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पैरों में सूजन किन बीमारियों का संकेत? जानिए कब सावधान हों

Neelam Saini 2026-08-08 15:57:24
पैरों में सूजन किन बीमारियों का संकेत? जानिए कब सावधान हों
पैरों में सूजन को न करें नजरअंदाज, इन बीमारियों का हो सकता है संकेत

पैरों में सूजन क्यों होती है? दिल से किडनी तक जानिए कारण

अचानक एक पैर में सूजन है तो सावधान, हो सकती है गंभीर वजह

पैरों में सूजन यानी एडिमा कई सामान्य परिस्थितियों में हो सकती है, जैसे लंबे समय तक बैठना, खड़े रहना या अधिक नमक खाना। मगर लगातार या अचानक आई सूजन कभी-कभी हृदय, किडनी, लिवर, नसों या ब्लड क्लॉट जैसी समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। मुख्य संदेश यही है कि सूजन के पैटर्न और साथ मौजूद दूसरे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। 

📍 Location: नई दिल्ली
📰 Date: 8 अगस्त 2026
✍️ नीलम सैनी

पैरों में सूजन क्या बताती है?

पैरों, टखनों या पंजों में सूजन को आमतौर पर एडिमा कहा जाता है। इसमें शरीर के ऊतकों में जरूरत से ज्यादा तरल जमा हो जाता है, जिससे त्वचा फूली हुई, खिंची हुई या चमकदार नजर आ सकती है। कई बार दबाने पर त्वचा में कुछ देर के लिए गड्ढा भी बन जाता है, जिसे पिटिंग एडिमा कहा जाता है। हर सूजन किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो, ऐसा जरूरी नहीं है। लंबे समय तक एक ही जगह बैठना या खड़े रहना, ज्यादा नमक खाना, गर्म मौसम, गर्भावस्था, वजन बढ़ना और कुछ दवाएं भी पैरों में सूजन की वजह बन सकती हैं। इसलिए केवल सूजन देखकर किसी बीमारी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। 

पैरों में सूजन के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?

पैरों में सूजन का एक अहम कारण नसों से जुड़ी समस्या हो सकती है। क्रॉनिक वेनस इनसफिशिएंसी में पैरों की नसें रक्त को प्रभावी तरीके से वापस हृदय की ओर नहीं पहुंचा पातीं, जिससे पैरों में रक्त और तरल जमा होने लगता है। वैरिकोज वेन्स भी इस तरह की सूजन से जुड़ी हो सकती हैं। लंबे समय तक बैठे रहने या खड़े रहने से भी पैरों में अस्थायी सूजन हो सकती है। खासकर गर्म मौसम में यह परेशानी अधिक महसूस हो सकती है। सामान्य परिस्थितियों में गतिविधि बढ़ाने और पैर ऊंचे रखने से राहत मिल सकती है, लेकिन अगर समस्या लगातार बनी रहे तो इसके पीछे की वजह की जांच जरूरी हो सकती है। 

दिल से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकती है सूजन

पैरों में सूजन कभी-कभी हृदय की कार्यक्षमता से जुड़ी समस्या की तरफ इशारा कर सकती है। जब हृदय शरीर में रक्त को पर्याप्त रूप से पंप नहीं कर पाता, तो रक्त का दबाव नसों में बढ़ सकता है और पैरों के ऊतकों में तरल जमा हो सकता है। इसके साथ पैरों या टखनों में सूजन और कभी-कभी वजन बढ़ना भी देखा जा सकता है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि पैरों में सूजन का मतलब सीधे तौर पर हृदय रोग होना नहीं है। यही वजह है कि केवल इस एक लक्षण के आधार पर बीमारी की पुष्टि करना गलत होगा। सांस फूलना, सीने में दर्द या धड़कन में असामान्यता जैसे दूसरे लक्षण मौजूद हों तो चिकित्सकीय मूल्यांकन ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है। 

किडनी की परेशानी में क्यों सूज सकते हैं पैर?

किडनी शरीर से अतिरिक्त तरल और कुछ अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाती है। किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर में तरल और नमक जमा हो सकता है, जिसके परिणामस्वरूप पैरों और टखनों में सूजन दिखाई दे सकती है। किडनी से संबंधित कुछ स्थितियों में आंखों के आसपास भी सूजन देखी जा सकती है। कुछ किडनी संबंधी बीमारियों में रक्त में प्रोटीन का स्तर कम हो सकता है। इससे शरीर के भीतर तरल के संतुलन पर असर पड़ता है और ऊतकों में तरल जमा होने की स्थिति बन सकती है। इसलिए लगातार सूजन के साथ पेशाब या शरीर में अन्य बदलाव महसूस हों तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। 

लिवर की बीमारी से भी जुड़ सकता है मामला

लिवर शरीर के तरल संतुलन और कई महत्वपूर्ण प्रोटीन के निर्माण में भूमिका निभाता है। गंभीर लिवर बीमारी, खासकर सिरोसिस जैसी स्थिति में शरीर में तरल जमा होने की समस्या हो सकती है, जिससे पैरों और पेट में सूजन दिखाई दे सकती है। लिवर से जुड़ी समस्या में सिर्फ पैरों की सूजन ही दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। पेट में तरल जमा होना, त्वचा या आंखों का पीला पड़ना और आसानी से चोट के निशान पड़ना जैसे अन्य संकेत भी सामने आ सकते हैं। ऐसे लक्षणों को एक साथ देखा जाना चाहिए और चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए। 

अचानक एक पैर में सूजन हो तो क्यों रहें सतर्क?

