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बारिश में किस आटे की रोटी खाना बेहतर है? जानिए सही विकल्प

Neelam Saini 2026-08-13 16:48:52
बारिश में किस आटे की रोटी खाना बेहतर है? जानिए सही विकल्प

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (एनआईएन), इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर), हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई), नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन

बारिश में रोटी के लिए कौन-सा आटा है बेहतर? जानिए

मानसून में गेहूं या मिलेट्स, किस आटे की रोटी खाएं?

बारिश के मौसम में रोटी चुनते समय इन बातों का रखें ध्यान

बारिश के मौसम में किसी एक आटे को सभी लोगों के लिए सबसे बेहतर बताने का वैज्ञानिक आधार नहीं है। साबुत गेहूं और मिलेट्स पोषक विकल्प हो सकते हैं। आटे की ताजगी, फाइबर, व्यक्तिगत स्वास्थ्य जरूरत और संतुलित भोजन अधिक महत्वपूर्ण हैं। मानसून में नमी से बचाकर आटा रखना भी जरूरी है।

LOCATION | DATE | BYLINE

हरियाणा | 13 अगस्त 2026 | ✍️ नीलम सैनी

बारिश में रोटी के लिए कौन-सा आटा बेहतर है?

बारिश के मौसम में खान-पान को लेकर अक्सर यह सवाल उठता है कि रोजाना रोटी बनाने के लिए कौन-सा आटा सेहत के लिहाज़ से बेहतर रहेगा। उपलब्ध पोषण संबंधी दिशा-निर्देशों के आधार पर किसी एक आटे को हर व्यक्ति के लिए “सबसे अच्छा” नहीं कहा जा सकता। हालांकि, साबुत गेहूं का आटा और विभिन्न मिलेट्स से बने आटे संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। मानसून में आटा चुनने से ज्यादा अहम उसकी गुणवत्ता, ताजगी, मात्रा और भंडारण है। वातावरण में नमी बढ़ने पर अनाज और आटे की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, इसलिए बारिश के मौसम में आटे को सूखी और साफ जगह पर रखना खाद्य सुरक्षा के लिहाज़ से महत्वपूर्ण हो जाता है। 

साबुत गेहूं का आटा क्यों हो सकता है अच्छा विकल्प?

भारतीयों के लिए 2024 की डाइटरी गाइडलाइंस में साबुत अनाज, साबुत गेहूं की रोटी और मिलेट्स को संतुलित भोजन का हिस्सा बनाने की सलाह दी गई है। साबुत अनाज में अनाज के प्राकृतिक हिस्से मौजूद रहते हैं, जिससे फाइबर सहित कई पोषक तत्व मिलते हैं। साबुत गेहूं की रोटी रोजमर्रा के भारतीय भोजन में आसानी से शामिल की जा सकती है। इसमें मौजूद आहार फाइबर पाचन प्रक्रिया को प्रभावित करता है और भोजन के बाद रक्त शर्करा के बढ़ने की गति को धीमा करने में मदद कर सकता है। हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ भी साबुत अनाज को रिफाइंड अनाज की तुलना में अधिक पोषणयुक्त विकल्प मानता है। इसका मतलब यह नहीं है कि गेहूं की रोटी अकेले ही सेहत की गारंटी देती है। रोटी के साथ सब्जियां, दाल, दही या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत और पर्याप्त विविधता वाला भोजन लेना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

मिलेट्स की रोटी भी हो सकती है पौष्टिक विकल्प

रागी, ज्वार, बाजरा और अन्य मिलेट्स भारतीय खान-पान में लंबे समय से इस्तेमाल होते रहे हैं। एनआईएन-आईसीएमआर की डाइटरी गाइडलाइंस में मिलेट्स को भी साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य विकल्पों के साथ शामिल किया गया है। मिलेट्स में फाइबर और कई सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं, हालांकि हर मिलेट का पोषण प्रोफाइल अलग होता है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर व्यक्ति को बारिश में सिर्फ बाजरे, ज्वार या रागी की रोटी ही खानी चाहिए।कुछ लोगों को मिलेट्स का स्वाद और पाचन आसानी से अनुकूल लग सकता है, जबकि कुछ लोगों के लिए गेहूं अधिक सुविधाजनक हो सकता है। व्यक्तिगत पसंद, उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अनाज का चुनाव अलग हो सकता है।

क्या बारिश में मिलेट्स गेहूं से ज्यादा फायदेमंद हैं?

