नहीं हैं। सामान्य सर्दी अक्सर धीरे-धीरे शुरू होती है और छींक, नाक बंद होना या गले की परेशानी अधिक प्रमुख हो सकती है। इसके विपरीत फ्लू अक्सर अचानक शुरू होता है और बुखार, बदन दर्द तथा थकान अधिक तीव्र हो सकती है। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर किसी व्यक्ति को निश्चित रूप से एच1एन1 या किसी अन्य श्वसन वायरस से संक्रमित बताना उचित नहीं है।
किन लोगों को अधिक सावधान रहना चाहिए?
इन्फ्लुएंजा किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन कुछ लोगों में गंभीर बीमारी और जटिलताओं का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
इनमें मुख्य रूप से—
गर्भवती महिलाएं, पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चे, बुजुर्ग, खासकर ६५ वर्ष से अधिक उम्र के लोग और लंबे समय से किसी बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति शामिल हैं। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में भी गंभीर संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। अस्थमा, मधुमेह, हृदय रोग या अन्य दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत सावधान
फ्लू के ज्यादातर मामले हल्के होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार गंभीर इन्फ्लुएंजा संक्रमण निमोनिया जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है और पहले से मौजूद बीमारियों को भी बिगाड़ सकता है। यदि बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना, सीने में दर्द या दबाव, अचानक चक्कर, भ्रम की स्थिति या लगातार गंभीर उल्टी हो, तो तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए। बच्चों में तेज या कठिन सांस लेना, होंठ या चेहरे का नीला पड़ना, सीने में दर्द, बहुत अधिक कमजोरी या सामान्य प्रतिक्रिया न देना जैसे संकेत आपात चिकित्सकीय मूल्यांकन की जरूरत बता सकते हैं।
क्या हर एच1एन1 मरीज को अस्पताल जाना पड़ता है?
नहीं। अधिकांश मौसमी इन्फ्लुएंजा संक्रमण हल्के होते हैं और लोग आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ तथा लक्षणों के अनुसार देखभाल से ठीक हो जाते हैं। लेकिन गंभीर लक्षण वाले या उच्च जोखिम वाले मरीजों को चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत हो सकती है। कुछ मरीजों में डॉक्टर एंटीवायरल दवा देने का निर्णय ले सकते हैं। खास तौर पर गंभीर बीमारी के जोखिम वाले लोगों में उपचार जल्द शुरू करना महत्वपूर्ण हो सकता है। एंटीवायरल दवाएं चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ही ली जानी चाहिए। एंटीबायोटिक दवाएं वायरस के खिलाफ काम नहीं करतीं, इसलिए फ्लू जैसे लक्षण होने पर खुद से एंटीबायोटिक शुरू करना उचित नहीं है।
बचाव के लिए क्या करें?
इन्फ्लुएंजा से बचाव में टीकाकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मौसमी फ्लू से बचाव और गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए वार्षिक फ्लू टीकाकरण सबसे प्रभावी उपायों में से एक है। इसके साथ ही खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना, नियमित रूप से हाथ धोना, बीमार होने पर दूसरों से दूरी बनाए रखना और अस्वस्थ महसूस होने पर घर पर आराम करना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है।
निष्कर्ष
एच1एन1 का नाम सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन इसके लक्षणों को हल्के में लेना भी सही नहीं। सबसे अहम बात यह है कि एच1एन1 इन्फ्लुएंजा ए का एक मौसमी उपप्रकार है और इसके लक्षण दूसरे मौसमी फ्लू संक्रमणों से काफी मिलते हैं। इसलिए केवल लक्षण देखकर स्वयं निदान करने के बजाय जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। खासकर सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, भ्रम, अत्यधिक कमजोरी या तेजी से बिगड़ती हालत जैसे संकेत दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से गंभीर स्वास्थ्य समस्या वाले लोगों को फ्लू के लक्षणों में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
Note:
यह लेख स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। एच1एन1 या किसी अन्य इन्फ्लुएंजा संक्रमण की पुष्टि और उपचार का निर्णय चिकित्सकीय जांच के आधार पर किया जाना चाहिए।