अचानक सिर्फ एक पैर में सूजन होना सामान्य थकान से अलग मामला हो सकता है। खासकर यदि सूजन के साथ दर्द, गर्माहट या लालिमा हो तो डीप वेन थ्रॉम्बोसिस यानी डीवीटी जैसी स्थिति की आशंका को चिकित्सकीय जांच के जरिए खारिज करना जरूरी है। डीवीटी में नस के भीतर ब्लड क्लॉट बन सकता है। लंबी यात्रा के बाद एक पैर में दर्द और सूजन दिखाई देना भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। मेयो क्लिनिक के मुताबिक ऐसे लक्षण डीवीटी से जुड़े हो सकते हैं और तत्काल चिकित्सकीय मूल्यांकन की जरूरत पड़ सकती है। 

सांस फूलने के साथ सूजन हो तो मामला गंभीर

पैरों की सूजन के साथ अगर अचानक सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या भारीपन, चक्कर या खून वाली खांसी जैसी स्थिति हो तो इसे सामान्य एडिमा मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण फेफड़ों तक पहुंचे ब्लड क्लॉट या फेफड़ों में तरल जमा होने जैसी गंभीर स्थितियों से जुड़े हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तत्काल इमरजेंसी मेडिकल मदद लेना जरूरी है। खासकर अचानक शुरू हुए लक्षणों में देरी करना जोखिम बढ़ा सकता है। 

दवाएं और रोजमर्रा की आदतें भी जिम्मेदार

पैरों में सूजन का कारण हमेशा कोई बीमारी नहीं होती। कुछ ब्लड प्रेशर की दवाएं, हार्मोन संबंधी दवाएं, कुछ एंटीडिप्रेसेंट, स्टेरॉयड और कुछ अन्य दवाएं एडिमा से जुड़ी हो सकती हैं। इसलिए यदि किसी नई दवा को शुरू करने के बाद सूजन दिखाई दे, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देना जरूरी है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण सावधानी भी है। केवल सूजन के कारण अपनी दवा खुद से बंद करना उचित नहीं है। मेडलाइनप्लस भी सलाह देता है कि संभावित दवा-सम्बंधित सूजन में दवा बंद करने से पहले स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात की जानी चाहिए। 

नमक और निष्क्रिय जीवनशैली का कितना असर?

अधिक नमक का सेवन शरीर में तरल जमा होने को बढ़ा सकता है। इसी तरह लंबे समय तक बैठे रहना या खड़े रहना पैरों में रक्त और तरल के जमाव को बढ़ा सकता है। इसलिए रोजमर्रा की गतिविधि, संतुलित खान-पान और लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से बचना सामान्य तौर पर मददगार हो सकता है। हल्की और अस्थायी सूजन में पैर ऊंचे रखना तथा हल्की शारीरिक गतिविधि कुछ लोगों को राहत दे सकती है। मगर यह उपाय किसी गंभीर बीमारी का इलाज नहीं हैं। लगातार बनी रहने वाली सूजन के मूल कारण की पहचान और उसका उपचार अधिक अहम है। 

जांच कैसे होती है?

पैरों में सूजन का कारण जानने के लिए डॉक्टर पहले मेडिकल हिस्ट्री और शारीरिक जांच करते हैं। इसके बाद लक्षणों के आधार पर ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट, किडनी और लिवर से जुड़े परीक्षण, ईसीजी, इमेजिंग या पैर की नसों का अल्ट्रासाउंड जैसी जांचों की जरूरत पड़ सकती है। जांच का उद्देश्य केवल सूजन कम करना नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद वजह का पता लगाना होता है। उदाहरण के लिए, ब्लड क्लॉट, हृदय संबंधी समस्या और किडनी की बीमारी का उपचार एक जैसा नहीं होता। इसलिए बिना जांच के केवल पानी की दवा या घरेलू उपाय अपनाना सही दृष्टिकोण नहीं माना जा सकता।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर पैरों की सूजन कुछ दिनों में कम नहीं होती, लगातार बढ़ती है या बार-बार वापस आती है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है। दोनों पैरों में सूजन के साथ हृदय, किडनी या नसों से जुड़ी पहले से कोई बीमारी हो तो भी इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वहीं अचानक एक पैर में तेज सूजन, दर्द, लालिमा या गर्माहट दिखाई दे तो तत्काल मेडिकल मूल्यांकन जरूरी हो सकता है। सांस फूलने या सीने में दर्द जैसे लक्षण जुड़ जाएं तो स्थिति को इमरजेंसी मानकर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। 

निष्कर्ष: पैरों में सूजन को सिर्फ थकान न समझें

पैरों में सूजन कई बार लंबे समय तक बैठने, गर्मी या नमक की अधिकता जैसी अपेक्षाकृत सामान्य वजहों से होती है। लेकिन यही लक्षण नसों की कमजोरी, हृदय, किडनी या लिवर की गंभीर बीमारी और कुछ मामलों में ब्लड क्लॉट से भी जुड़ा हो सकता है। इसलिए सही नज़रिया यह है कि हर सूजन से घबराया न जाए, लेकिन लगातार, असामान्य या अचानक आई सूजन को नजरअंदाज भी न किया जाए। शरीर का हर संकेत बीमारी नहीं होता, मगर कुछ संकेत बीमारी के शुरुआती इशारे जरूर हो सकते हैं—और समय पर जांच ही इस फर्क को साफ करती है।

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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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