मानसून के कारण किसी एक आटे की पोषण गुणवत्ता अचानक बढ़ नहीं जाती। इसलिए “बारिश में सिर्फ इसी आटे की रोटी खानी चाहिए” जैसी सलाह को वैज्ञानिक तथ्य के तौर पर पेश करना उचित नहीं होगा। साबुत गेहूं और मिलेट्स दोनों संतुलित भोजन में उपयोगी हो सकते हैं। बेहतर दृष्टिकोण यह है कि व्यक्ति अपनी डाइट में अनाजों में विविधता रखे और कुल भोजन में सब्जियां, फल, दालें, नट्स, बीज तथा उपयुक्त प्रोटीन स्रोतों को भी शामिल करे। 2024 की भारतीय डाइटरी गाइडलाइंस भी विविध और संतुलित भोजन पर जोर देती हैं। 
हार्वर्ड के पोषण संबंधी स्रोतों के मुताबिक साबुत अनाज में मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकते हैं। लेकिन इन संभावित लाभों को किसी एक अनाज के चमत्कारी प्रभाव के तौर पर नहीं समझना चाहिए। 

मिश्रित आटे की रोटी कितनी बेहतर?

कई घरों में गेहूं के साथ ज्वार, बाजरा, रागी या अन्य अनाज मिलाकर रोटी बनाने का चलन है। ऐसा करने से भोजन में अलग-अलग अनाजों के पोषक तत्व शामिल किए जा सकते हैं और स्वाद में भी विविधता आती है। लेकिन मिश्रित आटा खरीदते समय केवल पैकेट पर लिखे “मल्टीग्रेन” शब्द को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। वास्तविक सामग्री और उनकी मात्रा जानना अधिक उपयोगी है। घर पर अलग-अलग साबुत अनाजों को उचित अनुपात में मिलाकर ताजा आटा तैयार करना भी एक विकल्प हो सकता है।
यहां भी कोई निश्चित मिश्रण सभी लोगों के लिए समान रूप से उपयुक्त नहीं माना जा सकता। जिन लोगों को किसी अनाज से एलर्जी, असहिष्णुता या चिकित्सकीय कारणों से परहेज की सलाह दी गई है, उन्हें अपनी व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार आटा चुनना चाहिए।

बारिश में आटे की गुणवत्ता पर क्यों दें खास ध्यान?

मानसून में हवा में नमी अधिक हो सकती है और यही वजह है कि आटे के भंडारण पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। अनाज और अनाज से बने उत्पाद लंबे समय तक अनुचित परिस्थितियों में रखे जाने पर फफूंद या अन्य गुणवत्ता संबंधी समस्याओं से प्रभावित हो सकते हैं। खाद्य सुरक्षा पर उपलब्ध शोध भी अनाजों में फफूंद और माइक्रोबियल संदूषण की संभावना को रेखांकित करता है। इसलिए बारिश के मौसम में आटा खरीदते समय पैकेट की स्थिति, निर्माण और उपयोग की तारीख तथा पैकिंग की अखंडता देखना बेहतर है। खुले आटे को भी नमी, कीड़े और धूल से बचाकर रखना चाहिए। अगर आटे में असामान्य गंध, रंग में बदलाव, कीड़े या फफूंद जैसी स्पष्ट समस्या दिखाई दे तो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। केवल खराब हिस्से को निकालकर बाकी आटे को इस्तेमाल करना खाद्य सुरक्षा की दृष्टि से उचित तरीका नहीं माना जाना चाहिए।

क्या आटा फ्रिज में रखना जरूरी है?

हर घर में आटे को फ्रिज में रखना आवश्यक नहीं है। जरूरत इस बात की है कि आटा सूखी, साफ, ठंडी और नमी से अपेक्षाकृत सुरक्षित जगह पर रखा जाए। यदि घर में वातावरण बहुत नम है या लंबे समय तक आटा सुरक्षित रखना मुश्किल हो रहा है, तो कम मात्रा में आटा खरीदना अधिक व्यावहारिक हो सकता है। आटे को अच्छी तरह बंद डिब्बे में रखना भी नमी और बाहरी संदूषण से बचाव में मदद करता है। बारिश में बड़े पैमाने पर आटा जमा करने के बजाय आवश्यकता के अनुसार ताजा आटा लेना कई परिवारों के लिए बेहतर खाद्य-सुरक्षा रणनीति हो सकती है। खासकर पिसे हुए अनाज के मामले में भंडारण की स्थिति पर लगातार ध्यान देना चाहिए।

किन लोगों को आटा चुनते समय अतिरिक्त सावधानी चाहिए?

स्वस्थ व्यक्ति के लिए साबुत गेहूं और मिलेट्स सामान्य संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन मधुमेह, सीलिएक रोग, गेहूं से एलर्जी या किसी अन्य चिकित्सकीय स्थिति वाले व्यक्ति के लिए आटे का चुनाव व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार होना चाहिए। विशेष रूप से सीलिएक रोग में ग्लूटेन से बचना जरूरी होता है, इसलिए केवल “हेल्दी” या “मल्टीग्रेन” लिखे होने के आधार पर कोई आटा सुरक्षित मान लेना उचित नहीं है। ऐसी स्थिति में चिकित्सक या पंजीकृत डाइटिशियन की सलाह अधिक भरोसेमंद रहती है। इसी तरह बच्चों, बुजुर्गों और किसी विशेष बीमारी से जूझ रहे लोगों की पोषण जरूरतें अलग हो सकती हैं। इसलिए सामान्य स्वास्थ्य संबंधी सलाह को व्यक्तिगत चिकित्सा परामर्श का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

सिर्फ आटा नहीं, पूरी थाली पर दें ध्यान

रोटी को स्वस्थ भोजन का अकेला पैमाना मानना सही नहीं होगा। किसी व्यक्ति की कुल डाइट में अनाज के साथ पर्याप्त सब्जियां, दालें, फल, दूध या उपयुक्त विकल्प, नट्स और बीज जैसे खाद्य समूहों की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण है। आईसीएमआर-एनआईएन की 2024 गाइडलाइंस संतुलित भोजन, पर्याप्त विविधता और साबुत अनाज तथा मिलेट्स जैसे पोषक विकल्पों पर जोर देती हैं। इसलिए बारिश के मौसम में भी भोजन की गुणवत्ता का जायज़ा केवल यह देखकर नहीं लिया जाना चाहिए कि रोटी किस आटे से बनी है। 

बारिश में रोटी के लिए सबसे व्यावहारिक विकल्प क्या है?

अगर किसी स्वस्थ व्यक्ति के लिए रोजमर्रा की रोटी का विकल्प चुनना हो तो ताजा साबुत गेहूं का आटा एक व्यावहारिक विकल्प है। इसके साथ भोजन में समय-समय पर ज्वार, बाजरा, रागी जैसे मिलेट्स को शामिल करके अनाजों में विविधता लाई जा सकती है। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात “कौन-सा आटा सबसे ताकतवर है” नहीं, बल्कि यह है कि आटा साबुत अनाज से बना हो, ताजा हो, सही तरीके से रखा गया हो और आपकी कुल डाइट संतुलित हो। मिलेट्स को भी इसी व्यापक पोषण दृष्टिकोण के तहत देखना चाहिए।

निष्कर्ष

बारिश के मौसम में किसी एक आटे की रोटी को सभी लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ बताने का पर्याप्त वैज्ञानिक आधार नहीं है। साबुत गेहूं और मिलेट्स दोनों पौष्टिक विकल्प हो सकते हैं और भारतीय डाइटरी गाइडलाइंस भी साबुत अनाज तथा मिलेट्स को संतुलित भोजन में शामिल करने की सलाह देती हैं।  इसलिए मानसून में साबुत अनाज वाली रोटी को प्राथमिकता देना, भोजन में विविधता रखना और आटे को नमी तथा संदूषण से सुरक्षित रखना अधिक महत्वपूर्ण है। आखिरकार अच्छी सेहत का आधार केवल एक आटा नहीं, बल्कि संतुलित डाइट, उचित मात्रा, खाद्य सुरक्षा और व्यक्ति की अपनी पोषण जरूरतों का सही तालमेल है।

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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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